एक नज़र में
- भक्ति: कांता भाव की सगुण कृष्ण भक्ति, जिसमें ज्ञान से अधिक भावना और श्रद्धा को महत्व दिया।
- पैनोरमा: मीरा बाई पैनोरमा (2008) मेड़ता के राव दूदागढ़ में है।
- उनके नाम से गाए जाने वाले अनेक पदों में से विद्वान केवल कुछ सौ को ही उनका मानते हैं।
तथ्य
| जन्म | लगभग 1498 ई., कुड़की गाँव में |
|---|---|
| परिवार | बाजोली के जागीरदार रतनसिंह राठौड़ की पुत्री; मेड़ता के राव दूदा की पौत्री, जिनके यहाँ मेड़ता में लालन-पालन हुआ |
| विवाह | 1516 ई. में मेवाड़ के राणा सांगा के ज्येष्ठ पुत्र भोजराज से; कुछ वर्ष बाद ही विधवा हो गईं |
| देहांत | 1547 ई., गुजरात में; परंपरा के अनुसार द्वारिका के रणछोड़ मंदिर में गिरधर गोपाल में विलीन हुईं |
| रचनाएँ | उनके पद (मीरा पदावली), राजस्थानी में |
जीवन और लोककथा
- परंपरा के अनुसार कृष्ण भक्ति बचपन में शुरू हुई, जब दादी ने गिरधर गोपाल को उनका दूल्हा बताया।
- परंपरा के अनुसार उनके देवर राणा विक्रमादित्य ने उन्हें विष देकर और सर्प से डसवाकर मारने का प्रयास किया, पर उन्हें कोई हानि नहीं हुई।
- लोक-परंपरा रैदास को उनका गुरु मानती है, पर इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- कुड़की या मेड़ताजन्म कुड़की में · लालन-पालन मेड़ता में।
- भोजराज या विक्रमादित्यभोजराज उनके पति · भोजराज के भाई (मीरा के देवर) विक्रमादित्य ने उन्हें सताया।
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