एक नज़र में
- देवता: प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) विमल वसही, पित्तलहर और रणकपुर में; नेमिनाथ (22वें) लूण वसही में; पार्श्वनाथ (23वें) और महावीर स्वामी (24वें) शेष दो में।
- शैली: दिलवाड़ा राजस्थान-गुजरात की सोलंकी (चालुक्य) शिल्प शैली का प्रमुख उदाहरण है।
- वर्तनी: रणकपुर के निर्माता का नाम धरणाशाह, धरणीशाह या धरणकशाह भी लिखा मिलता है।
दिलवाड़ा, माउंट आबू
| स्थान | माउंट आबू, सिरोही जिला, नगर से लगभग 2.5 किमी |
|---|---|
| मंदिर | पाँच: विमल वसही, लूण वसही, पित्तलहर, पार्श्वनाथ एवं महावीर स्वामी |
| काल | 11वीं से 16वीं शताब्दी |
| मंदिर | निर्माता एवं काल | विशेष |
|---|---|---|
| विमल वसही | विमल शाह; 1031 ई. (कुछ विवरणों में 1026 ई.) | पाँचों में सबसे पुराना |
| लूण वसही | वस्तुपाल एवं तेजपाल; 1230 ई. | देवरानी-जेठानी के आले |
| पित्तलहर | भीमाशाह | आदिनाथ की धातु प्रतिमा, जिसका भार 108 मन बताया जाता है |
| पार्श्वनाथ | मंडलिक; 15वीं शताब्दी | तीन मंज़िला |
| महावीर स्वामी |
रणकपुर
| स्थान | रणकपुर, सादड़ी के पास, पाली जिला |
|---|---|
| मुख्य मंदिर | चौमुखा मंदिर, आदिनाथ की चार मुख वाली प्रतिमा |
| निर्माता | जैन व्यापारी धरणीशाह |
| शासक | महाराणा कुंभा (1433–1468 ई.), जिनके संरक्षण में निर्माण हुआ |
| स्तंभ | 1,444, इसलिए 'खंभों का अजायबघर' कहलाता है |
| शिल्पी | दीपक (देपाक) |
| परिसर में अन्य | सूर्य (सूर्यनारायण) मंदिर |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- पित्तलहरआदिनाथ प्रतिमा के पीतल के कारण यह नाम · निर्माता भीमाशाह, विमल शाह नहीं।
- चौमुखारणकपुर का मुख्य मंदिर चार मुख वाला · दिलवाड़ा के पार्श्वनाथ मंदिर में भी चौमुखी प्रतिमाएँ हैं।
- संरक्षकविमल शाह चालुक्य (सोलंकी) राजा भीमदेव प्रथम के मंत्री · वस्तुपाल-तेजपाल वाघेला शासक वीरधवल के मंत्री (RajRAS: भीमदेव द्वितीय)।
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