एक नज़र में
- नवरात्र के मेले: करणी माता, जीण माता, कैला देवी और शिला देवी के यहाँ सबसे अधिक भीड़ चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में होती है।
- अन्य तिथियों के मेले: शीतला माता, शीतलाष्टमी के आसपास (चैत्र कृष्ण पक्ष) · नारायणी माता, वैशाख शुक्ल · राणी सती, भाद्रपद अमावस्या को विशेष पूजा।
- तनोट माता (जैसलमेर): मान्यता है कि 1965 के युद्ध में मंदिर पर दागे गए गोले नहीं फटे।
प्रमुख लोक देवियाँ
- करणी माताचूहों वाली देवीमुख्य स्थानदेशनोक, बीकानेर के निकटकिसकी कुलदेवीचारण; बीकानेर के राठौड़ शासकप्रसिद्धिमंदिर के चूहे, जिन्हें काबा कहते हैंपूरे नोट्स पढ़ें →
- जीण माताभँवरों की देवीमुख्य स्थानजीणमाता गाँव, रैवासा के निकट, सीकरकिसकी कुलदेवीशेखावाटी के अनेक कुलप्रसिद्धिभाई हर्ष की पूजा हर्ष भैरव के रूप मेंपूरे नोट्स पढ़ें →
- कैला देवीलक्खी मेले की देवीमुख्य स्थानकरौली के निकट, कालीसिल नदी के किनारेकिसकी कुलदेवीकरौली के जादौन (यादव) शासकप्रसिद्धिलांगुरिया गीत; योगमाया का रूप मानी जाती हैंपूरे नोट्स पढ़ें →
- शीतला माताचेचक की देवीमुख्य स्थानशील की डूंगरी, चाकसूप्रसिद्धिबासौड़ा पर ठंडे भोजन का भोगपूरे नोट्स पढ़ें →
- शिला देवीबंगाल से लाई प्रतिमामुख्य स्थानआमेर दुर्ग, जयपुरप्रसिद्धिमानसिंह प्रथम पूर्वी बंगाल से लाए
- आई मातासीरवियों की कुलदेवीमुख्य स्थानबिलाड़ाकिसकी कुलदेवीसीरवी समाज
- सकराय माता (शाकम्भरी)शेखावाटी की शाकम्भरीमुख्य स्थानसकराय, उदयपुरवाटी के निकटकिसकी कुलदेवीखण्डेलवाल समाजप्रसिद्धिकथा: अकाल में लोगों को भोजन दिया; पुजारी नाथ पंथ के
- नारायणी माताअलवर की सती मातामुख्य स्थानअलवर से लगभग 80 किमी दक्षिण-पश्चिमकिसकी कुलदेवीनाई (सैन) समाजप्रसिद्धिकथा: पति के साथ सती हुईं
- राणी सतीझुंझुनूँ की दादीजीमुख्य स्थानझुंझुनूँकिसकी कुलदेवीअग्रवाल समाजप्रसिद्धिनारायणी नाम भी; मूर्ति नहीं, त्रिशूल की पूजा
- तनोट मातासीमा की देवीमुख्य स्थानतनोट, जैसलमेरकिसकी कुलदेवीजैसलमेर के भाटी शासकप्रसिद्धिहिंगलाज का रूप, आवड़ माता से अभिन्न मानी जाती हैं; थार की वैष्णो देवी
- जमुवाय माताकछवाहों की कुलदेवीमुख्य स्थानजमवारामगढ़किसकी कुलदेवीकछवाहा वंशप्रसिद्धिकस्बे का नाम इनके मंदिर से पड़ा
- चामुंडा माताजोधपुर की इष्टदेवीमुख्य स्थानमेहरानगढ़ दुर्ग, जोधपुरप्रसिद्धिराव जोधा मंडोर से लाए
- सच्चियाय माताओसवालों की कुलदेवीमुख्य स्थानओसियाँकिसकी कुलदेवीओसवाल समाजप्रसिद्धिगुर्जर-प्रतिहार काल का मंदिर
- त्रिपुरा सुंदरीबाँसवाड़ा की तरतई मातामुख्य स्थानउमराई, तलवाड़ा के निकट, बाँसवाड़ाप्रसिद्धिकाले पत्थर की अठारह भुजाओं वाली प्रतिमा
- अम्बिका मातामेवाड़ का खजुराहोमुख्य स्थानजगत, उदयपुर से लगभग 50 किमीप्रसिद्धिनागर शैली का मंदिर, 961 ई. में निर्मित माना जाता है
- सुगाली माताआउवा की 1857 वाली देवीमुख्य स्थानआउवा, पालीकिसकी कुलदेवीआउवा के ठाकुरप्रसिद्धि1857 में अंग्रेज इनकी प्रतिमा उठा ले गए
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- दो नारायणीनारायणी माता अलवर के निकट, नाई समाज की कुलदेवी · राणी सती, जिन्हें नारायणी भी कहते हैं, झुंझुनूँ में, अग्रवालों की कुलदेवी।
- चैत्र के दो लक्खी मेलेकैला देवी, करौली · शीतला माता, चाकसू।
- शिला या शीतलाशिला देवी आमेर दुर्ग में · शीतला माता चाकसू में।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 24
सुमेलित कीजिए – कुलदेवी — जाति (1) करणी माता — (i) नाई (2) सकराय माता — (ii) सीरवी (3) आई माता — (iii) खण्डेलवाल (4) नारायणी माता — (iv) चारण
- (1)1-iv, 2-i, 3-ii, 4-iii
- (2)1-ii, 2-i, 3-iv,4-iii
- (3)1-iv, 2-iii, 3-ii, 4-i
- (4)1-iv, 2-iii, 3-i, 4-ii
उत्तर देखें
✓ (3) 1-iv, 2-iii, 3-ii, 4-i
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