एक नज़र में
- CET 2022 का सुमेलन: अजरख–बाड़मेर, पावरलूम कपड़ों पर छपाई–बालोतरा, मोठड़ा–जोधपुर, मसूरिया–कैथून।
- GI: कोटा डोरिया, सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट और जोधपुर बंधेज पंजीकृत GI हैं।
- शाही कारखाने: सवाई जयसिंह के छत्तीस कारखानों में कपड़े सींवन खाना में सिले, रंगखाना में रँगे और छापाखाना में छापे जाते थे।
विधियाँ एवं कारीगर
| बाँधकर प्रतिरोध | रँगाई से पहले कपड़ा बाँधा जाता है: बंधेज (गाँठें), लहरिया (धारियाँ), मोठड़ा (कटती धारियाँ) |
|---|---|
| मिट्टी का प्रतिरोध | ठप्पों से दाबू (मिट्टी की लेई) छापकर रंग रोका जाता है: अकोला, बगरू |
| रँगाई करने वाले | रंगरेज और नीलगर |
| छपाई करने वाले | छीपा |
बाँधकर रँगा कपड़ा
| प्रकार | केंद्र | स्वरूप | याद रखें |
|---|---|---|---|
| बंधेज | जोधपुर; सीकर (शेखावाटी) | रँगाई से पहले कपड़े में छोटी-छोटी गाँठें बाँधना ('बद्ध' तकनीक); चुनरी इसका सबसे लोकप्रिय रूप है | जोधपुर की चुनरी के रंग चमकीले और टिकाऊ, बंधेज बारीक; सीकर के बंधेज की गिनती भी बारीक बंधेजों में होती है |
| लहरिया | जयपुर | एक ही दिशा में तिरछी धारियाँ, एक, दो, तीन, पाँच या सात रंगों में | |
| मोठड़ा | जोधपुर | तिरछी धारियाँ जो दोनों ओर से एक-दूसरे को काटती हैं | |
| राजाशाही एवं समुद्र लहर | जयपुर | राजाशाही: चमकदार गुलाबी आड़ी रेखाएँ · समुद्र लहर: चौड़ी-चौड़ी आड़ी धारियाँ | जयपुर के रंगरेज और नीलगर द्वारा रँगे जाने वाले लहरिये · 'प्रतापसाही' लहरिया का उल्लेख साहित्य में मिलता है |
| पोमचा | कमल-फूल के अभिप्राय वाली ओढ़नी |
छपाई के केंद्र
| केंद्र | छपाई | याद रखें |
|---|---|---|
| बगरू (जयपुर के पास) | मटिया रंग की ज़मीन पर लाल-काले फूल-पत्ती, पशु-पक्षी | छीपा कारीगर; दाबू (मिट्टी का प्रतिरोध) |
| सांगानेर (जयपुर के पास) | सफ़ेद ज़मीन पर फूलों की बारीक, लयात्मक बूटियाँ | छीपा कारीगर |
| अकोला (चित्तौड़गढ़ जिला) | बड़े पैमाने पर दाबू (मिट्टी-प्रतिरोध) छपाई | 'छीपों का अकोला' कहलाता है |
| बाड़मेर | अजरख: लाल और नीले रंग की ज्यामितीय आकृतियाँ, दोनों ओर छपी | आकृतियाँ तुर्की टाइलों से मिलती हैं |
| बालोतरा (तब बाड़मेर जिला, अब बालोतरा जिला) | पावरलूम कपड़ों पर छपाई | |
| पीपाड़, जोधपुर और पाली | बड़े, सशक्त अलंकरण, अधिकतर लाल, काले, नीले और हरे रंग में | |
| आहड़ और भीलवाड़ा | मुख्यतः लाल और काले रंग में चुनरी की छपाई; ओढ़नी पर तोता, मोर और फूल-पत्ती |
कोटा डोरिया (मसूरिया)
| स्थान | कोटा से लगभग 15 किमी दूर कैथून, सबसे पुराना और सबसे बड़ा केंद्र; कोटा, बूंदी और बारां जिलों के गाँव भी, जैसे मांगरोल, सिसवाली और अंता (बारां) |
|---|---|
| कपड़ा | खत कहलाने वाले छोटे चौकोर खानों वाला हल्का सूती-रेशमी कपड़ा, पिट करघों पर बुना |
| GI | आवेदन 22.07.2004, प्रमाणपत्र 05.07.2005; कोटा डोरिया का लोगो अलग GI है (आवेदन 10.12.2009) |
| नाम | 'मसूरिया' नाम मैसूर के बुनकरों से, या मसूर के दाने जितने बारीक खानों से माना जाता है |
| उत्पत्ति (परंपरा) | कहा जाता है कि बुनकर परिवारों को राव किशोर सिंह (1684–95) कोटा लाए; एक अन्य विवरण झाला ज़ालिम सिंह को श्रेय देता है, 1761 में |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- मसूरिया या मोठड़ामसूरिया कैथून का बुना कपड़ा (कोटा डोरिया) · मोठड़ा कटती धारियों वाला बाँधकर रँगा कपड़ा।
- लहरिया या मोठड़ालहरिया में धारियाँ एक ओर से · मोठड़ा में दोनों ओर से एक-दूसरे को काटती हुई।
- अकोला या बगरूदोनों मिट्टी के प्रतिरोध से छापते हैं · अकोला चित्तौड़गढ़ जिले में, बगरू जयपुर के पास।
- अजरख का स्थानRBSE पुस्तक और CET 2022 की कुंजी में बाड़मेर · RajRAS में बालोतरा।
- मांगरोलपहले कोटा जिले में (RBSE पुस्तक में यही) · अब बारां जिले में।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 84
सुमेलित कीजिये – (1) अजरख प्रिंट (I) कैथून (2) पावरलूम कपड़ों पर छपाई (II) जोधपुर (3) मोठड़ा (III) बालोतरा (4) मसूरिया (IV) बाड़मेर सही विकल्प चुनें –
- (1)(1) – (I), (2) – (II), (3) – (III), (4) – (IV)
- (2)(1) – (II), (2) – (III), (3) – (IV), (4) – (I)
- (3)(1) – (IV), (2) – (III), (3) – (II), (4) – (I)
- (4)(1) – (III), (2) – (IV), (3) – (I), (4) – (II)
उत्तर देखें
✓ (3) (1) – (IV), (2) – (III), (3) – (II), (4) – (I)
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