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राव मालदेव

मालदेव ने मारवाड़ का हर दिशा में विस्तार किया, फिर कुछ समय के लिए जोधपुर शेरशाह के हाथों गँवाया।

⏱ 2 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. पाठ्यक्रम में नाम: स्कूल व्याख्याता और टीचिंग एसोसिएट पाठ्यक्रमों में मालदेव मुस्लिम शक्ति का प्रतिरोध करने वाले शासकों में गिने गए हैं।
  2. गांगा की मृत्यु: गांगा महल के झरोखे से गिरे; ओझा लिखते हैं कि मालदेव ने उन्हें धक्का दिया, रेऊ इसे दुर्घटना बताते हैं।
  3. हुमायूँ: शेरशाह से हारने के बाद हुमायूँ ने मालदेव से सहायता चाही, पर मारवाड़ छोड़कर चला गया।

तथ्य

पिताराव गांगा
राज्यारोहणRBSE पुस्तक में 1531; रेऊ के अनुसार 5 जून 1531 (वि.सं. 1588 आषाढ़ वदि 5); ओझा गांगा की मृत्यु, अतः राज्यारोहण, 1532 में बताते हैं
मृत्यु1562
पुत्रराम (ज्येष्ठ), उदयसिंह और चन्द्रसेन आदि; चन्द्रसेन उत्तराधिकारी बने

युद्ध

  • खानवा, 1527: पिता के शासनकाल में राणा सांगा की ओर से लड़े (मेवाड़ पृष्ठ)।
  • मेड़ता: मेड़ता के वीरमदेव को निकाला, जो शेरशाह के पास चले गए।
  • बीकानेर: उनकी सेना ने साहेबा (1541 या 1542; राठौड़ पृष्ठ देखें) में राव जैतसी को मारा और बीकानेर लिया। जैतसी के मंत्री नगराज सहायता के लिए शेरशाह के पास गए थे।
  • गिरि-सुमेल, जनवरी 1544: शेरशाह के जाली पत्रों से मालदेव को अपने सरदारों पर संदेह हुआ; वे पीछे हटे और सेनापति जैता व कुम्पा लड़ते हुए मारे गए। शेरशाह ने कहा कि मुट्ठी भर बाजरे के लिए वह हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता। इसके बाद शेरशाह ने जोधपुर लिया।
  • शेरशाह की मृत्यु (1545) के बाद मालदेव ने जोधपुर और मारवाड़ का बड़ा भाग फिर जीता।
  • हरमाड़ा (अजमेर के पास), वि.सं. 1612 फाल्गुन वदि 9 (24 जनवरी 1557): हाजी खाँ की सहायता को भेजी गई उनकी सेना ने मेवाड़ के राणा उदयसिंह की सेना को हराया।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • मालदेव, चन्द्रसेनमालदेव ने जोधपुर शेरशाह के हाथों खोया (1544) · उनके पुत्र चन्द्रसेन ने अकबर की सेना के हाथों।
  • जैता और कुम्पागिरि-सुमेल में मालदेव के सेनापति · चित्तौड़ (1567–68) के जयमल और फत्ता नहीं।

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