एक नज़र में
- शिशु की रक्षा: दुर्गादास और अन्य सरदार शिशु अजीतसिंह को दिल्ली से निकाल लाए। रेऊ के अनुसार उन्हें सिरोही के कालिंद्री गाँव में पुरोहित जयदेव की पत्नी के पास छिपाया गया; ओझा के अनुसार पहले मेवाड़ के महाराणा राजसिंह ने उन्हें शरण दी और 12 गाँवों सहित केलवा का पट्टा दिया।
- मेवाड़ संबंध: मेवाड़ के राजसिंह ने राठौड़ों का साथ दिया, और औरंगजेब ने मेवाड़ पर आक्रमण किया (1679)।
- बहादुरशाह प्रथम: 1708 में अजीतसिंह को मनसब दिया पर जोधपुर का किला अपने पास रखा; 1710 में जोधपुर पर उनका अधिकार माना।
तथ्य
| जन्म | 13 अगस्त 1638, सालवा में |
|---|---|
| पिता | आसकरण राठौड़, मारवाड़ के सरदार |
| मृत्यु | 22 नवंबर 1718, उज्जैन में शिप्रा तट पर |
संघर्ष
- 1678–79: जसवंतसिंह की जमरूद में मृत्यु हुई और औरंगजेब ने मारवाड़ अपने सीधे शासन में ले लिया। पिता की मृत्यु के बाद अजीतसिंह का जन्म लाहौर में हुआ।
- लगभग तीस वर्ष तक राठौड़ दल मारवाड़ में मुगलों से लड़ते रहे।
- औरंगजेब की मृत्यु (1707) के बाद अजीतसिंह ने जोधपुर ले लिया।
- अजीतसिंह से अनबन के बाद दुर्गादास मारवाड़ छोड़ गए और अंतिम वर्ष उज्जैन में बिताए।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- दो अकबरबादशाह अकबर चन्द्रसेन से लड़ा · औरंगजेब के पुत्र शहजादा अकबर ने विद्रोह कर दुर्गादास का साथ लिया (1681)।
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