एक नज़र में
- RBSE पुस्तक के अनुसार पंच पीर: पाबूजी, हड़बूजी (हरभूजी), रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया और गोगाजी। तेजाजी इनमें नहीं हैं।
- भाद्रपद के मेले: गोगानवमी (कृष्ण नवमी), बापिणी में मेहाजी (कृष्ण अष्टमी), रामदेवरा (शुक्ल द्वितीया से एकादशी), आसींद में देवनारायणजी (शुक्ल सप्तमी), तेजा दशमी (शुक्ल दशमी)।
- चैत्र का मेला: तिलवाड़ा में मल्लीनाथजी का पशु मेला (चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी)।
- फड़ शाहपुरा (भीलवाड़ा) के जोशी चितेरे बनाते हैं; पाबूजी की फड़ भोपे रावणहत्था पर और देवनारायणजी की फड़ जंतर पर गाते हैं।
- अकबर के चित्तौड़ आक्रमण (1567-68) के वीर कल्लाजी राठौड़ चार हाथों वाले लोक देवता हैं।
- मल्लीनाथजी का संबंध तिलवाड़ा से है, गागरोन से नहीं; गागरोन संत पीपा से जुड़ा है।
प्रमुख लोक देवता एक नज़र में
- पाबूजीऊँटों के देवतामुख्य स्थान: कोलू, फलौदी के निकटमेला और तिथि: कोलू में वार्षिक मेलाप्रसिद्धि: ऊँटों के देवता; लोक-मान्यता में लक्ष्मण के अवतार; घोड़ी केसर कालमी; भोपे फड़ गाते हैंपूरे नोट्स पढ़ें →
- गोगाजीसर्प देवतामुख्य स्थान: ददरेवा (चूरू); गोगामेड़ी (हनुमानगढ़)मेला और तिथि: गोगानवमी, भाद्रपद कृष्ण नवमी, गोगामेड़ी मेंप्रसिद्धि: सर्प देवता; जाहरपीर; हिंदू और मुसलमान दोनों पूजते हैं; गुरु गोरखनाथपूरे नोट्स पढ़ें →
- रामदेवजीरामसा पीरमुख्य स्थान: रामदेवरा (रूणीचा), पोकरण के निकट, जैसलमेरमेला और तिथि: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशीप्रसिद्धि: रामसा पीर; कामड़िया पंथ; तेरहताली; नेजा और रिखियापूरे नोट्स पढ़ें →
- तेजाजीसर्पदंश के देवतामुख्य स्थान: खड़नाल (नागौर); मेला परबतसर मेंमेला और तिथि: तेजा दशमी, भाद्रपद शुक्ल दशमीप्रसिद्धि: जाट वीर; लाछा गूजरी की गायें छुड़ाईं; सर्पदंश के देवता; घोड़ी लीलणपूरे नोट्स पढ़ें →
- देवनारायणजीबगड़ावत गुर्जर वीरमुख्य स्थान: आसींद (भीलवाड़ा)मेला और तिथि: भाद्रपद शुक्ल सप्तमी, आसींद मेंप्रसिद्धि: बगड़ावत गुर्जर वीर; फड़ जंतर पर गाई जाती हैपूरे नोट्स पढ़ें →
- हड़बूजी (हरभूजी)शकुन शास्त्रीमुख्य स्थान: बेंगटी, फलौदी के निकटप्रसिद्धि: सांखला राजपूत; बालीनाथ के शिष्य; शकुन शास्त्री; 'हरभूजी की गाड़ी' पूजी जाती है
- मेहाजी मांगलियापंच पीरों में से एकमुख्य स्थान: बापिणीमेला और तिथि: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, बापिणी मेंप्रसिद्धि: पंच पीरों में से एक; शकुन शास्त्री; जैसलमेर के राव राणगदेव भाटी से युद्ध में वीरगति
- मल्लीनाथजीमहेवा के शासकमुख्य स्थान: तिलवाड़ा, लूनी नदी के तट परमेला और तिथि: पशु मेला, चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशीप्रसिद्धि: महेवा के शासक; मालानी क्षेत्र का नाम इन्हीं पर
- कल्लाजी राठौड़चार हाथों वाले लोक देवतामुख्य स्थान: मेवाड़ अंचलप्रसिद्धि: चार हाथों वाले लोक देवता; अकबर के चित्तौड़ आक्रमण में लड़े
पंच पीर
पंच पीर वे पाँच लोक देवता हैं जिन्हें हिंदू और मुसलमान दोनों पीर मानकर पूजते हैं। RBSE पुस्तक में यह दोहा दिया गया है:
पाबू, हरभू, रामदे, मांगलिया, मेहा।पांचू पीर पधारज्यो, गोगाजी जेहा।।
- पाबूजी
- हड़बूजी (हरभूजी)
- रामदेवजी
- मेहाजी मांगलिया
- गोगाजी
'मांगलिया, मेहा' एक ही व्यक्ति, मेहाजी मांगलिया हैं; इसलिए दोहे में पाँच पीर हैं, छह नहीं। तेजाजी इनमें नहीं हैं।
फड़ चित्रकला और भोपे
फड़ कपड़े पर बना लोक देवता के जीवन का पट-चित्र है। भोपे इसे लकड़ी पर लपेटकर गाँव-गाँव ले जाते हैं और रावणहत्था या जंतर की धुन पर इसके सामने कथा का वाचन करते हैं। इसमें चित्रकला, गायन, वादन और लोकधर्म का संगम है।
- पाबूजी की फड़: नायक (थोरी) जाति के भोपे अपनी पत्नियों (भोपियों) के साथ गाते हैं; पाबूजी की मनौती से बीमार ऊँट ठीक होने पर यह फड़ गवाई जाती है।
- देवनारायणजी की फड़: जंतर पर गाई जाती है; भारतीय डाक ने 2 सितंबर 1992 को इस पर डाक टिकट जारी किया।
- चितेरे: शाहपुरा (भीलवाड़ा) के छीपा जाति के जोशी; श्रीलाल जोशी इस शैली के प्रमुख चित्रकार हैं। अंतिम रेखाएँ (खुलाई) केवल काले रंग से की जाती हैं।
लोक देवताओं में समानता
- RBSE पुस्तक के अनुसार इन कथाओं का मूल उद्देश्य निर्बल की रक्षा, वचन-पालन जैसी शिक्षाएँ जन-जन तक पहुँचाना रहा है; हर विवरण अक्षरशः सत्य हो, यह आवश्यक नहीं।
- कई लोक देवताओं को हिंदू और मुसलमान दोनों पूजते हैं: रामदेवजी को रामसा पीर, गोगाजी को जाहरपीर और गोगापीर के रूप में।
- नाथ गुरु: गोगाजी का संबंध गोरखनाथ से; रामदेवजी और हड़बूजी का बालीनाथ से।
- गाँवों के थान: रामदेवजी के पगल्ये पेड़ के नीचे ऊँचे चबूतरे पर; गोगाजी का सर्प-अंकित पत्थर प्रायः खेजड़ी के नीचे।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- सर्प देवतागोगाजी (गोगानवमी, भाद्रपद कृष्ण नवमी, गोगामेड़ी) और तेजाजी (तेजा दशमी, भाद्रपद शुक्ल दशमी, परबतसर)।
- फड़पाबूजी की रावणहत्था पर, देवनारायणजी की जंतर पर गाई जाती है।
- तिलवाड़ा या गागरोनमल्लीनाथजी का मंदिर और पशु मेला तिलवाड़ा में है; गागरोन संत पीपा से जुड़ा है, इसलिए 'मल्लीनाथजी - गागरोन' गलत युग्म है (RAS प्रारंभिक 2023)।
- नेजा और रिखियारामदेवजी से जुड़े हैं, पाबूजी या तेजाजी से नहीं (प्रोटेक्शन ऑफिसर 2022)।
- चार हाथों वाले लोक देवताकल्लाजी; मल्लीनाथजी, फत्ताजी या झुंझारजी नहीं (CET स्नातक 2022)।
- शकुन शास्त्रीहड़बूजी और मेहाजी मांगलिया।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 33
चार हाथों वाला लोकदेवता किसे कहा जाता है?
- (1)कल्ला जी
- (2)मल्लीनाथ जी
- (3)फत्ता जी
- (4)झुन्झार जी
उत्तर देखें
✓ (1) कल्ला जी
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 131
निम्न में से कौन सा युग्म गलत मेलित है ?
- (1)रामदेवजी – रामदेवरा
- (2)मल्लीनाथजी – गागरोण
- (3)तेजाजी – खड़नाल
- (4)पाबूजी – कोलू
उत्तर देखें
✓ (2) मल्लीनाथजी – गागरोण
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 139
रिखिया एवं नेजा निम्नलिखित में से किस लोक देवता से संबंधित हैं ?
- (1)पाबूजी
- (2)तेजाजी
- (3)मल्लीनाथजी
- (4)रामदेवजी
उत्तर देखें
✓ (4) रामदेवजी
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