एक नज़र में
- अग्नि नृत्य: संप्रदाय के सिद्ध पुरुष धधकते अंगारों पर नाचते हैं (RAS प्रारंभिक 2023)।
- तपस्या: लोक-विश्वास के अनुसार उन्होंने गोरखमालिया (बीकानेर) में बारह वर्ष तपस्या की।
- कतरियासर के मेले: आश्विन शुक्ल सप्तमी, माघ शुक्ल सप्तमी और चैत्र शुक्ल सप्तमी।
तथ्य
| जन्म | 1482 ई., कतरियासर (बीकानेर) में |
|---|---|
| पालन-पोषण | हमीरजी जाणी (जाट) और उनकी पत्नी रूपांदे ने पोष्य पुत्र के रूप में किया |
| समाधि | आश्विन शुक्ल सप्तमी, 1506 ई. को कतरियासर में, 24 वर्ष की आयु में जीवित समाधि |
| नियम | 36 |
| ग्रंथ | सिंभूधड़ा और कोंडा, जिनमें उनके उपदेश संकलित हैं |
लोककथा और परंपरा
- परंपरा के अनुसार उन्होंने लोह पांगल नामक तांत्रिक का घमंड तोड़ा, राव लूणकरण को बीकानेर का राज्य पाने का वरदान दिया, और सुल्तान सिकंदर लोदी ने उन्हें कतरियासर के पास भूमि दी।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- एक क्षेत्र, दो प्रवर्तकजसनाथजी कतरियासर में · जाम्भोजी मुकाम में; दोनों का मिलन 1500 ई. में हुआ।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 128
राजस्थान में किस संप्रदाय के पुरुषों द्वारा अग्नि नृत्य किया जाता है ?
- (1)बिश्नोई संप्रदाय
- (2)रामस्नेही संप्रदाय
- (3)जसनाथी सिद्ध
- (4)दादू पंथ
उत्तर देखें
✓ (3) जसनाथी सिद्ध
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