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करणी माता

करणी माता का जन्म एक चारण परिवार में हुआ और बीकानेर के निकट देशनोक में वे देवी के रूप में पूजी जाती हैं। उनका मंदिर वहाँ रहने वाले हजारों चूहों के लिए प्रसिद्ध है।

⏱ 2 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 14 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. बीकानेर की कुलदेवी: परंपरा के अनुसार राव बीका ने राजगद्दी पर बैठने से पहले उनका आशीर्वाद पाया; तभी से वे बीकानेर के राठौड़ शासकों की कुलदेवी हैं।
  2. काबा: मंदिर के चूहे काबा कहलाते हैं; इन्हें मारना या पकड़ना वर्जित है और सफेद काबा के दर्शन शुभ माने जाते हैं।
  3. परंपरा के अनुसार मेहरानगढ़ (जोधपुर) और बीकानेर के दुर्ग की नींव करणी माता ने रखी।

तथ्य

जन्मवि.सं. 1444, आश्विन शुक्ल सप्तमी (20 सितंबर 1387 ई.), फलौदी के निकट सुवाप गाँव में (तब जोधपुर जिला, अब फलौदी)
माता-पितामेहाजी किनिया और देवल बाई; बचपन का नाम रिधुबाई
पतिदेपाजी
देहावसानवि.सं. 1595, चैत्र शुक्ल नवमी
मंदिरदेशनोक, बीकानेर से लगभग 33 से 35 किमी; शाक्त परंपरा। निर्माण कई चरणों में हुआ: महाराजा सूरतसिंह ने परकोटा और मुख्य प्रवेश द्वार बनवाया, महाराजा गंगासिंह ने इसे कलात्मक स्वरूप दिया
पुजारीदेपाजी के वंशज देपावत, जो मासिक बारी से सेवा करते हैं
मेलेआश्विन (बड़ा मेला) और चैत्र (छोटा मेला) के नवरात्रों में

जीवन और परंपरा

  • कहा जाता है कि हुमायूँ के भाई कामरान ने भटनेर पर आक्रमण किया, तब बीकानेर के राव जैतसी ने देशनोक जाकर करणी माता का आशीर्वाद लिया और विजय पाई।
  • मान्यता है कि करणी माता की कृपा से औरंगजेब की सेना बिना आक्रमण किए बीकानेर से लौट गई।

देशनोक के चूहे

  • मान्यता है कि ये चूहे पुनर्जन्म लेने वाले चारण हैं।
  • श्रद्धालु इन्हें दूध और लड्डू खिलाते हैं।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • चारण या नाईकरणी माता चारणों की कुलदेवी हैं · नारायणी माता नाई समाज की।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 24

सुमेलित कीजिए – कुलदेवी — जाति (1) करणी माता — (i) नाई (2) सकराय माता — (ii) सीरवी (3) आई माता — (iii) खण्डेलवाल (4) नारायणी माता — (iv) चारण

  1. (1)1-iv, 2-i, 3-ii, 4-iii
  2. (2)1-ii, 2-i, 3-iv,4-iii
  3. (3)1-iv, 2-iii, 3-ii, 4-i
  4. (4)1-iv, 2-iii, 3-i, 4-ii
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