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महाराणा कुंभा

मोकल के पुत्र कुंभा ने 1433 से 1468 तक मेवाड़ पर शासन किया; परीक्षा में वे योद्धा, निर्माता और संगीत के विद्वान के रूप में पूछे जाते हैं।

⏱ 2 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. परीक्षा दृष्टि: कुंभा के ग्रंथ और उपाधियाँ, तथा मण्डन के ग्रंथ, प्रायः सुमेलित करने को आते हैं।
  2. कुंभा या सांगा: सारंगपुर 1437 कुंभा बनाम मालवा है; खानवा 1527 सांगा बनाम बाबर।
  3. दुर्ग: मेवाड़ के 84 में से 32 दुर्ग कुंभा के बनवाए माने जाते हैं, कुंभलगढ़ भी इनमें है; कुंभलगढ़ और विजय स्तंभ का विवरण दुर्ग पृष्ठ पर है।

तथ्य

पितामोकल
शासनकाल1433–1468 ई.
सारंगपुर, 1437सारंगपुर (राजगढ़ जिला, मध्य प्रदेश) में मालवा के महमूद खिलजी को हराकर बंदी बनाया; महमूद ने मोकल के हत्यारों में से एक महपा पँवार को शरण दी थी
विजय स्तंभमालवा पर विजय की स्मृति में चित्तौड़ में बनवाया
मृत्यु1468 ई., पुत्र ऊदा (उदयसिंह प्रथम) ने हत्या की, जिसे 'हत्यारा' कहा गया

ग्रंथ और उपाधियाँ

  • संगीत: संगीतराज, संगीत मीमांसा और सूड प्रबंध।
  • टीकाएँ: जयदेव के गीतगोविंद पर रसिकप्रिया टीका, संगीत रत्नाकर पर टीका, और चण्डीशतक की व्याख्या।
  • कीर्तिस्तंभ प्रशस्ति: उनके स्तंभ का शिलालेख, जिसे कवि अत्रि ने आरंभ किया और उनके पुत्र महेश ने पूरा किया।
  • उपाधियाँ: अभिनवभरताचार्य, हिन्दू सुरताण, राजगुरु, दानगुरु, परमगुरु।

मण्डन

  • मण्डन: कुंभा के दरबार के सूत्रधार (शिल्पी), जिन्होंने कुंभलगढ़ बनाया।
  • ग्रंथ: देवतामूर्ति प्रकरण, प्रासाद मण्डन, राजवल्लभ, रूपमण्डन और वास्तुमण्डन; उनके भाई नाथा ने वास्तुमंजरी लिखी।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • विजय स्तंभ या कीर्ति स्तंभकुंभा का स्तंभ विजय स्तंभ है, जिसे ओझा और RBSE पुस्तक कीर्ति स्तंभ कहते हैं · चित्तौड़ दुर्ग में पुराना जैन कीर्ति स्तंभ भी है।
  • लेखकसंगीत ग्रंथ, कुंभा · वास्तु ग्रंथ, मण्डन और उनके भाई नाथा।

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