एक नज़र में
- नाम: कालीबंगा का अर्थ है 'काली चूड़ियाँ', टीले में मिले काली चूड़ियों के टुकड़ों के कारण।
- पहली सूचना: अमलानन्द घोष ने 1950 के दशक के आरम्भ में (RBSE पुस्तक में 1952 ई.) इसे हड़प्पा स्थल के रूप में पहचाना; बी.बी. लाल और बी.के. थापर ने बाद में खुदाई की। एल.पी. तेस्सितोरी ने इससे पहले (1917-19) टीले का उल्लेख किया था।
- जिला: आज हनुमानगढ़; 1960 के दशक की ASI रिपोर्टों में गंगानगर जिला लिखा है।
तथ्य
| स्थान | पीलीबंगा तहसील, हनुमानगढ़ जिला; घग्घर (प्राचीन सरस्वती) का बायाँ तट |
|---|---|
| उत्खनन | भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1960-61 से 1969-70 तक नौ सत्रों में: 1960-61 में बी.बी. लाल ने आरम्भ किया और 1961-62 में बी.के. थापर ने जारी रखा। RBSE पुस्तक आरम्भ 1961-62 बताती है। प्राक्-हड़प्पा काल की रिपोर्ट 2003 में (ASI मेमॉयर 98) और हड़प्पा काल का पहला भाग 2015 में (मेमॉयर 110) छपा |
| दो काल | काल I प्राक्-हड़प्पा, काल II हड़प्पा |
क्या मिला
- प्राक्-हड़प्पा काल का जुता हुआ खेत, जिसे एक ही खेत में साथ-साथ दो फसलें उगाने का संकेत माना जाता है।
- खिलौना गाड़ियाँ और प्राक्-हड़प्पा बस्ती के चारों ओर कच्ची ईंटों की दीवार।
- अग्निवेदियाँ: दुर्ग (गढ़ी) में एक पंक्ति में और निचले नगर के घरों में अग्नि-स्थान।
- मुहरें: हड़प्पा मुहरें और एक बेलनाकार मुहर।
- कच्ची ईंटों के मकान; पक्की ईंट मुख्यतः नालियों और कुओं में; एक घर की नाली लकड़ी की थी।
- कब्रिस्तान में शवाधान की तीन विधियाँ; एक बच्चे की खोपड़ी में छह छेद।
- मृद्भाण्ड: लाल, काली रेखाओं से चित्रित, कभी-कभी सफेद भी।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- खेत या वेदियाँजुता हुआ खेत प्राक्-हड़प्पा है · अग्निवेदियाँ हड़प्पा काल की हैं।
- कालीबंगा या रंगमहलरंगमहल (श्रीगंगानगर) बाद का स्थल है, जिसे स्वीडिश दल ने 1952-54 में खोदा।
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