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रणथंभौर दुर्ग

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित चौहानों का दुर्ग है, जो 1301 में हम्मीर देव के अंतिम युद्ध के लिए याद किया जाता है।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. 1301: हम्मीर देव चौहान ने अलाउद्दीन खिलजी की सेना के विद्रोही मंगोलों को शरण दी थी और उन्हें सौंपने से मना किया; वे लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और उनके परिवार की स्त्रियों ने जौहर किया।
  2. प्रकार: इसमें गिरि दुर्ग और वन दुर्ग दोनों की विशेषताएँ हैं।
  3. अबुल फज़ल ने इसे 'बख्तरबंद' दुर्ग कहा।

तथ्य

स्थानसवाई माधोपुर के पास, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के भीतर
निर्माताअजमेर के चौहान: RBSE पुस्तक में 8वीं सदी (एक मान्यता के अनुसार रणथान देव चौहान); अन्य विवरणों में 10वीं सदी का मध्य

दुर्ग के भीतर

  • हम्मीर महल, रानी महल, हम्मीर की कचहरी, सुपारी महल और जोगी महल।
  • 32 खंभों की छतरी।
  • त्रिनेत्र गणेश मंदिर और पीर सदरुद्दीन की दरगाह।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • अलाउद्दीन के घेरेरणथंभौर 1301, हम्मीर देव · चित्तौड़गढ़ 1303, रतनसिंह।

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