एक नज़र में
- राजस्थान सेवा संघ: पथिक की यह संस्था 1919 में वर्धा में बनी और 1920 में अजमेर ले जाई गई; इसने बिजौलिया, बेगूं और बूँदी (बरड़) के आंदोलन संभाले।
- गांधीजी: 1918 में महादेव देसाई को बिजौलिया भेजा; नीमूचणा गोलीकांड के बारे में लिखा कि यदि समाचार सही हैं तो यह "डायरवाद गहरा एवं व्यापक" (Dyerism double distilled) है (डायर: जलियांवाला बाग गोलीकांड का अधिकारी)।
- हरिपुरा कांग्रेस (1938): कांग्रेस ने रियासतों के संघर्ष वहाँ की जनता के अपने संगठनों पर छोड़े।
किसान आंदोलन
- बिजौलियाऊपरमाल के धाकड़ किसानवर्ष1897–1941स्थानबिजौलिया ठिकाना, मेवाड़ (भीलवाड़ा जिला)नेतृत्व / कारणसाधु सीताराम दास, विजयसिंह पथिक, माणिक्यलाल वर्मा; लगभग 84 लाग-बाग और बेगारघटनाक्रमतीन चरण; 1922 का समझौता लागू नहीं हुआ; 1941 में समाधान हुआपूरे नोट्स पढ़ें →
- बेगूं'बोल्शेविक' समझौतावर्ष1921–23स्थानबेगूं ठिकाना, मेवाड़नेतृत्व / कारणरामनारायण चौधरी, फिर पथिक; लाग-बाग और बेगारघटनाक्रममेनाल के पास भैरूकुंड में बैठक (1921); ठाकुर का राजस्थान सेवा संघ से हुआ समझौता अमान्य किया गया; ट्रेंच आयोग के समय 13 जुलाई 1923 को गोविंदपुरा में सेना ने गोली चलाई, रूपाजी और कृपाजी धाकड़ मारे गए (भीलवाड़ा गजेटियर केवल एक मृतक, रूपा धाकड़, का नाम देता है); अंततः कई लागें हटीं और बेगार पर रोक लगी
- बूँदी (बरड़)नानक भील, शहीदवर्ष1922–23; 1936 से फिरस्थानबूँदी राज्य का बरड़ क्षेत्रनेतृत्व / कारणराजस्थान सेवा संघ के नयनूराम शर्मा; लगभग 25 लागें, बेगार और ऊँचा लगानघटनाक्रम2 अप्रैल 1923 को डाबी में गोलीकांड, नानक भील और देवलाल गुर्जर मारे गए (बूँदी गजेटियर नानक भील की मृत्यु 1926 में बताता है)
- शेखावाटी (सीकर)कटराथल और कूदनवर्ष1922–47स्थानसीकर ठिकाना और शेखावाटी, जयपुर राज्यनेतृत्व / कारणजाट किसान, जब सीकर के रावराजा कल्याण सिंह ने 1922 में भू-राजस्व 25–50% बढ़ाया; सेवा संघ के रामनारायण चौधरीघटनाक्रमकिशोरी देवी की अध्यक्षता में कटराथल महिला सम्मेलन (25 अप्रैल 1934); कूदन गोलीकांड (25 अप्रैल 1935) में चार किसान मारे गए, जिसकी गूँज ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में हुई; मार्च 1947 में जयपुर में लोकप्रिय सरकार बनने पर अंत
- अलवर: नीमूचणामशीनगन से गोलीबारीवर्ष1925स्थाननीमूचणा गांव, अलवर राज्यनेतृत्व / कारणमहाराजा जयसिंह की 1923–24 की लगान वृद्धि के विरुद्ध किसानघटनाक्रम14 मई 1925: वहाँ एकत्र लगभग 800 किसानों पर सेना ने गोली चलाई; सैकड़ों मारे गए
- अलवर: जंगली सूअरसूअर मारने पर रोकवर्ष1921स्थानअलवर राज्यनेतृत्व / कारणराज्य द्वारा संरक्षित जंगली सूअरों से फसल नष्ट होने पर किसानघटनाक्रममहाराजा ने सूअर मारने की अनुमति दी
- मेवमेवात में मार्शल लॉवर्ष1932–33स्थानअलवर और भरतपुरनेतृत्व / कारणऊँचे लगान के विरुद्ध मेव किसान, नेतृत्व गुड़गांव के चौधरी यासीन खान काघटनाक्रमखरीफ का लगान देना बंद किया; गोविंदगढ़ की झड़प के बाद भारत सरकार की सेना ने अलवर के चार मेव निजामतों को मार्शल लॉ के अधीन लिया
- बीकानेर: दूधवाखाराबीकानेर का किसान संघर्षवर्ष1940 का दशकस्थानचूरू के पास दूधवाखारा गांव, बीकानेर राज्यनेतृत्व / कारणहनुमान सिंह, स्थानीय ठाकुर के अत्याचारों के विरुद्धघटनाक्रमजून 1945 में हनुमान सिंह जेल गए; इसके बाद 1946 में रायसिंहनगर गोलीकांड हुआ
- मारवाड़डाबड़ा कांडवर्ष1947 तकस्थानमारवाड़ (जोधपुर राज्य)नेतृत्व / कारणमारवाड़ हितकारिणी सभा, फिर मारवाड़ लोक परिषद (1938), जागीरदारों की लागों के विरुद्धघटनाक्रमइसकी पराकाष्ठा 1947 का डाबड़ा कांड थी (देखें प्रजामंडल आंदोलन)
जनजाति आंदोलन
- गोविंद गुरु का भील आंदोलनभगत आंदोलनवर्ष1913 तकस्थानडूंगरपुर, बांसवाड़ा, सूंथ और ईडर; मानगढ़ पहाड़ीनेतृत्व / कारणगोविंद गुरु; सम्प सभा और भगत पंथघटनाक्रम17 नवंबर 1913: मानगढ़ (बांसवाड़ा) पर एकत्र भीलों पर अंग्रेजी और रियासती सेनाओं ने गोली चलाईपूरे नोट्स पढ़ें →
- एकी आंदोलनभोमट के भीलवर्ष1921–29 (कुछ विवरणों में 1921–22)स्थानमेवाड़, भोमट क्षेत्र, सिरोही और ईडरनेतृत्व / कारणमोतीलाल तेजावत; कर न देने की प्रतिज्ञा और मेवाड़ की पुकार की 21 माँगेंघटनाक्रम7 मार्च 1922 को पाल-चितरिया (ईडर) में गोलीकांड; 1929 में तेजावत गिरफ्तारपूरे नोट्स पढ़ें →
- मीणा आंदोलनजरायम पेशा का कलंकवर्ष1924–52स्थानजयपुर राज्यनेतृत्व / कारणआपराधिक जनजाति अधिनियम (1924) और जयपुर के जरायम पेशा कानून (1930) के विरुद्ध, जिनमें मीणाओं को रोज थाने में हाजिरी देनी पड़ती थीघटनाक्रममीणा क्षेत्रीय महासभा (1933); जैन मुनि मगन सागर की अध्यक्षता में नीम का थाना सम्मेलन (अप्रैल 1944); 28 अक्टूबर 1946 को बागावास में लगभग 26,000 मीणाओं ने चौकीदारी छोड़ी, जिसे मुक्ति दिवस के रूप में मनाया गया; कानून 1952 में रद्द हुआ
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- नीमूचणा · नीम का थानानीमूचणा 1925 का अलवर गोलीकांड है; नीम का थाना में 1944 का मीणा सम्मेलन हुआ।
- भील नेतागोविंद गुरु, सम्प सभा, मानगढ़ (1913) · मोतीलाल तेजावत, एकी, भोमट (1921) · ठक्कर बापा, भील सेवा मंडल।
- 1923 के गोलीकांडडाबी (बूँदी, 2 अप्रैल) · गोविंदपुरा (बेगूं, 13 जुलाई)।
- नेताओं के क्षेत्रपथिक, बिजौलिया फिर बेगूं · नयनूराम शर्मा, बूँदी (बरड़) · रामनारायण चौधरी, बेगूं फिर सीकर।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 142
अप्रैल, 1944 ई. में नीम का थाना में आयोजित मीणों के सम्मेलन की अध्यक्षता की थी :
- (1)मुनि मगन सागर ने
- (2)छोटूराम झरवाल ने
- (3)जवाहर राम ने
- (4)लक्ष्मीनारायण झरवाल ने
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✓ (1) मुनि मगन सागर ने
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