एक नज़र में
- चिश्ती सिलसिला: मोइनुद्दीन चिश्ती ने इसे भारत में स्थापित किया; वे इसके संस्थापक नहीं थे।
- अकबर ने अजमेर की दरगाह की बार-बार यात्रा की, कुछ बार पैदल: सामान्य गणना में चौदह बार, यद्यपि एक नए अध्ययन के अनुसार 1562 से 1579 के बीच 17 बार।
- हमीदुद्दीन सूफी नागौरी ने नागौर में शाकाहार जैसी हिंदू जीवन-शैली अपनाई।
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती
| उपाधि | ख्वाजा गरीब नवाज़ |
|---|---|
| स्थान | अजमेर में बसे; उनकी दरगाह अजमेर शरीफ है |
| देहांत | संभवतः 1236 ई., अजमेर में |
| उत्तराधिकारी | कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी |
हमीदुद्दीन सूफी नागौरी
| उपाधि | सुल्तान-उत-तारीकीन, मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा दी गई |
|---|---|
| सिलसिला | चिश्ती; मोइनुद्दीन चिश्ती के शिष्य |
| जीवन | नागौर से लगभग 2 किमी दूर सुवाल गाँव में खेती की, और नागौर के हाकिम द्वारा दिया गया धन और भूमि लेने से मना कर दिया |
| देहांत | 1274 ई.; मजार नागौर में |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- दो हमीदुद्दीन नागौरीहमीदुद्दीन सूफी नागौरी, चिश्ती, मोइनुद्दीन के शिष्य, मजार नागौर में · काज़ी हमीदुद्दीन नागौरी, सुहरावर्दी सिलसिले के, मजार महरौली, दिल्ली में (CET स्नातक 2022)।
- सुल्तान-उत-तारीकीनहमीदुद्दीन सूफी नागौरी, न कि मोइनुद्दीन चिश्ती, बख्तियार काकी या बाबा फरीद (संरक्षण अधिकारी 2024)।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 34
साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतीक, काज़ी हमीदुद्दीन नागौरी, किस सूफी सिलसिले के थे?
- (1)चिश्ती
- (2)कादिरी
- (3)मगरिबी
- (4)सुहरावर्दी
उत्तर देखें
✓ (4) सुहरावर्दी
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 35
निम्नलिखित में से किस सूफी संत को 'सुल्तान–उत–तरीकीन' कहा जाता है?
- (1)हमीदुद्दीन नागौरी
- (2)बख्तियार काकी
- (3)मोइनुद्दीन चिश्ती
- (4)बाबा फरीद
उत्तर देखें
✓ (1) हमीदुद्दीन नागौरी
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