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राजस्थान के मंदिर, महल, बावड़ियाँ एवं जल-संरचनाएँ

राजस्थान के मंदिर, महल, बावड़ियाँ, झीलें, हवेलियाँ और छतरियाँ प्रायः स्थान, निर्माता और काल के रूप में पूछी जाती हैं, अक्सर स्मारक और नगर के मिलान के रूप में।

⏱ 8 मिनट पढ़ें4 विस्तृत पृष्ठ✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. चाँद बावड़ी: 13 मंज़िलें; प्रायः 3,500 सीढ़ियाँ बताई जाती हैं, पर राजस्थान पर्यटन के एक पृष्ठ पर लगभग 1,000।
  2. राजप्रशस्ति: रणछोड़ भट्ट द्वारा रचित मेवाड़ का संस्कृत इतिहास, राजसमंद की नौचौकी पर 25 शिलाओं पर उत्कीर्ण; प्रायः भारत का सबसे लंबा शिलालेख कही जाती है।
  3. चन्द्र महल: जयपुर के सिटी पैलेस के भीतर का सात मंज़िला महल, अलग महल नहीं।
  4. डीग: पहले भरतपुर जिले में था, अब स्वयं एक जिला है।

प्रमुख मंदिर

  • दिलवाड़ा (देलवाड़ा) के मंदिरसोलंकी शैली के जैन मंदिरस्थानमाउंट आबू, सिरोहीनिर्माता एवं कालविमल वसही विमल शाह द्वारा, 1031 ई. (कुछ विवरणों में 1026 ई.); लूण वसही वस्तुपाल एवं तेजपाल द्वारा, 1230 ई.प्रसिद्धिसफेद संगमरमर के पाँच जैन मंदिरपूरे नोट्स पढ़ें →
  • रणकपुर का जैन मंदिरखंभों का अजायबघरस्थानरणकपुर, सादड़ी के पास, पालीनिर्माता एवं कालजैन व्यापारी धरणीशाह, महाराणा कुंभा के शासनकाल (1433–1468 ई.) मेंप्रसिद्धि1,444 स्तंभों पर टिका आदिनाथ का चौमुखा मंदिरपूरे नोट्स पढ़ें →
  • ओसियाँ के मंदिरप्रतिहारकालीन मंदिरों का नगरस्थानओसियाँ, जोधपुर के पासनिर्माता एवं कालगुर्जर-प्रतिहार काल (8वीं शताब्दी) से 12वीं शताब्दी तकप्रसिद्धिसच्चियाय माता, सूर्य, हरिहर एवं महावीर मंदिर
  • किराडू के मंदिरप्राचीन किरात कूपस्थानबाड़मेर के पासनिर्माता एवं काल11वीं–12वीं शताब्दी; सोमेश्वर मंदिर लगभग 1016 ई.प्रसिद्धिशिव एवं विष्णु के पाँच मंदिरों का समूह; सोमेश्वर सबसे सुंदर
  • बाड़ौली के मंदिरचंबल किनारे के शिव मंदिरस्थानबाड़ौली, रावतभाटा, चित्तौड़गढ़निर्माता एवं कालमान्यता के अनुसार हूण (RBSE पुस्तक: तोरमाण का पुत्र मिहिरकुल); राजस्थान पर्यटन के अनुसार 9वीं शताब्दी, अन्य विवरणों में शैली के आधार पर 10वीं शताब्दीप्रसिद्धिनौ मंदिरों का समूह; घटेश्वर महादेव मुख्य मंदिर
  • हर्षत माता मंदिरहर्ष एवं आनंद की देवीस्थानआभानेरी, दौसानिर्माता एवं कालगुर्जर-प्रतिहार काल; 8वीं शताब्दी (राजस्थान पर्यटन: 9वीं–10वीं)प्रसिद्धिमूलतः विष्णु मंदिर; RBSE पुस्तक के अनुसार 11वीं सदी में महमूद गजनवी की सेना ने क्षतिग्रस्त किया; चाँद बावड़ी के पास
  • एकलिंगजी का मंदिरमेवाड़ के कुलदेवतास्थानकैलाशपुरी, उदयपुर–नाथद्वारा मार्ग परनिर्माता एवं कालपरंपरा के अनुसार बप्पा रावल, 8वीं शताब्दी; वर्तमान स्वरूप महाराणा रायमल ने दियाप्रसिद्धिकाले पत्थर की चतुर्मुखी शिव प्रतिमा; महाराणा स्वयं को इनका दीवान मानते थे
  • जगदीश मंदिरउदयपुर का विष्णु मंदिरस्थानउदयपुर, सिटी पैलेस के पासनिर्माता एवं कालमहाराणा जगतसिंह प्रथम, 1651 ई.प्रसिद्धिजगन्नाथ रूप में विष्णु; तीन मंज़िला, गर्भगृह के सामने पीतल की गरुड़ प्रतिमा
  • ब्रह्मा मंदिरदुर्लभ ब्रह्मा मंदिरस्थानपुष्कर, अजमेरप्रसिद्धिभारत के गिने-चुने ब्रह्मा मंदिरों में से एक; चतुर्मुखी प्रतिमा
  • नीलकंठेश्वर मंदिरपारानगर का शिव मंदिरस्थानराजोरगढ़ (पारानगर), सरिस्का के दक्षिण-पश्चिम मेंनिर्माता एवं कालप्रतिहारों के सामंत मथानदेव; लगभग 10वीं शताब्दी (एक अन्य मत: 6ठी–9वीं)प्रसिद्धित्रिकूटाकार (तीन गर्भगृहों वाला) शिव मंदिर
  • मंदाकिनी मंदिरबिजोलिया का शिव मंदिर समूहस्थानबिजोलिया, भीलवाड़ाप्रसिद्धिहजारेश्वर, उंडेश्वर एवं महाकाल शिव मंदिर
  • भण्डदेवरा मंदिररामगढ़ का शिव मंदिरस्थानरामगढ़, बारांनिर्माता एवं कालमेदवंशीय राजा मलय वर्मा, 10वीं शताब्दीप्रसिद्धिखजुराहो जैसी शिल्पकला वाला शिव मंदिर
  • सास-बहू (सहस्रबाहु) मंदिरनागदा के जुड़वाँ मंदिरस्थाननागदा, उदयपुर के पासनिर्माता एवं कालगुहिल शासक श्रीधर, 1026 ई. (राजस्थान पर्यटन: 9वीं–10वीं शताब्दी)प्रसिद्धिपास-पास बने दो वैष्णव मंदिर
  • जगतशिरोमणि मंदिरआमेर का वैष्णव मंदिरस्थानआमेर, जयपुरनिर्माता एवं कालमानसिंह प्रथम की रानी कंकावती, पुत्र जगतसिंह की स्मृति मेंप्रसिद्धिकृष्ण की वह प्रतिमा, जिसकी मान्यता है कि मीरा पूजा करती थीं
  • लोद्रवा का जैन मंदिरजैसलमेर का जैन तीर्थस्थानलोद्रवा, जैसलमेर के पासप्रसिद्धिभाटियों की पुरानी राजधानी में पार्श्वनाथ मंदिर

मंदिर स्थापत्य की शैलियाँ

  • महामारू (गुर्जर-प्रतिहार): लगभग 8वीं सदी से विकसित क्षेत्रीय शैली; आरंभिक उदाहरण ओसियाँ, चित्तौड़गढ़ एवं आभानेरी में; इसका अंतिम और सबसे भव्य मंदिर किराडू का सोमेश्वर।
  • मारू-गुर्जर (सोलंकी): 11वीं से 13वीं सदी का स्वर्ण काल; अलंकृत, ऊँचे, पतले और गोलाई लिए खंभे तथा ऊँची पीठिका; जैसे सच्चियाय माता (ओसियाँ) एवं समिद्धेश्वर (चित्तौड़ दुर्ग)।
  • भूमिज: राजस्थान में इसका सबसे पुराना मंदिर सेवाड़ी (पाली) का जैन मंदिर (लगभग 1010–20 ई.); अन्य उदाहरण मेनाल का महानालेश्वर, भण्डदेवरा एवं बिजोलिया का उंडेश्वर।
  • पंचायतन: मुख्य मंदिर के चारों ओर चार छोटे मंदिर, जैसे जगदीश (उदयपुर), बाड़ौली एवं भण्डदेवरा।
  • हवेली शैली: 16वीं–17वीं सदी के बाद अनेक मंदिर हवेलियों की तरह बनाए गए।

महल एवं उद्यान

महलस्थाननिर्माता एवं कालप्रसिद्धि
हवा महलजयपुरसवाई प्रतापसिंह, 1799 ई.; वास्तुकार लालचंद उस्तापाँच मंज़िलें और 953 छोटी खिड़कियाँ (झरोखे)
सिटी पैलेस, जयपुरजयपुरसवाई जयसिंह द्वितीय, 1729–1732 ई.; बाद के शासकों ने विस्तार कियामुबारक महल, पहले अतिथियों का स्वागत कक्ष, अब संग्रहालय
सिटी पैलेस, उदयपुरउदयपुर, पिछौला झील के पूर्वी किनारे परमहाराणा उदयसिंह द्वितीय, 1559 ई. में आरंभ (कुछ विवरणों में 1553 ई.); बाद के महाराणाओं ने विस्तार कियामोर की पच्चीकारी वाला मोर चौक; ज़नाना महल
जल महलजयपुर, मानसागर झील मेंलगभग 1699 ई. में आरंभ; 18वीं सदी में जीर्णोद्धारझील भरने पर इसका अधिकांश भाग पानी में डूबा रहता है
उम्मेद भवन पैलेसजोधपुर, छीतर पहाड़ी परमहाराजा उम्मेदसिंह, 1929–1943 ई.; वास्तुकार एच. वी. लैंचेस्टरअकाल में रोज़गार देने हेतु बना; इंडो-सारसेनिक, क्लासिकल रिवाइवल एवं आर्ट डेको शैलियाँ
लालगढ़ पैलेसबीकानेरमहाराजा गंगासिंह, पिता लालसिंह की स्मृति में; पहला भाग 1902 ई., पूरा 1926 ई.; वास्तुकार स्विंटन जैकबलाल बलुआ पत्थर; राजपूत, इस्लामी एवं यूरोपीय शैलियों का मेल
लेक पैलेस (जगनिवास)उदयपुर, पिछौला झील के द्वीप परमहाराणा जगतसिंह द्वितीय, 1743–1746 ई.ग्रीष्मकालीन महल, अब होटल
जगमंदिरउदयपुर, पिछौला झील के द्वीप परमहाराणा कर्णसिंह; जगतसिंह प्रथम के समय पूर्ण; लगभग 1620–1652 ई.जहाँगीर से विद्रोह के समय शहज़ादे खुर्रम (बाद में शाहजहाँ) को शरण दी
डीग के महलडीगमुख्यतः महाराजा सूरजमल, 18वीं शताब्दी; वहाँ पहला महल उनके पिता बदनसिंह ने बनवायागोपाल भवन तथा सावन-भादो के जुड़वाँ मंडप; फव्वारे
सहेलियों की बाड़ीउदयपुरमहाराणा संग्रामसिंह द्वितीयराजपरिवार की स्त्रियों के लिए उद्यान; फव्वारे, संगमरमर के हाथी और कमल-ताल

बावड़ियाँ

बावड़ीस्थाननिर्माता एवं कालप्रसिद्धि
चाँद बावड़ीआभानेरी, दौसामान्यता के अनुसार निकुंभ वंश के राजा चाँद (चंद); 8वीं–9वीं शताब्दीतीन ओर सीढ़ियाँ, चौथी ओर स्तंभों वाला मंडप
रानीजी की बावड़ीबूँदीराव राजा अनिरुद्धसिंह की रानी नाथावती, 1699 ई.लगभग 46 मीटर गहरी; नक्काशीदार स्तंभ, ऊँचा मेहराबदार द्वार और पत्थर के हाथी
तूरजी का झालराजोधपुरमहाराजा अभयसिंह के शासनकाल में, लगभग 1740 ई.; उनकी रानी तंवरजी से जुड़ा

शासकों द्वारा बनवाई गई झीलें

झीलस्थाननिर्माता एवं कालप्रसिद्धि
जयसमंद (ढेबर)सलूम्बर के पास (तब उदयपुर जिला, अब सलूम्बर)महाराणा जयसिंह, 1685–1691 ई.मीठे पानी की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील: राजस्थान पर्यटन के अनुसार एशिया की, अन्य विवरणों में भारत की
राजसमंदराजनगर और कांकरोली के बीच, राजसमंदमहाराणा राजसिंह प्रथम, 1662–1676 ई.नौचौकी की पाल
पिछौलाउदयपुरएक बंजारे ने, महाराणा लाखा के समय मेंपास के पिछोली गाँव के नाम पर नाम
फतहसागरउदयपुर, पिछौला के उत्तर मेंमहाराणा जयसिंह, 1678 ई.; 1889 ई. में महाराणा फतहसिंह ने फिर बनवाईइसका बाँध ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर कनॉट बाँध कहलाता है
आनासागरअजमेरअर्णोराज (आनाजी) चौहान, 1135–1150 ई.किनारे पर जहाँगीर का दौलत बाग और शाहजहाँ की संगमरमर की बारादरी

हवेलियाँ, छतरियाँ एवं जल-संरक्षण

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • पिछौला या फतहसागरजगमंदिर और जगनिवास पिछौला के द्वीपों पर · उदयपुर सौर वेधशाला फतहसागर के द्वीप पर।
  • गोमतीजयसमंद और राजसमंद दोनों इसी पर बाँध बनाकर बनीं; राजसमंद में केलवा और ताली नदियाँ भी आती हैं।
  • दो नीलकंठ मंदिरराजोरगढ़ का प्रतिहार काल का · कुंभलगढ़ दुर्ग के भीतर का नीलकंठ महादेव मंदिर 1458 ई. का।
  • खजुराहो उपनामकिराडू राजस्थान का खजुराहो · भण्डदेवरा हाड़ौती का खजुराहो (राजस्थान पर्यटन: राजस्थान का मिनी खजुराहो) · जगत का अंबिका माता मंदिर मेवाड़ का खजुराहो (राजस्थान पर्यटन: राजस्थान का खजुराहो)।
  • दो जल महलजयपुर का मानसागर झील में · डीग के महलों को भी जलमहल कहा जाता है।
  • लालगढ़बीकानेर के जूनागढ़ दुर्ग को लाल पत्थर के कारण लालगढ़ भी कहा जाता है · लालगढ़ पैलेस गंगासिंह का 20वीं सदी का महल है।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 140

निम्नलिखित में से कौन सा सुमेलित युग्म है :

  1. (1)नथमल की हवेली – जोधपुर
  2. (2)फलवर्द्धिका देवी मंदिर – माउण्ट आबू
  3. (3)चन्द्र महल – जयपुर
  4. (4)मालकोट दुर्ग – हनुमानगढ़
उत्तर देखें

✓ (3) चन्द्र महल – जयपुर

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संरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 12

भीलवाड़ा जिले में किस स्थान पर पर्यटक स्थल के रूप में प्रसिद्ध मंदाकिनी मन्दिर स्थित है?

  1. (1)जहाज़पुर
  2. (2)बिजोलिया
  3. (3)आसींद
  4. (4)तिलस्वा
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आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 127

राजोरगढ़ में मथानदेव द्वारा निर्मित प्रसिद्ध मंदिर निम्न में से किस देवी/देवता को समर्पित था ?

  1. (1)शिव
  2. (2)विष्णु
  3. (3)सूर्य
  4. (4)महिषासुर मर्दिनी
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समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 72

पिचौला (पिछौला) झील, राजस्थान के निम्नलिखित में से किस स्थान में पायी जाती है?

  1. (1)उदयपुर
  2. (2)अजमेर
  3. (3)भीलवाड़ा
  4. (4)करौली
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समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 131

उदयपुर का एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल “सहेलियों की बाड़ी” किसके द्वारा बनवाया गया था ।

  1. (1)महाराणा शंभू सिंह-I
  2. (2)महाराणा संग्राम सिंह-II
  3. (3)महाराजा सूरजमल
  4. (4)महाराजा उदय सिंह
उत्तर देखें

✓ (2) महाराणा संग्राम सिंह-II

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समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 17

लोद्रवा प्रसिद्ध है –

  1. (1)जैनियों के लिए
  2. (2)सिक्खों के लिए
  3. (3)जाटों के लिए
  4. (4)गुर्जरों के लिए
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✓ (1) जैनियों के लिए

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