एक नज़र में
- कहावत: ‘पगड़ी की लाज रखना’ यानी पगड़ी के सम्मान की रक्षा करना; विवाह आदि उत्सवों में पगड़ी से सम्मान देने की प्रथा आज भी है।
- रंगाई के प्रमुख प्रकार: पोमचा, लहरिया एवं चूनरी।
- आधुनिक पहनावा: पुरुषों में पैंट-कमीज अब सर्वस्वीकृत है; फिर भी बन्द गला या जोधपुरी कोट ने अपना अलग स्थान बनाए रखा है।
तथ्य
| लाल रंग | कसूमल अर्थात् लाल; दोहा है ‘मारू थारे देश में उपजै तीन रतन, इक ढोला, दूजी मारवण, तीजो कसूमल रंग’ |
|---|---|
| सबसे पुराना प्रमाण | कालीबंगा और आहड़ सभ्यता के काल से सूती वस्त्र; उत्खनन में रूई कातने के चक्र और तकली मिले |
| सर्दी | अंगरखी में रूई भरी जाती थी; शरद ऋतु में कंधों पर खेस, शाल और पामड़ी डाली जाती थी |
पुरुषों की पगड़ी
| पगड़ी | विवरण |
|---|---|
| शैलियाँ | अटपटी, अमरशाही, उदेशाही, खंजरशाही, शिवशाही, विजयशाही और शाँहजहानी; मुगलों के सम्पर्क से यह विविधता आई |
| मोठड़ा | विवाहोत्सव पर |
| लहरिया | श्रावण में |
| मदील | दशहरे पर |
| फूल-पत्ती की छपाई वाली | होली पर |
| व्यवसाय के अनुसार | सुनार आँटे वाली पगड़ी और बनजारे मोटी पट्टेदार पगड़ी पहनते थे |
| उच्च वर्ग | चीरा और फेंटा बाँधते थे |
| सजावट | तुर्रे, सरपेच, बालाबन्दी, धुगधुगी, गोसपेच, लटकन और फतेपेच |
| छाबदार | मेवाड़ में पगड़ी बाँधने वाला |
पुरुषों के वस्त्र
| वस्त्र | विवरण |
|---|---|
| अंगरखी | सामान्य जन का ऊपरी पहनावा, कई प्रकार व आकार में बनता था और तनसुख, दुतई, गाबा, गदर, मिरजाई, डोढी, कानो या डगला कहलाता था |
| चुगा (चोगा) | अंगरखी के ऊपर पहना जाने वाला वस्त्र; जामा, चुगा और अंगरखी पर कढ़ाई की जाती थी |
| जामा | घुटनों तक का वस्त्र, जो विवाह जैसे विशेष अवसरों पर पहना जाता था |
| पटका (कमरबंद) | जामा के ऊपर बाँधा जाने वाला वस्त्र, जिस पर तलवार या कटार लटकाई जाती थी |
| आत्मसुख | सर्दी में अंगरखी के ऊपर पहना जाने वाला वस्त्र |
| धोती | घुटनों तक होती थी और अंगरखी जाँघों तक |
| पछेवड़ा | गाँवों में धोती के ऊपर ओढ़ने का वस्त्र |
स्त्रियों की वेशभूषा
| वस्त्र | विवरण |
|---|---|
| घाघरा | प्रारंभिक मध्यकाल में कमर में लपेटा जाने वाला अधोवस्त्र कालान्तर में घेरदार कलियों वाला घाघरा बना; इसका छोटा रूप लहंगा है |
| कुर्ती और कांचली | कुर्ती ऊपर पहना जाने वाला वस्त्र है, जो आज भी मारवाड़ में प्रचलित है; कुर्ती के नीचे बाँह वाली अंगिया यानी कांचली पहनी जाती थी |
| साड़ियों के पुराने नाम | चोल, निचोल, पट, दुकूल, अंसुक, वसन, चीर-पटोरी, चोरसो, ओढ़नी, चूँदड़ी और धोरावाली; चूँदड़ी और लहरिया प्रमुख साड़ी रही हैं |
| पुराने कपड़े | जामादानी, किमखाब, टसर, छींट, मलमल, मखमल, पारचा और मसरू आदि |
ओढ़नी के प्रकार
| ओढ़नी | अर्थ एवं प्रयोग |
|---|---|
| पोमचा | नवजात शिशु की माँ को मातृ पक्ष से बेटे के जन्म पर पीला और बेटी के जन्म पर गुलाबी पोमचा दिया जाता है |
| लहरिया | श्रावण में, विशेषकर तीज पर स्त्रियाँ लहरिया भाँत की ओढ़नी और पुरुष लहरिया पगड़ी पहनते हैं; मांगलिक अवसरों पर पंचरंगा लहरिया पहना जाता है |
| चूनरी | बंधेज की ओढ़नी; कोई भी मांगलिक कार्य चूनरी के बिना अपूर्ण है |
जनजातीय वेशभूषा
| वस्त्र | कौन पहनता है और क्या है |
|---|---|
| खोयतु | भील पुरुषों द्वारा कमर पर बाँधी जाने वाली लंगोटी |
| ढेपाड़ा (ठेपाड़ा) | भील पुरुषों की तंग धोती |
| पोतिया | पगड़ी के स्थान पर सिर पर बाँधा जाने वाला वस्त्र |
| कछाबू | भील स्त्रियों का घुटनों तक का घाघरा |
| सिंदूरी | भील स्त्रियों की लाल रंग की साड़ी |
| कटकी | अविवाहित बालिकाओं की ओढ़नी, जिसे पावली भाँत की ओढ़नी भी कहते हैं |
| नांदणा | आदिवासी स्त्रियों का सबसे प्राचीन वस्त्र, जो नीले रंग की छींट से बनता है |
वस्त्रों की सजावट
वस्त्रों को भड़कीला बनाने के लिए गोटा, यानी सूती ताने पर बादले के बाने से बुनी पट्टी (चौड़ा लप्पा, कम चौड़ा लप्पी), टाँका जाता है, जिसका प्रसिद्ध केन्द्र सीकर जिले का खण्डेला कस्बा है; ‘चटापटी’ में किसी आकृति को कपड़े में काटकर दूसरे कपड़े पर टाँका जाता है, जो जानवरों की झूलों, परदों और तम्बू-कनातों पर काम आती है; शेखावाटी में अलग-अलग रंग के कपड़ों को डिज़ाइन में काटकर सिलने को पेचवर्क कहते हैं।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- खोयतु या कछाबूखोयतु भील पुरुष की लंगोटी · कछाबू भील स्त्री का घाघरा।
- पोमचा या लहरियापोमचा जन्म पर · लहरिया श्रावण व तीज पर।
- कुर्ती या कांचलीकुर्ती ऊपर का वस्त्र · बाँह वाली कांचली उसके नीचे।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 32
भील जनजाति के पुरुष कमर पर जो वस्त्र लपेटा करते हैं, उसे क्या कहा जाता हैं?
- (1)जामा
- (2)कछाबू
- (3)पोल्या
- (4)खोयतु
उत्तर देखें
✓ (4) खोयतु
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 132
राजस्थान की वेशभूषा में प्रयुक्त 'कसूमल' निम्न में से कौन सा रंग होता है ?
- (1)लाल
- (2)पीला
- (3)गुलाबी
- (4)केसरिया
उत्तर देखें
✓ (1) लाल
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