एक नज़र में
- पर्यावरण वैज्ञानिक: जीवों और वृक्षों के प्रति लगाव के कारण उन्हें पर्यावरण वैज्ञानिक कहा जाता है; वृक्षों की रक्षा के लिए बिश्नोइयों ने प्राण तक दिए हैं।
- नाम: बिश्नोई शब्द बीस और नौ से बना है।
- मुकाम के मेले: फाल्गुन अमावस्या और आश्विन अमावस्या।
तथ्य
| जन्म | भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, 1451 ई., पीपासर (नागौर) में |
|---|---|
| परिवार | पंवार राजपूत; पिता लोहटजी, माता हांसा देवी |
| संप्रदाय की स्थापना | 1485 ई., समराथल (बीकानेर) में, जहाँ वे 1483 ई. से रह रहे थे |
| नियम | 29 |
| समाधि | 1536 ई.: लालासर में देह त्यागी और तालवा गाँव के पास समाधि दी गई; यही स्थान अब मुकाम (नोखा, बीकानेर) कहलाता है |
| ग्रंथ | जम्भ संहिता, जम्भ सागर शब्दावली, बिश्नोई धर्मप्रकाश और जम्भसागर |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- तीन स्थानजन्म पीपासर · संप्रदाय की स्थापना समराथल · समाधि मुकाम।
- बिश्नोई या जसनाथीबिश्नोई पीठ मुकाम · जसनाथी पीठ कतरियासर।
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