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राजस्थान के ऊर्जा संसाधन

राज्य की बिजली और ईंधन कहाँ से आते हैं: स्रोतवार स्थापित क्षमता, प्रमुख केंद्र और क्षेत्र जिलों के साथ, लिग्नाइट, तेल-गैस और स्वच्छ ऊर्जा नीति।

⏱ 8 मिनट पढ़ें1 विस्तृत पृष्ठ✓ तथ्य जाँचे गए 22 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. दिसंबर 2025 तक राज्य की 31,556.43 मेगावाट स्थापित विद्युत क्षमता में पवन और सौर मिलाकर 45.36 प्रतिशत थे।
  2. राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति, 2024 का लक्ष्य 2029-30 तक 1,25,000 मेगावाट है: 90,000 मेगावाट सौर, 25,000 मेगावाट पवन एवं हाइब्रिड और 10,000 मेगावाट जल विद्युत, पंप स्टोरेज एवं बैटरी भंडारण।
  3. रावतभाटा राजस्थान में एनपीसीआईएल का एकमात्र चालू परमाणु केंद्र है।
  4. लिग्नाइट: कुल संसाधन सबसे अधिक बाड़मेर में और सिद्ध भंडार सबसे अधिक बीकानेर में हैं (1 अप्रैल 2024)।
  5. राजस्थान भारत के कच्चे तेल का लगभग 12 प्रतिशत देता है (भारत के 28.70 में से 3.42 मिलियन टन प्रतिवर्ष, फरवरी 2026 में प्रकाशित आँकड़े) और स्थलीय प्राकृतिक गैस उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।

ऊर्जा स्रोत: एक नज़र

  • सौरअग्रणी नवीकरणीय स्रोतप्रमुख स्थानभड़ला (तब जोधपुर जिला, अब फलौदी); जैसलमेरटिप्पणीदिसंबर 2025 तक 42,531 मेगावाट चालू, रूफटॉप और ऑफ-ग्रिड सहितपूरे नोट्स पढ़ें →
  • पवनपवन में पाँचवाँप्रमुख स्थानजैसलमेर और बाड़मेरटिप्पणी30 जून 2026 को 5,516 मेगावाट, राज्यों में पाँचवाँ स्थान; दिसंबर 2025 तक 2,140 मेगावाट पवन-सौर हाइब्रिड चालू
  • बायोमाससरसों-भूसे की बिजलीटिप्पणीदिसंबर 2025 तक 20 संयंत्र, 207.50 मेगावाट; ईंधन सरसों का भूसा और प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा; बायोमास एवं अपशिष्ट से ऊर्जा नीति 29 सितंबर 2023 से लागू
  • जल विद्युतबाँध आधारित बिजलीप्रमुख स्थानचंबल पर राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर; माही बजाज सागर, बांसवाड़ाटिप्पणीबाँधों का विवरण नदियों वाले नोट्स में
  • ताप (कोयला और लिग्नाइट)कोयला-लिग्नाइट केंद्रप्रमुख स्थानसूरतगढ़, कोटा, छबड़ा, कालीसिंध; बाड़मेर और बीकानेर जिलों में लिग्नाइट केंद्र
  • परमाणुरावतभाटा परमाणु केंद्रप्रमुख स्थानरावतभाटा, चित्तौड़गढ़ जिला
  • लिग्नाइटभूरा कोयलाप्रमुख स्थानबाड़मेर, बीकानेर और नागौर क्षेत्र
  • खनिज तेल और प्राकृतिक गैसतेल-गैस बेसिनप्रमुख स्थानबाड़मेर–सांचौर और जैसलमेर बेसिन

नवीकरणीय और अनवीकरणीय स्रोत

  • अनवीकरणीय: सीमित भंडार, जो दोबारा बनने में हज़ारों वर्ष लेता है, मानव जीवनकाल से कहीं अधिक: कोयला (लिग्नाइट भूरा कोयला है), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, अर्थात जीवाश्म ईंधन। राजस्थान में: लिग्नाइट, कच्चा तेल और गैस, तथा कोयला, लिग्नाइट और गैस आधारित केंद्र।
  • नवीकरणीय: प्रकृति इन्हें जल्दी नवीकृत कर देती है। सूर्य का प्रकाश और पवन मनुष्य के उपयोग से समाप्त नहीं होते; जल, मृदा और वन (इमारती लकड़ी) भी नवीकरणीय हैं, यद्यपि लापरवाह उपयोग से इनका भंडार घटता है। सूर्य का प्रकाश, पवन, जल और बायोमास भारत के नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन हैं; राजस्थान में सौर, पवन, बायोमास और जल विद्युत केंद्र।

स्रोतवार स्थापित क्षमता (मेगावाट)

स्रोत2024-25 (मार्च 2025)2025-26 (दिसंबर तक)
राज्य के अपने और साझा: ताप7,830.007,830.00
राज्य के अपने और साझा: जल विद्युत1,017.291,017.29
राज्य के अपने और साझा: गैस600.50600.50
केंद्रीय क्षेत्र से आवंटन: ताप2,056.952,197.47
केंद्रीय क्षेत्र से आवंटन: जल विद्युत740.66851.86
केंद्रीय क्षेत्र से आवंटन: परमाणु456.74806.74
आरआरईसीएल, आरएसएमएमएल और निजी परियोजनाएँ: पवन4,416.124,416.12
आरआरईसीएल, आरएसएमएमएल और निजी परियोजनाएँ: बायोमास166.65196.45
आरआरईसीएल, आरएसएमएमएल और निजी परियोजनाएँ: सौर (कुसुम पीपीए सहित)6,256.929,898.00
आरआरईसीएल, आरएसएमएमएल और निजी परियोजनाएँ: ताप एवं जल विद्युत3,742.003,742.00
कुल27,283.8331,556.43

तालिका की सौर और पवन पंक्तियाँ राज्य में चालू कुल क्षमता से कम हैं: सौर पंक्ति में कुसुम के बिजली क्रय अनुबंधों सहित सौर क्षमता है, और पवन पंक्ति के 4,416.12 मेगावाट के मुकाबले दिसंबर 2025 तक 5,229 मेगावाट पवन क्षमता चालू हो चुकी थी। 2025-26 में परमाणु की पंक्ति 350 मेगावाट बढ़ी।

ताप विद्युत केंद्र

केंद्रजिलाईंधनक्षमता (मेगावाट, 2023)
सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट (आरवीयूएनएल)श्रीगंगानगरकोयला2,820 (6 × 250 और 2 × 660)
कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (आरवीयूएनएल)कोटाकोयला1,240
छबड़ा थर्मल पावर प्लांट (आरवीयूएनएल)बारांकोयला2,320 (4 × 250 और 2 × 660)
कालीसिंध थर्मल पावर स्टेशन (आरवीयूएनएल)झालावाड़कोयला1,200 (2 × 600)
गिरल लिग्नाइट पावर प्लांट (आरवीयूएनएल)बाड़मेरलिग्नाइट250 (2 × 125)
राज वेस्ट लिग्नाइट पावर प्लांट (जेएसडब्ल्यू एनर्जी)बाड़मेरलिग्नाइट1,080 (8 × 135)
बरसिंगसर थर्मल पावर स्टेशन (एनएलसी इंडिया)बीकानेरलिग्नाइट250 (2 × 125)

लिग्नाइट

लिग्नाइट के भंडार एवं संसाधन: 1 अप्रैल 2024 को 6,586.24 मिलियन टन, जिनमें 1,203.85 मिलियन टन सिद्ध (प्रूव्ड) हैं। कोयला क्षेत्रों के नाम अगस्त 2023 से पहले के जिलों के अनुसार हैं। निक्षेप बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, जालौर, नागौर और पाली में हैं।

कोयला क्षेत्रसिद्धकुल (मिलियन टन)
बाड़मेर495.234,559.69
बीकानेर560.301,099.82
नागौर148.32735.75
जालौर-76.08
जैसलमेर-70.44
दो जिलों में फैले क्षेत्र (नागौर-पाली, जैसलमेर-बाड़मेर, जैसलमेर-बीकानेर)-44.46
कुल1,203.856,586.24

चालू खदानें: आरएसएमएमएल बाड़मेर के पास गिरल (खुली खदान, उत्पादन मई 1995 से) चलाता है, जिसका लिग्नाइट गिरल केंद्र में जाता है, और नागौर जिले में मातासुख–कसनाऊ (नवंबर 2003 से, कम गंधक और राख वाला)। बाड़मेर लिग्नाइट माइनिंग कंपनी, आरएसएमएमएल और जेएसडब्ल्यू की बाड़मेर कंपनी के संयुक्त उपक्रम, की कपूरड़ी और जालिपा खदानें राज वेस्ट संयंत्र को ईंधन देती हैं। पलाना की पुरानी भूमिगत खदान 1967 में बंद हुई।

खनिज तेल और प्राकृतिक गैस

केयर्न इंडिया ने 2025-26 में दिसंबर तक बाड़मेर–सांचौर बेसिन से 22.51 लाख टन कच्चा तेल निकाला। लगभग 57,000 से 59,000 बैरल प्रतिदिन 15 क्षेत्रों से आता है, जिनमें मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती, रागेश्वरी (राजेश्वरी) और कामेश्वरी हैं।

पेट्रोलियम बेसिनजिले
बाड़मेर–सांचौरबाड़मेर, जालौर का भाग और बालोतरा
जैसलमेरजैसलमेर, फलौदी और बीकानेर का भाग
बीकानेर–नागौरबीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू
विंध्यनकोटा, बारां, झालावाड़, धौलपुर, करौली तथा बूँदी, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ के भाग
  • प्राकृतिक गैस: बाड़मेर क्षेत्र से लगभग 1.90 से 2.20 और जैसलमेर से लगभग 0.71 से 0.75 मिलियन मानक घन मीटर प्रतिदिन, कुल 2.60 से 2.95।
  • नए गैस क्षेत्र: भाखरी टिब्बा (ऑयल इंडिया, जून 2025 से) और चिन्नेवाला टिब्बा (ओएनजीसी, अगस्त 2025 से), दोनों जैसलमेर जिले में।
  • भारी कच्चा तेल: बागेवाला, जैसलमेर जिला, लगभग 800 बैरल प्रतिदिन।
  • घटता कच्चा तेल उत्पादन: 2020-21 में 42.62 मिलियन बैरल, 2024-25 में 24.88 मिलियन और 2025-26 में दिसंबर तक 16.38 मिलियन।
  • रिफाइनरी: पचपदरा (तब बाड़मेर जिला, अब बालोतरा) की एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड; रिफाइनरी और उसका पेट्रोरसायन परिसर उद्योगों के नोट्स में हैं।

परमाणु ऊर्जा

एनपीसीआईएल का राजस्थान परमाणु विद्युत केंद्र (आरएपीएस) रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ जिले में है। इसकी चालू इकाइयाँ:

इकाईक्षमता (मेगावाट)वाणिज्यिक संचालन
आरएपीएस-22001 अप्रैल 1981
आरएपीएस-32201 जून 2000
आरएपीएस-422023 दिसंबर 2000
आरएपीएस-52204 फरवरी 2010
आरएपीएस-622031 मार्च 2010
आरएपीएस-770015 अप्रैल 2025

माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु विद्युत परियोजना, बांसवाड़ा: 700 मेगावाट के चार दाबित भारी जल रिएक्टर, दो चरणों में दो-दो इकाइयाँ, 42,000 करोड़ रुपये की लागत। इसे एनपीसीआईएल की सहायक कंपनी और एनपीसीआईएल-एनटीपीसी का संयुक्त उपक्रम अणुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (अश्विनी) बना रहा है; यह दो केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के संयुक्त उपक्रम की देश की पहली परमाणु परियोजना है। शिलान्यास 25 सितंबर 2025 को हुआ।

नीतियाँ, एजेंसियाँ और ऊर्जा संरक्षण

  • स्वच्छ ऊर्जा नीति: राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति, 2024 (दिसंबर 2024 में जारी, 29 मार्च 2029 तक या नई नीति आने तक प्रभावी, नोडल एजेंसी आरआरईसी) छत पर सौर, भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन को भी बढ़ावा देती है। हाइड्रोजन का लक्ष्य 2030 तक 2,000 किलो टन प्रतिवर्ष है, और पहली 500 किलो टन प्रतिवर्ष की परियोजना को पारेषण एवं व्हीलिंग शुल्क में 50% की छूट मिलती है।
  • गैस: राजस्थान सिटी गैस वितरण नीति 2025 (16 जुलाई 2025 को जारी) का उद्देश्य पाइप से और संपीड़ित प्राकृतिक गैस का प्रसार है; 2025-26 में दिसंबर तक 53,047 नए पाइप-से-रसोई-गैस कनेक्शन दिए गए।
  • एजेंसियाँ: आरआरईसीएल नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की राज्य नोडल एजेंसी और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की राज्य नामित एजेंसी है; आरवीयूएनएल राज्य के ताप विद्युत केंद्र चलाता है, आरवीपीएन पारेषण तंत्र, और तीन विद्युत वितरण कंपनियाँ (डिस्कॉम) बिजली वितरित करती हैं।
  • ऊर्जा संरक्षण दिवस: 14 दिसंबर, 1991 से हर वर्ष राजस्थान सहित पूरे देश में मनाया जाता है, इसी दिन राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार दिए जाते हैं; ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत बना।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • कालीसिंध और कोटाकालीसिंध थर्मल पावर स्टेशन झालावाड़ में है · कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट कोटा में है · छबड़ा तीसरा केंद्र है, बारां में।
  • रावतभाटापरमाणु केंद्र और राणा प्रताप सागर बाँध दोनों यहीं, चित्तौड़गढ़ जिले में हैं · नई परमाणु परियोजना माही बांसवाड़ा में, बांसवाड़ा जिले में है।
  • आरएपीएस-7 और आरएपीपी-8इकाई 7 सबसे नई चालू इकाई है · इकाई 8, 21 अक्टूबर 2026 को एनपीसीआईएल की निर्माणाधीन परियोजनाओं में थी।
  • लिग्नाइट या नहींकपूरड़ी (बाड़मेर), कसनाऊ और मेड़ता रोड (नागौर) लिग्नाइट क्षेत्र हैं · रामपुरा अगूचा (भीलवाड़ा) सीसा-जस्ता का क्षेत्र है · जगपुरा नॉर्थ (बांसवाड़ा) सोने का अन्वेषण ब्लॉक है।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 6

‘कालीसिन्ध तापीय ऊर्जा परियोजना’ निम्नलिखित में से राजस्थान के किस क्षेत्र में स्थित है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)

  1. (1)झालावाड़
  2. (2)बीकानेर
  3. (3)बाड़मेर
  4. (4)कोटा
उत्तर देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 11

कालीसिंध सुपर ताप बिजली स्टेशन अवस्थित है

  1. (1)बारां
  2. (2)झालावाड़
  3. (3)डूंगरपुर
  4. (4)बाँसवाड़ा
उत्तर देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 55

राजस्थान में ऊर्जा संरक्षण दिवस कब मनाया जाता है ?

  1. (1)14 दिसम्बर
  2. (2)5 जून
  3. (3)22 अप्रैल
  4. (4)21 मार्च
उत्तर देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 79

इनमें से कौन सा प्राकृतिक संसाधन गैर-नवीकरणीय संसाधन माना जाता है ?

  1. (1)इमारती लकड़ी (टिम्बर)
  2. (2)जीवाश्म ईंधन
  3. (3)सौर ऊर्जा
  4. (4)पवन ऊर्जा
उत्तर देखें

✓ (2) जीवाश्म ईंधन

पूरा प्रश्न-पत्र देखें

बीएसटीसी 2026 (प्रथम पारी) · प्रश्न 86

बाड़मेर की गिरल खदान और नागौर की मातासुख और कसनाऊ खदानों से कौनसा खनिज निकाला जाता है?

  1. (1)बैंटोनाइट
  2. (2)जिप्सम
  3. (3)लिग्नाइट
  4. (4)चूना पत्थर
उत्तर देखें

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 11

राजस्थान में लिग्नाइट के सबसे महत्वपूर्ण संसाधन स्थित हैं :

  1. (1)पलाना, अगूचा एवं मेड़ता
  2. (2)पलाना, कसनऊ एवं जगपुरा
  3. (3)कपूरड़ी, मेड़ता एवं कसनऊ
  4. (4)कपूरड़ी, पलाना एवं जगपुरा
उत्तर देखें

✓ (3) कपूरड़ी, मेड़ता एवं कसनऊ

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रीट 2024 लेवल 2 · प्रश्न 127

राजस्थान में कमलीताल तथा राजेश्वरी ____________ से सम्बन्धित है ।

  1. (1)कोयला
  2. (2)खनिज तेल व प्राकृतिक गैस
  3. (3)परमाणु ऊर्जा
  4. (4)तांबा
उत्तर देखें

✓ (2) खनिज तेल व प्राकृतिक गैस

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