एक नज़र में
- चित्रशाला: महाराणा जगतसिंह प्रथम ने राजमहल में 'चितेरों की ओवरी' नाम से चित्रशाला स्थापित की, जिसे 'तस्वीरां रो कारखानो' भी कहा गया।
- चावंड: छप्पन की पहाड़ियों में महाराणा प्रताप की राजधानी; प्रताप और अमरसिंह प्रथम के समय यहाँ चित्रकला का विकास हुआ।
- चौरपंचाशिका: डगलस बैरेट और बेसिल ग्रे इस शैली का उद्गम मेवाड़ में मानते हैं।
तथ्य
| उपशैलियाँ | चावंड, उदयपुर, नाथद्वारा, देवगढ़, सावर, शाहपुरा; बनेड़ा, बागौर, बेगूँ, केलवा ठिकाणा कला |
|---|---|
| स्वर्णकाल | लघु चित्रों के लिए महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–52); कलाओं के लिए महाराणा कुंभा का काल भी स्वर्णिम माना जाता है |
| अध्ययन | मोतीचन्द्र, श्रीधर अंधारे, आर.के. वशिष्ठ |
प्रमुख कृतियाँ
| वर्ष | कृति | विवरण |
|---|---|---|
| 1260 | श्रावकप्रतिक्रमणसूत्रचूर्णि | शैली का प्रथम उदाहरण, तेजसिंह के राज्यकाल में चित्रित |
| 1423 | सुपासनाह चरियम् | देलवाड़ा में लिखी गई |
| 1540 | परिजात अवतरण | भागवत पुराण का चित्र-समूह, नानाराम की कृति, उदयसिंह के काल में |
| 1592 | ढोलामारू | चावंड, महाराणा प्रताप के समय; राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में सुरक्षित |
| 1605 | रागमाला | चावंड, अमरसिंह प्रथम के समय; निसारदीन द्वारा चित्रित |
| 1628 | रागमाला | साहिबदीन, जगतसिंह प्रथम के काल में |
| 1648 | भागवत पुराण | साहिबदीन द्वारा चित्रित |
| 1649 | रामायण | जगतसिंह प्रथम ने बनवाना आरंभ कराया; साहिबदीन, मनोहर और उनके सहयोगी; युद्ध काण्ड का खंड 1652 का |
उपशैलियाँ
| उपशैली | विशेषता | चित्रकार |
|---|---|---|
| चावंड एवं उदयपुर | जगतसिंह प्रथम के समय रसिकप्रिया, गीतगोविन्द, भागवत पुराण, रामायण · संग्रामसिंह द्वितीय के समय गीतगोविन्द, बिहारी सतसई, सुन्दर शृंगार, मुल्ला दो प्याजा के लतीफे, कलीला-दमना | साहिबदीन, मनोहर, निसारदीन |
| नाथद्वारा | पुष्टिमार्गीय पीठ; उदयपुर और ब्रज शैली का समन्वय; 18वीं सदी में पिछवाई; कृष्ण चरित, यशोदा, नन्द, ग्वाल, गोपियाँ और वल्लभ सम्प्रदाय के संत; हरे-पीले रंग; मध्य में श्रीनाथजी, गायें, आसमान में देवता, सघन वनस्पति, कदली वृक्ष | बाबा रामचंद्र, नारायण, चतुर्भुज, रामलिंग, चम्पालाल, घासीराम, तुलसीराम; महिलाएँ: कमला, इलायची |
| देवगढ़ | रावत द्वारिकादास चूँडावत ने महाराणा जयसिंह के काल में 1680 ई. में ठिकाना स्थापित किया; मारवाड़, जयपुर और मेवाड़ का समन्वय; प्राकृतिक परिवेश, शिकार, अन्तःपुर, राजसी ठाठ-बाट; पीले रंग की बहुलता; भित्ति चित्र अजारा की ओवरी और मोती महल में। श्रीधर अंधारे इसे प्रकाश में लाए | बगता, कँवला प्रथम, कँवला द्वितीय, हरचंद, नंगा, चोखा, बैजनाथ |
उदयपुर शैली की पहचान
- पुरुष: गठीली मूँछों वाले भरे चेहरे, विशाल नयन, खुले अधर, छोटी ग्रीवा, छोटा कद, उदयपुरी पगड़ी व लम्बा साफा।
- स्त्रियाँ: सरलता के भाव से युक्त, मीनाकृत आँखें, सीधी लम्बी नाक, दोहरी चिबुक, ठिगना कद, लूगड़ी, घाघरा और कंचुकी।
- रंग: अधिकतर लाल, पीले, हरे, नीले, सफेद; प्रकृति का संतुलित चित्रण।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- साहिबदीनमेवाड़, जगतसिंह प्रथम · साहबदीन या साहबदी भी लिखा जाता है · अली रज़ा बीकानेर के · शिवदास मारवाड़ के।
- चावंड रागमाला का चित्रकारनिसारदीन (नसीरुद्दीन) · साहिबदीन नहीं, जो जगतसिंह प्रथम के समय के थे।
- अंधारे या डिकिन्सनश्रीधर अंधारे देवगढ़ को प्रकाश में लाए · एरिक डिकिन्सन और फैयाज अली ने किशनगढ़ पर लिखा।
- नाथद्वारामेवाड़ की उपशैली, ढूंढाड़ की नहीं।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 18
साहिबदीन नामक चित्रकार को मेवाड़ के किस शासक का संरक्षण प्राप्त था?
- (1)महाराणा राजसिंह
- (2)महाराणा अमरसिंह
- (3)महाराणा जगतसिंह ।
- (4)महाराणा कुम्भा
उत्तर देखें
✓ (3) महाराणा जगतसिंह ।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 23
श्रीधर अंधारे को किस चित्रशैली को प्रकाश में लाने का श्रेय दिया जाता है?
- (1)किशनगढ़
- (2)देवगढ़
- (3)शाहपुरा
- (4)उणियारा
उत्तर देखें
✓ (2) देवगढ़
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 16
मेवाड़ शैली में 1648 ई. में 'भागवत' का चित्रण किसके द्वारा किया गया?
- (1)मुस्तफा
- (2)हसन
- (3)अली रज़ा
- (4)साहबदी
उत्तर देखें
✓ (4) साहबदी
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 130
सूची-I व सूची-II को सुमेलित करते हुए राजस्थान की प्रसिद्ध चित्रकला शैलियों एवं उनके चित्रकारों के संबंध में सही विकल्प चुनिये : सूची-I — सूची-II A. किशनगढ़ — i. साहिबदीन B. बीकानेर — ii. निहालचंद C. मेवाड़ — iii. अली रज़ा D. मारवाड़ — iv. शिवदास कूट :
- (1)A-ii, B-iv, C-i, D-iii
- (2)A-ii, B-iii, C-i, D-iv
- (3)A-ii, B-iii, C-iv, D-i
- (4)A-ii, B-i, C-iii, D-iv
उत्तर देखें
✓ (2) A-ii, B-iii, C-i, D-iv
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