एक नज़र में
- परीक्षा दृष्टि: कुंभा के ग्रंथ और उपाधियाँ, तथा मण्डन के ग्रंथ, प्रायः सुमेलित करने को आते हैं।
- कुंभा या सांगा: सारंगपुर 1437 कुंभा बनाम मालवा है; खानवा 1527 सांगा बनाम बाबर।
- दुर्ग: मेवाड़ के 84 में से 32 दुर्ग कुंभा के बनवाए माने जाते हैं, कुंभलगढ़ भी इनमें है; कुंभलगढ़ और विजय स्तंभ का विवरण दुर्ग पृष्ठ पर है।
तथ्य
| पिता | मोकल |
|---|---|
| शासनकाल | 1433–1468 ई. |
| सारंगपुर, 1437 | सारंगपुर (राजगढ़ जिला, मध्य प्रदेश) में मालवा के महमूद खिलजी को हराकर बंदी बनाया; महमूद ने मोकल के हत्यारों में से एक महपा पँवार को शरण दी थी |
| विजय स्तंभ | मालवा पर विजय की स्मृति में चित्तौड़ में बनवाया |
| मृत्यु | 1468 ई., पुत्र ऊदा (उदयसिंह प्रथम) ने हत्या की, जिसे 'हत्यारा' कहा गया |
ग्रंथ और उपाधियाँ
- संगीत: संगीतराज, संगीत मीमांसा और सूड प्रबंध।
- टीकाएँ: जयदेव के गीतगोविंद पर रसिकप्रिया टीका, संगीत रत्नाकर पर टीका, और चण्डीशतक की व्याख्या।
- कीर्तिस्तंभ प्रशस्ति: उनके स्तंभ का शिलालेख, जिसे कवि अत्रि ने आरंभ किया और उनके पुत्र महेश ने पूरा किया।
- उपाधियाँ: अभिनवभरताचार्य, हिन्दू सुरताण, राजगुरु, दानगुरु, परमगुरु।
मण्डन
- मण्डन: कुंभा के दरबार के सूत्रधार (शिल्पी), जिन्होंने कुंभलगढ़ बनाया।
- ग्रंथ: देवतामूर्ति प्रकरण, प्रासाद मण्डन, राजवल्लभ, रूपमण्डन और वास्तुमण्डन; उनके भाई नाथा ने वास्तुमंजरी लिखी।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- विजय स्तंभ या कीर्ति स्तंभकुंभा का स्तंभ विजय स्तंभ है, जिसे ओझा और RBSE पुस्तक कीर्ति स्तंभ कहते हैं · चित्तौड़ दुर्ग में पुराना जैन कीर्ति स्तंभ भी है।
- लेखकसंगीत ग्रंथ, कुंभा · वास्तु ग्रंथ, मण्डन और उनके भाई नाथा।
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