EN
Log in

Add TopKaro to your iPhone

  1. Tap the Share button at the bottom of Safari
  2. Scroll and tap Add to Home Screen
  3. Tap Add — TopKaro appears on your home screen

iPhones don’t allow a one-tap install button, so we show these steps instead.

जाम्भोजी

जाम्भोजी, जिन्हें गुरु जम्भेश्वर भी कहते हैं, बिश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक थे। परीक्षा में उनका जन्म स्थान, संप्रदाय की स्थापना का स्थान और समाधि स्थल पूछे जाते हैं।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. पर्यावरण वैज्ञानिक: जीवों और वृक्षों के प्रति लगाव के कारण उन्हें पर्यावरण वैज्ञानिक कहा जाता है; वृक्षों की रक्षा के लिए बिश्नोइयों ने प्राण तक दिए हैं।
  2. नाम: बिश्नोई शब्द बीस और नौ से बना है।
  3. मुकाम के मेले: फाल्गुन अमावस्या और आश्विन अमावस्या।

तथ्य

जन्मभाद्रपद कृष्ण अष्टमी, 1451 ई., पीपासर (नागौर) में
परिवारपंवार राजपूत; पिता लोहटजी, माता हांसा देवी
संप्रदाय की स्थापना1485 ई., समराथल (बीकानेर) में, जहाँ वे 1483 ई. से रह रहे थे
नियम29
समाधि1536 ई.: लालासर में देह त्यागी और तालवा गाँव के पास समाधि दी गई; यही स्थान अब मुकाम (नोखा, बीकानेर) कहलाता है
ग्रंथजम्भ संहिता, जम्भ सागर शब्दावली, बिश्नोई धर्मप्रकाश और जम्भसागर

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • तीन स्थानजन्म पीपासर · संप्रदाय की स्थापना समराथल · समाधि मुकाम।
  • बिश्नोई या जसनाथीबिश्नोई पीठ मुकाम · जसनाथी पीठ कतरियासर।

पढ़ लिया? अब अभ्यास करें

निःशुल्क अभ्यास प्रश्नों से इस विषय पर अपनी तैयारी जाँचें।

अभ्यास प्रश्न →