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मीराबाई

मीराबाई सोलहवीं सदी की मेड़ता की राठौड़ राजकुमारी और कृष्ण की भक्त थीं, जिन्हें वे गिरधर गोपाल कहती थीं। परीक्षा में उनका परिवार, विवाह और भक्ति का स्वरूप पूछा जाता है।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. भक्ति: कांता भाव की सगुण कृष्ण भक्ति, जिसमें ज्ञान से अधिक भावना और श्रद्धा को महत्व दिया।
  2. पैनोरमा: मीरा बाई पैनोरमा (2008) मेड़ता के राव दूदागढ़ में है।
  3. उनके नाम से गाए जाने वाले अनेक पदों में से विद्वान केवल कुछ सौ को ही उनका मानते हैं।

तथ्य

जन्मलगभग 1498 ई., कुड़की गाँव में
परिवारबाजोली के जागीरदार रतनसिंह राठौड़ की पुत्री; मेड़ता के राव दूदा की पौत्री, जिनके यहाँ मेड़ता में लालन-पालन हुआ
विवाह1516 ई. में मेवाड़ के राणा सांगा के ज्येष्ठ पुत्र भोजराज से; कुछ वर्ष बाद ही विधवा हो गईं
देहांत1547 ई., गुजरात में; परंपरा के अनुसार द्वारिका के रणछोड़ मंदिर में गिरधर गोपाल में विलीन हुईं
रचनाएँउनके पद (मीरा पदावली), राजस्थानी में

जीवन और लोककथा

  • परंपरा के अनुसार कृष्ण भक्ति बचपन में शुरू हुई, जब दादी ने गिरधर गोपाल को उनका दूल्हा बताया।
  • परंपरा के अनुसार उनके देवर राणा विक्रमादित्य ने उन्हें विष देकर और सर्प से डसवाकर मारने का प्रयास किया, पर उन्हें कोई हानि नहीं हुई।
  • लोक-परंपरा रैदास को उनका गुरु मानती है, पर इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • कुड़की या मेड़ताजन्म कुड़की में · लालन-पालन मेड़ता में।
  • भोजराज या विक्रमादित्यभोजराज उनके पति · भोजराज के भाई (मीरा के देवर) विक्रमादित्य ने उन्हें सताया।

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