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थेवा

थेवा प्रतापगढ़ की, रंगीन काँच पर हाथ से काटी सोने की पत्ती जड़ने की कला है, जो सुनारों के एक ही परिवार में सिमटी रही।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. जयपुर नहीं: CET (सीनियर सेकेंडरी) 2024 में पूछा गया कि थेवा कहाँ की कला है; उत्तर प्रतापगढ़ है। जयपुर मीनाकारी और कुंदन के लिए जाना जाता है।
  2. गुप्त कला: इसे केवल राजसोनी परिवार के पुरुष करते हैं और यह पिता से पुत्र को मिलती है।
  3. सम्मान: प्रतापगढ़ के महेश राज सोनी को 2015 में पद्मश्री मिला।

तथ्य

स्थानप्रतापगढ़ नगर, प्रतापगढ़ जिला
कला23 कैरेट सोने की पत्ती पर हाथ से डिज़ाइन काटकर उसे रंगीन (बेल्जियम) काँच पर जड़ना
निर्मातास्वर्णकारों का राजसोनी परिवार
GIथेवा आर्ट वर्क: आवेदन 17.10.2011, प्रमाणपत्र 31.03.2014
डाक टिकट15 नवंबर 2002 को जारी हस्तशिल्प के चार टिकटों के सेट में ₹5 का एक टिकट

उत्पत्ति

परिवार की परंपरा के अनुसार नाथू सोनी नामक स्वर्णकार ने इस कला की शुरुआत की; वर्ष 1707 या 1767 बताया जाता है। कहा जाता है कि क्षेत्र के एक शासक ने उन्हें 'राजसोनी' (राज-सुनार) की उपाधि दी; विवरणों में शासक का नाम सावंत सिंह या सुमंत सिंह मिलता है।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • सोने की कारीगरीथेवा काँच पर सोना, प्रतापगढ़ · मीनाकारी सोने या चाँदी पर मीना, जयपुर · कोफ्तगिरी लोहे पर तार-जड़ाई, उदयपुर।
  • काँच दो शिल्पों मेंथेवा में रंगीन काँच पर सोना जड़ा जाता है · जयपुर की ब्लू पॉटरी के लोंदे में पिसा काँच मिलाया जाता है।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 104

राजस्थान में थेवा कला निम्न में से किस क्षेत्र से संबंधित है?

  1. (1)चूरू
  2. (2)जयपुर
  3. (3)प्रतापगढ़
  4. (4)झालावाड़
उत्तर देखें

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