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राजस्थान के चौहान

चौहान (चाहमान) पहले सांभर (शाकम्भरी) और बाद में अजमेर से शासन करते थे; तराइन (1192 ई.) के बाद रणथम्भौर और जालौर की शाखाएँ तब तक टिकी रहीं, जब तक अलाउद्दीन खिलजी ने दोनों दुर्ग नहीं ले लिए।

⏱ 4 मिनट पढ़ें3 विस्तृत पृष्ठ✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. दिल्ली: विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) ने तोमरों से ली; दिल्ली पर अधिकार करने वाले वे पहले चौहान शासक थे; पृथ्वीराज तृतीय को वह विरासत में मिली।
  2. तराइन: पृथ्वीराज तृतीय ने तराइन के पहले युद्ध (1191 ई.) में मुहम्मद गोरी को हराया।
  3. इल्तुतमिश और रणथम्भौर: 1226 ई. से इल्तुतमिश ने रणथम्भौर दुर्ग घेरा और उसके शासक से दिल्ली की अधीनता मनवाई; रणथम्भौर के वीरनारायण की मृत्यु इल्तुतमिश से संघर्ष में हुई।
  4. सिवाना: अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर राज्य का यह दुर्ग 1308 ई. में, जालौर को घेरने से पहले, लिया। चित्तौड़ 1303 मेवाड़ वाले पृष्ठ पर है।

चौहानों की तीन शाखाएँ

चौहानों की उत्पत्ति

  • अग्निकुंड: पृथ्वीराज रासो के अनुसार आबू पर्वत पर वशिष्ठ के यज्ञ-कुंड से परमार, चालुक्य, प्रतिहार और चौथे योद्धा के रूप में चौहान उत्पन्न हुए।
  • सूर्यवंशी: गौरीशंकर हीराचंद ओझा का मत; पृथ्वीराज विजय और हम्मीर महाकाव्य भी उन्हें सूर्यवंशी बताते हैं।
  • चंद्रवंशी: अचलेश्वर मंदिर (आबू) के लेख में।
  • ब्राह्मण मूल: बिजौलिया अभिलेख वासुदेव के वंशज सामंत को वत्सगोत्रीय ब्राह्मण बताता है; डॉ. दशरथ शर्मा यही मानते हैं।

आरंभिक क्षेत्र: सांभर (शाकम्भरी) के आसपास का सपादलक्ष। बिजौलिया अभिलेख वासुदेव को चौहानों का आदि पुरुष और सांभर झील का प्रवर्तक बताता है; उनका समय लगभग 551 ई. माना जाता है।

अजमेर की शाखा

शासकसंबंधप्रसिद्धि
अजयराज (1105–1133 ई.)पृथ्वीराज प्रथम के पुत्रलगभग 1113 ई. में अजयमेरु (अजमेर) बसाया; चाँदी व ताँबे के सिक्के चलाए, कुछ पर रानी सोमलदेवी (सोमलवती) का नाम
अर्णोराज (आनाजी) (1133–1155 ई.)अजयराज के पुत्रअजमेर में आनासागर झील और पुष्कर में वराह मंदिर बनवाया; गुजरात के कुमारपाल चालुक्य से हारे; पुत्र जगदेव ने उनकी हत्या की
विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) (1158–1163 ई.)अर्णोराज के पुत्र; भाई जगदेव के बाद गद्दी पर'कवि बांधव' कहलाए; अजमेर में संस्कृत पाठशाला और बीसलपुर झील बनवाई
पृथ्वीराज द्वितीयजगदेव के पुत्र, अर्थात विग्रहराज चतुर्थ के भतीजेविग्रहराज चतुर्थ के पुत्र अमरगांगेय के बाद गद्दी पर; संभवतः उत्तराधिकारी के बिना मरे
सोमेश्वरअर्णोराज के पुत्र; पृथ्वीराज द्वितीय के चाचागुजरात में पले; कलचुरि राजकुमारी से विवाह; पृथ्वीराज तृतीय और हरिराज के पिता
पृथ्वीराज तृतीय (1177–1192 ई.)सोमेश्वर के पुत्रशाकम्भरी के सबसे प्रसिद्ध चौहान शासक

शासन-वर्ष पुस्तकों में कुछ वर्ष आगे-पीछे मिलते हैं; ऊपर के वर्ष RBSE पुस्तक के हैं।

चौहानों की अन्य शाखाएँ

  • नाडोल: वाक्पतिराज के पुत्र लक्ष्मण ने शुरू की; इसी शाखा के कीर्तिपाल ने जालौर शाखा की नींव रखी।
  • हाड़ा (बूँदी, कोटा: हाड़ौती) और देवड़ा (सिरोही) चौहानों की बाद की शाखाएँ हैं; हाड़ा अन्य राजवंशों वाले पृष्ठ पर हैं।

ग्रंथ और अभिलेख

कृतिरचयिताविषय
बिजौलिया अभिलेख (वि.सं. 1226, 1170 ई.)रचयिता गुणभद्र; जैन श्रावक लोलाक ने खुदवायाशाकम्भरी चौहानों की वंशावली
पृथ्वीराज विजयकश्मीरी कवि जयानकपृथ्वीराज तृतीय और उनके पूर्वजों पर संस्कृत काव्य, उन्हीं के समय में लिखा गया
पृथ्वीराज रासोचंदबरदाई, परंपरा के अनुसार पृथ्वीराज के दरबारी कविपृथ्वीराज तृतीय पर लंबा काव्य; अनेक इतिहासकार इसे बहुत बाद का मानते हैं
ललित विग्रहराजविग्रहराज चतुर्थ के दरबारी कवि सोमदेवराजा के सम्मान में संस्कृत नाटक
हरकेलिस्वयं विग्रहराज चतुर्थसंस्कृत नाटक; इसकी पंक्तियाँ अजमेर की उनकी संस्कृत पाठशाला की शिलाओं पर खुदी हैं
बीसलदेव रासोनरपति नाल्हबीसलदेव पर काव्य
हम्मीर महाकाव्यजैन विद्वान नयचन्द्र (नयनचन्द्र) सूरिहम्मीर पर संस्कृत महाकाव्य, उनकी मृत्यु के लगभग सौ वर्ष बाद रचा गया
हम्मीर रासो · हम्मीर हठजोधराज · चंद्रशेखरहम्मीर पर बाद के काव्य
कान्हड़दे प्रबंधचौहान शासक अखैराज के दरबारी कवि पद्मनाभकान्हड़देव और जालौर के पतन पर काव्य, 1455 ई. में रचा गया; इसकी फिरोजा–वीरमदेव प्रेम कथा ऐतिहासिक नहीं है

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • पृथ्वीराज विजय · पृथ्वीराज रासोजयानक का संस्कृत काव्य पृथ्वीराज के समय का है · रासो परंपरा से चंदबरदाई का है (CET 2022 में पूछा गया)।
  • विग्रहराज चतुर्थ के दो नाटकहरकेलि उनका स्वयं का · ललित विग्रहराज सोमदेव का।
  • दो हम्मीररणथम्भौर के हम्मीर देव चौहान (1301) · मेवाड़ के हम्मीर सिसोदिया, मेवाड़ वाले पृष्ठ पर।
  • दो बिजौलिया1170 ई. का बिजौलिया अभिलेख (चौहान वंशावली) · 20वीं सदी का बिजौलिया किसान आंदोलन, किसान आंदोलनों वाले पृष्ठ पर।
  • दुर्गरणथम्भौर, जालौर, सिवाना और अजमेर का तारागढ़ दुर्गों वाले पृष्ठ पर हैं।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 121

अजमेर का पराक्रमी चौहान शासक जिसने दिल्ली पर विजय प्राप्त कर उसे अपने साम्राज्य में शामिल कर लिया । वह था –

  1. (1)विग्रहराज चतुर्थ
  2. (2)अर्णोराज
  3. (3)अजयराज
  4. (4)पृथ्वीराज तृतीय
उत्तर देखें

✓ (1) विग्रहराज चतुर्थ

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 137

'ललित विग्रहराज' नाटक की रचना किसने की ?

  1. (1)हेमचन्द्र
  2. (2)कल्हण
  3. (3)सोमदेव
  4. (4)महेश
उत्तर देखें

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 30

निम्न में से कौन–सा युग्म सुमेलित नहीं है?

  1. (1)हम्मीर महाकाव्य – नयनचन्द्र सूरी
  2. (2)वंश भास्कर – सूर्यमल्ल मीसण
  3. (3)कुवलयमाला – उद्योतन सूरी
  4. (4)पृथ्वीराज विजय – चन्दबरदाई
उत्तर देखें

✓ (4) पृथ्वीराज विजय – चन्दबरदाई

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 129

निम्न में से कौन सा विकल्प सही सुमेलित नहीं है ?

  1. (1)पृथ्वीराज रासो – चंदरबरदाई
  2. (2)बीसलदेव रासो – नरपति
  3. (3)खुमाण रासो – करणीदान
  4. (4)शत्रुसाल रासो – डूंगरसिंह
उत्तर देखें

✓ (3) खुमाण रासो – करणीदान

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संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 123

निम्नलिखित में से कौन सा अभिलेख शाकम्भरी चौहानों के प्रारंभिक इतिहास का अच्छा स्रोत है ?

  1. (1)चीरवा अभिलेख
  2. (2)बिजोलिया अभिलेख
  3. (3)घटियाला अभिलेख
  4. (4)मानमोरी अभिलेख
उत्तर देखें

✓ (2) बिजोलिया अभिलेख

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