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राजस्थान के लोक देवता

लोक देवता राजस्थान के वे वीर और समाज-सुधारक हैं जिन्हें निर्बल की रक्षा, गौ-रक्षा और वचन-पालन के कारण जनमानस ने देवता के रूप में पूजा। परीक्षा में उनके स्थान, मेले, समुदाय, प्रतीक और उपनाम पूछे जाते हैं।

⏱ 4 मिनट पढ़ें5 विस्तृत पृष्ठ✓ तथ्य जाँचे गए 14 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. RBSE पुस्तक के अनुसार पंच पीर: पाबूजी, हड़बूजी (हरभूजी), रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया और गोगाजी। तेजाजी इनमें नहीं हैं।
  2. भाद्रपद के मेले: गोगानवमी (कृष्ण नवमी), बापिणी में मेहाजी (कृष्ण अष्टमी), रामदेवरा (शुक्ल द्वितीया से एकादशी), आसींद में देवनारायणजी (शुक्ल सप्तमी), तेजा दशमी (शुक्ल दशमी)।
  3. चैत्र का मेला: तिलवाड़ा में मल्लीनाथजी का पशु मेला (चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी)।
  4. फड़ शाहपुरा (भीलवाड़ा) के जोशी चितेरे बनाते हैं; पाबूजी की फड़ भोपे रावणहत्था पर और देवनारायणजी की फड़ जंतर पर गाते हैं।
  5. अकबर के चित्तौड़ आक्रमण (1567-68) के वीर कल्लाजी राठौड़ चार हाथों वाले लोक देवता हैं।
  6. मल्लीनाथजी का संबंध तिलवाड़ा से है, गागरोन से नहीं; गागरोन संत पीपा से जुड़ा है।

प्रमुख लोक देवता एक नज़र में

पंच पीर

पंच पीर वे पाँच लोक देवता हैं जिन्हें हिंदू और मुसलमान दोनों पीर मानकर पूजते हैं। RBSE पुस्तक में यह दोहा दिया गया है:

पाबू, हरभू, रामदे, मांगलिया, मेहा।पांचू पीर पधारज्यो, गोगाजी जेहा।।

  • पाबूजी
  • हड़बूजी (हरभूजी)
  • रामदेवजी
  • मेहाजी मांगलिया
  • गोगाजी

'मांगलिया, मेहा' एक ही व्यक्ति, मेहाजी मांगलिया हैं; इसलिए दोहे में पाँच पीर हैं, छह नहीं। तेजाजी इनमें नहीं हैं।

फड़ चित्रकला और भोपे

फड़ कपड़े पर बना लोक देवता के जीवन का पट-चित्र है। भोपे इसे लकड़ी पर लपेटकर गाँव-गाँव ले जाते हैं और रावणहत्था या जंतर की धुन पर इसके सामने कथा का वाचन करते हैं। इसमें चित्रकला, गायन, वादन और लोकधर्म का संगम है।

  • पाबूजी की फड़: नायक (थोरी) जाति के भोपे अपनी पत्नियों (भोपियों) के साथ गाते हैं; पाबूजी की मनौती से बीमार ऊँट ठीक होने पर यह फड़ गवाई जाती है।
  • देवनारायणजी की फड़: जंतर पर गाई जाती है; भारतीय डाक ने 2 सितंबर 1992 को इस पर डाक टिकट जारी किया।
  • चितेरे: शाहपुरा (भीलवाड़ा) के छीपा जाति के जोशी; श्रीलाल जोशी इस शैली के प्रमुख चित्रकार हैं। अंतिम रेखाएँ (खुलाई) केवल काले रंग से की जाती हैं।

लोक देवताओं में समानता

  • RBSE पुस्तक के अनुसार इन कथाओं का मूल उद्देश्य निर्बल की रक्षा, वचन-पालन जैसी शिक्षाएँ जन-जन तक पहुँचाना रहा है; हर विवरण अक्षरशः सत्य हो, यह आवश्यक नहीं।
  • कई लोक देवताओं को हिंदू और मुसलमान दोनों पूजते हैं: रामदेवजी को रामसा पीर, गोगाजी को जाहरपीर और गोगापीर के रूप में।
  • नाथ गुरु: गोगाजी का संबंध गोरखनाथ से; रामदेवजी और हड़बूजी का बालीनाथ से।
  • गाँवों के थान: रामदेवजी के पगल्ये पेड़ के नीचे ऊँचे चबूतरे पर; गोगाजी का सर्प-अंकित पत्थर प्रायः खेजड़ी के नीचे।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • सर्प देवतागोगाजी (गोगानवमी, भाद्रपद कृष्ण नवमी, गोगामेड़ी) और तेजाजी (तेजा दशमी, भाद्रपद शुक्ल दशमी, परबतसर)।
  • फड़पाबूजी की रावणहत्था पर, देवनारायणजी की जंतर पर गाई जाती है।
  • तिलवाड़ा या गागरोनमल्लीनाथजी का मंदिर और पशु मेला तिलवाड़ा में है; गागरोन संत पीपा से जुड़ा है, इसलिए 'मल्लीनाथजी - गागरोन' गलत युग्म है (RAS प्रारंभिक 2023)।
  • नेजा और रिखियारामदेवजी से जुड़े हैं, पाबूजी या तेजाजी से नहीं (प्रोटेक्शन ऑफिसर 2022)।
  • चार हाथों वाले लोक देवताकल्लाजी; मल्लीनाथजी, फत्ताजी या झुंझारजी नहीं (CET स्नातक 2022)।
  • शकुन शास्त्रीहड़बूजी और मेहाजी मांगलिया।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 33

चार हाथों वाला लोकदेवता किसे कहा जाता है?

  1. (1)कल्ला जी
  2. (2)मल्लीनाथ जी
  3. (3)फत्ता जी
  4. (4)झुन्झार जी
उत्तर देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 131

निम्न में से कौन सा युग्म गलत मेलित है ?

  1. (1)रामदेवजी – रामदेवरा
  2. (2)मल्लीनाथजी – गागरोण
  3. (3)तेजाजी – खड़नाल
  4. (4)पाबूजी – कोलू
उत्तर देखें

✓ (2) मल्लीनाथजी – गागरोण

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 139

रिखिया एवं नेजा निम्नलिखित में से किस लोक देवता से संबंधित हैं ?

  1. (1)पाबूजी
  2. (2)तेजाजी
  3. (3)मल्लीनाथजी
  4. (4)रामदेवजी
उत्तर देखें

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