EN
Log in

Add TopKaro to your iPhone

  1. Tap the Share button at the bottom of Safari
  2. Scroll and tap Add to Home Screen
  3. Tap Add — TopKaro appears on your home screen

iPhones don’t allow a one-tap install button, so we show these steps instead.

सामाजिक कुप्रथाएँ और सुधार कानून

प्रश्न पूछते हैं कि किस राज्य या शासक ने किसी कुप्रथा पर सबसे पहले रोक लगाई, किस वर्ष, और सुधार सभाओं के उद्देश्य क्या थे।

⏱ 4 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. जयपुर और 1844: सती विधेयक, समाधि रोकने का पहला प्रयास, त्याग पर रोक और कन्या वध को अनुचित घोषित करना, सभी 1844 में (एक अध्ययन कन्या वध के लिए 1843 देता है)।
  2. जौहर और सती में अंतर: जौहर युद्ध में पराजय निश्चित होने पर राजपूत स्त्रियों का सामूहिक अग्नि-स्नान · सती पति की चिता पर विधवा का जलना।
  3. कुप्रथाएँ: डाकन, स्त्रियों को डायन बताकर यातना देना या मार डालना · कन्या वध, जन्म लेते ही कन्या को मारना · त्याग, राजपूत कन्या के विवाह पर चारण, भाट आदि को दिया जाने वाला दान · समाधि, भूमि में जीवित गड़कर या जल में डूबकर प्राण त्यागना।

तथ्य

रूप कँवर सती कांड4 सितम्बर 1987, देवराला गाँव, सीकर जिला
इसके बाद के कानून1987 में राजस्थान का सती निवारण कानून, फिर केन्द्र का सती (निवारण) आयोग अधिनियम, 1987 (1988 का अधिनियम संख्या 3)
डायन-प्रताड़ना कानूनराजस्थान डायन-प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2015 (2015 का अधिनियम संख्या 14); राज्यपाल की स्वीकृति 24 अप्रैल 2015

सती: राज्यवार रोक

वर्षराज्य या शासनविवरण
1822बूँदीअनेक परीक्षा-पुस्तकें इसे सती को गैर-कानूनी घोषित करने वाली राजस्थान की पहली रियासत बताती हैं; RBSE पुस्तक में यह नहीं है
1829लॉर्ड विलियम बैंटिक4 दिसम्बर 1829 के बंगाल रेगुलेशन XVII से ब्रिटिश भारत में सती गैर-कानूनी
1830अलवरउन्हीं पुस्तकों के अनुसार 1829 के कानून के बाद रोक लगाने वाली पहली रियासत
1844जयपुर1839 में पोलिटिकल एजेन्ट की अध्यक्षता में बनी जयपुर संरक्षक समिति ने सती उन्मूलन का विधेयक पारित किया, जो प्रथम वैधानिक प्रयास था; इसके बाद ए.जी.जी. ने पोलिटिकल एजेन्टों से अन्य शासकों पर प्रभाव डालने को कहा
1846डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़सती को विधि-सम्मत नहीं माना
1848कोटा, जोधपुरअन्य पुस्तकें कोटा के लिए 1862 और जोधपुर के लिए 1860 देती हैं
1860मेवाड़अनेक प्रयासों के बाद कानून, उल्लंघन पर जुर्माना; अन्य पुस्तकें 1861 देती हैं
1861ब्रिटिश अधिकारीकठोर नियम: सती की सूचना पर कारावास, जुर्माने के साथ शासक को पद से हटाना और गाँव को खालसा करना; लापरवाह शासकों की तोपों की सलामी घटाना

अन्य कुप्रथाएँ और उनके विरुद्ध कानून

कुप्रथावर्ष, राज्य या कानूनविवरण
डाकन प्रथामेवाड़, 1853तब मेवाड़ में महाराणा स्वरूप सिंह (1842–61) का शासन था; RBSE पुस्तक मेवाड़ रेजीडेन्ट कर्नल ईडन के परामर्श पर महाराणा जवान सिंह का नाम देती है, जिनकी मृत्यु 1838 में हो चुकी थी; अन्य पुस्तकें मेवाड़ भील कोर के कमांडेंट जे.सी. ब्रुक को श्रेय देती हैं
कन्या वधपहले मेवाड़, फिर कोटा; जोधपुर के नियम 1839; जयपुर 1844RBSE कक्षा 7 की पुस्तक व अनेक अन्य पुस्तकें कोटा को पहला मानती हैं, 1833 में (कुछ 1834), फिर बूँदी 1834, बीकानेर 1837 और उदयपुर 1844; कर्नल जेम्स टॉड ने दहेज को प्रमुख कारण माना; 1888 के बाद घटनाएँ लगभग समाप्त
त्याग प्रथाजोधपुर 1841; बीकानेर और जयपुर 1844
समाधि प्रथाजयपुर 1844; 1861 का अधिनियमपोलिटिकल एजेन्ट लुडलो के प्रयासों से पहला प्रयास
दास प्रथाकोटा, 1832रोक लगाने वाली राजस्थान की पहली रियासत मानी जाती है; ब्रिटिश भारत के लिए RBSE कक्षा 7 की पुस्तक 1833 के चार्टर अधिनियम का उल्लेख करती है
बाल एवं अनमेल विवाहअलवर, 10 दिसम्बर 1903RBSE पुस्तक अलवर के कानून को पहला मानती है; अन्य पुस्तकें 1885 में जोधपुर का नाम देती हैं, जहाँ प्रधानमंत्री सर प्रताप सिंह ने यह रोक लगवाई
शारदा अधिनियम28 सितम्बर 1929 को पारित, 1 अप्रैल 1930 से लागूअजमेर के हरबिलास शारदा के नाम पर; न्यूनतम आयु लड़की 14 और लड़का 18 वर्ष, 1978 में 18 और 21 वर्ष; इसकी जगह बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006
विधवा पुनर्विवाह1856 का अधिनियम XV26 जुलाई 1856 को लॉर्ड कैनिंग के समय लागू; ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने अभियान चलाया
दहेजदहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961केन्द्रीय कानून, 1 जुलाई 1961 से लागू
सागड़ी (बंधुआ मजदूरी)राजस्थान सागड़ी प्रथा उन्मूलन अधिनियम, 1961
मृत्युभोजराजस्थान मृत्युभोज निवारण अधिनियम, 19601960 का अधिनियम संख्या 1

सुधार सभाएँ

सभास्थापनाउद्देश्य और कार्य
देश हितेषिणी सभाउदयपुर (मेवाड़), 2 जुलाई 1877राजपूतों में विवाह खर्च सीमित करना और बहुविवाह के विरुद्ध नियम बनाना; इसका उल्लेख करने वाले कवि श्यामलदास (वीर विनोद) स्वयं इसके सदस्य थे; यह मेवाड़ तक सीमित रही
वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभाप्रथम सम्मेलन अजमेर, 10 मार्च 1888; नाम जनवरी 1889 में1887 से ए.जी.जी. कर्नल सी.के.एम. वाल्टर के प्रयास से; उद्देश्य: बहुविवाह की समाप्ति, विवाह आयु लड़की कम से कम 14 और लड़का 18 वर्ष, टीका और रीत पर रोक, विवाह और मृत्युभोज के खर्च पर नियंत्रण

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • डाकन या डायनडाकन पर रोक 1853 (मेवाड़) · डायन-प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2015।
  • विवाह आयुवाल्टर सभा के नियमों और 1929 के शारदा अधिनियम में 14 और 18 · 1978 के बाद 18 और 21।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

संरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 18

'समाधि' लेने की कुप्रथा रोकने का सर्वप्रथम प्रयास किस राज्य ने किया?

  1. (1)जोधपुर
  2. (2)उदयपुर
  3. (3)जयपुर
  4. (4)कोटा
उत्तर देखें

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 4

भारत के किस गवर्नर जनरल के कार्यकाल के दौरान, हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया गया था?

  1. (1)लॉर्ड एमहर्स्ट
  2. (2)लॉर्ड एलनबरो
  3. (3)लॉर्ड कैनिंग
  4. (4)लॉर्ड मेयो
उत्तर देखें

✓ (3) लॉर्ड कैनिंग

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 8

अधोलिखित कथनों को सावधानीपूर्वक पढ़िए – (i) 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में, मेवाड़ में देश हितेषिणी सभा की स्थापना की गयी। (ii) सभा का मुख्य उद्देश्य समाज सुधार था। सही कूट चुनिए –

  1. (1)केवल कथन (i) सत्य है
  2. (2)केवल कथन (ii) सत्य है
  3. (3)न तो (i) ना ही (ii) सत्य है
  4. (4)दोनों कथन सत्य हैं
उत्तर देखें

✓ (4) दोनों कथन सत्य हैं

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 126

वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन असत्य है ?

  1. (1)इसकी स्थापना सन् 1888 में कर्नल सी.के.एम. वाल्टर के प्रयासों से हुई थी ।
  2. (2)इसका उद्देश्य राजस्थान के राजपूतों और दलितों के लिए सुधारात्मक कार्य करना था ।
  3. (3)इसकी प्रथम बैठक का आयोजन अजमेर में हुआ था ।
  4. (4)सभा ने अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सामाजिक नियम बनाए ।
उत्तर देखें

✓ (2) इसका उद्देश्य राजस्थान के राजपूतों और दलितों के लिए सुधारात्मक कार्य करना था ।

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

पढ़ लिया? अब अभ्यास करें

निःशुल्क अभ्यास प्रश्नों से इस विषय पर अपनी तैयारी जाँचें।

अभ्यास प्रश्न →
अगला टॉपिक:राजस्थान के दुर्ग →