एक नज़र में
- दिल्ली: विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) ने तोमरों से ली; दिल्ली पर अधिकार करने वाले वे पहले चौहान शासक थे; पृथ्वीराज तृतीय को वह विरासत में मिली।
- तराइन: पृथ्वीराज तृतीय ने तराइन के पहले युद्ध (1191 ई.) में मुहम्मद गोरी को हराया।
- इल्तुतमिश और रणथम्भौर: 1226 ई. से इल्तुतमिश ने रणथम्भौर दुर्ग घेरा और उसके शासक से दिल्ली की अधीनता मनवाई; रणथम्भौर के वीरनारायण की मृत्यु इल्तुतमिश से संघर्ष में हुई।
- सिवाना: अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर राज्य का यह दुर्ग 1308 ई. में, जालौर को घेरने से पहले, लिया। चित्तौड़ 1303 मेवाड़ वाले पृष्ठ पर है।
चौहानों की तीन शाखाएँ
- शाकम्भरी और अजमेरतराइन और दिल्लीकेंद्र व संस्थापकसांभर, बाद में अजमेर; वासुदेवप्रसिद्ध शासकपृथ्वीराज तृतीयअंततराइन का दूसरा युद्ध, 1192 ई.पूरे नोट्स पढ़ें →
- रणथम्भौरमंगोल विद्रोहियों को शरणकेंद्र व संस्थापकरणथम्भौर; पृथ्वीराज तृतीय के पुत्र गोविन्दराज (1194 ई.)प्रसिद्ध शासकहम्मीर देवअंतअलाउद्दीन खिलजी ने दुर्ग लिया, 1301 ई.पूरे नोट्स पढ़ें →
- जालौरसिवाना और जालौरकेंद्र व संस्थापकजालौर (सोनगिरि); नाडोल शाखा के कीर्तिपाल (1181 ई.)प्रसिद्ध शासककान्हड़देवअंतअलाउद्दीन खिलजी ने दुर्ग लिया, 1311 ई.पूरे नोट्स पढ़ें →
चौहानों की उत्पत्ति
- अग्निकुंड: पृथ्वीराज रासो के अनुसार आबू पर्वत पर वशिष्ठ के यज्ञ-कुंड से परमार, चालुक्य, प्रतिहार और चौथे योद्धा के रूप में चौहान उत्पन्न हुए।
- सूर्यवंशी: गौरीशंकर हीराचंद ओझा का मत; पृथ्वीराज विजय और हम्मीर महाकाव्य भी उन्हें सूर्यवंशी बताते हैं।
- चंद्रवंशी: अचलेश्वर मंदिर (आबू) के लेख में।
- ब्राह्मण मूल: बिजौलिया अभिलेख वासुदेव के वंशज सामंत को वत्सगोत्रीय ब्राह्मण बताता है; डॉ. दशरथ शर्मा यही मानते हैं।
आरंभिक क्षेत्र: सांभर (शाकम्भरी) के आसपास का सपादलक्ष। बिजौलिया अभिलेख वासुदेव को चौहानों का आदि पुरुष और सांभर झील का प्रवर्तक बताता है; उनका समय लगभग 551 ई. माना जाता है।
अजमेर की शाखा
| शासक | संबंध | प्रसिद्धि |
|---|---|---|
| अजयराज (1105–1133 ई.) | पृथ्वीराज प्रथम के पुत्र | लगभग 1113 ई. में अजयमेरु (अजमेर) बसाया; चाँदी व ताँबे के सिक्के चलाए, कुछ पर रानी सोमलदेवी (सोमलवती) का नाम |
| अर्णोराज (आनाजी) (1133–1155 ई.) | अजयराज के पुत्र | अजमेर में आनासागर झील और पुष्कर में वराह मंदिर बनवाया; गुजरात के कुमारपाल चालुक्य से हारे; पुत्र जगदेव ने उनकी हत्या की |
| विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) (1158–1163 ई.) | अर्णोराज के पुत्र; भाई जगदेव के बाद गद्दी पर | 'कवि बांधव' कहलाए; अजमेर में संस्कृत पाठशाला और बीसलपुर झील बनवाई |
| पृथ्वीराज द्वितीय | जगदेव के पुत्र, अर्थात विग्रहराज चतुर्थ के भतीजे | विग्रहराज चतुर्थ के पुत्र अमरगांगेय के बाद गद्दी पर; संभवतः उत्तराधिकारी के बिना मरे |
| सोमेश्वर | अर्णोराज के पुत्र; पृथ्वीराज द्वितीय के चाचा | गुजरात में पले; कलचुरि राजकुमारी से विवाह; पृथ्वीराज तृतीय और हरिराज के पिता |
| पृथ्वीराज तृतीय (1177–1192 ई.) | सोमेश्वर के पुत्र | शाकम्भरी के सबसे प्रसिद्ध चौहान शासक |
शासन-वर्ष पुस्तकों में कुछ वर्ष आगे-पीछे मिलते हैं; ऊपर के वर्ष RBSE पुस्तक के हैं।
चौहानों की अन्य शाखाएँ
- नाडोल: वाक्पतिराज के पुत्र लक्ष्मण ने शुरू की; इसी शाखा के कीर्तिपाल ने जालौर शाखा की नींव रखी।
- हाड़ा (बूँदी, कोटा: हाड़ौती) और देवड़ा (सिरोही) चौहानों की बाद की शाखाएँ हैं; हाड़ा अन्य राजवंशों वाले पृष्ठ पर हैं।
ग्रंथ और अभिलेख
| कृति | रचयिता | विषय |
|---|---|---|
| बिजौलिया अभिलेख (वि.सं. 1226, 1170 ई.) | रचयिता गुणभद्र; जैन श्रावक लोलाक ने खुदवाया | शाकम्भरी चौहानों की वंशावली |
| पृथ्वीराज विजय | कश्मीरी कवि जयानक | पृथ्वीराज तृतीय और उनके पूर्वजों पर संस्कृत काव्य, उन्हीं के समय में लिखा गया |
| पृथ्वीराज रासो | चंदबरदाई, परंपरा के अनुसार पृथ्वीराज के दरबारी कवि | पृथ्वीराज तृतीय पर लंबा काव्य; अनेक इतिहासकार इसे बहुत बाद का मानते हैं |
| ललित विग्रहराज | विग्रहराज चतुर्थ के दरबारी कवि सोमदेव | राजा के सम्मान में संस्कृत नाटक |
| हरकेलि | स्वयं विग्रहराज चतुर्थ | संस्कृत नाटक; इसकी पंक्तियाँ अजमेर की उनकी संस्कृत पाठशाला की शिलाओं पर खुदी हैं |
| बीसलदेव रासो | नरपति नाल्ह | बीसलदेव पर काव्य |
| हम्मीर महाकाव्य | जैन विद्वान नयचन्द्र (नयनचन्द्र) सूरि | हम्मीर पर संस्कृत महाकाव्य, उनकी मृत्यु के लगभग सौ वर्ष बाद रचा गया |
| हम्मीर रासो · हम्मीर हठ | जोधराज · चंद्रशेखर | हम्मीर पर बाद के काव्य |
| कान्हड़दे प्रबंध | चौहान शासक अखैराज के दरबारी कवि पद्मनाभ | कान्हड़देव और जालौर के पतन पर काव्य, 1455 ई. में रचा गया; इसकी फिरोजा–वीरमदेव प्रेम कथा ऐतिहासिक नहीं है |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- पृथ्वीराज विजय · पृथ्वीराज रासोजयानक का संस्कृत काव्य पृथ्वीराज के समय का है · रासो परंपरा से चंदबरदाई का है (CET 2022 में पूछा गया)।
- विग्रहराज चतुर्थ के दो नाटकहरकेलि उनका स्वयं का · ललित विग्रहराज सोमदेव का।
- दो हम्मीररणथम्भौर के हम्मीर देव चौहान (1301) · मेवाड़ के हम्मीर सिसोदिया, मेवाड़ वाले पृष्ठ पर।
- दो बिजौलिया1170 ई. का बिजौलिया अभिलेख (चौहान वंशावली) · 20वीं सदी का बिजौलिया किसान आंदोलन, किसान आंदोलनों वाले पृष्ठ पर।
- दुर्गरणथम्भौर, जालौर, सिवाना और अजमेर का तारागढ़ दुर्गों वाले पृष्ठ पर हैं।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 121
अजमेर का पराक्रमी चौहान शासक जिसने दिल्ली पर विजय प्राप्त कर उसे अपने साम्राज्य में शामिल कर लिया । वह था –
- (1)विग्रहराज चतुर्थ
- (2)अर्णोराज
- (3)अजयराज
- (4)पृथ्वीराज तृतीय
उत्तर देखें
✓ (1) विग्रहराज चतुर्थ
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 137
'ललित विग्रहराज' नाटक की रचना किसने की ?
- (1)हेमचन्द्र
- (2)कल्हण
- (3)सोमदेव
- (4)महेश
उत्तर देखें
✓ (3) सोमदेव
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 30
निम्न में से कौन–सा युग्म सुमेलित नहीं है?
- (1)हम्मीर महाकाव्य – नयनचन्द्र सूरी
- (2)वंश भास्कर – सूर्यमल्ल मीसण
- (3)कुवलयमाला – उद्योतन सूरी
- (4)पृथ्वीराज विजय – चन्दबरदाई
उत्तर देखें
✓ (4) पृथ्वीराज विजय – चन्दबरदाई
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 129
निम्न में से कौन सा विकल्प सही सुमेलित नहीं है ?
- (1)पृथ्वीराज रासो – चंदरबरदाई
- (2)बीसलदेव रासो – नरपति
- (3)खुमाण रासो – करणीदान
- (4)शत्रुसाल रासो – डूंगरसिंह
उत्तर देखें
✓ (3) खुमाण रासो – करणीदान
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 123
निम्नलिखित में से कौन सा अभिलेख शाकम्भरी चौहानों के प्रारंभिक इतिहास का अच्छा स्रोत है ?
- (1)चीरवा अभिलेख
- (2)बिजोलिया अभिलेख
- (3)घटियाला अभिलेख
- (4)मानमोरी अभिलेख
उत्तर देखें
✓ (2) बिजोलिया अभिलेख
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