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आमेर के राजा मानसिंह प्रथम

आमेर के मानसिंह प्रथम ने अकबर और जहाँगीर की सेवा सेनापति और सूबेदार के रूप में की।

⏱ 1 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 16 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. हल्दीघाटी, 1576: उन्होंने महाराणा प्रताप के विरुद्ध अकबर की सेना का नेतृत्व किया; युद्ध और उसका विवादित परिणाम मेवाड़ के नोट्स में है।
  2. नवरत्न: इन्हें प्रायः अकबर के नवरत्नों में गिना जाता है।
  3. अकबर से उपाधियाँ: फर्जन्द (बेटा) और मिर्जा राजा।

तथ्य

जन्मदिसंबर 1550; भगवंतदास के पुत्र, भारमल के पौत्र
आमेर का शासन1589–1614 ई.
मनसबराजा बनने पर 5,000 (1589); 1605 में 7,000
सूबेदारकाबुल (1585–86), बिहार (1587 से), बंगाल (1594 से; कुछ विवरणों में 1595)
मृत्यु6 जुलाई 1614, एलिचपुर (बरार) में; उनके पुत्र भाऊसिंह उत्तराधिकारी बने

जीवन-वृत्त

  • 1562: वे पिता के साथ अकबर की सेवा में आए।
  • उड़ीसा, 1592: उन्होंने उड़ीसा को मुगल साम्राज्य में मिलाया।

मंदिर और निर्माण

  • शिला देवी: इनके समय देवी आमेर में प्रतिष्ठित हुईं।
  • वृंदावन में गोविंद देव का मंदिर।
  • आमेर का महल इनके समय शुरू हुआ: आमेर किले के नोट्स देखें।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • जगत शिरोमणि मंदिरइनकी रानी कंकावती ने पुत्र जगतसिंह की स्मृति में बनवाया, मानसिंह ने नहीं; मंदिरों और महलों के नोट्स देखें।
  • मानसिंह या भगवंतदासभगवंतदास उनके पिता थे और उनसे पहले आमेर के शासक रहे।

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