एक नज़र में
- पहला GI: कोटा डोरिया राजस्थान का पहला GI है।
- 2023 का समूह: उदयपुर कोफ्तगारी, बीकानेर कशीदाकारी, जोधपुर बंधेज, बीकानेर उस्ता कला और नाथद्वारा पिछवाई को 2023 में एक साथ GI प्रमाणपत्र मिले।
- प्रतिरोध रँगाई: रंग को या तो कपड़ा बाँधकर रोका जाता है (बंधेज, लहरिया, मोठड़ा) या कपड़े पर दाबू नामक मिट्टी की लेई छापकर (अकोला, बगरू)।
मुख्य शिल्प
- ब्लू पॉटरीनीली चित्रित ग्लेज़ कारीगरीस्थानजयपुरसामग्री एवं तकनीकक्वार्ट्ज़ पाउडर, पिसे काँच, मुल्तानी मिट्टी और गोंद का गूँधा लोंदा; अधिकतर नीले रंग से चित्रित और ग्लेज़ किया हुआयाद रखें'शिल्पगुरु' कृपालसिंह शेखावत ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई; परंपरा के अनुसार यह सवाई रामसिंह द्वितीय (1835–80) के काल में जयपुर आई
- मोलेला मृण्शिल्प (टेराकोटा)मन्नत की मिट्टी-पट्टिकाएँस्थानमोलेला गाँव, राजसमंद जिलासामग्री एवं तकनीककुम्हार बिना साँचे के, हाथ से लोकदेवताओं की उभरी हुई पट्टिकाएँ गढ़ते हैंयाद रखेंआदिवासी भक्त इन्हें मन्नत की पट्टिकाओं के रूप में खरीदते हैं
- पोकरण पॉटरीहल्के गुलाबी बर्तनस्थानपोकरण, जैसलमेर जिलासामग्री एवं तकनीकबारीक पिसी स्थानीय मिट्टी, जो पकने पर हल्की गुलाबी, लगभग सफ़ेद होती हैयाद रखेंघड़े, सुराही, दीये जैसे रोज़मर्रा के बर्तन
- थेवाकाँच पर सोनास्थानप्रतापगढ़सामग्री एवं तकनीकहाथ से काटी सोने की पत्ती रंगीन काँच पर जड़ी (फ्यूज़) जाती हैयाद रखेंकेवल राजसोनी परिवार के पुरुष यह कला करते हैंपूरे नोट्स पढ़ें →
- मीनाकारी एवं कुंदनमीना और रत्न-जड़ाईस्थानजयपुरसामग्री एवं तकनीकमीनाकारी: खुदे हुए सोने या चाँदी पर रंगीन मीना · कुंदन: सोने में रत्न जड़नायाद रखेंपरंपरा के अनुसार आमेर के मानसिंह प्रथम लाहौर से मीनाकारों को लाए
- तारकशीचाँदी के तार के गहनेस्थाननाथद्वारासामग्री एवं तकनीकधातु के बारीक तारों से बने चाँदी के आभूषण
- कोफ्तगिरी (कोफ्तगारी)लोहे पर तार-जड़ाईस्थानउदयपुर; चित्तौड़गढ़ भीसामग्री एवं तकनीकलोहे या इस्पात पर सोने या चाँदी के तार की जड़ाई, मुख्यतः हथियारों पर
- मकराना संगमरमरखानों का कस्बास्थानमकराना (तब नागौर जिला, अब डीडवाना-कुचामन)सामग्री एवं तकनीककस्बे की खानों का सफ़ेद संगमरमरयाद रखेंताजमहल में प्रयुक्त
- बंधेजबाँधकर रँगाईस्थानजोधपुर; सीकर (शेखावाटी)सामग्री एवं तकनीककपड़े में छोटी-छोटी गाँठें बाँधकर रँगना; चुनरी इसका सबसे लोकप्रिय रूप हैयाद रखेंजोधपुर की चुनरी: चमकीले, टिकाऊ रंग और बारीक बंधेजपूरे नोट्स पढ़ें →
- लहरिया एवं मोठड़ाधारीदार बंधेजस्थानलहरिया: जयपुर · मोठड़ा: जोधपुरसामग्री एवं तकनीकलपेटकर बाँधे कपड़े पर तिरछी धारियों की रँगाई; मोठड़ा में धारियाँ एक-दूसरे को काटती हैंपूरे नोट्स पढ़ें →
- बगरू छपाईदाबू वाली ठप्पा छपाईस्थानबगरू, जयपुर के पाससामग्री एवं तकनीकछीपों की हाथ से ठप्पा छपाई, दाबू (मिट्टी का प्रतिरोध) के साथयाद रखेंमटिया रंग की ज़मीन पर लाल-काले (स्याह-बैगर) अलंकरणपूरे नोट्स पढ़ें →
- सांगानेरी छपाईबारीक फूलदार छपाईस्थानसांगानेर, जयपुर के पाससामग्री एवं तकनीकछीपों की बारीक हाथ की ठप्पा छपाईयाद रखेंसफ़ेद ज़मीन पर फूलों की नाज़ुक बूटियाँपूरे नोट्स पढ़ें →
- अजरखदोनों ओर की छपाईस्थानबाड़मेरसामग्री एवं तकनीकलाल और नीले रंग की ज्यामितीय आकृतियाँ, कपड़े के दोनों ओर छपीयाद रखेंआकृतियाँ तुर्की टाइलों से मिलती हैंपूरे नोट्स पढ़ें →
- अकोला का दाबूदाबू छपाई का गाँवस्थानअकोला, चित्तौड़गढ़ जिलासामग्री एवं तकनीकमिट्टी के प्रतिरोध से बड़े पैमाने पर ठप्पा छपाईयाद रखें'छीपों का अकोला' कहलाता हैपूरे नोट्स पढ़ें →
- कोटा डोरिया (मसूरिया)चौखाने की बुनाईस्थानकोटा के पास कैथून; कोटा, बूंदी और बारां जिलों के गाँव भीसामग्री एवं तकनीकपिट करघों पर छोटे चौकोर खानों (खत) में बुना हल्का सूती-रेशमी कपड़ापूरे नोट्स पढ़ें →
- दरियाँबुने बिछावनस्थानसालावास, जोधपुर के पाससामग्री एवं तकनीकसपाट बुनाई वाले फ़र्श के बिछावन
- नमदाऊन का फेल्ट गलीचास्थानटोंकसामग्री एवं तकनीकऊन को धुनकर, परतें बिछाकर और दबाकर बना फेल्ट; बुना हुआ नहींयाद रखेंएप्लीक और कढ़ाई से सजाया जाता है
- गोटाधातु-धागे की पट्टीस्थानखण्डेला, सीकर जिलासामग्री एवं तकनीकसूती ताने पर बादले के बाने से बुनी पट्टी, जो कपड़े पर टाँकी जाती हैयाद रखेंचौड़ा गोटा लप्पा, कम चौड़ा लप्पी कहलाता है
- कशीदाकारीशीशे वाली कढ़ाईस्थानबीकानेरसामग्री एवं तकनीकशीशे के काम के साथ घनी कढ़ाईयाद रखेंमुख्यतः मेघवाल समुदाय की महिलाएँ करती हैं
- उस्ता कलाऊँट की खाल पर सोनास्थानबीकानेरसामग्री एवं तकनीकऊँट की खाल की वस्तुओं, दीवारों और छतों पर उभरा सुनहरी काम (मनोती) और उस पर चित्रण (नक्काशी)याद रखेंजूनागढ़ दुर्ग के अनूप महल, फूल महल और करण महल में दिखती है
- लाख का कामलाख की चूड़ियाँस्थानजयपुरसामग्री एवं तकनीकलाख से बनी चूड़ियाँ, मोतियों और नगों से जड़ीयाद रखेंमनिहार समुदाय बनाता है
- मोजड़ीचमड़े की जूतियाँस्थानजोधपुरसामग्री एवं तकनीककढ़ाईदार चमड़े की जूतियाँयाद रखें2026 में GI पंजीकृत
- कावड़चलता-फिरता काष्ठ मंदिरस्थानबस्सी, चित्तौड़गढ़ जिला
पद्मश्री शिल्पकार
| शिल्पकार | शिल्प | पद्मश्री |
|---|---|---|
| कृपालसिंह शेखावत | ब्लू पॉटरी, जयपुर | 1974 |
| हिसामुद्दीन उस्ता | उस्ता कला, बीकानेर | 1986 |
| कुदरत सिंह | मीनाकारी, जयपुर | 1988 |
| रामकिशोर छीपा | बगरू की ठप्पा छपाई | 2009 |
| मोहन लाल कुम्हार | मोलेला मृण्शिल्प, राजसमंद | 2012 |
| महेश राज सोनी | थेवा, प्रतापगढ़ | 2015 |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- सोने की कारीगरीथेवा काँच पर सोना · उस्ता कला ऊँट की खाल पर उभरा सुनहरी काम · कोफ्तगिरी लोहे पर सोने या चाँदी का तार · मीनाकारी सोने या चाँदी पर मीना।
- अजरख का स्थानRBSE पुस्तक और CET 2022 की कुंजी में बाड़मेर · RajRAS में बालोतरा (तब बाड़मेर जिला, अब बालोतरा जिला)।
- उस्ता कलाकारGI आवेदन के अनुसार अकबर के समय राजा रायसिंह ने इन्हें बीकानेर बुलाया · RajRAS के अनुसार अनूपसिंह इन्हें लाहौर से लाए।
- मोठड़ा का स्थानCET 2022 में जोधपुर से मिलान · RajRAS लहरिया और मोठड़ा के लिए बीकानेर बताता है।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 84
सुमेलित कीजिये – (1) अजरख प्रिंट (I) कैथून (2) पावरलूम कपड़ों पर छपाई (II) जोधपुर (3) मोठड़ा (III) बालोतरा (4) मसूरिया (IV) बाड़मेर सही विकल्प चुनें –
- (1)(1) – (I), (2) – (II), (3) – (III), (4) – (IV)
- (2)(1) – (II), (2) – (III), (3) – (IV), (4) – (I)
- (3)(1) – (IV), (2) – (III), (3) – (II), (4) – (I)
- (4)(1) – (III), (2) – (IV), (3) – (I), (4) – (II)
उत्तर देखें
✓ (3) (1) – (IV), (2) – (III), (3) – (II), (4) – (I)
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 104
राजस्थान में थेवा कला निम्न में से किस क्षेत्र से संबंधित है?
- (1)चूरू
- (2)जयपुर
- (3)प्रतापगढ़
- (4)झालावाड़
उत्तर देखें
✓ (3) प्रतापगढ़
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