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महाराणा प्रताप

उदयसिंह द्वितीय के पुत्र प्रताप ने 1572 से 1597 तक मेवाड़ पर शासन किया और चित्तौड़ के पतन के बाद भी अकबर से संघर्ष जारी रखा।

⏱ 2 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. हल्दीघाटी का परिणाम: RBSE पुस्तक के अनुसार युद्ध का परिणाम नहीं निकल सका और अकबर का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ; जी.एन. शर्मा और सतीश चंद्र इसे मुगल विजय मानते हैं।
  2. युद्ध के नाम: खमनौर (अबुल फजल), गोगुंदा (बदायूँनी) और हल्दीघाटी (टॉड), जिन्होंने इसे 'मेवाड़ की थर्मोपल्ली' कहा।
  3. मुगल सेना के सेनापति आमेर के मानसिंह कछवाहा पृष्ठ पर हैं।

तथ्य

जन्मवि.सं. 1597, ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया (9 मई 1540), कुंभलगढ़ में
पिताउदयसिंह द्वितीय
राज्यारोहण1572, गोगुंदा में; सरदारों ने उदयसिंह के चुने उत्तराधिकारी जगमाल को नहीं माना
मृत्यु19 जनवरी 1597, चावण्ड में
उत्तराधिकारीपुत्र अमरसिंह प्रथम

हल्दीघाटी, 1576

  • तिथि: RBSE पुस्तक में 18 जून 1576; जी.एन. शर्मा में 21 जून।
  • स्थान: खमनौर (राजसमंद जिला) के पास, हल्दीघाटी दर्रे के नीचे।
  • पक्ष: प्रताप की सेना, जिसके हरावल का नेतृत्व हकीम खाँ सूर ने और भील धनुर्धरों का राणा पूंजा ने किया, बनाम मानसिंह के नेतृत्व में अकबर की सेना, जिसके हरावल में जगन्नाथ कछवाहा और आसफ खाँ थे।
  • युद्ध: प्रताप ने मानसिंह के हाथी पर वार किया और घायल हुए; एक झाला सरदार (RBSE पुस्तक में झाला बीदा, अन्य इतिहासों में झाला मानसिंह) ने उनके राजचिह्न धारण किए ताकि प्रताप युद्धभूमि से निकल सकें। परंपरा के अनुसार घायल घोड़ा चेतक उन्हें बाहर ले गया और फिर मर गया।
  • युद्ध के बाद: मानसिंह ने प्रताप का पीछा नहीं किया।

दिवेर और अंतिम वर्ष

  • दिवेर (राजसमंद): प्रताप ने दिवेर की मुगल चौकी पर आक्रमण किया और उनके पुत्र अमरसिंह ने चौकी के सूबेदार सुल्तान खाँ को मारा; RBSE पुस्तक में 1582, जी.एन. शर्मा में लगभग 1578। टॉड ने दिवेर को 'मेवाड़ का मेराथन' कहा।
  • पुनः अधिकार: मृत्यु तक प्रताप ने चित्तौड़ और माण्डलगढ़ को छोड़कर पूरा मेवाड़ वापस ले लिया था।
  • चावण्ड: अंतिम वर्षों में उनकी राजधानी।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • हल्दीघाटी या दिवेरहल्दीघाटी 1576, मानसिंह की सेना · दिवेर, सुल्तान खाँ की मुगल चौकी।
  • प्रताप या अमरसिंहप्रताप, हल्दीघाटी · अमरसिंह, दिवेर में सुल्तान खाँ को मारा और 1615 की संधि की।
  • प्रताप या उदयसिंहउदयसिंह द्वितीय ने 1568 में चित्तौड़ खोया और उदयपुर बसाया · प्रताप हल्दीघाटी में लड़े।

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