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राजस्थान में 1857 की क्रांति

1857 में राजस्थान में क्रांति सेना की छावनियों से शुरू हुई और आउवा के ठाकुर जैसे सामंतों तथा कोटा जैसे नगरों तक फैली।

⏱ 4 मिनट पढ़ें1 विस्तृत पृष्ठ✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. 1857 में ए.जी.जी.: जॉर्ज पैट्रिक लॉरेंस; गवर्नर जनरल: लॉर्ड कैनिंग।
  2. छह छावनियाँ: नसीराबाद, नीमच, देवली, ब्यावर, एरिनपुरा और खेरवाड़ा, जिनमें एक भी यूरोपीय सैनिक नहीं था। नीमच आज मध्य प्रदेश में है।
  3. अधिकांश शासकों ने अंग्रेजों की सहायता की; क्रांति को सैनिकों, सामंतों और आम जनता ने आगे बढ़ाया।

क्रांति के केंद्र

  • नसीराबादराजस्थान में पहलातिथि28 मई 1857विद्रोह किसने किया15वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री, जिसे अजमेर से यहाँ भेजा गया थाक्या हुआक्रांतिकारियों ने छावनी पर कब्जा किया और दिल्ली की ओर चल पड़े
  • नीमचशपथ से इनकारतिथि3 जून 1857विद्रोह किसने कियाछावनी के सैनिक; 2 जून को कर्नल एबॉट ने उन्हें वफादारी की शपथ दिलाई थीक्या हुआघुड़सवार मोहम्मद अली बेग ने शपथ को चुनौती दी; क्रांतिकारियों ने छावनी जलाई और दिल्ली की ओर चले। कप्तान शावर्स ने कोटा, बूंदी और मेवाड़ की सेनाओं की सहायता से 8 जून को नीमच पर फिर अधिकार किया
  • देवली और टोंकसेना नवाब के विरुद्धविद्रोह किसने कियादेवली में नीमच के क्रांतिकारी; टोंक में मीर आलम खाँ के नेतृत्व में नवाब की सेनाक्या हुआदेवली छावनी जला दी गई। टोंक की सेना अंग्रेज-समर्थक नवाब के विरुद्ध क्रांतिकारियों के साथ हो गई, बकाया वेतन वसूला और दिल्ली की ओर चली
  • भरतपुररियासती सेना का विद्रोहतिथि1857, मथुरा के विद्रोह के बादविद्रोह किसने कियाराज्य की सेना, गुर्जर और मेव जनता के साथक्या हुआपॉलिटिकल एजेंट मेजर मॉरिसन महाराजा की सलाह पर भरतपुर छोड़कर चला गया
  • एरिनपुरादिल्ली चलो का नारातिथि21 अगस्त 1857विद्रोह किसने कियाजोधपुर लीजनक्या हुआलीजन के सैनिकों ने आबू में अंग्रेजों पर हमला किया; क्रांतिकारी एरिनपुरा को लूटकर "चलो दिल्ली, मारो फिरंगी" का नारा लगाते हुए दिल्ली की ओर चले, पर आउवा में रुक गए
  • आउवाठाकुर का विद्रोहतिथिसितंबर 1857 से जनवरी 1858विद्रोह किसने कियाठाकुर कुशाल सिंह, एरिनपुरा के क्रांतिकारियों के साथक्या हुआजोधपुर की सेना और ए.जी.जी. लॉरेंस की सेना हारी; जनवरी 1858 में किला अंग्रेजों के हाथ गयापूरे नोट्स पढ़ें →
  • कोटारेजीडेंसी पर हमलातिथि15 अक्टूबर 1857 से मार्च 1858विद्रोह किसने कियामहाराव की सेना की दो पलटनें, रिसालदार मेहराब खाँ और लाला जयदयाल के नेतृत्व मेंक्या हुआमेजर बर्टन और उनके दो पुत्र मारे गए। क्रांतिकारियों का कोटा पर लगभग छह माह (RBSE कक्षा 12 में पाँच माह) अधिकार रहा; करौली की सेना ने महाराव की सहायता की और मार्च 1858 में जनरल रॉबर्ट्स ने शहर फिर जीता। मेहराब खाँ और जयदयाल को फाँसी दी गई (RBSE कक्षा 9: जयदयाल को तोप से उड़ाया गया)
  • धौलपुरग्वालियर-इंदौर के विद्रोहीतिथिअक्टूबर 1857विद्रोह किसने कियाग्वालियर और इंदौर के विद्रोही सैनिक, जिनसे राज्य की अधिकांश सेना जा मिलीक्या हुआदिसंबर 1857 में पटियाला की सेना की सहायता से व्यवस्था बहाल हुई

शासक और अंग्रेज एजेंट, 1857

राज्यपॉलिटिकल एजेंटशासक
जयपुरविलियम ईडनमहाराजा रामसिंह द्वितीय
जोधपुर (मारवाड़)कप्तान मॉक मेसन (मोंक मेसन)महाराजा तख्तसिंह
कोटामेजर बर्टनमहाराव रामसिंह द्वितीय
उदयपुर (मेवाड़)कप्तान शावर्समहाराणा स्वरूपसिंह
भरतपुरमेजर मॉरिसन (RBSE कक्षा 12 में मेजर निक्सन)महाराजा जसवंतसिंह

शासक और सामंत

  • बीकानेर: महाराजा सरदारसिंह राजपूताने के एकमात्र शासक थे जो अंग्रेजों की सहायता के लिए अपनी सेना लेकर स्वयं राज्य से बाहर, अंग्रेजी क्षेत्र में गए।
  • मेवाड़: महाराणा स्वरूपसिंह ने अंग्रेजों की सहायता के लिए अपनी सेना भेजी।
  • क्रांतिकारियों की सहायता करने वाले सामंत: सलूंबर के रावत केसरीसिंह और कोठारिया के रावत जोधसिंह (RBSE कक्षा 9 में ज्योतसिंह), दोनों मेवाड़ के; मारवाड़ और मेवाड़ के अनेक ठाकुरों की सहानुभूति भी क्रांतिकारियों के साथ थी।

राजस्थान में तात्या टोपे

  • 1858 में ग्वालियर में हारने के बाद वे राजस्थान आए, जहाँ टोंक की सेना उनके साथ हो गई और सलूंबर के रावत ने उनकी सहायता की।
  • अगस्त 1858 में अंग्रेजों ने उन्हें बनास नदी के तट पर हराया; इसके बाद उन्होंने झालरापाटन पर अधिकार किया। दिसंबर 1858 में उन्होंने बांसवाड़ा पर अधिकार किया।
  • 1858 में ग्वालियर में बीकानेर में जन्मे सेठ अमरचंद बांठिया ने लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे की क्रांतिकारी सेना को धन दिया; अंग्रेजों ने उन्हें फाँसी दी।
  • नरवर के जागीरदार मानसिंह ने विश्वासघात कर उन्हें अंग्रेजों को सौंप दिया; 18 अप्रैल 1859 को सिपरी (अब शिवपुरी, मध्य प्रदेश) में उन्हें फाँसी दी गई।

असफलता के कारण और परिणाम

  • असफलता: कोई साझा नेता या योजना नहीं, और अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग समय पर विद्रोह।
  • पुरस्कार: वफादार शासकों को उपाधियाँ और पुरस्कार मिले।
  • सामंत: अनेक जागीरदारों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया था, इसलिए अंग्रेजों ने सामंत वर्ग की शक्ति घटाने की नीति अपनाई।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • स्थान के अनुसार नेताआउवा में कुशाल सिंह · कोटा में मेहराब खाँ और जयदयाल · टोंक में मीर आलम खाँ।
  • ए.जी.जी. या पॉलिटिकल एजेंटलॉरेंस पूरे राजपूताने के ए.जी.जी. थे · ईडन, मेसन, बर्टन, शावर्स और मॉरिसन अलग-अलग राज्यों के एजेंट थे।
  • दो रामसिंह द्वितीयजयपुर के महाराजा रामसिंह द्वितीय · कोटा के महाराव रामसिंह द्वितीय।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 3

1857 की क्रांति के दौरान जयपुर के पॉलिटिकल ऐजेण्ट कौन थे?

  1. (1)मॉक मैसन
  2. (2)मेजर बर्टन
  3. (3)विलियम ईडन
  4. (4)मेजर मॉरीसन
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