एक नज़र में
- कुचामनी के वाद्य: ढोल, शहनाई, ढोलक और सारंगी वादक मुख्य सहयोगी होते हैं।
- शेखावाटी के वाद्य: प्रायः हारमोनियम, सारंगी, शहनाई, बाँसुरी, नक्कारा और ढोलक।
- दंगल: तुर्रा कलंगी का मुख्य माध्यम शिव-शक्ति पर काव्यमय रचनाएँ थीं, जिन्हें 'दंगल' कहते हैं।
तथ्य
| आरंभ | 18वीं सदी की शुरुआत से |
|---|---|
| विषय | पौराणिक या वीर आख्यान, जिनमें ऐतिहासिक तत्त्व भी होते हैं |
| शैलियाँ | क्षेत्र के अनुसार अंतर भाषा का नहीं, प्रस्तुति के ढंग का है |
शैलियाँ
| शैली | स्थान और कलाकार | प्रमुख ख्याल |
|---|---|---|
| कुचामनी | प्रवर्तक लच्छीराम; उगमराज प्रमुख खिलाड़ी | चाँद नीलगिरी, राव रिड़मल, मीरा मंगल |
| शेखावाटी | चिड़ावा के नानूराम, इसके मुख्य खिलाड़ी; उनके शिष्य दूलिया राणा | हीर राँझा, हरीचंद, भर्तृहरि, जयदेव कलाली, ढोला मरवण, आल्हादेव |
| जयपुरी | गुणीजनखाना के कलाकार | जोगी-जोगन, कान-गूजरी, मियाँ-बीबी, पठान, रसीली तम्बोलन |
| हेला | दौसा, लालसोट और सवाई माधोपुर; शायर हेला | |
| कन्हैया | करौली, सवाई माधोपुर, धौलपुर, भरतपुर और दौसा | |
| तुर्रा कलंगी | मेवाड़; केंद्र घोसुंडा, चित्तौड़, निम्बाहेड़ा और नीमच (मध्य प्रदेश) |
कुचामनी और शेखावाटी
- कुचामनी का रूप ऑपेरा जैसा है और इसमें लोकगीतों की प्रधानता है। यह खुले मंच पर, सरल भाषा में, सामाजिक व्यंग्य के विषयों पर खेला जाता है।
- शेखावाटी ख्याल प्रभावी पद-संचालन और भाषा व मुद्रा में संप्रेषणीय शैली के गीत-गायन के लिए जाना जाता है। दूलिया राणा के ख्यालों का खर्च उनके परिवार के लोग ही उठाते हैं।
तुर्रा कलंगी
- मेवाड़ के संत-पीर शाह अली और तुकनगीर ने लगभग 400 वर्ष पूर्व इसकी रचना की।
- 'तुर्रा' शिव का और 'कलंगी' पार्वती का प्रतीक है; तुकनगीर 'तुर्रा' के और शाह अली 'कलंगी' के पक्षकार थे।
- इसके संवाद 'बोल' कहलाते हैं और काव्यात्मक होते हैं।
- इसकी प्रकृति गैर-व्यावसायिक है। लगभग 20 फुट ऊँचे रंगमंच को राजस्थानी शैली में भरपूर सजाया जाता है, इसमें दर्शकों के भाग लेने की सर्वाधिक संभावना रहती है और चंग बजाया जाता है।
- प्रमुख कलाकार: सोनी जयदयाल, चेतराम, हमीद बेग, ताराचंद और ठाकुर ओंकारसिंह।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- मंच पर स्त्री पात्रजयपुरी ख्याल में स्त्री पात्रों की भूमिका स्त्रियाँ भी निभाती हैं · कुचामनी ख्याल में पुरुष।
- हेला या कन्हैयाहेला ख्याल का आरंभ बम (बड़ा नगाड़ा) और नौबत से होता है और इसकी पहचान 'हेला देना' (लंबी टेर में आवाज देना) है · कन्हैया ख्याल की मुख्य कथा 'कहन' और मुख्य पात्र 'मेड़िया' कहलाता है।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 73
कूचामणी ख्याल के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं? a. कूचामणी ख्याल प्रसिद्ध लोक नाट्यकार लच्छी राम द्वारा शुरू किया गया था। b. चाँद नीलगिरी, राव रिदमल और मीरा मंगल, लच्छी राम द्वारा रचित प्रमुख ख्याल हैं। c. कूचामणी ख्याल एक मुक्त नाट्यशाला (थिएटर) में निष्पादित नहीं किया जाता है। d. इस ख्याल में ढोल, सारंगी, शहनाई और ढोलक वादक मुख्य सहयोगी होते हैं। नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेंः
- (1)केवल b, c और d
- (2)केवल a, c और d
- (3)केवल a, b और c
- (4)केवल a, b और d
उत्तर देखें
✓ (4) केवल a, b और d
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