एक नज़र में
- जयपुर नहीं: CET (सीनियर सेकेंडरी) 2024 में पूछा गया कि थेवा कहाँ की कला है; उत्तर प्रतापगढ़ है। जयपुर मीनाकारी और कुंदन के लिए जाना जाता है।
- गुप्त कला: इसे केवल राजसोनी परिवार के पुरुष करते हैं और यह पिता से पुत्र को मिलती है।
- सम्मान: प्रतापगढ़ के महेश राज सोनी को 2015 में पद्मश्री मिला।
तथ्य
| स्थान | प्रतापगढ़ नगर, प्रतापगढ़ जिला |
|---|---|
| कला | 23 कैरेट सोने की पत्ती पर हाथ से डिज़ाइन काटकर उसे रंगीन (बेल्जियम) काँच पर जड़ना |
| निर्माता | स्वर्णकारों का राजसोनी परिवार |
| GI | थेवा आर्ट वर्क: आवेदन 17.10.2011, प्रमाणपत्र 31.03.2014 |
| डाक टिकट | 15 नवंबर 2002 को जारी हस्तशिल्प के चार टिकटों के सेट में ₹5 का एक टिकट |
उत्पत्ति
परिवार की परंपरा के अनुसार नाथू सोनी नामक स्वर्णकार ने इस कला की शुरुआत की; वर्ष 1707 या 1767 बताया जाता है। कहा जाता है कि क्षेत्र के एक शासक ने उन्हें 'राजसोनी' (राज-सुनार) की उपाधि दी; विवरणों में शासक का नाम सावंत सिंह या सुमंत सिंह मिलता है।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- सोने की कारीगरीथेवा काँच पर सोना, प्रतापगढ़ · मीनाकारी सोने या चाँदी पर मीना, जयपुर · कोफ्तगिरी लोहे पर तार-जड़ाई, उदयपुर।
- काँच दो शिल्पों मेंथेवा में रंगीन काँच पर सोना जड़ा जाता है · जयपुर की ब्लू पॉटरी के लोंदे में पिसा काँच मिलाया जाता है।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 104
राजस्थान में थेवा कला निम्न में से किस क्षेत्र से संबंधित है?
- (1)चूरू
- (2)जयपुर
- (3)प्रतापगढ़
- (4)झालावाड़
उत्तर देखें
✓ (3) प्रतापगढ़
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