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रामस्नेही संप्रदाय

रामचरणजी द्वारा प्रवर्तित रामस्नेही संप्रदाय राम-नाम स्मरण से निर्गुण राम की उपासना करता है; इसके उपासना स्थल रामद्वारे कहलाते हैं। परीक्षा में पूछा जाता है कि किस संत ने कौन सी शाखा स्थापित की।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. मूर्ति नहीं: शाहपुरा के मुख्य रामद्वारे में कोई मूर्ति नहीं है; अनुयायी राम-नाम का ध्यान करते हैं।
  2. फूलडोल: शाहपुरा का पाँच दिवसीय फूलडोल महोत्सव इस संप्रदाय की अपनी विशेषता है।
  3. उपदेश: रामचरणजी के उपदेश अणभैवाणी में संकलित हैं।

रामचरणजी

जन्ममाघ शुक्ल चतुर्दशी, 1719 ई., सोडा गाँव (तब जयपुर राज्य) में; मूल नाम रामकिशन
गुरुकृपारामजी, जिनसे 1751 ई. में दांतड़ा (मेवाड़) में दीक्षा ली
संप्रदाय का आरंभ1760 ई., भीलवाड़ा में
पीठशाहपुरा (भीलवाड़ा), जहाँ के शासक रणसिंह ने उनके लिए छतरी और मठ बनवाया
देहांत1798 ई., शाहपुरा में

चार शाखाएँ

शाखासंस्थापक
शाहपुरारामचरणजी
रैणदरियावजी
सिंहथलहरिरामदासजी
खेड़ापारामदासजी

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • रैण या शाहपुरादरियावजी की गद्दी रैण में है, गढ़ा, डीडवाना या फतेहपुर में नहीं (संरक्षण अधिकारी 2024) · रामचरणजी की गद्दी शाहपुरा में।
  • सोडा या शाहपुरारामचरणजी का जन्म सोडा में · उनकी पीठ शाहपुरा में।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

संरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 9

दरियाव जी द्वारा किस स्थान पर अपने पंथ की गद्दी स्थापित की गई?

  1. (1)गढ़ा
  2. (2)डीडवाना
  3. (3)फतेहपुर
  4. (4)रैण
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