एक नज़र में
- जन्म खड़नाल (नागौर) में माघ शुक्ल चतुर्दशी, 1073 ई. को (RBSE पुस्तक; कला एवं संस्कृति विभाग के अनुसार वि.सं. 1130)।
- धौलिया गोत्र के जाट; पिता ताहड़जी, माता रामकुंवरी।
- पत्नी पेमल को लेने ससुराल पनेर गए और वहाँ लाछा गूजरी की गायें लुटेरों से छुड़ाईं।
- सर्प को दिया वचन निभाकर जीभ आगे की; भाद्रपद शुक्ल दशमी को सुरसुरा (किशनगढ़) में देहांत।
- तेजा दशमी (भाद्रपद शुक्ल दशमी): परबतसर में विशाल पशु मेला।
- सर्पदंश की मान्यता: पीड़ित के दाएँ पैर में तेजाजी की तांत (डोरी) बाँधने से विष नहीं चढ़ता।
- तलवार लिए घुड़सवार के रूप में, जिनकी जीभ को सर्प डस रहा है; घोड़ी लीलण। पंच पीरों में नहीं।
तथ्य
| जन्म स्थान | खड़नाल गाँव, नागौर |
|---|---|
| जन्म तिथि | माघ शुक्ल चतुर्दशी, 1073 ई. (वि.सं. 1130, कला एवं संस्कृति विभाग) |
| माता-पिता | ताहड़जी और रामकुंवरी |
| जाति | जाट, धौलिया गोत्र |
| पत्नी | पेमल, पनेर की |
| देहांत | सुरसुरा (किशनगढ़), भाद्रपद शुक्ल दशमी; कला एवं संस्कृति विभाग के अनुसार वि.सं. 1160 (1103 ई.) |
| मेला | तेजा दशमी, भाद्रपद शुक्ल दशमी; परबतसर में विशाल पशु मेला |
| वाहन और प्रतीक | घोड़ी लीलण; तलवार लिए घुड़सवार, जिनकी जीभ को सर्प डस रहा है |
| उपनाम | नागों के देवता; गौ-रक्षक |
जीवन और लोक-कथा
लोक-कथा के अनुसार तेजाजी पत्नी पेमल को लेने ससुराल पनेर गए थे। उसी दिन लुटेरे लाछा गूजरी की गायें ले गए और गूजरी की प्रार्थना पर तेजाजी उनके पीछे निकले।
रास्ते में एक सर्प उन्हें डसने लगा। तेजाजी ने वचन दिया कि गायें छुड़ाकर वे स्वयं लौटेंगे। भीषण संघर्ष के बाद गायें छुड़ाईं और घायल होने पर भी वचन के अनुसार सर्प के पास लौटे। पूरे शरीर पर घाव होने के कारण उन्होंने डसने के लिए जीभ आगे कर दी और भाद्रपद शुक्ल दशमी को सुरसुरा में सर्पदंश से उनकी मृत्यु हुई।
पूजा और मेला
- तेजा दशमी (भाद्रपद शुक्ल दशमी): परबतसर (तब नागौर ज़िला, अब डीडवाना-कुचामन) में विशाल पशु मेला लगता है।
- सर्पदंश पीड़ित के दाएँ पैर में तेजाजी की तांत (डोरी) बाँधी जाती है; मान्यता है कि इससे विष नहीं चढ़ता।
- भारतीय डाक ने सितंबर 2011 में वीर तेजाजी पर डाक टिकट जारी किया।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- तेजाजीखड़नाल (जन्म), सुरसुरा (देहांत), परबतसर (मेला), तेजा दशमी। गोगाजी: ददरेवा, गोगामेड़ी, गोगानवमी।
- तेजाजी जाट हैं; गोगाजी चौहान राजपूत।
- जन्म 1073 ई. (वि.सं. 1130); देहांत 1103 ई. (वि.सं. 1160)। इन्हें आपस में न बदलें।
- तेजाजी पंच पीरों में नहीं हैं।
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