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राजस्थान की चित्रकला की शैलियाँ

राजस्थानी चित्रकला को भौगोलिक आधार पर चार शैलियों में बाँटा गया है, जिनकी उपशैलियाँ किसी राजधानी या ठिकाने के नाम पर हैं। परीक्षा में चित्रकार, संरक्षक, प्रसिद्ध कृति और शैली की पहचान पूछी जाती है।

⏱ 7 मिनट पढ़ें4 विस्तृत पृष्ठ✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. शैली और चित्रकार: साहिबदीन, मनोहर और निसारदीन · मेवाड़; अमरदास भाटी, दाना भाटी और शिवदास · जोधपुर; अली रज़ा और हामिद रुकनुद्दीन · बीकानेर; निहालचंद · किशनगढ़; साहिबराम · जयपुर; अहमदअली · बूंदी; रघुनाथ · कोटा।
  2. स्वर्णकाल: मेवाड़ में जगतसिंह प्रथम · मारवाड़ में मानसिंह · बीकानेर में अनूपसिंह · किशनगढ़ में सावंतसिंह · जयपुर में सवाई प्रतापसिंह · अलवर में विनयसिंह · बूंदी में छत्रसाल · कोटा में उम्मेदसिंह।
  3. नाम: आनन्द कुमारस्वामी की 'राजपूत पेंटिंग्स' (1916 ई.) ने पहला वैज्ञानिक विभाजन प्रस्तुत किया और इसे 'राजपूत चित्रकला' कहा; रायकृष्णदास ने इसका खंडन कर 'राजस्थानी चित्रकला' नाम दिया।

चार शैलियाँ और किशनगढ़

आरंभ

  • आलनिया और दर्रा (कोटा), बैराठ (तब जयपुर जिला, अब कोटपूतली-बहरोड़) तथा दर (भरतपुर क्षेत्र) के शैलाश्रयों में सबसे पुराने चित्र मिलते हैं; वी.एस. वाकणकर ने 1953 में चम्बल घाटी और दर्रा में चित्रित शैलाश्रयों की खोज की।
  • चित्रित ग्रंथ: ओघ निर्युक्ति वृत्ति और दस वैकालिका सूत्र चूर्णि (1060 ई.), जैसलमेर भंडार में मिले; ये राजस्थान में उपलब्ध सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ हैं।
  • विशुद्ध राजस्थानी चित्रकला का जन्म लगभग 1500 ई. में हुआ, जन्मभूमि मेदपाट (मेवाड़) है; पहले जैन, गुजरात और अपभ्रंश शैली का प्रभाव था, बाद में मुगल प्रभाव आया।
  • विषय: कृष्ण लीला, रागमाला, बारहमासा, नायिका भेद, शिकार, दरबार और व्यक्ति-चित्र; कागज, कपड़े तथा महलों, हवेलियों और मंदिरों की दीवारों पर।

प्रमुख तिथियाँ एवं कृतियाँ

वर्षकृतिशैली और चित्रकार
1260श्रावकप्रतिक्रमणसूत्रचूर्णिमेवाड़, तेजसिंह के काल में
1423सुपासनाह चरियम्मेवाड़, देलवाड़ा में लिखा गया
1540परिजात अवतरण (भागवत पुराण)मेवाड़, नानाराम, उदयसिंह के काल में
1591चुनार रागमालाबूंदी शैली के सबसे पुराने ज्ञात चित्र; वाराणसी के पास चुनार में अकबर के चित्रकार मीर सैयद अली के तीन शिष्यों ने बनाए
1591यशोधरा चरित्रआमेर, ढूंढाड़
1592ढोलामारूमेवाड़, चावंड, महाराणा प्रताप के काल में; राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में सुरक्षित
1605रागमाला (चावंड रागमाला)मेवाड़, अमरसिंह प्रथम के काल में; चित्रकार निसारदीन (नसीरुद्दीन भी लिखा जाता है)
1610भागवतमारवाड़, मेवाड़ और मारवाड़ दोनों की विशेषताओं वाला
1623रागमाला चित्रावलीमारवाड़, चित्रकार वीरजी, पाली के विट्ठलदास चाँपावत के लिए
1628रागमालामेवाड़, साहिबदीन, जगतसिंह प्रथम के काल में
1639रसिकप्रिया, कृष्ण रुक्मिणी री वेलिआमेर, मिर्जा राजा जयसिंह की रानी चन्द्रावती के लिए
1648भागवत पुराणमेवाड़, साहिबदीन
1698'राजा पाबूजी' का व्यक्ति-चित्रअजमेर शैली, जूनियाँ का चाँद
1725'महाराजा अभयसिंह नृत्य देखते हुए'मारवाड़, डालचन्द
1750उम्मेदसिंह का जंगली सूअर का शिकारबूंदी
1857'महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स' की स्थापनाजयपुर, सवाई रामसिंह; अब राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स

राजस्थानी चित्रकला की विशेषताएँ

  • लोक जीवन से जुड़ाव; भक्ति और शृंगार का सजीव चित्रण; चटकीले व चमकदार रंग; देश-काल के अनुरूप परिवेश।
  • महलों, किलों, मंदिरों और हवेलियों में सबसे अधिक देखी जाती है।
  • चित्रकारों ने विभिन्न ऋतुओं का शृंगारिक चित्रण कर उनका मानव जीवन पर प्रभाव अंकित किया।
  • प्राकृतिक सौंदर्य के साथ नारी सौंदर्य का सजीव चित्रण।
  • राजा-महाराजाओं, राजपुत्रों व सामन्तों के संरक्षण में फूली-फली।

हाड़ौती: बूंदी और कोटा

चौहानवंशी हाड़ाओं का प्रभुत्व बूंदी, कोटा और झालावाड़ क्षेत्र में रहा, इसलिए यह हाड़ौती कहलाया।

बिंदुबूंदीकोटा
प्रभावपहले मेवाड़, राव सुरजन के समय से मुगल; भावसिंह और पुत्र अनिरुद्धसिंह के दक्षिण के युद्धों में जाने से दक्षिण शैली का समावेशस्वतंत्र अस्तित्व का श्रेय महाराव रामसिंह को; भीमसिंह के समय कृष्ण भक्ति और वल्लभ सम्प्रदाय का प्रभाव
चरमोत्कर्षराव छत्रसाल (शत्रुसाल) ने रंगमहल बनवाया, जो भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है; चित्रशाला राव उम्मेदसिंह के समय बनीउम्मेदसिंह के समय; मुसव्विरखाने के कलाकारों ने दीवारों पर बड़े चित्र और बड़ी वसलियों पर शिकार के समूह-चित्र बनाए
पहचानलम्बी आकृतियाँ, पतले शरीर; लाल अधर, गोलाकार मुख, पीछे झुकी चिबुक; काले बादल, बिजली, जलाशय, हरे वृक्ष, मोर, वानर; पक्षी विशेष महत्त्व केपीन अधर, सुदीर्घ नासिका, पतली कमर वाली नारी; चौड़े कंधे, भरी-भरी दाढ़ी-मूँछें, मांसल देह, तलवार-कटार वाले पुरुष; घने जंगलों में शिकार, रानियाँ भी शिकार करती दिखाई गईं
रंगसफेद-गुलाबी, लाल हिंगुल, हराहल्का हरा, पीला, नीला
चित्रकारसुरजन, अहमदअली, रामलाल, श्री किशन, साधुरामरघुनाथ, गोविन्दराम, डालू, लच्छीराम, नूर मोहम्मद
विषयरागरागिनी, नायिका भेद, ऋतु वर्णन, बारहमासा, कृष्णलीला, दरबार, शिकार, हाथियों की लड़ाई, उत्सवमुख्यतः शिकार; साथ में जुलूस और कृष्ण लीला

झालावाड़: इसकी शैली का निर्धारण अभी शेष है; राजमहलों के भित्ति चित्रों में श्रीनाथजी, राधाकृष्ण लीला, रामलीला और राजसी वैभव मिलते हैं।

लोक एवं भित्ति चित्रकला

कलास्थान एवं कलाकारमाध्यमविशेषता
फड़शाहपुरा (भीलवाड़ा); छीपा जाति के जोशी चितेरे; श्रीलाल जोशी (पद्मश्री, 2006)कपड़े पर पट-चित्रलोक देवताओं के जीवन-प्रसंग और चमत्कार; प्रमुख पात्र सबसे बड़ा
पिछवाईनाथद्वाराश्रीनाथजी के पीछे सजाने का बड़ा कपड़ाकृष्ण लीला, गायें, कदली वृक्ष; पुष्टिमार्गीय परंपरा
पानेसम्पूर्ण राजस्थान, उत्सवों परकागजदेवी-देवताओं के चित्र, दीवार चित्रों के विकल्प के रूप में; श्रीनाथजी का पाना सर्वाधिक कलात्मक, चौबीस शृंगारों सहित
मांडणाग्रामीण घरदीवार और फर्श पर खड़िया (सफेद) और गेरू (लाल) से अंकनदेहरी, चौखट, आँगन, चबूतरा, घड़ा रखने का स्थान; विवाह पर गणेशजी व लक्ष्मीजी के पगल्या (पैर); तीर्थयात्रा से लौटने पर पुष्कर पेड़ी व पथवारी; त्रिकोण, चतुष्कोण, षट्कोण, अष्टकोण, वृत्त
सांझीकुँवारी कन्याएँसफेदी पुती दीवार पर गोबर, काँच, मोती, कौड़ी, फूल-पत्तेदशहरे से पूर्व श्राद्ध पक्ष में पन्द्रह दिन; माता पार्वती का रूप मानकर अच्छे वर-घर की कामना से पूजन; अंतिम पाँच दिन का बड़ा रूप संझया कोट
कावड़बस्सी गाँव (चित्तौड़गढ़); खैरादी परिवार का पुश्तैनी व्यवसाय; मांगीलाल मिस्त्रीकई द्वारों वाला चित्रित काष्ठ मंदिरलाल रंग पर काले रंग से पौराणिक कथाएँ; अंतिम द्वार खुलने पर राम, लक्ष्मण व सीता की मूर्तियाँ
शेखावाटी के भित्ति चित्रनवलगढ़, रामगढ़, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, मुकुन्दगढ़, मंडावा, बिसाऊ; महणसरहवेलियों की दीवारेंश्रेष्ठियों की हवेलियाँ; 'ओपन आर्ट गैलरी' कहलाती है; महणसर में पोद्दारों की हवेली 'सोने-चाँदी की दुकान' (सोने की दुकान) भित्ति चित्रों में सोने के प्रयोग के लिए प्रसिद्ध

फड़ कैसे बनती है

  • कपड़ा: मोटे हाथकते दो सूती कपड़ों (रेजी या रेजा) पर गेहूँ या चावल के माँड में गोंद मिलाकर कलफ लगाया जाता है, फिर घोटकर समतल करते हैं।
  • रंग: पाँच या सात; गेरू, हिरमिच, जंगाल, हरताल, प्योड़ी, सिन्दूर, हिंगुल, काजल, चूना व नील आदि।
  • क्रम: सर्वप्रथम सिन्दूरी रंग शरीर में, फिर हरा व लाल कपड़ों में, भूरा वास्तु-निर्माण में; अंतिम रेखाएँ (खुलाई) काले रंग से।
  • रंग-संकेत: देवियाँ नीली, देव लाल, राक्षस काले, साधु सफेद या पीले; सिन्दूरी और लाल रंग शौर्य के प्रतीक।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • शाहपुराभीलवाड़ा में फड़ का कस्बा · मेवाड़ की उपशैली के रूप में भी · और ढूंढाड़ का ठिकाणा भी।
  • उम्मेदसिंहबूंदी के राव उम्मेदसिंह ने चित्रशाला बनवाई · कोटा शैली का चरमोत्कर्ष महाराव उम्मेदसिंह के समय।
  • नाथद्वारामेवाड़ की उपशैली है, ढूंढाड़ की नहीं।
  • भित्ति तकनीकआलागीला, आराइश और मोराकसी गीले चूने के पलस्तर की एक ही पद्धति, आमेर से आरंभ · मणिकुट्टिम में मोती, लाख व लकड़ी की मणियाँ चिपकाई जाती हैं, सवाई माधोसिंह प्रथम के समय।
  • बणी-ठणीकिशनगढ़, निहालचंद · साहिबदीन (मेवाड़), अली रज़ा (बीकानेर) या शिवदास (मारवाड़) नहीं।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 11

‘महणसर’ प्रसिद्ध है –

  1. (1)सोने की चित्रकारी के लिए
  2. (2)मुगलकालीन चित्रों की अधिकता के लिए
  3. (3)360 खिड़कियों की हवेली के लिए
  4. (4)सती माता मन्दिर के लिए
उत्तर देखें

✓ (1) सोने की चित्रकारी के लिए

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 18

साहिबदीन नामक चित्रकार को मेवाड़ के किस शासक का संरक्षण प्राप्त था?

  1. (1)महाराणा राजसिंह
  2. (2)महाराणा अमरसिंह
  3. (3)महाराणा जगतसिंह ।
  4. (4)महाराणा कुम्भा
उत्तर देखें

✓ (3) महाराणा जगतसिंह ।

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समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 23

श्रीधर अंधारे को किस चित्रशैली को प्रकाश में लाने का श्रेय दिया जाता है?

  1. (1)किशनगढ़
  2. (2)देवगढ़
  3. (3)शाहपुरा
  4. (4)उणियारा
उत्तर देखें

समान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 49

फड़ कलाकार श्री लाल जोशी राजस्थान के किस स्थान से सम्बंधित हैं?

  1. (1)भीलवाड़ा
  2. (2)जयपुर
  3. (3)सीकर
  4. (4)चूरू
उत्तर देखें

संरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 134

चन्दुलाल, मुकुन्द, मुन्नालाल किस चित्र-शैली के चित्रकार थे ?

  1. (1)मेवाड़ शैली
  2. (2)बीकानेर शैली
  3. (3)जयपुर शैली
  4. (4)अलवर शैली
उत्तर देखें

✓ (2) बीकानेर शैली

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संरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 16

मेवाड़ शैली में 1648 ई. में 'भागवत' का चित्रण किसके द्वारा किया गया?

  1. (1)मुस्तफा
  2. (2)हसन
  3. (3)अली रज़ा
  4. (4)साहबदी
उत्तर देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 127

प्रसिद्ध चित्रकार मुहम्मद शाह जयपुर के किस महाराजा का दरबारी चित्रकार था ?

  1. (1)सवाई राम सिंह द्वितीय
  2. (2)सवाई जगत सिंह
  3. (3)सवाई प्रताप सिंह
  4. (4)सवाई जय सिंह
उत्तर देखें

✓ (4) सवाई जय सिंह

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आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 130

सूची-I व सूची-II को सुमेलित करते हुए राजस्थान की प्रसिद्ध चित्रकला शैलियों एवं उनके चित्रकारों के संबंध में सही विकल्प चुनिये : सूची-I — सूची-II A. किशनगढ़ — i. साहिबदीन B. बीकानेर — ii. निहालचंद C. मेवाड़ — iii. अली रज़ा D. मारवाड़ — iv. शिवदास कूट :

  1. (1)A-ii, B-iv, C-i, D-iii
  2. (2)A-ii, B-iii, C-i, D-iv
  3. (3)A-ii, B-iii, C-iv, D-i
  4. (4)A-ii, B-i, C-iii, D-iv
उत्तर देखें

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