एक नज़र में
- बगड़ावत प्रमुख भोजा (सवाई भोज) और सेढ़ू के पुत्र; RBSE पुस्तक उनका समय लगभग 1243 ई. बताती है, जबकि परंपरा के अनुसार उनका जन्म 1,100 वर्ष से भी पहले हुआ (2023 में उनका 1111वाँ अवतरण महोत्सव मनाया गया)।
- उनके जन्म से पहले ही पिता अपने 23 भाइयों सहित भिनाय के शासक से संघर्ष में मारे गए; बाद में गायों को लेकर हुए संघर्ष में देवजी ने भिनाय ठाकुर को मार दिया।
- पत्नी: पीपलदे, धारा नगरी के जयसिंह देव परमार की पुत्री।
- मुख्य स्थान: आसींद (भीलवाड़ा); मेला भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को।
- जन्मदिन: माघ शुक्ल षष्ठी (RPSC कुंजी, प्रोटेक्शन ऑफिसर 2024)।
- भोपे 'देवजी की फड़' और काव्य 'बगड़ावत' गाते हैं; उनकी फड़ जंतर पर गाई जाती है। डाक टिकट: 2 सितंबर 1992।
- जनवरी 2023 में मालासेरी डूंगरी (भीलवाड़ा) में, जिसे उनका जन्मस्थान माना जाता है, उनका 1111वाँ अवतरण महोत्सव मनाया गया।
तथ्य
| जन्म | RBSE पुस्तक के अनुसार लगभग 1243 ई.; परंपरा के अनुसार 1,100 वर्ष से भी पहले (2023 में 1111वाँ अवतरण महोत्सव)। मालासेरी डूंगरी, भीलवाड़ा जन्मस्थान के रूप में पूज्य |
|---|---|
| माता-पिता | भोजा (सवाई भोज) बगड़ावत और सेढ़ू |
| पत्नी | पीपलदे, धारा नगरी के जयसिंह देव परमार की पुत्री |
| समुदाय | गुर्जर; बगड़ावत वंश |
| मुख्य स्थान | आसींद (भीलवाड़ा), सवाई भोज मंदिर |
| अन्य धाम | देवधाम जोधपुरिया (टोंक) |
| मेला | भाद्रपद शुक्ल सप्तमी, आसींद में |
| जन्मदिन | माघ शुक्ल षष्ठी (RPSC कुंजी) |
| वाद्य | जंतर |
| उपनाम | देवजी; विष्णु के अवतार (भक्तों की मान्यता) |
जीवन और लोक-कथा
RBSE पुस्तक के अनुसार देवनारायण के जन्म से पहले ही उनके पिता, बगड़ावत प्रमुख भोजा, अपने तेईस भाइयों सहित भिनाय के शासक से संघर्ष में मारे गए। बालक की रक्षा के लिए माँ सेढ़ू उन्हें लेकर पीहर मालवा चली गईं। लगभग दस वर्ष की आयु में पिता की मृत्यु का बदला लेने लौटते समय उन्होंने धारा नगरी में पीपलदे से विवाह किया और बाद में गायों को लेकर हुए संघर्ष में भिनाय ठाकुर को मार दिया।
RPSC की कुंजी (प्रोटेक्शन ऑफिसर 2024) यह कथन सही मानती है कि देवजी ने भिनाय के ठाकुर से गायें छुड़ाईं और अपना पैतृक गाँव पुनः बसाया।
पूजा और मेला
- उनका मुख्य पूजा स्थल आसींद (भीलवाड़ा) है, जहाँ भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को मेला लगता है।
- उनके मुख्य अनुयायी गुर्जर हैं, जो 'देवजी की फड़' और काव्य 'बगड़ावत' के गायन से उनका यशोगान करते हैं; किंवदंती है कि हर रात तीन पहर गाने पर यह छह माह में पूरा होता है।
- फड़ भोपे गाते हैं; पर RPSC कुंजी यह नहीं मानती कि उनके मंदिरों के पुजारी 'हमेशा विवाहित गुर्जर' ही होते हैं।
- 28 जनवरी 2023 को प्रधानमंत्री मालासेरी डूंगरी (भीलवाड़ा) में उनके 1111वें अवतरण महोत्सव में शामिल हुए।
फड़ और जंतर
- देवनारायण की फड़ भोपे जंतर पर गाते हैं; फड़ की प्रार्थना के समय भी जंतर बजाया जाता है।
- भारतीय डाक ने 2 सितंबर 1992 को देवनारायण की फड़ पर डाक टिकट जारी किया।
- पाबूजी की फड़ की तरह इसे भी शाहपुरा और भीलवाड़ा के जोशी चितेरे बनाते हैं।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- देवनारायणजी का वाद्य जंतर है; पाबूजी का रावणहत्था।
- RPSC कुंजी के अनुसार जन्मदिन माघ शुक्ल षष्ठी (कुछ स्रोतों में सप्तमी); आसींद का मेला भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को, जो अलग अवसर है।
- भिनाय वह स्थान है जहाँ बगड़ावत लड़े; उनका मुख्य स्थान आसींद है।
- सवाई भोज उनके पिता का नाम है और आसींद के मंदिर का नाम भी।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
संरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 2
देवनारायण जी से संबंधित गलत कथन को पहचानिए -
- (1)देवजी ने भिनाय के ठाकुर से गायों को छुड़ाया और अपने पैतृक गाँव को पुनः बसाया।
- (2)देवजी का जन्मदिन माघ माह की शुक्ल पक्ष के छठे दिन को मनाया जाता है।
- (3)देवजी के मंदिरों के पुजारी हमेशा विवाहित गुर्जर होते हैं।
- (4)देवजी के कृत्यों की प्रशंसा में ये भोपे 'देवजी की फड़' गाते हैं।
उत्तर देखें
✓ (3) देवजी के मंदिरों के पुजारी हमेशा विवाहित गुर्जर होते हैं।
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