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राजपूत, सल्तनत और मुगल

राजस्थान के राजपूत राज्यों ने दिल्ली सल्तनत और मुगलों का सामना युद्ध से भी किया, संधियों और वैवाहिक संबंधों से भी।

⏱ 5 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. सल्तनत के वर्ष: रणथम्भौर 1301, चित्तौड़ 1303, सिवाना 1308, जालौर 1311।
  2. मुगल काल के वर्ष: खानवा 1527, चित्तौड़ 1568, रणथम्भौर 1569, हल्दीघाटी 1576, मेवाड़ की संधि 1615।
  3. औरंगजेब के विरुद्ध मेवाड़ के राजसिंह (1679 का जज़िया): मेवाड़ पृष्ठ देखें।

सल्तनत के अभियान, एक-एक पंक्ति में

वर्षक्या हुआविवरण किस पृष्ठ पर
1191, 1192तराइन: मुहम्मद गौरी 1191 में पृथ्वीराज तृतीय से हारा और 1192 में जीताचौहान
1226 सेइल्तुतमिश ने रणथम्भौर घेरकर उसके शासक से दिल्ली की अधीनता मनवाईचौहान
1301अलाउद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर जीता; हम्मीर लड़ते हुए मारा गयाचौहान
1303अलाउद्दीन खिलजी ने रतनसिंह से चित्तौड़ जीतामेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया)
1308अलाउद्दीन खिलजी ने सिवाना जीताचौहान
1311अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर जीता; कान्हड़देव लड़ते हुए मारा गयाचौहान
खिलजी और तुगलक कालजैसलमेर के पहले और दूसरे साकेअन्य राजवंश (भाटी)
1433–1468 (कुंभा का शासन)कुंभा का मालवा और गुजरात के सुल्तानों से संघर्षमेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया)

मुगल काल: युद्ध और घटनाएँ

वर्षक्या हुआविवरण किस पृष्ठ पर
1527खानवा: बाबर ने राणा सांगा को हरायामेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया)
1534बीकानेर के राव जैतसी ने हुमायूँ के भाई कामरान को हरायाराठौड़
1535गुजरात के बहादुरशाह ने चित्तौड़ लियामेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया)
1544गिरि-सुमेल: शेरशाह सूरी और मालदेव की सेना (शेरशाह सूर वंश का था, मुगल नहीं)राठौड़
1568अकबर ने चित्तौड़ जीतामेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया)
1569अकबर ने रणथम्भौर लिया; सुर्जन हाड़ा ने दुर्ग सौंप दियाअन्य राजवंश (हाड़ा)
1570अकबर का नागौर दरबार: बीकानेर के कल्याणमल ने मुगल अधीनता मानी, और जैसलमेर के हरराज ने भी; मारवाड़ का चंद्रसेन आया और लौट गयाराठौड़; अन्य राजवंश (भाटी)
1576हल्दीघाटी: अकबर की सेना और महाराणा प्रतापमेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया)
1665पुरंदर: मिर्जा राजा जयसिंह ने मुगलों की ओर से घेरा डाला और शिवाजी से संधि कीकछवाहा
1678–79जसवंतसिंह की जमरूद में मृत्यु (1678); मारवाड़ के लिए राठौड़ों का संघर्ष शुरूराठौड़
1707औरंगजेब की मृत्यु के बाद राठौड़ों ने जोधपुर मुगलों से वापस लियाराठौड़

राजपूतों के प्रति मुगल नीति

  • अकबर: राजपूत रानियों के परिवारों को अमीर वर्ग में ऊँचे पद मिले, पर उसने विवाह को शर्त नहीं बनाया; रणथम्भौर के हाड़ाओं से कोई वैवाहिक संबंध नहीं हुआ।
  • जज़िया: अकबर ने 1564 में समाप्त किया; औरंगजेब ने 1679 में फिर लगाया।
  • औरंगजेब: जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद उसने मारवाड़ को मुगल नियंत्रण में लिया और उसका टीका इंद्रसिंह को दिया। दुर्गादास के नेतृत्व में राठौड़ सरदारों ने जसवंतसिंह के मरणोपरांत जन्मे पुत्र अजीतसिंह को गद्दी पर बैठाया। मेवाड़ के राजसिंह ने राठौड़ों का पक्ष लिया, और औरंगजेब ने मेवाड़ पर आक्रमण किया (1679)।

विवाह और संधियाँ

राजपूत पक्षमुगल पक्षवर्ष
आमेर के भारमल: पुत्री हरखाबाई (बाद में मरियम उज्जमानी), जहाँगीर की माताअकबर1562
आमेर के भगवानदास: पुत्री मानबाई, खुसरो की माताशहजादा सलीम (जहाँगीर)1585
जोधपुर के मोटा राजा उदयसिंह: पुत्री जगत गुसाईं (जोधाबाई), खुर्रम की माताशहजादा सलीम (जहाँगीर)RBSE पुस्तक व गोपीनाथ शर्मा के अनुसार 1587; सतीश चंद्र के अनुसार 1585
मेवाड़ के अमरसिंह प्रथम: चित्तौड़ लौटाया गया, पर उसकी मरम्मत की मनाहीजहाँगीर (अभियान शहजादा खुर्रम के नेतृत्व में)1615
मेवाड़ के जयसिंह: कुछ परगने छोड़ेऔरंगजेब1681

किसने विरोध किया, किसने मेल किया

राजवंशविरोधमेल या सेवापरिणाम
रणथम्भौर और जालौर के चौहानहम्मीर; कान्हड़देवरणथम्भौर, सिवाना और जालौर पर अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार
मेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया)रतनसिंह; सांगा; उदयसिंह; प्रताप; 1615 तक अमरसिंह प्रथम; राजसिंहचित्तौड़ 1303, 1535 और 1568 में छिना; 1615 और 1681 में संधि
मारवाड़ (राठौड़)मालदेव, शेरशाह के विरुद्ध; चंद्रसेन; अजीतसिंह के लिए दुर्गादासमोटा राजा उदयसिंह (1583 में अकबर ने जोधपुर का शासक बनाया); जसवंतसिंह1707 में जोधपुर वापस
बीकानेर (राठौड़)जैतसी, कामरान के विरुद्धकल्याणमल; रायसिंहरायसिंह अकबर के गुजरात और कंधार अभियानों में लड़ा
आमेर (कछवाहा)भारमल, भगवानदास, मानसिंह, मिर्जा राजा जयसिंहअकबर के समय भगवानदास 5,000 और मानसिंह 7,000 के मनसब तक पहुँचे
बूँदी (हाड़ा)रणथम्भौर में सुर्जन हाड़ा1569 के बाद सुर्जन हाड़ासुर्जन ने अकबर की सेवा की (मनसब: अन्य राजवंश पृष्ठ, हाड़ा)

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • राजसिंह और रायसिंहमेवाड़ के राजसिंह ने औरंगजेब का विरोध किया · बीकानेर के रायसिंह ने अकबर की सेवा की।
  • शेरशाह और बाबरगिरि-सुमेल (1544) शेरशाह सूरी के विरुद्ध · खानवा (1527) बाबर के विरुद्ध।
  • जहाँगीर की माताआमेर की हरखाबाई (मरियम उज्जमानी) · परंपरा उन्हें जोधाबाई कहती है, पर जोधपुर की जोधाबाई (जगत गुसाईं) जहाँगीर की पत्नी और खुर्रम की माता थीं।
  • सलीम की राजपूत रानियाँआमेर की मानबाई, खुसरो की माता · जोधपुर की जगत गुसाईं, खुर्रम (शाहजहाँ) की माता।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 126

निम्नलिखित में से किस राजपूत शासक ने मुगल बादशाह के खिलाफ विद्रोह किया ?

  1. (1)बीकानेर के महाराजा अनूपसिंह
  2. (2)मारवाड़ के महाराजा जसवंतसिंह
  3. (3)मेवाड़ के महाराणा राजसिंह
  4. (4)आमेर के महाराजा बिशनसिंह
उत्तर देखें

✓ (3) मेवाड़ के महाराणा राजसिंह

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