EN
Log in

Add TopKaro to your iPhone

  1. Tap the Share button at the bottom of Safari
  2. Scroll and tap Add to Home Screen
  3. Tap Add — TopKaro appears on your home screen

iPhones don’t allow a one-tap install button, so we show these steps instead.

राजस्थान के अन्य राजवंश: प्रतिहार, परमार, भाटी और हाड़ा

प्रारंभिक और मध्यकालीन राजस्थान के चार और राजवंश: मण्डोर व कन्नौज के प्रतिहार, आबू व वागड़ के परमार, जैसलमेर के भाटी तथा बूँदी व कोटा के हाड़ा।

⏱ 8 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. सुलेमान: अरब यात्री जो लगभग 851 ई. में प्रतिहार राजा मिहिरभोज (भोज प्रथम) के शासनकाल में भारत आया; उसने राजा की अश्वसेना की प्रशंसा की और उसे भारत के राजाओं में इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु बताया।
  2. अग्निकुंड की कथा (आबू पर्वत के यज्ञ-कुंड से परमारों और प्रतिहारों की उत्पत्ति): चौहान पृष्ठ देखें।
  3. जैसलमेर के प्राचीन नाम: माड (मांड) और वल्ल। मांड गायकी का नाम इसी क्षेत्र से पड़ा।
  4. लोद्रवा: जैसलमेर से लगभग 15 किमी उत्तर-पश्चिम में भाटियों की पुरानी राजधानी, जो आज जैन मंदिरों, विशेषकर पार्श्वनाथ मंदिर, के लिए प्रसिद्ध है।
  5. बूँदी और हाड़ौती: बूँदी का नाम मीणा सरदार बूँदा के नाम पर पड़ा; क्षेत्र का नाम हाड़ौती चौहानों की शाखा हाड़ाओं के कारण पड़ा (चौहान पृष्ठ देखें)।

चार राजवंश

राजवंशराजस्थान में केंद्रकाल
प्रतिहारमण्डोर (मंडव्यपुर), बाद में मेड़ता; साम्राज्यिक शाखा भीनमाल, फिर जालौर या उज्जैन, फिर कन्नौजमण्डोर शाखा लगभग छठी सदी से; साम्राज्यिक शाखा नागभट्ट प्रथम (8वीं सदी) से
परमारआबू के निकट चंद्रावती; वागड़ में अर्थूणा; जालौर; किराडूआबू शाखा लगभग 1311 ई. तक; वागड़ शाखा 11वीं-12वीं सदी में
भाटीतनोट, देरावर, लोद्रवा, फिर जैसलमेररावल जैसल (12वीं सदी) से जैसलमेर
हाड़ाबूँदी, और अलग राज्य के रूप में कोटाबूँदी राव देवा से (1241 या 1341 ई.); कोटा 1631 से

गुर्जर-प्रतिहार

शासक स्वयं को लक्ष्मण का वंशज बताते थे, जो राम के द्वारपाल (प्रतिहार) थे। 'गुर्जर' शब्द किसी जाति का है या प्रदेश (गुर्जरत्रा, राजस्थान के इस भाग का पुराना नाम) का, इस पर विद्वान एकमत नहीं हैं।

साम्राज्यिक शाखा का पहला केंद्र विवादित है: दशरथ शर्मा के अनुसार जालौर, आर.सी. मजूमदार के ग्रंथ में संभावित मत अवंति (उज्जैन); गोपीनाथ शर्मा पूरे वंश का मूल मण्डोर मानते हैं; उनके अनुसार इस शाखा ने पहले चावड़ों से भीनमाल लिया, फिर आबू व जालौर, फिर उज्जैन और अंत में कन्नौज।

शासककालकिसके लिए प्रसिद्ध
नागभट्ट प्रथमलगभग 730 से 756 ई.सिंध के अरबों का प्रतिरोध किया; ग्वालियर प्रशस्ति कहती है कि उसने म्लेच्छ राजा की सेनाओं को कुचला और उसे नारायण के समान बताती है
वत्सराज8वीं सदी का उत्तरार्ध; 778 ई. में जालौर का शासक (कुवलयमाला)पाल राजा धर्मपाल को हराया, फिर राष्ट्रकूट राजा ध्रुव से हारा
नागभट्ट द्वितीय833 ई. तकवत्सराज का पुत्र; चक्रायुध को हटाकर कन्नौज को राजधानी बनाया; राष्ट्रकूट गोविंद तृतीय से पराजित भी हुआ
मिहिरभोज (भोज प्रथम)लगभग 836 से 885 ई.उसके सिक्कों पर 'श्रीमदादिवराह' अंकित है
महेंद्रपाल प्रथमलगभग 885 से 908 ई.कवि राजशेखर का शिष्य और आश्रयदाता

कन्नौज के लिए प्रतिहारों, बंगाल के पालों और दक्कन के राष्ट्रकूटों में संघर्ष हुआ (त्रिपक्षीय संघर्ष)। बाद में राष्ट्रकूट इंद्र तृतीय ने महीपाल के समय कन्नौज को लूटा और महमूद गजनवी ने 1018 ई. में उस पर आक्रमण किया।

मण्डोर शाखा: संस्थापकहरिश्चंद्र, एक ब्राह्मण; उसकी क्षत्रिय रानी भद्रा से हुए चार पुत्रों ने मंडव्यपुर (मण्डोर) जीतकर उसका परकोटा बनवाया; वंशावली रज्जिल से चलती है
राजधानी परिवर्तनरज्जिल के पोते नागभट्ट ने राजधानी मण्डोर से मेदांतक (मेड़ता) की
शीलुकवल्ल के भाटी देवराज को हराया
अभिलेखबाउक का जोधपुर अभिलेख, 837 ई.; कक्कुक के घटियाला अभिलेख, वि.सं. 918 (861 ई.)
बाउक और कक्कुकसौतेले भाई, कक्क की अलग-अलग रानियों के पुत्र; बाउक के बाद कक्कुक
बाद मेंइंदा प्रतिहारों से मण्डोर राठौड़ राव चूण्डा के पास गया (राठौड़ पृष्ठ देखें)

आबू, वागड़ और जालौर के परमार

परमारों की मुख्य शाखा ने धार से मालवा पर शासन किया; नीचे की शाखाओं ने राजस्थान के भागों पर।

शाखाकेंद्रतथ्य
आबूआबू के निकट चंद्रावतीवंशावली उत्पलराज से आरंभ होती है। गुजरात के चौलुक्यों का सामंत धारावर्ष (अभिलेख 1163 से 1219 ई.) उस गुजराती सेना में था जिसने 1178 ई. में आबू के निकट कासहृद (कायद्रा) में मुहम्मद गौरी को हराया। परंपरा के अनुसार उसका एक बाण तीन भैंसों को बेध देता था (अचलेश्वर में उसकी मूर्ति)। उसके भाई प्रह्लादन ने 'पार्थ पराक्रम व्यायोग' लिखा। लगभग 1311 ई. में चौहान राव लूंभा ने चंद्रावती ले ली: RBSE पुस्तक के अनुसार वह नाडोल का चौहान था, गोपीनाथ शर्मा के अनुसार जालौर की देवड़ा शाखा का।
वागड़अर्थूणा (प्राचीन नाम उत्थूणक), बाँसवाड़ा जिलाअर्थूणा के मंडलेश्वर शिव मंदिर पर चामुंडराज का वि.सं. 1136 (1079 ई.) का अभिलेख है। वागड़ का अंतिम ज्ञात परमार शासक विजयराज है (1108 व 1109 ई. के अभिलेख); 1179 ई. तक गुहिल सामंतसिंह वागड़ पर शासन कर रहा था।
जालौरजालौरजालौर के एक अभिलेख से ज्ञात: प्रतिपाल भाटिया के अनुसार वि.सं. 1174 (1118 ई.); गोपीनाथ शर्मा इसे 1087 ई. का बताते हैं और इसमें वाक्पतिराज से विसल तक सात शासकों के नाम पढ़ते हैं

मालवा में मुंज को चालुक्य तैलप द्वितीय ने बंदी बनाकर मार डाला। उसके बाद उसका छोटा भाई सिंधुराज और फिर सिंधुराज का पुत्र भोज (लगभग 1010 से 1055 ई.) शासक बना, जो धार का विद्वान राजा था और जिसने चित्तौड़ में त्रिभुवन नारायण शिव मंदिर बनवाया।

जैसलमेर के भाटी

भाटी चंद्रवंशी यादव हैं और अपना संबंध श्रीकृष्ण से जोड़ते हैं। इनका नियमित इतिहास विजयराज से मिलता है। RBSE पुस्तक के अनुसार उसका पुत्र भोज गौरियों से लड़ता हुआ मारा गया और उसके उत्तराधिकारी जैसल ने जैसलमेर की नींव रखी; जैसलमेर जिला गजेटियर के अनुसार भोज का चाचा जैसल गौरी की सेना लेकर आया और उसे मार डाला। पहले के केंद्र तनोट, देरावर (देवगढ़) और लोद्रवा थे; देवराज ने लोद्रवा लोद्रा राजपूतों से लिया।

जैसलमेर की स्थापनारावल जैसल ने त्रिकूट पहाड़ी पर की और राजधानी लोद्रवा से यहाँ लाया; दुर्ग 1155 ई. (कुछ विवरणों में 1156; आर.ए. अग्रवाल नींव 12 जुलाई 1155 बताते हैं)। जिला गजेटियर के अनुसार जैसलमेर की स्थापना वि.सं. 1234 (लगभग 1177 ई.) से पहले नहीं हो सकती
दुर्ग का पूरा होनाउसके उत्तराधिकारी शालिवाहन के समय
अकबरअकबर के नागौर दरबार (1570) में रावल हरराज ने उसकी अधीनता स्वीकार की और अपनी पुत्री का विवाह उससे किया
अंग्रेजों से संधि12 दिसंबर 1818, महारावल मूलराज द्वितीय के समय

जैसलमेर दुर्ग 'ढाई साकों' के लिए प्रसिद्ध है:

साकाआक्रमणकारीविवरण
पहलाअलाउद्दीन खिलजीRBSE पुस्तक के अनुसार मूलराज के समय; जिला गजेटियर के अनुसार रावल उसका पिता जैतसिंह था, जो घेरे के आरंभ में मरा, और युवराज मूलराज अंतिम युद्ध में मारा गया। तिथि 1299 या लगभग 1308 (दोनों गजेटियर में)
दूसराफिरोजशाह तुगलक (RBSE पृ. 22); जैसलमेर जिला गजेटियर इसे अलाउद्दीन खिलजी (के.एस. लाल के अनुसार 1299, या उसके शासन के अंत में) अथवा गयासुद्दीन या मुहम्मद बिन तुगलक के समय रखता हैरावल दूदा और तिलकसी (तिलकसिंह) मारे गए
अर्द्ध साकाकंधार का अमीर अली, 1550रावल लूणकरण ने अमीर अली को शरण दी थी, उसी ने विश्वासघात कर आक्रमण किया; लूणकरण लड़ता हुआ मारा गया, पर अंत में भाटी विजयी रहे, इसलिए जौहर नहीं हुआ

बूँदी और कोटा के हाड़ा

राव देवा (देवसिंह) ने मीणों से बूँदी की घाटी ली और क्षेत्र को हाड़ावती नाम दिया। वर्ष में मतभेद है: वंश भास्कर में वि.सं. 1298 (1241 ई.), जिसे गोपीनाथ शर्मा मानते हैं; टॉड और जगदीश सिंह गहलोत 1341 ई. देते हैं।

शासक या घटनाकालतथ्य
बूँदी के राव सुर्जन1554–1585रणथम्भौर उनके पास था; 1569 में उसे अकबर को सौंपकर मुगल सेवा में गए। मनसब: सतीश चंद्र के अनुसार 2,000; गोपीनाथ शर्मा के अनुसार पहले 1,000, फिर 5,000 व 'रावराजा' की उपाधि। उन्होंने अंतिम वर्ष काशी में बिताए। कवि चंद्रशेखर ने उनके लिए 'सुर्जन चरित' लिखा।
कोटा के माधोसिंह1648 तकबूँदी के राव रतन के दूसरे पुत्र। रतन ने उन्हें कोटा का शासक बनाया (गोपीनाथ शर्मा के अनुसार 1624 में); शाहजहाँ ने कोटा अलग राज्य के रूप में उन्हें दिया, जगदीश सिंह गहलोत के अनुसार 1631 (वि.सं. 1688) में।
कंपनी से संधियाँकोटा 26 दिसंबर 1817; बूँदी 10 फरवरी 1818दोनों राज्य ब्रिटिश संरक्षण में आए

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • दो भोजमिहिरभोज (भोज प्रथम), कन्नौज का प्रतिहार · भोज, धार का परमार।
  • दो उत्पलराजआबू के परमारों का पहला राजा · मालवा के मुंज (वाक्पतिराज द्वितीय) की एक उपाधि।
  • वल्ल और वागड़माड और वल्ल जैसलमेर हैं · वागड़ डूंगरपुर-बाँसवाड़ा है।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 122

अरब यात्री सुलेमान ने किस प्रतिहार राजा के शासनकाल में भारत की यात्रा की ?

  1. (1)नागभट्ट द्वितीय
  2. (2)नागभट्ट प्रथम
  3. (3)वत्सराज
  4. (4)भोज प्रथम
उत्तर देखें

समान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 51

जैसलमेर का प्राचीन नाम था-

  1. (1)वागड़
  2. (2)मांड
  3. (3)हाड़ौती
  4. (4)शेखावाटी
उत्तर देखें

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 17

लोद्रवा प्रसिद्ध है –

  1. (1)जैनियों के लिए
  2. (2)सिक्खों के लिए
  3. (3)जाटों के लिए
  4. (4)गुर्जरों के लिए
उत्तर देखें

✓ (1) जैनियों के लिए

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

पढ़ लिया? अब अभ्यास करें

निःशुल्क अभ्यास प्रश्नों से इस विषय पर अपनी तैयारी जाँचें।

अभ्यास प्रश्न →
अगला टॉपिक:राजपूत, सल्तनत और मुगल →