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कालबेलिया नृत्य

कालबेलिया, कालबेलिया समुदाय का नृत्य है: महिलाएँ लहराते काले घाघरे में सर्प की तरह घूमती हैं और पुरुष वाद्य बजाते हैं।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 15 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. वाद्य: खंजरी (ताल वाद्य) और पूंगी, जो सुषिर वाद्य है और परंपरा से साँप पकड़ने के लिए बजाई जाती थी।
  2. होली: होली पर विशेष पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं।
  3. गीत: प्रस्तुति के समय तत्काल रचे जाते हैं और कथाओं के माध्यम से पौराणिक ज्ञान फैलाते हैं; ये मौखिक परंपरा से चलते आए हैं, इनका कोई लिखित पाठ या प्रशिक्षण पुस्तिका नहीं है।

तथ्य

समुदायकालबेलिया, जो पहले पेशेवर सपेरे थे
वेशभूषाछोटे शीशों और चाँदी के धागे की कढ़ाई वाले वस्त्र; पारंपरिक गोदना और गहने
यूनेस्कोमानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची, 2010
प्रसिद्ध नृत्यांगनागुलाबो सपेरा (सरकारी सूची में गुलाबी सपेरा), पद्मश्री 2016; उन्होंने इस नृत्य को देश-विदेश में पहचान दिलाई

कालबेलियों के अन्य नृत्य

  • इंडोणी, पणिहारी, बागड़िया और शंकरिया भी कालबेलियों के नृत्य हैं।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • कालबेलिया या तेरहतालीकालबेलिया में महिलाएँ काले घाघरे में नाचती हैं और पुरुष पूंगी-खंजरी बजाते हैं · तेरहताली कामड़ महिलाएँ बैठकर मंजीरे बजाते हुए रामदेवजी के यशगान में करती हैं।

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