एक नज़र में
- पथिक गांधीजी से बम्बई में मिले (वर्धा में नहीं); इसके बाद गांधीजी ने जांच के लिए महादेव देसाई को भेजा (1918)।
- इसका प्रभाव फैला: असंतोष बेगूं, बस्सी और पारसोली तक पहुँचा, और बूंदी (बरड़) के किसानों व तेजावत के भीलों ने इससे प्रेरणा ली।
- पथिक का वास्तविक नाम भूपसिंह था; किसान उन्हें महात्माजी कहते थे।
तथ्य
| वर्ष | 1897–1941, लगभग 44 वर्ष |
|---|---|
| स्थान | मेवाड़ के ऊपरमाल क्षेत्र का बिजौलिया ठिकाना (भीलवाड़ा जिला) |
| किसान | अधिकांश धाकड़ |
| शिकायतें | लगभग 84 प्रकार की लाग-बाग, भारी लगान और बेगार |
| अंत | 1941 (कुछ विवरणों में 1939): मेवाड़ के राजस्व मंत्री डॉ. मोहनसिंह मेहता ने समाधान कराया और किसानों को उनकी जमीनें वापस मिलीं |
तीन चरण
| चरण | वर्ष | नेतृत्व | घटनाएँ |
|---|---|---|---|
| प्रथम | 1897–1915 | नानजी पटेल और ठाकरी पटेल, फिर साधु सीताराम दास | 1897: गिरधरपुरा में एक मृत्युभोज पर किसानों ने दोनों पटेलों को महाराणा फतहसिंह से फरियाद करने उदयपुर भेजा, पर कोई परिणाम नहीं निकला। 1913: सीताराम दास के नेतृत्व में, फतहकरण चारण के साथ, किसानों ने एक वर्ष बिजौलिया की जमीन पर खेती नहीं की और राव ने 84 में से 6 लागें हटाईं |
| द्वितीय | 1915–1923 | विजयसिंह पथिक | 1915 में सीताराम दास पथिक से मिले और उनसे नेतृत्व का अनुरोध किया। 1916: मन्नालाल की अध्यक्षता में किसान पंच बोर्ड; 1917 में हरियाली अमावस्या को ऊपरमाल पंच बोर्ड। माणिक्यलाल वर्मा ठिकाने की नौकरी छोड़कर आंदोलन में आए। मेवाड़ के जांच आयोगों से खास राहत नहीं मिली। 1922: ए.जी.जी. रॉबर्ट हॉलैंड की मध्यस्थता से हुए समझौते में लगभग 35 लागें और बेगार समाप्त हुईं |
| तृतीय | 1923–1941 | माणिक्यलाल वर्मा, हरिभाऊ उपाध्याय, जमनालाल बजाज | 1923 में पथिक गिरफ्तार हुए और ठिकाने ने समझौता तोड़ दिया। 1927: पथिक की सलाह पर किसानों ने बारानी भूमि छोड़ी और वह उनके हाथ से निकल गई। 1931: जमनालाल बजाज ने महाराणा से वार्ता की (20 जुलाई) |
चरणों के वर्ष भिन्न हैं: RBSE पुस्तक 1897–1915 और 1915–1923 देती है; कुछ पुस्तकें विभाजन 1916 में मानती हैं, जब पथिक जुड़े।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- समाचार पत्रगणेश शंकर विद्यार्थी के प्रताप (कानपुर) ने बिजौलिया को पूरे देश में पहुँचाया; अभ्युदय (प्रयाग), भारत मित्र (कलकत्ता) और मराठा (पूना) ने भी समाचार छापे · ऊपरमाल का डंका पथिक का अपना पत्र था · नवीन राजस्थान (अजमेर, 1922) राजस्थान सेवा संघ का पत्र था।
- लागेंचँवरी, हर कन्या के विवाह पर 13 रुपये (कुछ साक्ष्यों में 5 रुपये), जो 1903 में राव कृष्णसिंह ने लगाई; किसानों ने दो वर्ष तक बेटियों के विवाह नहीं किए और ग्वालियर जाने निकल पड़े, तब राव ने इसे हटाने का वचन दिया · तलवार बंधाई, उत्तराधिकार शुल्क, जिसका भार राव पृथ्वीसिंह (1906 से) ने किसानों पर डाला।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 7
विजयसिंह पथिक ने किस समाचार पत्र के माध्यम से बिजौलिया किसान आन्दोलन का प्रचार पूरे भारत में कर दिया था?
- (1)नवीन राजस्थान
- (2)तरुण राजस्थान
- (3)युगान्तर
- (4)प्रताप
उत्तर देखें
✓ (4) प्रताप
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 10
निम्नलिखित ठिकानों में से किसने ‘चँवरी कर’ लगाया?
- (1)कुचामन
- (2)डीडवाना
- (3)भैंसरोड़गढ़
- (4)बिजौलिया
उत्तर देखें
✓ (4) बिजौलिया
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 124
बिजोलिया किसान आन्दोलन के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : A. बिजोलिया किसान आन्दोलन सम्बन्धी जानकारी देने हेतु विजय सिंह पथिक गांधीजी से मिलने वर्धा गये थे । B. प्रयाग के अभ्युदय एवं कलकत्ता के भारत मित्र समाचार-पत्रों ने बिजोलिया किसान आन्दोलन सम्बन्धी समाचारों का नियमित रूप से प्रकाशन किया था । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर को चुनिये :
- (1)केवल A सही है ।
- (2)केवल B सही है ।
- (3)A और B दोनों सही हैं ।
- (4)न तो A और न ही B सही है ।
उत्तर देखें
✓ (2) केवल B सही है ।
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