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जैसलमेर दुर्ग (सोनार किला)

जैसलमेर का सोनार किला थार के किनारे त्रिकूट पहाड़ी पर बना है और आज भी उसमें लोग रहते हैं।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. प्रकार: धान्वन (मरुस्थलीय) दुर्ग, और चारों ओर के परकोटे के कारण पारिध दुर्ग।
  2. कहावत: पत्थर के पैर, लोहे का शरीर और काठ के घोड़े पर सवार होकर ही जैसलमेर पहुँचा जा सकता है।
  3. निर्माण: चूने के बिना बड़े-बड़े पीले पत्थर जोड़कर बना; दूर से लंगर डाले जहाज़ जैसा दिखता है।

तथ्य

स्थानजैसलमेर, त्रिकूट पहाड़ी पर
नामसोनार किला, स्वर्ण दुर्ग, पीले बलुआ पत्थर के रंग के कारण
निर्माताभाटी शासक रावल जैसल; 1155 ई. (कुछ विवरणों में 1156)
बुर्ज99
जीवित किलापुराने शहर की लगभग एक-चौथाई आबादी भीतर रहती है; दुकानें, हवेलियाँ और मंदिर भी हैं

दुर्ग के भीतर

  • जैन मंदिर: पीले बलुआ पत्थर के सात, 12वीं से 16वीं सदी के, जिनमें ऋषभदेव, पार्श्वनाथ और संभवनाथ के मंदिर हैं।
  • महल: रंग महल, मोती महल, गज विलास और जवाहर विलास।
  • दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों का संग्रह।

फिल्म और साहित्य में

सत्यजित राय ने फेलूदा की कहानी 'सोनार केल्ला' इसी दुर्ग पर लिखी और यहीं उसकी फिल्म बनाई।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • सोनार किला या सोनार केल्लासोनार किला दुर्ग है · सोनार केल्ला सत्यजित राय की उस पर आधारित कहानी और फिल्म है।

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