एक नज़र में
- वाद्य: खंजरी (ताल वाद्य) और पूंगी, जो सुषिर वाद्य है और परंपरा से साँप पकड़ने के लिए बजाई जाती थी।
- होली: होली पर विशेष पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं।
- गीत: प्रस्तुति के समय तत्काल रचे जाते हैं और कथाओं के माध्यम से पौराणिक ज्ञान फैलाते हैं; ये मौखिक परंपरा से चलते आए हैं, इनका कोई लिखित पाठ या प्रशिक्षण पुस्तिका नहीं है।
तथ्य
| समुदाय | कालबेलिया, जो पहले पेशेवर सपेरे थे |
|---|---|
| वेशभूषा | छोटे शीशों और चाँदी के धागे की कढ़ाई वाले वस्त्र; पारंपरिक गोदना और गहने |
| यूनेस्को | मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची, 2010 |
| प्रसिद्ध नृत्यांगना | गुलाबो सपेरा (सरकारी सूची में गुलाबी सपेरा), पद्मश्री 2016; उन्होंने इस नृत्य को देश-विदेश में पहचान दिलाई |
कालबेलियों के अन्य नृत्य
- इंडोणी, पणिहारी, बागड़िया और शंकरिया भी कालबेलियों के नृत्य हैं।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- कालबेलिया या तेरहतालीकालबेलिया में महिलाएँ काले घाघरे में नाचती हैं और पुरुष पूंगी-खंजरी बजाते हैं · तेरहताली कामड़ महिलाएँ बैठकर मंजीरे बजाते हुए रामदेवजी के यशगान में करती हैं।
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