एक नज़र में
- भाई: रायमल के पुत्र पृथ्वीराज, जयमल, राजसिंह और सांगा, चारों स्वयं को उत्तराधिकारी मानते थे; इस संघर्ष में सांगा विजयी रहे।
- मालवा: मालवा के अमीरों ने मेदिनीराय को हटाया तो वह सांगा की शरण में आया, जिससे मेवाड़ और मालवा में युद्ध हुआ।
- परीक्षा दृष्टि: बाबर के विरुद्ध सांगा फरवरी 1527 में बयाना में जीते और एक माह बाद खानवा में हारे।
तथ्य
| पिता | रायमल |
|---|---|
| शासनकाल | 1509–1528 ई. (जी.एन. शर्मा व सतीश चंद्र के अनुसार 1508) |
| उपाधि | हिन्दूपत |
| उत्तराधिकारी | पुत्र रतनसिंह द्वितीय |
| मृत्यु | 30 जनवरी 1528, बाबर से फिर युद्ध न चाहने वाले सामंतों ने विष दिया; RBSE पुस्तक के अनुसार बसवा (दौसा) में मृत्यु हुई, जबकि जी.एन. शर्मा के अनुसार कालपी के पास विष दिया गया और लौटते समय मृत्यु हुई |
| समाधि | माण्डलगढ़ |
उनके युद्ध
| युद्ध | वर्ष | विरोधी | परिणाम |
|---|---|---|---|
| खातौली (कोटा) | 1517 | इब्राहिम लोदी | सांगा विजयी |
| बाड़ी (धौलपुर) | इब्राहिम लोदी की सेना | सांगा विजयी | |
| गागरोन | 1519 (सतीश चंद्र में 1517) | मालवा का महमूद खिलजी द्वितीय | सांगा विजयी; महमूद बंदी |
| बयाना (भरतपुर) | फरवरी 1527 | बाबर की सेना | सांगा विजयी |
| खानवा (भरतपुर) | 17 मार्च 1527 | बाबर | बाबर विजयी |
खानवा, 1527
- युद्ध से पहले: 1526 में पानीपत में बाबर इब्राहिम लोदी को हरा चुका था और उसने सांगा पर सहायता का वादा तोड़ने का आरोप लगाया; RBSE पुस्तक के अनुसार इस आरोप की पुष्टि नहीं होती, जबकि जी.एन. शर्मा के अनुसार सांगा ने सरदारों की सलाह पर समझौता पूरा नहीं किया।
- सांगा के सहयोगी: हसन खाँ मेवाती, महमूद लोदी और चंदेरी के मेदिनीराय, साथ में अनेक राजपूत सरदार।
- बाबर की जीत का कारण: तोपखाना और तुलुगमा (पार्श्व आक्रमण) युद्ध पद्धति।
- सांगा घायल हुए और उन्हें युद्धक्षेत्र से दूर ले जाया गया।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- खानवा या पानीपतखानवा 1527, बाबर बनाम सांगा · पानीपत 1526, बाबर बनाम इब्राहिम लोदी।
- लोदी या मालवाखातौली और बाड़ी इब्राहिम लोदी के विरुद्ध · गागरोन मालवा के विरुद्ध।
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