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दिलवाड़ा एवं रणकपुर के जैन मंदिर

माउंट आबू का दिलवाड़ा और पाली का रणकपुर राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध जैन मंदिर हैं, दोनों सफेद संगमरमर में तराशे गए।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. देवता: प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) विमल वसही, पित्तलहर और रणकपुर में; नेमिनाथ (22वें) लूण वसही में; पार्श्वनाथ (23वें) और महावीर स्वामी (24वें) शेष दो में।
  2. शैली: दिलवाड़ा राजस्थान-गुजरात की सोलंकी (चालुक्य) शिल्प शैली का प्रमुख उदाहरण है।
  3. वर्तनी: रणकपुर के निर्माता का नाम धरणाशाह, धरणीशाह या धरणकशाह भी लिखा मिलता है।

दिलवाड़ा, माउंट आबू

स्थानमाउंट आबू, सिरोही जिला, नगर से लगभग 2.5 किमी
मंदिरपाँच: विमल वसही, लूण वसही, पित्तलहर, पार्श्वनाथ एवं महावीर स्वामी
काल11वीं से 16वीं शताब्दी
मंदिरनिर्माता एवं कालविशेष
विमल वसहीविमल शाह; 1031 ई. (कुछ विवरणों में 1026 ई.)पाँचों में सबसे पुराना
लूण वसहीवस्तुपाल एवं तेजपाल; 1230 ई.देवरानी-जेठानी के आले
पित्तलहरभीमाशाहआदिनाथ की धातु प्रतिमा, जिसका भार 108 मन बताया जाता है
पार्श्वनाथमंडलिक; 15वीं शताब्दीतीन मंज़िला
महावीर स्वामी

रणकपुर

स्थानरणकपुर, सादड़ी के पास, पाली जिला
मुख्य मंदिरचौमुखा मंदिर, आदिनाथ की चार मुख वाली प्रतिमा
निर्माताजैन व्यापारी धरणीशाह
शासकमहाराणा कुंभा (1433–1468 ई.), जिनके संरक्षण में निर्माण हुआ
स्तंभ1,444, इसलिए 'खंभों का अजायबघर' कहलाता है
शिल्पीदीपक (देपाक)
परिसर में अन्यसूर्य (सूर्यनारायण) मंदिर

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • पित्तलहरआदिनाथ प्रतिमा के पीतल के कारण यह नाम · निर्माता भीमाशाह, विमल शाह नहीं।
  • चौमुखारणकपुर का मुख्य मंदिर चार मुख वाला · दिलवाड़ा के पार्श्वनाथ मंदिर में भी चौमुखी प्रतिमाएँ हैं।
  • संरक्षकविमल शाह चालुक्य (सोलंकी) राजा भीमदेव प्रथम के मंत्री · वस्तुपाल-तेजपाल वाघेला शासक वीरधवल के मंत्री (RajRAS: भीमदेव द्वितीय)।

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