एक नज़र में
- मूर्ति नहीं: शाहपुरा के मुख्य रामद्वारे में कोई मूर्ति नहीं है; अनुयायी राम-नाम का ध्यान करते हैं।
- फूलडोल: शाहपुरा का पाँच दिवसीय फूलडोल महोत्सव इस संप्रदाय की अपनी विशेषता है।
- उपदेश: रामचरणजी के उपदेश अणभैवाणी में संकलित हैं।
रामचरणजी
| जन्म | माघ शुक्ल चतुर्दशी, 1719 ई., सोडा गाँव (तब जयपुर राज्य) में; मूल नाम रामकिशन |
|---|---|
| गुरु | कृपारामजी, जिनसे 1751 ई. में दांतड़ा (मेवाड़) में दीक्षा ली |
| संप्रदाय का आरंभ | 1760 ई., भीलवाड़ा में |
| पीठ | शाहपुरा (भीलवाड़ा), जहाँ के शासक रणसिंह ने उनके लिए छतरी और मठ बनवाया |
| देहांत | 1798 ई., शाहपुरा में |
चार शाखाएँ
| शाखा | संस्थापक |
|---|---|
| शाहपुरा | रामचरणजी |
| रैण | दरियावजी |
| सिंहथल | हरिरामदासजी |
| खेड़ापा | रामदासजी |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- रैण या शाहपुरादरियावजी की गद्दी रैण में है, गढ़ा, डीडवाना या फतेहपुर में नहीं (संरक्षण अधिकारी 2024) · रामचरणजी की गद्दी शाहपुरा में।
- सोडा या शाहपुरारामचरणजी का जन्म सोडा में · उनकी पीठ शाहपुरा में।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
संरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 9
दरियाव जी द्वारा किस स्थान पर अपने पंथ की गद्दी स्थापित की गई?
- (1)गढ़ा
- (2)डीडवाना
- (3)फतेहपुर
- (4)रैण
उत्तर देखें
✓ (4) रैण
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