एक नज़र में
- दर्जा: चित्तौड़गढ़ के बाद मेवाड़ का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण दुर्ग।
- अबुल फज़ल: यह इतनी ऊँचाई पर है कि नीचे से ऊपर देखने पर सिर से पगड़ी गिर जाती है।
- कर्नल टॉड ने इसकी प्राचीरों और बुर्जों की तुलना एट्रस्कन स्थापत्य से की।
- एक बार विजय: 1578 में अकबर के सेनापति शाहबाज़ खाँ ने, जब पीने का पानी कम पड़ गया।
तथ्य
| स्थान | कुंभलगढ़, राजसमंद; उदयपुर से लगभग 84 किमी |
|---|---|
| निर्माता | राणा कुंभा, 15वीं सदी; प्रमुख शिल्पी मंडन |
| दीवार | लगभग 36 किमी लंबी, इतनी चौड़ी कि आठ घुड़सवार साथ चल सकें |
| द्वार | सात |
| घटनाएँ | बनवीर द्वारा विक्रमादित्य की हत्या के बाद बालक उदयसिंह को यहीं आश्रय मिला; यहीं उदयसिंह का राज्याभिषेक हुआ और महाराणा प्रताप का जन्म हुआ |
| परिवेश | अरावली की पहाड़ियाँ, कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के भीतर |
दुर्ग के भीतर
- कटारगढ़: दुर्ग के ऊपरी छोर पर राणा कुंभा का निवास।
- नीलकंठ महादेव मंदिर: 1458 में बना; चारों ओर से प्रवेश वाला सर्वतोभद्र मंदिर।
- गोलेराव जैन मंदिर: नौ मंदिरों का समूह।
- अन्य: झालीबाव बावड़ी, कुंभस्वामी विष्णु मंदिर और उड़ना राजकुमार (पृथ्वीराज) की छतरी।
- महाराणा फतहसिंह ने 19वीं सदी में दुर्ग की मरम्मत करवाई।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- चित्तौड़गढ़ या कुंभलगढ़विजय स्तंभ और तीन साके चित्तौड़गढ़ के · लंबी दीवार और प्रताप का जन्म कुंभलगढ़ के।
- बादल महलकुंभलगढ़ का 'बादलों का महल', दुर्ग के सबसे ऊँचे स्थान पर · जैसलमेर का पाँच मंज़िला बादल महल, जिसकी मीनार ताज़िये के आकार की है।
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