एक नज़र में
- सल्तनत के वर्ष: रणथम्भौर 1301, चित्तौड़ 1303, सिवाना 1308, जालौर 1311।
- मुगल काल के वर्ष: खानवा 1527, चित्तौड़ 1568, रणथम्भौर 1569, हल्दीघाटी 1576, मेवाड़ की संधि 1615।
- औरंगजेब के विरुद्ध मेवाड़ के राजसिंह (1679 का जज़िया): मेवाड़ पृष्ठ देखें।
सल्तनत के अभियान, एक-एक पंक्ति में
| वर्ष | क्या हुआ | विवरण किस पृष्ठ पर |
|---|---|---|
| 1191, 1192 | तराइन: मुहम्मद गौरी 1191 में पृथ्वीराज तृतीय से हारा और 1192 में जीता | चौहान |
| 1226 से | इल्तुतमिश ने रणथम्भौर घेरकर उसके शासक से दिल्ली की अधीनता मनवाई | चौहान |
| 1301 | अलाउद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर जीता; हम्मीर लड़ते हुए मारा गया | चौहान |
| 1303 | अलाउद्दीन खिलजी ने रतनसिंह से चित्तौड़ जीता | मेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया) |
| 1308 | अलाउद्दीन खिलजी ने सिवाना जीता | चौहान |
| 1311 | अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर जीता; कान्हड़देव लड़ते हुए मारा गया | चौहान |
| खिलजी और तुगलक काल | जैसलमेर के पहले और दूसरे साके | अन्य राजवंश (भाटी) |
| 1433–1468 (कुंभा का शासन) | कुंभा का मालवा और गुजरात के सुल्तानों से संघर्ष | मेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया) |
मुगल काल: युद्ध और घटनाएँ
| वर्ष | क्या हुआ | विवरण किस पृष्ठ पर |
|---|---|---|
| 1527 | खानवा: बाबर ने राणा सांगा को हराया | मेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया) |
| 1534 | बीकानेर के राव जैतसी ने हुमायूँ के भाई कामरान को हराया | राठौड़ |
| 1535 | गुजरात के बहादुरशाह ने चित्तौड़ लिया | मेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया) |
| 1544 | गिरि-सुमेल: शेरशाह सूरी और मालदेव की सेना (शेरशाह सूर वंश का था, मुगल नहीं) | राठौड़ |
| 1568 | अकबर ने चित्तौड़ जीता | मेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया) |
| 1569 | अकबर ने रणथम्भौर लिया; सुर्जन हाड़ा ने दुर्ग सौंप दिया | अन्य राजवंश (हाड़ा) |
| 1570 | अकबर का नागौर दरबार: बीकानेर के कल्याणमल ने मुगल अधीनता मानी, और जैसलमेर के हरराज ने भी; मारवाड़ का चंद्रसेन आया और लौट गया | राठौड़; अन्य राजवंश (भाटी) |
| 1576 | हल्दीघाटी: अकबर की सेना और महाराणा प्रताप | मेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया) |
| 1665 | पुरंदर: मिर्जा राजा जयसिंह ने मुगलों की ओर से घेरा डाला और शिवाजी से संधि की | कछवाहा |
| 1678–79 | जसवंतसिंह की जमरूद में मृत्यु (1678); मारवाड़ के लिए राठौड़ों का संघर्ष शुरू | राठौड़ |
| 1707 | औरंगजेब की मृत्यु के बाद राठौड़ों ने जोधपुर मुगलों से वापस लिया | राठौड़ |
राजपूतों के प्रति मुगल नीति
- अकबर: राजपूत रानियों के परिवारों को अमीर वर्ग में ऊँचे पद मिले, पर उसने विवाह को शर्त नहीं बनाया; रणथम्भौर के हाड़ाओं से कोई वैवाहिक संबंध नहीं हुआ।
- जज़िया: अकबर ने 1564 में समाप्त किया; औरंगजेब ने 1679 में फिर लगाया।
- औरंगजेब: जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद उसने मारवाड़ को मुगल नियंत्रण में लिया और उसका टीका इंद्रसिंह को दिया। दुर्गादास के नेतृत्व में राठौड़ सरदारों ने जसवंतसिंह के मरणोपरांत जन्मे पुत्र अजीतसिंह को गद्दी पर बैठाया। मेवाड़ के राजसिंह ने राठौड़ों का पक्ष लिया, और औरंगजेब ने मेवाड़ पर आक्रमण किया (1679)।
विवाह और संधियाँ
| राजपूत पक्ष | मुगल पक्ष | वर्ष |
|---|---|---|
| आमेर के भारमल: पुत्री हरखाबाई (बाद में मरियम उज्जमानी), जहाँगीर की माता | अकबर | 1562 |
| आमेर के भगवानदास: पुत्री मानबाई, खुसरो की माता | शहजादा सलीम (जहाँगीर) | 1585 |
| जोधपुर के मोटा राजा उदयसिंह: पुत्री जगत गुसाईं (जोधाबाई), खुर्रम की माता | शहजादा सलीम (जहाँगीर) | RBSE पुस्तक व गोपीनाथ शर्मा के अनुसार 1587; सतीश चंद्र के अनुसार 1585 |
| मेवाड़ के अमरसिंह प्रथम: चित्तौड़ लौटाया गया, पर उसकी मरम्मत की मनाही | जहाँगीर (अभियान शहजादा खुर्रम के नेतृत्व में) | 1615 |
| मेवाड़ के जयसिंह: कुछ परगने छोड़े | औरंगजेब | 1681 |
किसने विरोध किया, किसने मेल किया
| राजवंश | विरोध | मेल या सेवा | परिणाम |
|---|---|---|---|
| रणथम्भौर और जालौर के चौहान | हम्मीर; कान्हड़देव | रणथम्भौर, सिवाना और जालौर पर अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार | |
| मेवाड़ (गुहिल-सिसोदिया) | रतनसिंह; सांगा; उदयसिंह; प्रताप; 1615 तक अमरसिंह प्रथम; राजसिंह | चित्तौड़ 1303, 1535 और 1568 में छिना; 1615 और 1681 में संधि | |
| मारवाड़ (राठौड़) | मालदेव, शेरशाह के विरुद्ध; चंद्रसेन; अजीतसिंह के लिए दुर्गादास | मोटा राजा उदयसिंह (1583 में अकबर ने जोधपुर का शासक बनाया); जसवंतसिंह | 1707 में जोधपुर वापस |
| बीकानेर (राठौड़) | जैतसी, कामरान के विरुद्ध | कल्याणमल; रायसिंह | रायसिंह अकबर के गुजरात और कंधार अभियानों में लड़ा |
| आमेर (कछवाहा) | भारमल, भगवानदास, मानसिंह, मिर्जा राजा जयसिंह | अकबर के समय भगवानदास 5,000 और मानसिंह 7,000 के मनसब तक पहुँचे | |
| बूँदी (हाड़ा) | रणथम्भौर में सुर्जन हाड़ा | 1569 के बाद सुर्जन हाड़ा | सुर्जन ने अकबर की सेवा की (मनसब: अन्य राजवंश पृष्ठ, हाड़ा) |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- राजसिंह और रायसिंहमेवाड़ के राजसिंह ने औरंगजेब का विरोध किया · बीकानेर के रायसिंह ने अकबर की सेवा की।
- शेरशाह और बाबरगिरि-सुमेल (1544) शेरशाह सूरी के विरुद्ध · खानवा (1527) बाबर के विरुद्ध।
- जहाँगीर की माताआमेर की हरखाबाई (मरियम उज्जमानी) · परंपरा उन्हें जोधाबाई कहती है, पर जोधपुर की जोधाबाई (जगत गुसाईं) जहाँगीर की पत्नी और खुर्रम की माता थीं।
- सलीम की राजपूत रानियाँआमेर की मानबाई, खुसरो की माता · जोधपुर की जगत गुसाईं, खुर्रम (शाहजहाँ) की माता।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 126
निम्नलिखित में से किस राजपूत शासक ने मुगल बादशाह के खिलाफ विद्रोह किया ?
- (1)बीकानेर के महाराजा अनूपसिंह
- (2)मारवाड़ के महाराजा जसवंतसिंह
- (3)मेवाड़ के महाराणा राजसिंह
- (4)आमेर के महाराजा बिशनसिंह
उत्तर देखें
✓ (3) मेवाड़ के महाराणा राजसिंह
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