एक नज़र में
- चाँद बावड़ी: 13 मंज़िलें; प्रायः 3,500 सीढ़ियाँ बताई जाती हैं, पर राजस्थान पर्यटन के एक पृष्ठ पर लगभग 1,000।
- राजप्रशस्ति: रणछोड़ भट्ट द्वारा रचित मेवाड़ का संस्कृत इतिहास, राजसमंद की नौचौकी पर 25 शिलाओं पर उत्कीर्ण; प्रायः भारत का सबसे लंबा शिलालेख कही जाती है।
- चन्द्र महल: जयपुर के सिटी पैलेस के भीतर का सात मंज़िला महल, अलग महल नहीं।
- डीग: पहले भरतपुर जिले में था, अब स्वयं एक जिला है।
प्रमुख मंदिर
- दिलवाड़ा (देलवाड़ा) के मंदिरसोलंकी शैली के जैन मंदिरस्थानमाउंट आबू, सिरोहीनिर्माता एवं कालविमल वसही विमल शाह द्वारा, 1031 ई. (कुछ विवरणों में 1026 ई.); लूण वसही वस्तुपाल एवं तेजपाल द्वारा, 1230 ई.प्रसिद्धिसफेद संगमरमर के पाँच जैन मंदिरपूरे नोट्स पढ़ें →
- रणकपुर का जैन मंदिरखंभों का अजायबघरस्थानरणकपुर, सादड़ी के पास, पालीनिर्माता एवं कालजैन व्यापारी धरणीशाह, महाराणा कुंभा के शासनकाल (1433–1468 ई.) मेंप्रसिद्धि1,444 स्तंभों पर टिका आदिनाथ का चौमुखा मंदिरपूरे नोट्स पढ़ें →
- ओसियाँ के मंदिरप्रतिहारकालीन मंदिरों का नगरस्थानओसियाँ, जोधपुर के पासनिर्माता एवं कालगुर्जर-प्रतिहार काल (8वीं शताब्दी) से 12वीं शताब्दी तकप्रसिद्धिसच्चियाय माता, सूर्य, हरिहर एवं महावीर मंदिर
- किराडू के मंदिरप्राचीन किरात कूपस्थानबाड़मेर के पासनिर्माता एवं काल11वीं–12वीं शताब्दी; सोमेश्वर मंदिर लगभग 1016 ई.प्रसिद्धिशिव एवं विष्णु के पाँच मंदिरों का समूह; सोमेश्वर सबसे सुंदर
- बाड़ौली के मंदिरचंबल किनारे के शिव मंदिरस्थानबाड़ौली, रावतभाटा, चित्तौड़गढ़निर्माता एवं कालमान्यता के अनुसार हूण (RBSE पुस्तक: तोरमाण का पुत्र मिहिरकुल); राजस्थान पर्यटन के अनुसार 9वीं शताब्दी, अन्य विवरणों में शैली के आधार पर 10वीं शताब्दीप्रसिद्धिनौ मंदिरों का समूह; घटेश्वर महादेव मुख्य मंदिर
- हर्षत माता मंदिरहर्ष एवं आनंद की देवीस्थानआभानेरी, दौसानिर्माता एवं कालगुर्जर-प्रतिहार काल; 8वीं शताब्दी (राजस्थान पर्यटन: 9वीं–10वीं)प्रसिद्धिमूलतः विष्णु मंदिर; RBSE पुस्तक के अनुसार 11वीं सदी में महमूद गजनवी की सेना ने क्षतिग्रस्त किया; चाँद बावड़ी के पास
- एकलिंगजी का मंदिरमेवाड़ के कुलदेवतास्थानकैलाशपुरी, उदयपुर–नाथद्वारा मार्ग परनिर्माता एवं कालपरंपरा के अनुसार बप्पा रावल, 8वीं शताब्दी; वर्तमान स्वरूप महाराणा रायमल ने दियाप्रसिद्धिकाले पत्थर की चतुर्मुखी शिव प्रतिमा; महाराणा स्वयं को इनका दीवान मानते थे
- जगदीश मंदिरउदयपुर का विष्णु मंदिरस्थानउदयपुर, सिटी पैलेस के पासनिर्माता एवं कालमहाराणा जगतसिंह प्रथम, 1651 ई.प्रसिद्धिजगन्नाथ रूप में विष्णु; तीन मंज़िला, गर्भगृह के सामने पीतल की गरुड़ प्रतिमा
- ब्रह्मा मंदिरदुर्लभ ब्रह्मा मंदिरस्थानपुष्कर, अजमेरप्रसिद्धिभारत के गिने-चुने ब्रह्मा मंदिरों में से एक; चतुर्मुखी प्रतिमा
- नीलकंठेश्वर मंदिरपारानगर का शिव मंदिरस्थानराजोरगढ़ (पारानगर), सरिस्का के दक्षिण-पश्चिम मेंनिर्माता एवं कालप्रतिहारों के सामंत मथानदेव; लगभग 10वीं शताब्दी (एक अन्य मत: 6ठी–9वीं)प्रसिद्धित्रिकूटाकार (तीन गर्भगृहों वाला) शिव मंदिर
- मंदाकिनी मंदिरबिजोलिया का शिव मंदिर समूहस्थानबिजोलिया, भीलवाड़ाप्रसिद्धिहजारेश्वर, उंडेश्वर एवं महाकाल शिव मंदिर
- भण्डदेवरा मंदिररामगढ़ का शिव मंदिरस्थानरामगढ़, बारांनिर्माता एवं कालमेदवंशीय राजा मलय वर्मा, 10वीं शताब्दीप्रसिद्धिखजुराहो जैसी शिल्पकला वाला शिव मंदिर
- सास-बहू (सहस्रबाहु) मंदिरनागदा के जुड़वाँ मंदिरस्थाननागदा, उदयपुर के पासनिर्माता एवं कालगुहिल शासक श्रीधर, 1026 ई. (राजस्थान पर्यटन: 9वीं–10वीं शताब्दी)प्रसिद्धिपास-पास बने दो वैष्णव मंदिर
- जगतशिरोमणि मंदिरआमेर का वैष्णव मंदिरस्थानआमेर, जयपुरनिर्माता एवं कालमानसिंह प्रथम की रानी कंकावती, पुत्र जगतसिंह की स्मृति मेंप्रसिद्धिकृष्ण की वह प्रतिमा, जिसकी मान्यता है कि मीरा पूजा करती थीं
- लोद्रवा का जैन मंदिरजैसलमेर का जैन तीर्थस्थानलोद्रवा, जैसलमेर के पासप्रसिद्धिभाटियों की पुरानी राजधानी में पार्श्वनाथ मंदिर
मंदिर स्थापत्य की शैलियाँ
- महामारू (गुर्जर-प्रतिहार): लगभग 8वीं सदी से विकसित क्षेत्रीय शैली; आरंभिक उदाहरण ओसियाँ, चित्तौड़गढ़ एवं आभानेरी में; इसका अंतिम और सबसे भव्य मंदिर किराडू का सोमेश्वर।
- मारू-गुर्जर (सोलंकी): 11वीं से 13वीं सदी का स्वर्ण काल; अलंकृत, ऊँचे, पतले और गोलाई लिए खंभे तथा ऊँची पीठिका; जैसे सच्चियाय माता (ओसियाँ) एवं समिद्धेश्वर (चित्तौड़ दुर्ग)।
- भूमिज: राजस्थान में इसका सबसे पुराना मंदिर सेवाड़ी (पाली) का जैन मंदिर (लगभग 1010–20 ई.); अन्य उदाहरण मेनाल का महानालेश्वर, भण्डदेवरा एवं बिजोलिया का उंडेश्वर।
- पंचायतन: मुख्य मंदिर के चारों ओर चार छोटे मंदिर, जैसे जगदीश (उदयपुर), बाड़ौली एवं भण्डदेवरा।
- हवेली शैली: 16वीं–17वीं सदी के बाद अनेक मंदिर हवेलियों की तरह बनाए गए।
महल एवं उद्यान
| महल | स्थान | निर्माता एवं काल | प्रसिद्धि |
|---|---|---|---|
| हवा महल | जयपुर | सवाई प्रतापसिंह, 1799 ई.; वास्तुकार लालचंद उस्ता | पाँच मंज़िलें और 953 छोटी खिड़कियाँ (झरोखे) |
| सिटी पैलेस, जयपुर | जयपुर | सवाई जयसिंह द्वितीय, 1729–1732 ई.; बाद के शासकों ने विस्तार किया | मुबारक महल, पहले अतिथियों का स्वागत कक्ष, अब संग्रहालय |
| सिटी पैलेस, उदयपुर | उदयपुर, पिछौला झील के पूर्वी किनारे पर | महाराणा उदयसिंह द्वितीय, 1559 ई. में आरंभ (कुछ विवरणों में 1553 ई.); बाद के महाराणाओं ने विस्तार किया | मोर की पच्चीकारी वाला मोर चौक; ज़नाना महल |
| जल महल | जयपुर, मानसागर झील में | लगभग 1699 ई. में आरंभ; 18वीं सदी में जीर्णोद्धार | झील भरने पर इसका अधिकांश भाग पानी में डूबा रहता है |
| उम्मेद भवन पैलेस | जोधपुर, छीतर पहाड़ी पर | महाराजा उम्मेदसिंह, 1929–1943 ई.; वास्तुकार एच. वी. लैंचेस्टर | अकाल में रोज़गार देने हेतु बना; इंडो-सारसेनिक, क्लासिकल रिवाइवल एवं आर्ट डेको शैलियाँ |
| लालगढ़ पैलेस | बीकानेर | महाराजा गंगासिंह, पिता लालसिंह की स्मृति में; पहला भाग 1902 ई., पूरा 1926 ई.; वास्तुकार स्विंटन जैकब | लाल बलुआ पत्थर; राजपूत, इस्लामी एवं यूरोपीय शैलियों का मेल |
| लेक पैलेस (जगनिवास) | उदयपुर, पिछौला झील के द्वीप पर | महाराणा जगतसिंह द्वितीय, 1743–1746 ई. | ग्रीष्मकालीन महल, अब होटल |
| जगमंदिर | उदयपुर, पिछौला झील के द्वीप पर | महाराणा कर्णसिंह; जगतसिंह प्रथम के समय पूर्ण; लगभग 1620–1652 ई. | जहाँगीर से विद्रोह के समय शहज़ादे खुर्रम (बाद में शाहजहाँ) को शरण दी |
| डीग के महल | डीग | मुख्यतः महाराजा सूरजमल, 18वीं शताब्दी; वहाँ पहला महल उनके पिता बदनसिंह ने बनवाया | गोपाल भवन तथा सावन-भादो के जुड़वाँ मंडप; फव्वारे |
| सहेलियों की बाड़ी | उदयपुर | महाराणा संग्रामसिंह द्वितीय | राजपरिवार की स्त्रियों के लिए उद्यान; फव्वारे, संगमरमर के हाथी और कमल-ताल |
बावड़ियाँ
| बावड़ी | स्थान | निर्माता एवं काल | प्रसिद्धि |
|---|---|---|---|
| चाँद बावड़ी | आभानेरी, दौसा | मान्यता के अनुसार निकुंभ वंश के राजा चाँद (चंद); 8वीं–9वीं शताब्दी | तीन ओर सीढ़ियाँ, चौथी ओर स्तंभों वाला मंडप |
| रानीजी की बावड़ी | बूँदी | राव राजा अनिरुद्धसिंह की रानी नाथावती, 1699 ई. | लगभग 46 मीटर गहरी; नक्काशीदार स्तंभ, ऊँचा मेहराबदार द्वार और पत्थर के हाथी |
| तूरजी का झालरा | जोधपुर | महाराजा अभयसिंह के शासनकाल में, लगभग 1740 ई.; उनकी रानी तंवरजी से जुड़ा |
शासकों द्वारा बनवाई गई झीलें
| झील | स्थान | निर्माता एवं काल | प्रसिद्धि |
|---|---|---|---|
| जयसमंद (ढेबर) | सलूम्बर के पास (तब उदयपुर जिला, अब सलूम्बर) | महाराणा जयसिंह, 1685–1691 ई. | मीठे पानी की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील: राजस्थान पर्यटन के अनुसार एशिया की, अन्य विवरणों में भारत की |
| राजसमंद | राजनगर और कांकरोली के बीच, राजसमंद | महाराणा राजसिंह प्रथम, 1662–1676 ई. | नौचौकी की पाल |
| पिछौला | उदयपुर | एक बंजारे ने, महाराणा लाखा के समय में | पास के पिछोली गाँव के नाम पर नाम |
| फतहसागर | उदयपुर, पिछौला के उत्तर में | महाराणा जयसिंह, 1678 ई.; 1889 ई. में महाराणा फतहसिंह ने फिर बनवाई | इसका बाँध ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर कनॉट बाँध कहलाता है |
| आनासागर | अजमेर | अर्णोराज (आनाजी) चौहान, 1135–1150 ई. | किनारे पर जहाँगीर का दौलत बाग और शाहजहाँ की संगमरमर की बारादरी |
हवेलियाँ, छतरियाँ एवं जल-संरक्षण
- हवेलियाँसेठों और दीवानों की हवेलियाँमुख्य उदाहरणपटवों की, नथमल की एवं सालिम सिंह की हवेलीक्षेत्रजैसलमेरपूरे नोट्स पढ़ें →
- छतरियाँराजाओं के स्मारकमुख्य उदाहरणगैटोर, बड़ा बाग, चौरासी खंभों की छतरी, मूसी महारानी की छतरी, गोपालसिंह की छतरीक्षेत्रजयपुर, जैसलमेर, बूँदी, अलवर, करौलीपूरे नोट्स पढ़ें →
- परंपरागत जल-संरक्षणवर्षा-जल का संचयमुख्य उदाहरणखड़ीन, नाडी, टांका, कुंड एवं जोहड़क्षेत्रपश्चिमी राजस्थान; जोहड़ अलवर मेंपूरे नोट्स पढ़ें →
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- पिछौला या फतहसागरजगमंदिर और जगनिवास पिछौला के द्वीपों पर · उदयपुर सौर वेधशाला फतहसागर के द्वीप पर।
- गोमतीजयसमंद और राजसमंद दोनों इसी पर बाँध बनाकर बनीं; राजसमंद में केलवा और ताली नदियाँ भी आती हैं।
- दो नीलकंठ मंदिरराजोरगढ़ का प्रतिहार काल का · कुंभलगढ़ दुर्ग के भीतर का नीलकंठ महादेव मंदिर 1458 ई. का।
- खजुराहो उपनामकिराडू राजस्थान का खजुराहो · भण्डदेवरा हाड़ौती का खजुराहो (राजस्थान पर्यटन: राजस्थान का मिनी खजुराहो) · जगत का अंबिका माता मंदिर मेवाड़ का खजुराहो (राजस्थान पर्यटन: राजस्थान का खजुराहो)।
- दो जल महलजयपुर का मानसागर झील में · डीग के महलों को भी जलमहल कहा जाता है।
- लालगढ़बीकानेर के जूनागढ़ दुर्ग को लाल पत्थर के कारण लालगढ़ भी कहा जाता है · लालगढ़ पैलेस गंगासिंह का 20वीं सदी का महल है।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 140
निम्नलिखित में से कौन सा सुमेलित युग्म है :
- (1)नथमल की हवेली – जोधपुर
- (2)फलवर्द्धिका देवी मंदिर – माउण्ट आबू
- (3)चन्द्र महल – जयपुर
- (4)मालकोट दुर्ग – हनुमानगढ़
उत्तर देखें
✓ (3) चन्द्र महल – जयपुर
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 12
भीलवाड़ा जिले में किस स्थान पर पर्यटक स्थल के रूप में प्रसिद्ध मंदाकिनी मन्दिर स्थित है?
- (1)जहाज़पुर
- (2)बिजोलिया
- (3)आसींद
- (4)तिलस्वा
उत्तर देखें
✓ (2) बिजोलिया
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 127
राजोरगढ़ में मथानदेव द्वारा निर्मित प्रसिद्ध मंदिर निम्न में से किस देवी/देवता को समर्पित था ?
- (1)शिव
- (2)विष्णु
- (3)सूर्य
- (4)महिषासुर मर्दिनी
उत्तर देखें
✓ (1) शिव
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 72
पिचौला (पिछौला) झील, राजस्थान के निम्नलिखित में से किस स्थान में पायी जाती है?
- (1)उदयपुर
- (2)अजमेर
- (3)भीलवाड़ा
- (4)करौली
उत्तर देखें
✓ (1) उदयपुर
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 131
उदयपुर का एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल “सहेलियों की बाड़ी” किसके द्वारा बनवाया गया था ।
- (1)महाराणा शंभू सिंह-I
- (2)महाराणा संग्राम सिंह-II
- (3)महाराजा सूरजमल
- (4)महाराजा उदय सिंह
उत्तर देखें
✓ (2) महाराणा संग्राम सिंह-II
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 17
लोद्रवा प्रसिद्ध है –
- (1)जैनियों के लिए
- (2)सिक्खों के लिए
- (3)जाटों के लिए
- (4)गुर्जरों के लिए
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✓ (1) जैनियों के लिए
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