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प्रजामंडल आंदोलन

1930 के दशक से राजस्थान की रियासतों की जनता ने उत्तरदायी शासन की माँग के लिए प्रजामंडल और लोक परिषदें बनाईं। परीक्षा में स्थापना-वर्ष, संस्थापक और नेता किस रियासत का है, यह पूछा जाता है।

⏱ 7 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. हरिपुरा कांग्रेस (1938, अध्यक्ष सुभाषचंद्र बोस): कांग्रेस ने रियासती जनता को नैतिक समर्थन दिया और उसे अपने संगठन बनाने के लिए छोड़ा। उसी वर्ष मेवाड़, अलवर और भरतपुर में प्रजामंडल बने।
  2. पुस्तकों में प्रजामंडलों के स्थापना-वर्ष अलग-अलग मिलते हैं। स्थापना, पुनर्गठन, पहला अधिवेशन और मान्यता अलग तिथियाँ हैं, इसलिए देखें कि प्रश्न कौन-सी तिथि पूछ रहा है।
  3. मेवाड़, जयपुर और भरतपुर में राज्य ने पहले प्रजामंडल पर प्रतिबंध लगाया; फिर सत्याग्रह चला और बाद में प्रतिबंध हटा या प्रजामंडल को मान्यता मिली।

पृष्ठभूमि

  • राजपूताना–मध्य भारत सभा: जमनालाल बजाज, विजयसिंह पथिक आदि ने बनाई; अध्यक्ष जमनालाल बजाज। वी.डी. माथुर इसे 1919 की और IGNCA मार्च 1920 की बताते हैं।
  • अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् (AISPC): पहला अधिवेशन 17–18 दिसंबर 1927 को बम्बई में, दीवान बहादुर रामचंद्र राव की अध्यक्षता में। विजयसिंह पथिक उपाध्यक्ष चुने गए और रामनारायण चौधरी राजपूताना की रियासतों के सचिव बने।
  • राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद्: इसका पहला प्रांतीय अधिवेशन 1931 में अजमेर में हुआ, जिसे रामनारायण चौधरी ने आयोजित किया।
  • रियासती शाखाएँ: AISPC की रियासतों में इकाइयाँ प्रजामंडल, प्रजा परिषद् या लोक परिषद् कहलाती थीं। जहाँ शासक ने इकाई नहीं बनने दी, वहाँ वह राज्य के बाहर खुली: सिरोही (बम्बई), बीकानेर (कलकत्ता), जैसलमेर (जोधपुर)।
  • AISPC का सातवाँ अधिवेशन: उदयपुर, 31 दिसंबर 1945 से 1 जनवरी 1946, अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू; इसे माणिक्यलाल वर्मा ने आमंत्रित किया।

रियासतवार प्रजामंडल

रियासतस्थापनासंस्थापक एवं नेता
जयपुर प्रजामंडल1931; 1936–37 में पुनर्गठन (IGNCA; RBSE: हरिपुरा के बाद, 1938)कर्पूरचंद पाटनी। पुनर्गठन के समय चिरंजीलाल मिश्र अध्यक्ष थे; 1938 से जमनालाल बजाज अध्यक्ष और हीरालाल शास्त्री मंत्री
मारवाड़ (जोधपुर)मारवाड़ प्रजामंडल, 1934। मारवाड़ लोक परिषद्, मई 1938 (IGNCA: 16 मई)प्रजामंडल के अध्यक्ष भंवरलाल सर्राफ। लोक परिषद् के प्रेरक जयनारायण व्यास
मेवाड़ (उदयपुर)24 अप्रैल 1938 (IGNCA: 25 अप्रैल)बलवंत सिंह मेहता, अध्यक्ष; भूरेलाल बया, उपाध्यक्ष; माणिक्यलाल वर्मा, महामंत्री
बीकानेरबीकानेर प्रजामंडल, कलकत्ता में, 1936। बीकानेर राज्य प्रजा परिषद्, 22 जुलाई 1942 (IGNCA: 12 जुलाई)वैद्य मघाराम; प्रजा परिषद् के लिए रघुवरदयाल गोयल
कोटा (हाड़ौती)हाड़ौती प्रजामंडल, 1934 (वी.डी. माथुर: 1926)। कोटा राज्य प्रजामंडल, 1939 (IGNCA: 1938)नयनूराम शर्मा; अभिन्न हरि, जिन्होंने 1941 में शर्मा की मृत्यु के बाद नेतृत्व किया
बूंदीबूंदी प्रजामंडल, 1931। बूंदी राज्य लोक परिषद्, 19441931 में कांतिलाल। लोक परिषद्: हरिमोहन माथुर, अध्यक्ष, और बृजसुंदर शर्मा, मंत्री; RBSE पुस्तक ऋषिदत्त मेहता को इसका संस्थापक बताती है
झालावाड़पहली सार्वजनिक सभा, 1947मांगीलाल भव्य, कन्हैयालाल मित्तल, मकबूल आलम
अलवर1938हरिनारायण शर्मा
भरतपुरदिसंबर 1938, रेवाड़ी मेंगोपीलाल यादव, अध्यक्ष; मास्टर आदित्येंद्र, कोषाध्यक्ष
धौलपुर1936कृष्णदत्त पालीवाल
करौली1938 (IGNCA: 1939)त्रिलोकचंद माथुर, चिरंजीलाल शर्मा
शाहपुरा1938 (वी.डी. माथुर: 1937)रमेशचंद्र ओझा, माणिक्यलाल वर्मा के मार्गदर्शन में (IGNCA: वर्मा ने स्थापना की); लादूराम व्यास भी प्रमुख नेता थे
किशनगढ़1939
सिरोहीप्रवासी सिरोही प्रजामंडल, बम्बई में, 1934। सिरोही राज्य प्रजामंडल, जनवरी 1939गोकुलभाई भट्ट; बम्बई में वृद्धिशंकर त्रिवेदी
डूंगरपुर1944भोगीलाल पंड्या, अध्यक्ष, गौरीशंकर उपाध्याय और हरिदेव जोशी के साथ; RBSE पुस्तक हरिदेव जोशी को संस्थापक बताती है
बांसवाड़ा1945भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी, धूलजी भाई भावसार
प्रतापगढ़RBSE पुस्तक में 1936; IGNCA में 1946अमृतलाल पायक, चुन्नीलाल प्रभाकर
कुशलगढ़1944 (IGNCA: 1940)भंवरलाल निगम
जैसलमेर1945, जोधपुर में। इससे पहले 1937–38 में लोक परिषद् (RBSE: प्रयास; IGNCA: 1938 में स्थापना)मीठालाल व्यास

प्रमुख घटनाएँ

रियासतकबक्या हुआ
जयपुर1938–39प्रजामंडल का पहला अधिवेशन 1938 में जमनालाल बजाज की अध्यक्षता में हुआ। राज्य ने प्रजामंडल का रास्ता रोका, और अपने ऊपर लगे प्रतिबंध के विरुद्ध जयपुर में प्रवेश करने पर बजाज बैराठ के पास गिरफ्तार हुए। 7 अगस्त 1939 के समझौते से प्रजामंडल को मान्यता मिली
जयपुर1942हीरालाल शास्त्री और जयपुर दरबार के बीच अलिखित समझौता हुआ (IGNCA: प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल से; वी.डी. माथुर: महाराजा सवाई मानसिंह से), जिसे परीक्षा-पुस्तकों में "जेंटलमैन एग्रीमेंट" कहा जाता है, और प्रजामंडल भारत छोड़ो आंदोलन से अलग रहा। बाबा हरिश्चंद्र के गुट ने अलग होकर आजाद मोर्चा बनाया, जो नेहरू के कहने पर 1945 में फिर प्रजामंडल में मिल गया
मेवाड़1938–4111 मई 1938 को प्रजामंडल गैरकानूनी घोषित हुआ और वर्मा को निष्कासित किया गया; उन्होंने अजमेर से काम किया। फरवरी 1939 में वे गिरफ्तार हुए और पीटे गए; गांधीजी ने 'हरिजन' में इसकी निंदा की। प्रतिबंध 1941 में हटा (IGNCA: 22 फरवरी); उसके बाद पहला अधिवेशन 25–26 नवंबर 1941 को उदयपुर में वर्मा की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें आचार्य कृपलानी और विजयलक्ष्मी पंडित आए
मेवाड़अगस्त 1942वर्मा ने महाराणा से अंग्रेजों से संबंध तोड़ने को कहा; उनकी गिरफ्तारी पर पूरे राज्य में हड़ताल हुई, जो भारत छोड़ो आंदोलन का अंग थी
मारवाड़1940लोक परिषद् को 29 मार्च 1940 को गैरकानूनी घोषित किया गया; 1940 में ही बाद के समझौते से प्रतिबंध समाप्त हुआ
मारवाड़28 मार्च 1942उत्तरदायी शासन दिवस: चंडावल गाँव पहुँचे लोक परिषद् कार्यकर्ताओं पर लाठियों और भालों से हमला हुआ
मारवाड़13 मार्च 1947डाबड़ा, डीडवाना (अब डीडवाना-कुचामन जिला): जागीरदारों के विरुद्ध लोक परिषद् के नेतृत्व में हुई किसानों की सभा पर जागीरदार के आदमियों ने (RBSE: पुलिस ने) हमला किया; मथुरादास माथुर, द्वारकादास पुरोहित और राधाकिशन जैसे नेता गिरफ्तार हुए
कोटाअगस्त 1942प्रजामंडल कार्यकर्ताओं ने पुलिस को बैरकों में बंद कर शहर कोतवाली पर कब्जा किया और तिरंगा फहराया; लगभग दो सप्ताह शहर जनता के हाथ में रहा
बीकानेर1944–4626 अक्टूबर 1944: बीकानेर दमन विरोधी दिवस। 30 जून–1 जुलाई 1946: रायसिंहनगर में प्रजा परिषद् का अधिवेशन; तिरंगा जुलूस पर पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें बीरबल सिंह शहीद हुए (1 जुलाई)
जैसलमेर4 अप्रैल 1946सागरमल गोपा की जैसलमेर में गिरफ्तारी और कारावास के बाद मृत्यु हुई। राज्य ने इसे आत्महत्या बताया; नेहरू और जयनारायण व्यास ने उनके साथ हुए व्यवहार की निंदा की
भरतपुर1939–40राज्य ने प्रजामंडल पर रोक लगाई; 9 अप्रैल 1939 के अल्टीमेटम के बाद सत्याग्रह चला। समझौते से इसे मान्यता मिली (IGNCA में 25 अक्टूबर 1939, RBSE पुस्तक में दिसंबर 1940)। इसका पहला राजनीतिक सम्मेलन 30 दिसंबर 1940 को जयनारायण व्यास की अध्यक्षता में हुआ
धौलपुर12 नवंबर 1946तसीमो गाँव में प्रजामंडल के अधिवेशन को राज्य पुलिस ने भंग किया
डूंगरपुरजून 1947रास्तापाल: प्रजामंडल कार्यकर्ताओं की पाठशाला पर पुलिस ने हमला किया; नानाभाई खांट और भील बालिका कालीबाई मारे गए
शाहपुरा1947गोकुललाल असावा के नेतृत्व में लोकप्रिय सरकार बनी (IGNCA में 14 अगस्त, वी.डी. माथुर में सितंबर)

सभी में समानता

  • लक्ष्य: मारवाड़, बीकानेर और अलवर ने शासक की छत्रछाया में उत्तरदायी शासन की माँग की।
  • नाम: मारवाड़ और (1944 से) बूंदी में लोक परिषद्; बीकानेर और, मान्यता के बाद, भरतपुर में प्रजा परिषद्; बाकी अधिकतर प्रजामंडल कहलाए।
  • जड़ें: किसान और जनजाति आंदोलन (बिजौलिया, बेगूं, भील आंदोलन) पहले हुए। माणिक्यलाल वर्मा बिजौलिया और बेगूं आंदोलनों में पथिकजी के साथ काम कर चुके थे।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • पहला प्रजामंडलवी.डी. माथुर जयपुर के (1931) को पहला बताते हैं, पर RBSE बूंदी प्रजामंडल को भी 1931 का बताती है, और हाड़ौती व बूंदी के प्रजामंडल 1926–27 तक पुराने बताए गए हैं (वी.डी. माथुर; बूंदी गजेटियर) · मारवाड़ का (1934) राजनीतिक काम करने वाला पहला प्रजामंडल था।
  • मारवाड़ की तीन संस्थाएँप्रजामंडल (1934, 1936 में प्रतिबंधित) · नागरिक अधिकार रक्षक सभा (1936, वह भी प्रतिबंधित) · लोक परिषद् (1938)।
  • कोटा का मांगरोल अधिवेशन1939, अध्यक्ष नयनूराम शर्मा। RBSE और IGNCA इसे पहला अधिवेशन मानते हैं; वी.डी. माथुर इसे चौथा बताते हैं।
  • भरतपुर की दो संस्थाएँराज्य प्रजा संघ (1928) और 1938 का प्रजामंडल अलग हैं।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 1

निम्नलिखित में से कौनसा (राजनीतिक कार्यकर्ता – संबंधित देशी राज्य) सुमेलित नहीं है?

  1. (1)कृष्णदत्त पालीवाल – धौलपुर
  2. (2)हरिमोहन माथुर – करौली
  3. (3)मथुरा दास माथुर – मारवाड़
  4. (4)गोपीलाल यादव – भरतपुर
उत्तर देखें

✓ (2) हरिमोहन माथुर – करौली

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 2

भरतपुर राज्य प्रजा संघ की स्थापना हुई –

  1. (1)1937 में
  2. (2)1928 में
  3. (3)1938 में
  4. (4)1942 में
उत्तर देखें

संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 130

स्वतंत्रता सेनानी धर्मचन्द सुराणा किस प्रजामंडल से संबंधित थे ?

  1. (1)जयपुर प्रजामंडल
  2. (2)सिरोही प्रजामंडल
  3. (3)डूँगरपुर प्रजामंडल
  4. (4)बाँसवाड़ा प्रजामंडल
उत्तर देखें

✓ (2) सिरोही प्रजामंडल

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 123

कन्हैया लाल मित्तल, मांगीलाल बाव्या और मकबूल आलम निम्नलिखित किस प्रजा मण्डल आन्दोलन से सम्बद्ध थे ?

  1. (1)झालावाड़ राज्य प्रजा मण्डल
  2. (2)बाँसवाड़ा राज्य प्रजा मण्डल
  3. (3)बूंदी राज्य प्रजा परिषद्
  4. (4)करौली राज्य प्रजा मण्डल
उत्तर देखें

✓ (1) झालावाड़ राज्य प्रजा मण्डल

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