एक नज़र में
- मेवाड़ के महाराणा कुंभा ने संगीत ग्रंथ संगीतराज, संगीत मीमांसा और सूड प्रबंध लिखे।
- पुंडरीक विट्ठल ने रागमंजरी आमेर के कछवाहा राजकुमार माधोसिंह के लिए लिखी, जो राजा मानसिंह के भाई थे।
- बीकानेर में महाराजा अनूपसिंह के संगीतशास्त्री भावभट्ट ने अनूप संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर और अनूप संगीतांकुश लिखे।
- जयपुर दरबार का संगीतज्ञों और नर्तकों का विभाग गुणीजनखाना था; यहाँ के दरबारी संगीतज्ञ चाँद खाँ ने स्वर सागर लिखा।
- उस्ताद अल्लादिया खाँ ने ख्याल गायकी के जयपुर-अतरौली घराने की नींव रखी।
- मोहन वीणा के जनक जयपुर के पं. विश्व मोहन भट्ट को 'ए मीटिंग बाय द रिवर' के लिए ग्रैमी पुरस्कार मिला।
दरबार, आश्रयदाता और ग्रंथ
| दरबार / शासक | ग्रंथ या व्यक्ति | टिप्पणी |
|---|---|---|
| मेवाड़: महाराणा कुंभा (1433-1468) | रसिकप्रिया, जयदेव के गीतगोविंद पर उनकी टीका | संगीतराज पाँच भागों (रत्नकोश) में है: पाठ्य, गीत, वाद्य, नृत्य और रस |
| आमेर के कछवाहा: माधोसिंह | पुंडरीक विट्ठल | कर्नाटक के संगीतशास्त्री; बाद में अकबर के दरबार में रागमाला और नर्तन निर्णय लिखे |
| बीकानेर: महाराजा अनूपसिंह | भावभट्ट | अनूपसिंह ने कुंभा के संगीत ग्रंथों का पूरा संग्रह भी एकत्र करवाया |
| जयपुर | गुणीजनखाना; राधा गोविंद संगीत सार | राधा गोविंद संगीत सार सवाई प्रतापसिंह (1778-1803) के समय संकलित हुआ |
जयपुर-अतरौली घराना
| संस्थापक | उस्ताद अल्लादिया खाँ (1855-1946) |
|---|---|
| नाम | उनका परिवार अलीगढ़ के पास अतरौली से था और बाद में उनियारा में बस गया; इसलिए घराना जयपुर, अतरौली या जयपुर-अतरौली कहलाता है |
| शैली | ख्याल गायकी |
जयपुर का एक कथक घराना भी है, जो नृत्य का है; राजस्थान के लोक संगीत, लोक वाद्य और लोक नृत्य के अलग पृष्ठ हैं।
पं. विश्व मोहन भट्ट
| नगर | जयपुर |
|---|---|
| वाद्य | मोहन वीणा, जिसे उन्होंने गिटार का रूप बदलकर और 14 तार जोड़कर बनाया |
| ग्रैमी | 36वें ग्रैमी पुरस्कार (1994) में सर्वश्रेष्ठ वर्ल्ड म्यूज़िक एल्बम, राय कूडर के साथ |
| अन्य सम्मान | संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1998), पद्म श्री (2002) और पद्म भूषण (2017) |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- ग्रंथकारकुंभा, मेवाड़ · पुंडरीक विट्ठल, आमेर के माधोसिंह, फिर अकबर · भावभट्ट, बीकानेर के अनूपसिंह · चाँद खाँ, जयपुर।
- गीतगोविंद की टीकाएँरसिकप्रिया कुंभा की · अनूपोदय अनूपसिंह की।
- तीन जयपुरगुणीजनखाना दरबार का कलाकार विभाग · जयपुर-अतरौली ख्याल का घराना · कथक का जयपुर घराना नृत्य।
- ग्रैमी का वर्ष36वाँ ग्रैमी समारोह 1994 में हुआ; कुछ पुस्तकें 1993 लिखती हैं। एल्बम के लिए 1994 का पुरस्कार ग्रैमी था; संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1998) और पद्म श्री (2002) बाद में मिले।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
बीएसटीसी 2026 (प्रथम पारी) · प्रश्न 56
निम्नांकित में से जयपुर के किस दरबारी संगीतज्ञ ने ‘स्वर–सागर’ नामक ग्रंथ लिखा था?
- (1)भट्ट द्वारकानाथ
- (2)देवर्षि भट्ट
- (3)अली भगवान
- (4)चाँद खाँ
उत्तर देखें
✓ (4) चाँद खाँ
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंबीएसटीसी 2026 (प्रथम पारी) · प्रश्न 63
पंडित विश्व मोहन भट्ट को उनके एल्बम ‘ए मीटिंग बाय द रिवर’ के लिए 1994 में कौनसा पुरस्कार दिया गया था?
- (1)संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
- (2)पद्म श्री
- (3)ग्रैमी पुरस्कार
- (4)कालिदास सम्मान
उत्तर देखें
✓ (3) ग्रैमी पुरस्कार
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