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दुर्गादास राठौड़

1678 में जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद दुर्गादास शिशु अजीतसिंह को मुगलों की पहुँच से बाहर ले गए और मारवाड़ के प्रतिरोध का नेतृत्व किया।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. शिशु की रक्षा: दुर्गादास और अन्य सरदार शिशु अजीतसिंह को दिल्ली से निकाल लाए। रेऊ के अनुसार उन्हें सिरोही के कालिंद्री गाँव में पुरोहित जयदेव की पत्नी के पास छिपाया गया; ओझा के अनुसार पहले मेवाड़ के महाराणा राजसिंह ने उन्हें शरण दी और 12 गाँवों सहित केलवा का पट्टा दिया।
  2. मेवाड़ संबंध: मेवाड़ के राजसिंह ने राठौड़ों का साथ दिया, और औरंगजेब ने मेवाड़ पर आक्रमण किया (1679)।
  3. बहादुरशाह प्रथम: 1708 में अजीतसिंह को मनसब दिया पर जोधपुर का किला अपने पास रखा; 1710 में जोधपुर पर उनका अधिकार माना।

तथ्य

जन्म13 अगस्त 1638, सालवा में
पिताआसकरण राठौड़, मारवाड़ के सरदार
मृत्यु22 नवंबर 1718, उज्जैन में शिप्रा तट पर

संघर्ष

  • 1678–79: जसवंतसिंह की जमरूद में मृत्यु हुई और औरंगजेब ने मारवाड़ अपने सीधे शासन में ले लिया। पिता की मृत्यु के बाद अजीतसिंह का जन्म लाहौर में हुआ।
  • लगभग तीस वर्ष तक राठौड़ दल मारवाड़ में मुगलों से लड़ते रहे।
  • औरंगजेब की मृत्यु (1707) के बाद अजीतसिंह ने जोधपुर ले लिया।
  • अजीतसिंह से अनबन के बाद दुर्गादास मारवाड़ छोड़ गए और अंतिम वर्ष उज्जैन में बिताए।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • दो अकबरबादशाह अकबर चन्द्रसेन से लड़ा · औरंगजेब के पुत्र शहजादा अकबर ने विद्रोह कर दुर्गादास का साथ लिया (1681)।

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