एक नज़र में
- झूले, मेहंदी और नए वस्त्र इस पर्व की पहचान हैं; इसकी मिठाई घेवर है।
- इसे मुख्यतः कन्याएँ और नवविवाहित महिलाएँ मनाती हैं।
- कजली तीज को सातुड़ी तीज भी कहते हैं।
तथ्य
| हरियाली तीज (जयपुर) | श्रावण शुक्ल तृतीया; तीज माता (पार्वती) की शाही सवारी सिटी पैलेस से दो दिन निकलती है |
|---|---|
| कजली तीज (बूंदी) | भाद्रपद कृष्ण तृतीया; इसे बड़ी तीज या बूढ़ी तीज भी कहते हैं। शोभायात्रा और मेले में देवी उमा की पूजा होती है |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- तीज या गणगौरतीज वर्षा ऋतु (श्रावण-भाद्रपद) में आती है · गणगौर होली के बाद चैत्र में।
पढ़ लिया? अब अभ्यास करें
निःशुल्क अभ्यास प्रश्नों से इस विषय पर अपनी तैयारी जाँचें।
अभ्यास प्रश्न →