EN
Log in

Add TopKaro to your iPhone

  1. Tap the Share button at the bottom of Safari
  2. Scroll and tap Add to Home Screen
  3. Tap Add — TopKaro appears on your home screen

iPhones don’t allow a one-tap install button, so we show these steps instead.

छपाई, रँगाई एवं बुनाई

राजस्थान में कपड़ा बाँधकर रँगा जाता है या ठप्पों से छापा जाता है, प्रायः मिट्टी के प्रतिरोध के साथ, और कोटा में हल्का चौखाने वाला कपड़ा बुना जाता है। हर केंद्र की अपनी पहचान है।

⏱ 3 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. CET 2022 का सुमेलन: अजरख–बाड़मेर, पावरलूम कपड़ों पर छपाई–बालोतरा, मोठड़ा–जोधपुर, मसूरिया–कैथून।
  2. GI: कोटा डोरिया, सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट और जोधपुर बंधेज पंजीकृत GI हैं।
  3. शाही कारखाने: सवाई जयसिंह के छत्तीस कारखानों में कपड़े सींवन खाना में सिले, रंगखाना में रँगे और छापाखाना में छापे जाते थे।

विधियाँ एवं कारीगर

बाँधकर प्रतिरोधरँगाई से पहले कपड़ा बाँधा जाता है: बंधेज (गाँठें), लहरिया (धारियाँ), मोठड़ा (कटती धारियाँ)
मिट्टी का प्रतिरोधठप्पों से दाबू (मिट्टी की लेई) छापकर रंग रोका जाता है: अकोला, बगरू
रँगाई करने वालेरंगरेज और नीलगर
छपाई करने वालेछीपा

बाँधकर रँगा कपड़ा

प्रकारकेंद्रस्वरूपयाद रखें
बंधेजजोधपुर; सीकर (शेखावाटी)रँगाई से पहले कपड़े में छोटी-छोटी गाँठें बाँधना ('बद्ध' तकनीक); चुनरी इसका सबसे लोकप्रिय रूप हैजोधपुर की चुनरी के रंग चमकीले और टिकाऊ, बंधेज बारीक; सीकर के बंधेज की गिनती भी बारीक बंधेजों में होती है
लहरियाजयपुरएक ही दिशा में तिरछी धारियाँ, एक, दो, तीन, पाँच या सात रंगों में
मोठड़ाजोधपुरतिरछी धारियाँ जो दोनों ओर से एक-दूसरे को काटती हैं
राजाशाही एवं समुद्र लहरजयपुरराजाशाही: चमकदार गुलाबी आड़ी रेखाएँ · समुद्र लहर: चौड़ी-चौड़ी आड़ी धारियाँजयपुर के रंगरेज और नीलगर द्वारा रँगे जाने वाले लहरिये · 'प्रतापसाही' लहरिया का उल्लेख साहित्य में मिलता है
पोमचाकमल-फूल के अभिप्राय वाली ओढ़नी

छपाई के केंद्र

केंद्रछपाईयाद रखें
बगरू (जयपुर के पास)मटिया रंग की ज़मीन पर लाल-काले फूल-पत्ती, पशु-पक्षीछीपा कारीगर; दाबू (मिट्टी का प्रतिरोध)
सांगानेर (जयपुर के पास)सफ़ेद ज़मीन पर फूलों की बारीक, लयात्मक बूटियाँछीपा कारीगर
अकोला (चित्तौड़गढ़ जिला)बड़े पैमाने पर दाबू (मिट्टी-प्रतिरोध) छपाई'छीपों का अकोला' कहलाता है
बाड़मेरअजरख: लाल और नीले रंग की ज्यामितीय आकृतियाँ, दोनों ओर छपीआकृतियाँ तुर्की टाइलों से मिलती हैं
बालोतरा (तब बाड़मेर जिला, अब बालोतरा जिला)पावरलूम कपड़ों पर छपाई
पीपाड़, जोधपुर और पालीबड़े, सशक्त अलंकरण, अधिकतर लाल, काले, नीले और हरे रंग में
आहड़ और भीलवाड़ामुख्यतः लाल और काले रंग में चुनरी की छपाई; ओढ़नी पर तोता, मोर और फूल-पत्ती

कोटा डोरिया (मसूरिया)

स्थानकोटा से लगभग 15 किमी दूर कैथून, सबसे पुराना और सबसे बड़ा केंद्र; कोटा, बूंदी और बारां जिलों के गाँव भी, जैसे मांगरोल, सिसवाली और अंता (बारां)
कपड़ाखत कहलाने वाले छोटे चौकोर खानों वाला हल्का सूती-रेशमी कपड़ा, पिट करघों पर बुना
GIआवेदन 22.07.2004, प्रमाणपत्र 05.07.2005; कोटा डोरिया का लोगो अलग GI है (आवेदन 10.12.2009)
नाम'मसूरिया' नाम मैसूर के बुनकरों से, या मसूर के दाने जितने बारीक खानों से माना जाता है
उत्पत्ति (परंपरा)कहा जाता है कि बुनकर परिवारों को राव किशोर सिंह (1684–95) कोटा लाए; एक अन्य विवरण झाला ज़ालिम सिंह को श्रेय देता है, 1761 में

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • मसूरिया या मोठड़ामसूरिया कैथून का बुना कपड़ा (कोटा डोरिया) · मोठड़ा कटती धारियों वाला बाँधकर रँगा कपड़ा।
  • लहरिया या मोठड़ालहरिया में धारियाँ एक ओर से · मोठड़ा में दोनों ओर से एक-दूसरे को काटती हुई।
  • अकोला या बगरूदोनों मिट्टी के प्रतिरोध से छापते हैं · अकोला चित्तौड़गढ़ जिले में, बगरू जयपुर के पास।
  • अजरख का स्थानRBSE पुस्तक और CET 2022 की कुंजी में बाड़मेर · RajRAS में बालोतरा।
  • मांगरोलपहले कोटा जिले में (RBSE पुस्तक में यही) · अब बारां जिले में।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 84

सुमेलित कीजिये – (1) अजरख प्रिंट (I) कैथून (2) पावरलूम कपड़ों पर छपाई (II) जोधपुर (3) मोठड़ा (III) बालोतरा (4) मसूरिया (IV) बाड़मेर सही विकल्प चुनें –

  1. (1)(1) – (I), (2) – (II), (3) – (III), (4) – (IV)
  2. (2)(1) – (II), (2) – (III), (3) – (IV), (4) – (I)
  3. (3)(1) – (IV), (2) – (III), (3) – (II), (4) – (I)
  4. (4)(1) – (III), (2) – (IV), (3) – (I), (4) – (II)
उत्तर देखें

✓ (3) (1) – (IV), (2) – (III), (3) – (II), (4) – (I)

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

पढ़ लिया? अब अभ्यास करें

निःशुल्क अभ्यास प्रश्नों से इस विषय पर अपनी तैयारी जाँचें।

अभ्यास प्रश्न →
अगला टॉपिक:राजस्थान के संत एवं संप्रदाय →