एक नज़र में
- नियम: बिश्नोई (जाम्भोजी), 29 · जसनाथी (जसनाथजी), 36।
- रामस्नेही शाखाएँ: शाहपुरा (रामचरणजी) · रैण (दरियावजी) · सिंहथल (हरिरामदासजी) · खेड़ापा (रामदासजी)।
- राजस्थान से बाहर: माध्वाचार्य ने द्वैत का प्रतिपादन किया, जिसमें विष्णु गुणयुक्त ईश्वर हैं, अतः उनकी भक्ति सगुण है, निर्गुण नहीं · रामानंद ने राम भक्ति का प्रचार किया।
प्रमुख संत एवं संप्रदाय
- दादूदयालराजस्थान के कबीरसंप्रदायदादू पंथमुख्य स्थाननरायणा, फुलेरा के निकट (जयपुर)प्रसिद्धिकर्मकांड, जाति-भेद और मूर्तिपूजा का विरोधपूरे नोट्स पढ़ें →
- जसनाथजीसिद्धों के गुरुसंप्रदायजसनाथी; अनुयायी सिद्ध कहलाते हैंमुख्य स्थानकतरियासर (बीकानेर)प्रसिद्धिसिद्ध पुरुषों का अग्नि नृत्यपूरे नोट्स पढ़ें →
- जाम्भोजीपर्यावरण वैज्ञानिकसंप्रदायबिश्नोईमुख्य स्थानजन्म पीपासर; समाधि मुकामप्रसिद्धिवृक्षों और जीवों की रक्षापूरे नोट्स पढ़ें →
- रामचरणजीअणभैवाणी के रचयितासंप्रदायरामस्नेहीमुख्य स्थानजन्म सोडा; पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा)प्रसिद्धिराम-नाम स्मरण; रामद्वारे में मूर्ति नहींपूरे नोट्स पढ़ें →
- मीराबाईराजस्थान की राधामुख्य स्थानलालन-पालन मेड़ता में; विवाह मेवाड़ मेंप्रसिद्धिगिरधर गोपाल (कृष्ण) की भक्त; उनके पदपूरे नोट्स पढ़ें →
- ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्तीगरीब नवाज़संप्रदायचिश्ती (सूफी)मुख्य स्थानअजमेरप्रसिद्धिउनकी दरगाह, अजमेर शरीफपूरे नोट्स पढ़ें →
- हमीदुद्दीन सूफी नागौरीसुल्तान-उत-तारीकीनसंप्रदायचिश्ती (सूफी)मुख्य स्थाननागौरप्रसिद्धिमोइनुद्दीन चिश्ती के शिष्यपूरे नोट्स पढ़ें →
- पीपाजीराजा से संतमुख्य स्थानगागरोन (झालावाड़); मंदिर समदड़ी में (तब बाड़मेर जिला, अब बालोतरा)प्रसिद्धिगागरोन के खींची राजपूत शासक, जिन्होंने राज्य त्याग दिया
- धन्नाजीधार्मिक आंदोलन के अग्रदूतमुख्य स्थानधुवन (धुआँ कलाँ), टोंकप्रसिद्धिजाट किसान; गुरु ग्रंथ साहिब में तीन पद
- लालदासजीमेवात के निर्गुण संतसंप्रदायलालदासीमुख्य स्थानधोलीदूब (मेवात); देहांत नगला में; समाधि शेरपुर मेंप्रसिद्धिमेव परिवार में जन्म; गृहस्थ (विवाहित); मेव मुसलमान इन्हें पीर मानते हैं
- चरणदासजीचरणदासी संप्रदाय के प्रवर्तकमुख्य स्थानजन्म डेहरा, अलवर के निकट; जीवन दिल्ली मेंप्रसिद्धिसहजोबाई और दयाबाई के गुरु; 1703–1782 ई.
- हरिदास निरंजनीअलख निरंजन के उपासकसंप्रदायनिरंजनीमुख्य स्थानकापड़ोद, डीडवाना के निकटप्रसिद्धिमूल नाम हरिसिंह सांखला; परंपरा के अनुसार पहले लूटमार करते थे
- मावजीअनुयायियों के लिए कल्कि अवतारसंप्रदायनिष्कलंकमुख्य स्थानजन्म साबला; बेणेश्वर धाम की स्थापनाप्रसिद्धिउनके ग्रंथ चौपड़े कहलाते हैं
- राना बाईजाट परिवार की संतमुख्य स्थानहरनावां, मकराना के निकटप्रसिद्धिकृष्ण भक्त; 1570 ई. में हरनावां में जीवित समाधि
- गवरी बाईनागर ब्राह्मण संत कवयित्रीमुख्य स्थानडूंगरपुरप्रसिद्धिजन्म वि.सं. 1815; महारावल शिवसिंह ने इनके लिए मंदिर बनवाया
- निम्बार्क संप्रदायद्वैताद्वैत दर्शनमुख्य स्थानसलेमाबाद (अजमेर)प्रसिद्धिराधा और कृष्ण की युगल उपासना
- वल्लभ संप्रदायबाल कृष्ण की उपासनासंप्रदायपुष्टिमार्गमुख्य स्थाननाथद्वारा (राजसमंद)प्रसिद्धिश्रीनाथजी, जो 1672 में गोवर्धन से लाए गए
- गौड़ीय संप्रदायचैतन्य की कृष्ण भक्तिमुख्य स्थानगोविंद देवजी (जयपुर); मदन मोहनजी (करौली)प्रसिद्धिदोनों विग्रह वृंदावन से लाए गए
- नाथ संप्रदायमहाराजा मानसिंह के गुरुमुख्य स्थानमहामंदिर, जोधपुरप्रसिद्धि1812 में महाराजा मानसिंह के शासनकाल में बना; नाथ योगियों के भित्तिचित्र
निर्गुण और सगुण भक्ति
- निर्गुण, निराकार ईश्वर और मूर्तिपूजा नहीं: दादू पंथ, रामस्नेही, निरंजनी और लालदासी संप्रदाय; धन्ना और पीपा ने भी मूर्तिपूजा के स्थान पर नाम-स्मरण को महत्व दिया; गवरी बाई के पदों में निर्गुण भाव प्रधान है।
- सगुण, साकार ईश्वर: मीराबाई और राना बाई, तथा कृष्ण भक्ति के संप्रदाय (वल्लभ, निम्बार्क और गौड़ीय)।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- गौड़ीय या वल्लभगोविंद देवजी (जयपुर) और मदन मोहनजी (करौली) गौड़ीय · श्रीनाथजी (नाथद्वारा) वल्लभ (CET स्नातक 2022)।
- महामंदिरजोधपुर का महामंदिर नाथ संप्रदाय का है, बिश्नोई, दादू या रामस्नेही संप्रदाय का नहीं (CET स्नातक 2022)।
- रामानंद के शिष्यपीपा, गागरोन के शासक · धन्ना, टोंक के जाट किसान।
- धन्ना का जन्म स्थानRBSE पुस्तक के अनुसार धुवन (टोंक); कुछ विवरणों में फागी (जयपुर) का एक गाँव।
- अन्य मीराहरनावां की राना बाई 'राजस्थान की दूसरी मीरा' · डूंगरपुर की गवरी बाई 'वागड़ की मीरा' (CET स्नातक 2024)।
- सहजोबाई और दयाबाई की बोलीRPSC की उत्तर-कुंजी में मेवाती (संरक्षण अधिकारी 2022); इनकी संत-भाषा में मेवाती के साथ हरियाणवी और ब्रज का मेल है।
- लालदास का जन्म वर्षअधिकांश विवरणों में 1540 ई.; RBSE की कक्षा 10 की पुस्तक में 1504 छपा है।
- लालदास की समाधिशेरपुर में उनके समाधि-स्थल पर मंदिर बना (RAS प्रारंभिक 2024)।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 26
गोविंद देव मन्दिर, जयपुर एवं मदन मोहन मन्दिर, करौली का सम्बन्ध किस सम्प्रदाय से है?
- (1)नाथ
- (2)वल्लभ
- (3)रामस्नेही
- (4)गौड़ीय
उत्तर देखें
✓ (4) गौड़ीय
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 28
‘जोधपुर का महामन्दिर’ उपासना स्थल है –
- (1)बिश्नोई संप्रदाय का
- (2)दादू संप्रदाय का
- (3)रामस्नेही संप्रदाय का
- (4)नाथ संप्रदाय का
उत्तर देखें
✓ (4) नाथ संप्रदाय का
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 135
बोली, जिसमें भक्ति संत सहजोबाई तथा दयाबाई की रचनाएँ प्राप्त होती हैं –
- (1)मेवाती
- (2)मालवी
- (3)ढूंढाड़ी
- (4)निमाड़ी
उत्तर देखें
✓ (1) मेवाती
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 135
‘वागड़ की मीरा’ के नाम से कौन प्रसिद्ध है?
- (1)राणा बाई
- (2)कर्मावती
- (3)गवरी बाई
- (4)पन्ना धाय
उत्तर देखें
✓ (3) गवरी बाई
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 131
संत लालदास के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प चुनिए : A. संत लालदास आजीवन अविवाहित रहे । B. संत लालदास की मृत्यु के पश्चात् उनके समाधि स्थान पर मन्दिर का निर्माण करवाया गया ।
- (1)केवल A सत्य है ।
- (2)केवल B सत्य है ।
- (3)A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4)A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर देखें
✓ (2) केवल B सत्य है ।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 140
भक्ति आंदोलन के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन सत्य नहीं है ?
- (1)वल्लभाचार्य ने पुष्टिमार्ग की स्थापना की ।
- (2)निम्बार्क ने द्वैताद्वैत के सिद्धांत का प्रतिपादन किया ।
- (3)माध्वाचार्य ने सगुण भक्ति के स्थान पर निर्गुण भक्ति सिद्धांत को प्रतिपादित किया ।
- (4)रामानंद ने राम भक्ति परंपरा का प्रचार किया ।
उत्तर देखें
✓ (3) माध्वाचार्य ने सगुण भक्ति के स्थान पर निर्गुण भक्ति सिद्धांत को प्रतिपादित किया ।
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