एक नज़र में
- CET 2022 के जोड़े: सुरलिया, कान · तिमणिया, गला · तगड़ी, कमर · रमझोल पैरों का आभूषण है, कलाई का नहीं।
- दो सूचियाँ: RBSE पुस्तक थमण्यो को कण्ठ के और तिमणियाँ को गले व वक्ष के आभूषणों में रखती है; कुछ पुस्तकें दोनों को एक मानती हैं।
- केन्द्र: जयपुर का प्रमुख बाजार जौहरी बाजार और प्रमुख चौपड़ माणक चौक (माणक रत्नों का सरताज) · नाथद्वारा चाँदी की तारकशी के लिए · प्रतापगढ़ थेवा कला के लिए।
तथ्य
| प्राचीन प्रमाण | कालीबंगा और आहड़ सभ्यता के काल में स्त्रियाँ मिट्टी और चमकदार पत्थरों के आभूषण पहनती थीं; शुंगकालीन मिट्टी के खिलौनों और फलकों से हाथों में चूड़ियाँ व कड़े, पैरों में खड़वे और गले में लटकन वाले हार का पता चलता है; हाथी-दाँत के आभूषण भी प्रयुक्त होते थे |
|---|---|
| निर्धन स्त्रियाँ | काँसा, पीतल, ताँबा, कौड़ी, सीप और मूँगे के गहने पहनती थीं |
| मूर्तियों में | ओसियाँ, नागदा, देलवाड़ा और कुम्भलगढ़ की मूर्तियों में कुंडल, हार, बाजूबंद, कंकण, नूपुर और मुद्रिका दिखते हैं |
स्त्रियों के आभूषण: सिर से पैर तक
| अंग | आभूषण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| सिर | बोर, बोरला, शीशफूल, रखड़ी, टिकड़ा | सिर पर बाँधे जाते हैं |
| दाँत | रखन, चूंप | रखन दाँतों पर चढ़ाई गई सोने के पत्तर की खोल है; चूंप दाँतों के बीच जड़वाई गई सोने की कील है |
| कान | कर्णफूल, पीपलपत्रा, फूल झूमका, अंगोट्या, झेला, लटकन, टोटी, सुरलिया | |
| नाक | नथ, बेसर, बारी, भोगली, कांटा, चूनी, चोप, भँवरकड़ी | |
| कण्ठ | थमण्यो, थेड्यो, आड़, मूँठया, झालरा, ठुस्सी | |
| गला और वक्ष | तुलसी, बजट्टी, हालरो, हाँसली, तिमणिया, पोत, चन्द्रहार, कंठमाला, हमेल, हांकर, मांदल्या, चपकली, हंसहार, सरी, कण्ठी | |
| भुजा | बाजूबंद, भुजबंद, अणत, टड्डा | |
| हाथ और कलाई | कड़ा, कंकण, मोकड़ी, कातर्या, नोगरी, चांट, गजरा, गोखरू, चूड़ी, हथफूल | मोकड़ी लाख से बनी चूड़ी है; कातर्या काँच की चूड़ी है |
| उँगलियाँ | बींटी, दामणा, हथपान, मूंदड़ी | आरसी अँगूठे में पहनी जाती है |
| कमर | कन्दोरा या करधनी, तगड़ी | |
| पाँव | कड़ा, लंगर, पायल, पायजेब, घुंघरू, नूपुर, झाँझर, नेवरी, रमझोल | |
| पैर की उँगलियाँ | बिछिया, पगपान |
पुरुषों और बच्चों के आभूषण
| पहनने वाले | आभूषण |
|---|---|
| पुरुष: कान | मुरकियां, लोंग, झाले, छैलकड़ी |
| पुरुष: भुजा और हाथ | बाजूबंद, कड़ा, नरमुख; उँगलियों में अंगूठी, बीठिया और मूंदड़ियां |
| बच्चे: कण्ठ | हँसुली; नजर्या, यानी राती छींतरी में सोने का खेरा, मूँग का आखा और रतचनण बाँधकर बना शृंगार, जिससे रत्यावड़ी (गाँठगूमड़े) न हों |
| बच्चे: हाथ और पाँव | कडूल्या, यानी हाथ और पाँवों के कड़े; झाँझर्या (झाँझरिया), जिसे पैंजणी भी कहते हैं, घुंघरियों वाली पतली साँकली |
| बच्चे: कान | कुड़क, यानी कान छिदवाकर पहनाया गया सोने या जस्ते का तार; बाद में मोती, लूँग, गुड़दा, मुरकी या बाली; ठोस सोने की कुड़क ‘मुरकी’ कहलाती है |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- बोरला या बारीबोरला सिर का · बारी नाक का आभूषण।
- रखन या चूंपरखन दाँत पर सोने की खोल · चूंप दाँतों के बीच सोने की कील।
- ठुस्सी या दामणाठुस्सी कण्ठ का · दामणा उँगलियों का।
- पीपलपत्रा या पगपानपीपलपत्रा कान का · पगपान पैर की उँगलियों का।
- मोकड़ी या कातर्यामोकड़ी लाख की चूड़ी · कातर्या काँच की चूड़ी।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 22
निम्नलिखित में से कौनसा (आभूषण – मानव अंग) सुमेलित नहीं है?
- (1)सुरलिया – कान
- (2)तिमणिया – गला
- (3)रमझोल – कलाई
- (4)तगड़ी – कमर
उत्तर देखें
✓ (3) रमझोल – कलाई
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