एक नज़र में
- उत्पत्ति: विवादित। मारवाड़ के पहले राठौड़ शासक सीहा को परंपरा से कन्नौज के गहड़वाल जयचंद का वंशज माना जाता है; विद्वान राठौड़ों को राष्ट्रकूटों से जोड़ते हैं।
- चूण्डा के बाद: पहले उनके छोटे पुत्र कान्हा, फिर सत्ता शासक बने; रणमल ने मण्डोर 1427 में ही लिया।
- कामरान: बीकानेर के राव जैतसी ने 1534 में उसे हराया, जैसा बीठू सूजा के 'राव जैतसी रो छंद' में वर्णित है।
मारवाड़ के शासक (मण्डोर व जोधपुर)
- राव सीहामारवाड़ के पहले राठौड़शासनकालमृत्यु 1273 ई. (वि.सं. 1330)किसलिए जाने जाते हैंपाली के उत्तर-पश्चिम में छोटा राज्य बनाया; पाली के पास बीठू के अभिलेख में उनकी मृत्यु का उल्लेख
- राव चूण्डाराजधानी मण्डोरशासनकाल1394–1423किसलिए जाने जाते हैंइंदा प्रतिहारों से मण्डोर पाया: रेऊ के अनुसार दहेज में, RBSE पुस्तक के अनुसार अपने साहस और कूटनीति से अधिकार किया। उसे राजधानी बनाया। पूगल के भाटियों के छल से नागौर में मारे गए
- राव रणमलहंसा बाई के भाईशासनकाल1427–1438किसलिए जाने जाते हैंचूण्डा के ज्येष्ठ पुत्र। मेवाड़ में रहे, जहाँ उनकी बहन हंसा बाई का विवाह राणा लाखा से हुआ। चित्तौड़ में मेवाड़ी सामंतों ने उनकी हत्या की
- राव जोधानई राजधानीशासनकाल1438–1489 (रेऊ: 1453–1489)किसलिए जाने जाते हैंरणमल के पुत्र। मण्डोर पुनः जीता (1453), जोधपुर बसाया (1459)पूरे नोट्स पढ़ें →
- राव गांगामालदेव के पिताशासनकाल1515–1531 (ओझा: 1532)किसलिए जाने जाते हैंउनकी सेना, पुत्र मालदेव सहित, खानवा (1527) में राणा सांगा की ओर से लड़ी (मेवाड़ पृष्ठ)
- राव मालदेवशेरशाह के प्रतिद्वंद्वीशासनकाल1531–1562 (ओझा: 1532 से)किसलिए जाने जाते हैंगांगा के पुत्र। मेड़ता और बीकानेर लिए; जोधपुर शेरशाह के हाथों खोया (1544) और उसकी मृत्यु के बाद फिर जीतापूरे नोट्स पढ़ें →
- राव चन्द्रसेनमारवाड़ का प्रतापशासनकाल1562–1581किसलिए जाने जाते हैंमालदेव के पुत्र। जोधपुर अकबर की सेना के हाथों खोया (1564; ख्यातों में 1565) और भाद्राजूण व सिवाना से संघर्ष जारी रखापूरे नोट्स पढ़ें →
- मोटा राजा उदयसिंहमुगल अधीनता स्वीकारीशासनकाल1583–1595किसलिए जाने जाते हैंचन्द्रसेन के भाई, अकबर ने शासक बनाया। उनकी पुत्री जोधा बाई (जगत गुसाईं) का विवाह राजकुमार सलीम से हुआ
- महाराजा जसवंतसिंह प्रथमनैणसी के आश्रयदाताशासनकाल1638–1678किसलिए जाने जाते हैंगजसिंह के पुत्र। मुहणोत नैणसी उनके मंत्री थे। जमरूद में मृत्यु
- महाराजा अजीतसिंहमरणोपरांत जन्मे उत्तराधिकारीशासनकाल1679–1724 (रेऊ: 1707–1724)किसलिए जाने जाते हैंजसवंतसिंह के पुत्र, उनकी मृत्यु के बाद जन्मे। औरंगजेब की मृत्यु (1707) के बाद जोधपुर लिया; पुत्र बख्तसिंह ने उनकी हत्या की
- दुर्गादास राठौड़मारवाड़ के रक्षकशासनकालजीवन 1638–1718किसलिए जाने जाते हैंआसकरण के पुत्र। शिशु अजीतसिंह को बचाया और औरंगजेब के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व कियापूरे नोट्स पढ़ें →
बीकानेर के शासक
| शासक | शासनकाल | किसलिए जाने जाते हैं |
|---|---|---|
| राव बीका | 1465–1504 | जोधा के पुत्र। 1465 में जांगल प्रदेश गए; वि.सं. 1545 वैशाख सुदि 2 (12 अप्रैल 1488) को बीकानेर बसाया |
| राव लूणकरण | 1505–1526 | बीका के पुत्र, बड़े भाई नरा के बाद। ढोसी में नारनौल के नवाब से लड़ते हुए मारे गए |
| राव जैतसी | 1526–1541 (ओझा: 1542) | लूणकरण के पुत्र। मालदेव की सेना से लड़ते हुए मारे गए (युद्ध तालिका देखें) |
| राव कल्याणमल | 1541 (ओझा: 1542)–1574 | जैतसी के पुत्र। गिरि-सुमेल में शेरशाह की ओर रहे; अकबर के नागौर दरबार (1570) में मुगल अधीनता स्वीकार करने वाले पहले राठौड़ शासक बने |
| राजा रायसिंह | 1574–1612 | कल्याणमल के पुत्र। अकबर ने उन्हें जोधपुर का प्रशासक बनाया (1572)। जूनागढ़ दुर्ग बनवाया (1589–94)। बुरहानपुर में मृत्यु |
युद्ध एक पंक्ति में
- साहेबा (पाहेबा)बीकानेर पर अधिकारवर्षRBSE पुस्तक के बीकानेर वाले भाग में 1541; उसी के मालदेव वाले भाग में और ओझा के अनुसार जैतसी की छतरी के लेख से 1542पक्ष और परिणाममालदेव की सेना बनाम बीकानेर के राव जैतसी; जैतसी मारे गए और मालदेव ने बीकानेर लिया
- गिरि-सुमेलमुट्ठी भर बाजरावर्षजनवरी 1544पक्ष और परिणामशेरशाह ने जैतारण (तब पाली जिला, अब ब्यावर) के पास मालदेव के सेनापति जैता और कुम्पा को हरायापूरे नोट्स पढ़ें →
- हरमाड़ामेवाड़ पर मारवाड़ की जीतवर्ष1557पक्ष और परिणामहाजी खाँ की सहायता को गई मालदेव की सेना ने राणा उदयसिंह की सेना को भगायापूरे नोट्स पढ़ें →
- धरमतउत्तराधिकार युद्धवर्ष15 अप्रैल 1658 (वि.सं. 1715)पक्ष और परिणामदारा शिकोह की ओर से जसवंतसिंह बनाम औरंगजेब और मुराद, उज्जैन के पास; कासिम खाँ के विश्वासघात से जसवंतसिंह पराजित
साझा बिंदु
- किशनगढ़: मोटा राजा उदयसिंह के पुत्र किशनसिंह ने बसाया।
- खानवा (1527), हल्दीघाटी (1576), सल्तनत और मुगल: मेवाड़ तथा राजपूत, सल्तनत और मुगल वाले पृष्ठ देखें; जैसलमेर व भाटी: राजस्थान के अन्य राजवंश देखें।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- दो चूण्डामारवाड़ के राव चूण्डा को मण्डोर मिला · मेवाड़ के चूण्डा, राणा लाखा के पुत्र, ने हंसा बाई के पुत्र के लिए मेवाड़ की गद्दी छोड़ी (मेवाड़ पृष्ठ)।
- दो उदयसिंहमारवाड़ के मोटा राजा उदयसिंह · मेवाड़ के राणा उदयसिंह, प्रताप के पिता।
- जैता-कुम्पा, जयमल-फत्तागिरि-सुमेल में मालदेव के सेनापति · चित्तौड़ (1567–68) के रक्षक।
- दो कर्णलूणकरण, 'कलियुग का कर्ण' (बीठू सूजा) · रायसिंह, 'राजपूताने का कर्ण' (मुंशी देवीप्रसाद)।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 121
मारवाड़ के राव चूण्डा के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प का चयन कीजिए : A. राव चूण्डा को मण्डोर दहेज में प्राप्त हुआ । B. राव चूण्डा की मृत्यु के तुरंत पश्चात् राव रणमल राजगद्दी पर आसीन हुआ ।
- (1)केवल A सत्य है ।
- (2)केवल B सत्य है ।
- (3)A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4)A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर देखें
✓ (1) केवल A सत्य है ।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 122
'राव-जैतसी-रो-छन्द' के अनुसार, बीकानेर के शासक राव जैतसी ने निम्न में से किसे परास्त किया था ?
- (1)हुमायूँ
- (2)कामरान
- (3)शेरशाह
- (4)अकबर
उत्तर देखें
✓ (2) कामरान
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