एक नज़र में
- वाद्यों के चार वर्ग: तत (तार वाले), सुषिर (फूँक वाले), अवनद्ध (चमड़े से मढ़े) और घन (ठोस, स्वयं बजने वाले)।
- स्त्री पात्र: गवरी और कुचामनी ख्याल में इन्हें पुरुष निभाते हैं; जयपुरी ख्याल में स्त्रियाँ भी निभाती हैं।
- लोक गीतों के तीन भाग: जन-सामान्य के गीत, संगीत को व्यवसाय के रूप में अपनाने वाली जातियों के गीत और क्षेत्रीय गीत। सबसे अधिक गीत शृंगार रस के हैं, जिनमें वियोग शृंगार अधिक है।
- माँड: राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध गायकी, जिसकी उदयपुर, जोधपुर, जयपुर-बीकानेर और जैसलमेर की अलग-अलग शैलियाँ हैं।
लोक नाट्य
- ख्यालअनेक शैलियों का गायन-नाट्यस्थान और कलाकारपूरा राजस्थान, क्षेत्रीय शैलियों मेंविशेषता18वीं सदी की शुरुआत से लोक नाट्य में; शैलियों में अंतर भाषा का नहीं, प्रस्तुति के ढंग का हैपूरे नोट्स पढ़ें →
- गवरीभीलों का धार्मिक नाट्यस्थान और कलाकारमेवाड़ के भीलविशेषताशिव-भस्मासुर की कथा, रक्षाबंधन के दूसरे दिन से खेली जाती हैपूरे नोट्स पढ़ें →
- तमाशासंगीत, नृत्य और गायनस्थान और कलाकारजयपुर; भट्ट परिवारविशेषतामहाराजा प्रतापसिंह के काल में शुरू हुआ; खुले मंच पर, जिसे अखाड़ा कहते हैं; गोपीचंद और हीर-राँझा मुख्य तमाशे हैं
- रम्मतहोली का साहित्यिक नाट्यस्थान और कलाकारजैसलमेर, फलौदी और बीकानेरविशेषताहोली पर खेली जाती है; जैसलमेर के तेज कवि ने श्रीकृष्ण कंपनी के नाम से अखाड़ा शुरू किया और अपनी 'स्वतंत्र बावनी' (1943) गांधीजी को भेंट की
- स्वांगचरित्रों का वेशविशेषताकलाकार बहुरूपिया किसी ऐतिहासिक, पौराणिक या प्रसिद्ध चरित्र का वेश धरता है; केलवा के परशुराम सबसे नामी कलाकार हैं; भीलवाड़ा के जानकीलाल भांड ने भारत उत्सवों में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया
- लीला नाट्यकृष्ण और राम की लीलाएँस्थान और कलाकाररासलीला: फुलेरा, जयपुर, असलपुर, हरदोणा और गुंडा · रामलीला: भरतपुर, पाटूदा और बिसाऊ · सनकादिकों की लीलाएँ: घोसुंडा और बस्सीविशेषतारासलीला में कृष्ण के बाल्यकाल और किशोरावस्था की लीलाएँ; रामलीला में राम का जीवन
- नौटंकीविवाह-मेलों के पूर्वी नाटकस्थान और कलाकारधौलपुर, करौली, अलवर, गंगापुर, भरतपुर और सवाई माधोपुरविशेषताविवाह, सामाजिक समारोहों, मेलों और लोकोत्सवों पर; रूप बसंत, नकाबपोश, सत्यवादी हरिश्चंद्र और राजा भरथरी
- चारबैतसंगीत दंगलस्थान और कलाकारटोंकविशेषतानवाब फैजुल्ला खाँ के शासनकाल में करीम खाँ निहंग ने शुरू किया; गायक घुटनों के बल खड़ा होकर डफ बजाता है
- फड़ वाचनपट-वाचनस्थान और कलाकारभोपेविशेषतालोक देवता की कथा का चित्रित कपड़े का पट, जिसे गाँव-गाँव जाकर बाँचा जाता है
- कठपुतलीधागे की पुतलियों का नाट्यस्थान और कलाकारभाट जातिविशेषताधागों से चलने वाली लकड़ी की पुतलियाँ; धागा-पुतली शैली राजस्थान की देन हैपूरे नोट्स पढ़ें →
तत वाद्य (तार वाले)
| वाद्य | बजाने वाले | विशेषता |
|---|---|---|
| रावणहत्था | पाबूजी के भोपे | नारियल के खोल का ढाँचा, बाँस की डंडी और घोड़े की पूँछ के बालों का गज |
| जंतर | गुर्जरों के भोपे | वीणा जैसा, दो तूँबों वाला; तारों को ऊपर की ओर छेड़ा जाता है |
| कामायचा | मांगणियार | ढाँचा आम या रोहिड़ा की लकड़ी के एक ही टुकड़े से; 17 तार |
| सिंधी सारंगी | जैसलमेर और बाड़मेर के लंगा | लकड़ी के एक ही टुकड़े से बनी; ताँत के चार बजाने वाले तार और इस्पात के 22 सहायक तार |
| सुरिंदा | लंगा | |
| तंदूरा (चौतारा) | कामड़ | चार तार; रामदेवजी के भजनों के साथ बजाया जाता है |
| भपंग | मेवात क्षेत्र (अलवर अंचल) के जोगी | तूँबे के खोल पर मढ़ी खाल के बीच से निकला एक तार; भजनों के साथ बजता है |
सुषिर वाद्य (फूँक वाले)
| वाद्य | बजाने वाले | विशेषता |
|---|---|---|
| अलगोजा | दो बाँसुरियाँ एक साथ फूँकी जाती हैं, एक से धुन और दूसरी से आधार स्वर | |
| सतारा | जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र के मेघवाल | अकेले, बिना गायन के, जटिल स्वर-समूहों में बजाया जाता है |
| पूंगी | कालबेलिया | परंपरागत रूप से साँप पकड़ने के लिए बजाई जाती है |
| मशक | चमड़े की थैली में हवा भरी जाती है; इसकी नलियों से आधार स्वर या धुन बजती है | |
| शहनाई | कुचामनी और शेखावाटी ख्याल | घूमर के साथ भी बजती है |
| बाँकिया | गैर | जुलूसों और समारोहों में बजता है; गैर में ढोल और थाली के साथ |
अवनद्ध वाद्य (चमड़े से मढ़े)
| वाद्य | बजाने वाले | विशेषता |
|---|---|---|
| ढोल | गैर और घूमर | बड़ा, दोनों ओर मढ़ा; लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है |
| ढोलक | मांगणियार और लंगा सहित अनेक | दोनों ओर मढ़ी; दोनों हाथों से, प्रायः बैठकर बजाई जाती है |
| नगाड़ा | गींदड़; हेला ख्याल (बम, बड़ा नगाड़ा) | बड़े नगाड़े खड़े होकर बड़े डंडों से, छोटे जोड़ी में बैठकर बजते हैं; पहले युद्ध का वाद्य था |
| चंग | शेखावाटी की होली; तुर्रा कलंगी ख्याल | चंग नृत्य में हर नर्तक एक चंग बजाता है |
| डफ | चारबैत के गायक | बालकों के 'ढप के गीत' इसी के नाम पर हैं |
| खंजरी | कालबेलिया; जोगी | |
| मांदल | गवरी में भील |
घन वाद्य (ठोस)
| वाद्य | बजाने वाले | विशेषता |
|---|---|---|
| खड़ताल (खरताल) | मांगणियार | लकड़ी की चार पतली पट्टियाँ, दोनों हाथों में दो-दो, नृत्य जैसी झूमती मुद्रा में बजाई जाती हैं |
| मोरचंग | लंगा | लोहे का छोटा वाद्य, जिसे दाँतों के बीच दबाकर उसकी जीभ उँगली से छेड़ी जाती है; मुँह गूँज का काम करता है |
| मंजीरा | कामड़; जोगी | धातु की छोटी झाँझें |
| थाली | गैर और गवरी | धातु की थाली, जिसे घंटे की तरह बजाया जाता है |
| चिमटा | रम्मत की मंडलियाँ; जोगी |
गायक जातियाँ और गायन शैलियाँ
- मांगणियारमरुस्थल के वंशानुगत संगीतकारक्षेत्र और आश्रयदाताजैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र; अधिकतर हिंदू आश्रयदाताविशेषतामुसलमान, जो प्रस्तुति से पहले कृष्ण की प्रार्थना करते हैं; पुराने शासकों और युद्धों के गीतपूरे नोट्स पढ़ें →
- लंगासिंधी सिपाहियों के गायकक्षेत्र और आश्रयदाताजैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र; आश्रयदाता सिंधी सिपाहीविशेषताआश्रयदाताओं के हर संस्कार में गाते हैं और विवाह में बारात को वधू के घर ले जाते हैंपूरे नोट्स पढ़ें →
- जोगीकथा-गायकक्षेत्र और आश्रयदाताबांदा गाँव (सवाई माधोपुर); मेवात क्षेत्र (अलवर अंचल) के जोगीविशेषताशिव-पार्वती, भरथरी, गोपीचंद और रामदेव की कथाएँ घेरे में बैठकर जोगिया सारंगी के साथ गाते हैं
- कामड़रामदेवजी के भक्तक्षेत्र और आश्रयदातारामदेवजी के मेले और उत्सवविशेषतास्त्रियाँ तेरहताली करती हैं; पुरुष मंजीरा, तानपुरा और चौतारा बजाते हैं
- ढोली, मिरासी, ढाढी आदिव्यावसायिक संगीत जातियाँक्षेत्र और आश्रयदातासंगीत को व्यवसाय के रूप में अपनाने वाली जातियाँविशेषताख्याल और ठुमरी की तरह छोटी तानों से सजे गीत, जिनमें माँड, देस, सोरठ और मारू जैसे रागों की छाया है
- माँडपधारो म्हारे देसक्षेत्र और आश्रयदाताबीकानेर की अल्लाह जिल्लाई बाई (पद्मश्री, 1982)विशेषताउनका गाया यह गीत पर्यटकों को खुला निमंत्रण है
लोक गीत
| प्रकार | गीत | कब और कहाँ |
|---|---|---|
| संस्कार | बना-बनी, बिंदोला, घोड़ी, जला, मायरा, हल्दी; जन्म पर जच्चा | विवाह और जन्म पर; अधिकतर स्त्रियाँ गाती हैं |
| त्योहार | खेलण दो गणगौर; तीज के गीत; घूमर गीत 'म्हारी घूमर छे नखराली' | गणगौर, तीज और होली; होली पर पुरुषों की टोलियाँ रसिया, होरी और धमाल गाती हैं |
| ऋतुएँ | फाग, बीजण, शियाळा, बारहमासा, चेती, कजली, जाड़ा; सावन के गीत चौमासा, पपैयो, बदली, मोर | शरद, ग्रीष्म, वर्षा और बसंत; इंद्रदेव की स्तुति |
| वस्तुएँ और भाव | इंडोणी, कांगसियो, गोरबंद, पणिहारी, लूर, ओळूँ, सुपणा, हिचकी, काजलिया, कागा | आकांक्षाएँ और भाव प्रकृति या वस्तुओं के माध्यम से |
| मरुस्थल | कुरजाँ, पीपली, रतन राणो, मूमल, घूघरी, केवड़ा | बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और जोधपुर |
| मेवाड़ और दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र | पटेल्या, बीछियो, लालर, माछर, नोखीला, थारी ऊँटा री असवारी, नावरी असवारी, शिकार; हमसीढ़ो | भील, मीणा, गरासिया और सहरिया क्षेत्र; हमसीढ़ो उत्तरी मेवाड़ के भीलों में स्त्री-पुरुष मिलकर गाते हैं |
| देवी-देवता और संत | तेजाजी, देवजी, पाबूजी, गोगाजी और जुझारजी के भजन; मीरा, कबीर, दादू और रैदास के पद; कैला देवी के लांगुरिया | लांगुरिया करौली में बहुत लोकप्रिय; भरतपुर और कामाँ में कृष्ण-लीला के गीत |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- मोरचंग का वर्गसंस्कृति मंत्रालय के इंडियन कल्चर पोर्टल पर घन वाद्य, और राजस्थान पर्यटन इसे ताल-वाद्यों में गिनता है; कई परीक्षा-पुस्तकें इसे सुषिर बताती हैं।
- भपंग का वर्गपरीक्षा-पुस्तकें इसे तत वाद्य बताती हैं; राजस्थान पर्यटन और सहपीडिया इसे ताल-वाद्य ('बोलता ढोल') कहते हैं।
- कामायचा या सिंधी सारंगीकामायचा, मांगणियार · सिंधी सारंगी, लंगा।
- दंगलटोंक का चारबैत और मेवाड़ का तुर्रा कलंगी ख्याल, दोनों संगीत दंगल के रूप में खेले जाते हैं।
- मेवाड़ या मरु के गीतबीछियो, लालर, नोखीला और शिकार (एक प्रश्न-पत्र में 'शिखर') मेवाड़ के गीत हैं · कुरजाँ, मूमल और पीपली मरु क्षेत्र के।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 20
निम्नलिखित में से कौन सा वाद्य यंत्र बाकी तीन से अलग है?
- (1)खड़ताल
- (2)मशक
- (3)शहनाई
- (4)अलगोज़ा
उत्तर देखें
✓ (1) खड़ताल
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 128
लोक वाद्ययंत्र 'चौतारा' के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प चुनिए : A. यह चार तारों वाला वाद्ययंत्र है । B. यह सामान्यतः रामदेवजी के भजन गाने में प्रयुक्त होता है ।
- (1)केवल A सत्य है ।
- (2)केवल B सत्य है ।
- (3)A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4)A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर देखें
✓ (3) A और B दोनों सत्य हैं ।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 25
बिछियौ, लालर, नोखिला और शिखर राजस्थान के _________ हैं।
- (1)लोक नाटक
- (2)लोक गीत
- (3)लोक नृत्य
- (4)वाद्ययंत्र
उत्तर देखें
✓ (2) लोक गीत
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