एक नज़र में
- हल्दीघाटी, 1576: उन्होंने महाराणा प्रताप के विरुद्ध अकबर की सेना का नेतृत्व किया; युद्ध और उसका विवादित परिणाम मेवाड़ के नोट्स में है।
- नवरत्न: इन्हें प्रायः अकबर के नवरत्नों में गिना जाता है।
- अकबर से उपाधियाँ: फर्जन्द (बेटा) और मिर्जा राजा।
तथ्य
| जन्म | दिसंबर 1550; भगवंतदास के पुत्र, भारमल के पौत्र |
|---|---|
| आमेर का शासन | 1589–1614 ई. |
| मनसब | राजा बनने पर 5,000 (1589); 1605 में 7,000 |
| सूबेदार | काबुल (1585–86), बिहार (1587 से), बंगाल (1594 से; कुछ विवरणों में 1595) |
| मृत्यु | 6 जुलाई 1614, एलिचपुर (बरार) में; उनके पुत्र भाऊसिंह उत्तराधिकारी बने |
जीवन-वृत्त
- 1562: वे पिता के साथ अकबर की सेवा में आए।
- उड़ीसा, 1592: उन्होंने उड़ीसा को मुगल साम्राज्य में मिलाया।
मंदिर और निर्माण
- शिला देवी: इनके समय देवी आमेर में प्रतिष्ठित हुईं।
- वृंदावन में गोविंद देव का मंदिर।
- आमेर का महल इनके समय शुरू हुआ: आमेर किले के नोट्स देखें।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- जगत शिरोमणि मंदिरइनकी रानी कंकावती ने पुत्र जगतसिंह की स्मृति में बनवाया, मानसिंह ने नहीं; मंदिरों और महलों के नोट्स देखें।
- मानसिंह या भगवंतदासभगवंतदास उनके पिता थे और उनसे पहले आमेर के शासक रहे।
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