एक नज़र में
- हस्त कुठार: सी.ए. हैकेट ने 1870 के दशक में जयपुर और इन्द्रगढ़ (बूँदी) से पूर्व पाषाणकालीन हस्त कुठार (हैण्ड-एक्स) खोजे (RBSE पुस्तक में 1870 ई.)।
- ताम्र भण्डार: झाड़ोल (उदयपुर), कुराड़ा (तब नागौर जिला, अब डीडवाना-कुचामन) और साबणिया (बीकानेर) ताम्र उपकरणों के भण्डार के लिए जाने जाते हैं।
- हैण्डले का 'बौद्ध नगर': 1884 ई. की सर्दियों में टी.एच. हैण्डले ने साँभर के पास नलियासर के प्राचीन टीले में परीक्षण खुदाई की और उसे बौद्ध नगर माना; दयाराम साहनी ने 1936-38 में इसकी खुदाई की।
युग और उनके स्थल
- पूर्व पाषाण कालनदियों के किनारे पाषाण औज़ारमुख्य स्थलचम्बल, बनास और उनकी सहायक नदियों के किनारे; लूनी बेसिन
- मध्य पाषाण काललघु पाषाण उपकरणों के शिविरमुख्य स्थलबागोर, तिलवाड़ातिथिबागोर रेडियोकार्बन से लगभग 4500 ई.पू. से (RBSE: 4000-5000 ई.पू.)
- ताम्रयुगताँबे के औज़ार, कांतली घाटीमुख्य स्थलगणेश्वरतिथिRBSE पुस्तक के अनुसार लगभग 2800 ई.पू.; रेडियोकार्बन से 2500-2200 ई.पू. (ASI समीक्षा 1981-82)
- हड़प्पाघग्घर तट का नगरमुख्य स्थलकालीबंगापूरे नोट्स पढ़ें →
- आहड़-बनास संस्कृतिमेवाड़ का ताम्रयुगमुख्य स्थलआहड़, गिलूण्ड, बालाथल, ओझियानातिथिलगभग 3000-1500 ई.पू.पूरे नोट्स पढ़ें →
- लौहयुग और बाद का काललोहा, धूसर मृद्भाण्ड, नगरमुख्य स्थलनोह, जोधपुरा, सुनारी, रैढ़, बैराठ, नलियासर, नगरी, रंगमहलतिथिचित्रित धूसर मृद्भाण्ड लगभग 800 ई.पू. (मिश्र) या 600 ई.पू. (RBSE) से
- जनपदकबीले और राज्यमुख्य स्थलमत्स्य, शिवि, मालव, यौधेय, अर्जुनायन
पाषाणकालीन शिविर: बागोर और तिलवाड़ा
लघु पाषाण उपकरण (माइक्रोलिथ: ब्लेड, अर्धचन्द्राकार, त्रिभुज, ट्रेपेज़ जैसे छोटे पत्थर के औज़ार) मध्य पाषाण काल की पहचान हैं। राजस्थान में ये पश्चिम में लूनी और उसकी सहायक नदियों से तथा मेवाड़ से, जिसमें चित्तौड़ के पास बेड़च घाटी भी है, मिले हैं। वी.एन. मिश्र के दल ने 1966-67 की सर्दियों में दो निवास-शिविर, बागोर और तिलवाड़ा, खोजे।
| स्थल | स्थान और नदी | प्राप्तियाँ |
|---|---|---|
| बागोर | माण्डल तहसील, भीलवाड़ा जिला; बनास की सहायक कोठारी नदी का बायाँ तट | 1967-70 में वी.एन. मिश्र के निर्देशन में उत्खनन। क्वार्ट्ज और चर्ट के हज़ारों लघु पाषाण उपकरण; पत्थर बिछे फर्श; शिविर के भीतर ही शवाधान; गाय-बैल, भेड़-बकरी की हड्डियाँ। बाद के चरण में ताँबे के उपकरण आए। कृषि: RBSE पुस्तक यहाँ कृषि और पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य मानती है, जबकि मिश्र के अनुसार सबसे पुराने चरण में खाद्य पौधे नहीं उगाए जाते थे और बाद के चरण में कृषि के केवल संकेत मिलते हैं |
| तिलवाड़ा | लूनी नदी पर, बालोतरा से लगभग 16 किमी (तब बाड़मेर जिला, अब बालोतरा) | वी.एन. मिश्र और विजय कुमार ने उत्खनन किया। बागोर से छोटा और बाद का: क्वार्ट्ज, चर्ट और राइओलाइट के लघु उपकरण, झोपड़ियों के पत्थर-घेरे, जली हड्डियों वाले राख के गड्ढे; मृद्भाण्ड, और ऊपरी स्तरों में काँच |
ताम्रयुग: गणेश्वर
गणेश्वर सीकर जिले की नीम का थाना तहसील में कांतली नदी के उद्गम पर, खेतड़ी पट्टी के ताँबे के अयस्कों के निकट है। यहाँ से ताँबे के बाणाग्र, भाले की नोक, मछली पकड़ने के काँटे, छेनियाँ और चूड़ियाँ (एक गणना में कई सौ ताम्र वस्तुएँ, दूसरी में जोधपुरा सहित एक हज़ार से अधिक) और लघु पाषाण उपकरण मिले। यहाँ का ताँबा हड़प्पा के नगरों को जाता था।
उत्खनन: राजस्थान के पुरातत्व विभाग के आर.सी. अग्रवाल ने 1970 के दशक के अन्त में; ASI की वार्षिक समीक्षाओं में 1979-80 में परीक्षण खुदाई और 1981-82 में उसी विभाग के विजय कुमार की खुदाई दर्ज है।
लौहयुग और बाद के स्थल
| स्थल | स्थान | प्राप्तियाँ |
|---|---|---|
| नोह | भरतपुर के पास | चित्रित धूसर मृद्भाण्ड के साथ लोहे की कुल्हाड़ियाँ, भाले की नोक और बाणाग्र |
| जोधपुरा | कोटपूतली के पास (तब जयपुर जिला, अब कोटपूतली-बहरोड़) | आर.सी. अग्रवाल के निर्देशन में राजस्थान के पुरातत्व विभाग ने खुदाई की; चित्रित धूसर मृद्भाण्ड के साथ लोहे के उपकरण |
| सुनारी | झुंझुनूं जिला | लोहा गलाने और गढ़ने की दो भट्टियाँ, चित्रित धूसर मृद्भाण्ड के आरम्भिक चरण की |
| रैढ़ | ढील नदी पर, टोंक जिला | जयपुर रियासत के लिए के.एन. पुरी ने उत्खनन किया। लोहे के धातुमल के ढेर और लोहे के उपकरण इसे धातु-कर्म का नगर दिखाते हैं; RBSE पुस्तक इसे प्राचीन राजस्थान का 'टाटानगर' कहती है। इसके आहत और मालव सिक्कों के भण्डार स्रोत पृष्ठ पर हैं |
| बैराठ (विराटनगर) | तब जयपुर जिला, अब कोटपूतली-बहरोड़ | बीजक की पहाड़ी पर दयाराम साहनी ने परिक्रमा-पथ वाला गोल बौद्ध मन्दिर और विहार खोदा; भीम की डूँगरी और महादेव की डूँगरी से भी अवशेष मिले। अशोक का भाब्रू अभिलेख यहीं से मिला |
| नलियासर | साँभर के पास, जयपुर जिला | दयाराम साहनी की खुदाई में छह स्तरों पर मकान मिले |
| नगरी (मध्यमिका) | चित्तौड़गढ़ के पास | शिवि जन के सिक्कों पर 'मझमिकाय सिबि जनपदस' (मध्यमिका के शिवि जनपद का) लिखा है |
| रंगमहल | सूरतगढ़ तहसील, श्रीगंगानगर जिला (RBSE पुस्तक इसे हनुमानगढ़ में बताती है) | हन्ना रिड के नेतृत्व में स्वीडिश अभियान दल ने 1952-54 में खुदाई की |
राजस्थान के जनपद
बौद्ध ग्रन्थों की सोलह महाजनपदों की सूची का मत्स्य राजस्थान में था। RBSE पुस्तक के अनुसार सिकन्दर के आक्रमणों के बाद मालव, यौधेय और अर्जुनायन कबीले राजस्थान में आ बसे।
| जनपद | क्षेत्र | साक्ष्य |
|---|---|---|
| मत्स्य | आधुनिक जयपुर, अलवर, धौलपुर, करौली और भरतपुर के कुछ भाग; राजधानी विराटनगर (बैराठ) | महाभारत के अनुसार पाण्डवों ने अज्ञातवास का वर्ष राजा विराट के दरबार में बिताया और उनकी पुत्री उत्तरा का विवाह अभिमन्यु से हुआ। बाद में मौर्य साम्राज्य का भाग |
| शिवि | चित्तौड़गढ़ के आसपास, मध्यमिका (नगरी) इसका नगर | |
| मालव | नगर (कर्कोट नगर), उणियारा, टोंक जिला; रैढ़ | मालव सिक्के (स्रोत पृष्ठ देखें) |
| यौधेय | सिक्कों पर कार्तिकेय देवता |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- बागोर या तिलवाड़ाबागोर कोठारी पर (भीलवाड़ा) · तिलवाड़ा लूनी पर (बालोतरा के पास)।
- गणेश्वर या सुनारीगणेश्वर (सीकर) ताँबे के औज़ार · सुनारी (झुंझुनूं) लोहे की भट्टियाँ।
- नगर या नगरीनगर (कर्कोट नगर, टोंक) मालव सिक्कों का स्थल · नगरी (चित्तौड़गढ़ के पास) मध्यमिका, शिवि नगर।
- रैढ़ या नलियासररैढ़ (टोंक) लोहा और मालव प्राप्तियाँ · नलियासर (साँभर) हैण्डले का 'बौद्ध नगर'।
- मध्यमिका या विराटनगरमध्यमिका (नगरी) शिवि नगर · विराटनगर (बैराठ) मत्स्य की राजधानी।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 120
निम्नलिखित किस प्राचीन स्थल के उत्खनन में मालव जनपद की लौह सामग्री के विशाल संग्रह की जानकारी प्राप्त हुई है ?
- (1)नगर (नैनवाँ)
- (2)नगरी (मध्यमिका)
- (3)सांभर
- (4)रैढ़ (टोंक)
उत्तर देखें
✓ (4) रैढ़ (टोंक)
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 126
झाड़ोल (उदयपुर), कुराड़ा (नागौर) और साबणिया (बीकानेर) में क्या समानता है ?
- (1)ताम्रपाषाण संस्कृति के केन्द्र
- (2)पुरा-पाषाण युग के केन्द्र
- (3)लघु पाषाण उपकरण मिले हैं
- (4)ताम्र उपकरणों के भण्डार
उत्तर देखें
✓ (4) ताम्र उपकरणों के भण्डार
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 120
निम्नलिखित में से किस पुरास्थल की पहचान पुरातत्त्वविद् टी.एच. हैण्डले ने एक बौद्ध कस्बे के रूप में की थी ?
- (1)भाण्डारेज
- (2)बूढ़ा पुष्कर
- (3)बैराठ
- (4)नलियासर
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✓ (4) नलियासर
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