EN
Log in

Add TopKaro to your iPhone

  1. Tap the Share button at the bottom of Safari
  2. Scroll and tap Add to Home Screen
  3. Tap Add — TopKaro appears on your home screen

iPhones don’t allow a one-tap install button, so we show these steps instead.

रणथम्भौर के हम्मीर देव

रणथम्भौर के अंतिम चौहान राजा हम्मीर देव ने अपनी शरण में आए मंगोल विद्रोहियों को नहीं सौंपा और 1301 ई. में अलाउद्दीन खिलजी से लड़ते हुए मारे गए।

⏱ 2 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. पूछा जाने वाला कारण: अलाउद्दीन की अपनी सेना के मंगोल विद्रोहियों को शरण, जिन्हें हम्मीर ने लौटाने से इनकार किया।
  2. हम्मीर के सेनानायक रणमल और रतिपाल के अलाउद्दीन से मिल जाने के बाद दुर्ग का पतन हुआ।
  3. हम्मीर पर ग्रंथ: हम्मीर महाकाव्य, नयचन्द्र सूरि (संस्कृत) · हम्मीर रासो, जोधराज · हम्मीर हठ, चंद्रशेखर।

तथ्य

पिताजैत्रसिंह
वंशरणथम्भौर के चौहान, जिनकी शुरुआत पृथ्वीराज तृतीय के पुत्र गोविन्दराज ने की
गद्दी पर1282 ई.; अन्य वृत्तांतों में 1283 ई. (वि.सं. 1339, हम्मीर महाकाव्य से)
प्रमुख रानीरंगदेवी
मृत्यु1301 ई., रणथम्भौर में लड़ते हुए

अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध

  • इससे पहले सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर पर आक्रमण किया, पर उसे नहीं ले सका।
  • मुहम्मदशाह (और केहब्रू) के नेतृत्व में मंगोल विद्रोही गुजरात की लूट के बँटवारे के झगड़े के बाद अलाउद्दीन की सेना से भागकर हम्मीर की शरण में आए।
  • 1299 ई.: हम्मीर ने उन्हें लौटाने से इनकार किया, और उसके विरुद्ध भेजी गई खिलजी सेना पीछे हटा दी गई।
  • बाद में उलुग खाँ और नुसरत खाँ की सेना ने दुर्ग घेरा; दीवारों से फेंके गए गोले से नुसरत खाँ मारा गया।
  • 1301 ई.: अलाउद्दीन स्वयं आया और दीवारों तक ऊँचा चबूतरा (पाशीब) बनवाया; किले में रसद कम पड़ गई।
  • अलाउद्दीन ने हम्मीर के दो सेनानायकों को किला देने का लालच देकर अपनी ओर मिला लिया; उनके विश्वासघात से तुर्क किले में घुसे। बाद में अलाउद्दीन ने दोनों को मरवा दिया।
  • हम्मीर लड़ते हुए मारे गए; किले की स्त्रियों ने रानी रंगदेवी के नेतृत्व में जौहर किया।

जुलाई 1301 ई. में दुर्ग का पतन हुआ और रणथम्भौर के चौहानों का राज्य समाप्त हो गया। दुर्ग की इमारतें दुर्गों वाले पृष्ठ पर हैं।

दोहे में हम्मीर का हठ

सिंह-सवन सत्पुरूष-वचन, कदली फळै इक बार।तिरिया-तेल हमीर-हठ, चढ़ै न दूजी बार।।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • दो हम्मीररणथम्भौर के हम्मीर देव चौहान · मेवाड़ के हम्मीर सिसोदिया, मेवाड़ वाले पृष्ठ पर।
  • अलाउद्दीन के घेरे वर्ष सेरणथम्भौर 1301 · चित्तौड़ 1303 (मेवाड़ पृष्ठ) · सिवाना 1308 · जालौर 1311।

पढ़ लिया? अब अभ्यास करें

निःशुल्क अभ्यास प्रश्नों से इस विषय पर अपनी तैयारी जाँचें।

अभ्यास प्रश्न →
अगला टॉपिक:आमेर-जयपुर के कछवाहा →