एक नज़र में
- 50 सेमी की समवर्षा रेखा राज्य को दो भागों में बाँटती है: इसके पश्चिम में शुष्क व अर्द्धशुष्क मरुस्थल है, जबकि अरावली और पूर्वी भाग में वर्ष में 50–100 सेमी वर्षा होती है।
- प्रश्नपत्रों में जिलों को वर्षा के क्रम में रखने को कहा जाता है: IMD की जून–सितंबर की सामान्य वर्षा दक्षिण के प्रतापगढ़ (914.2 मिमी) से पश्चिम के जैसलमेर (176.9 मिमी) तक घटती है।
- क्षेत्रफल में सबसे बड़ा कृषि-जलवायु खंड: अति शुष्क आंशिक सिंचित खंड।
- हर वर्षा-आँकड़ा अपनी आधार अवधि पर निर्भर है; आँकड़े के साथ अवधि भी याद करें।
ऋतुएँ
| ऋतु | माह | तापमान | वर्षा एवं अन्य बातें |
|---|---|---|---|
| ग्रीष्म ऋतु | मार्च से मध्य जून | प्रायः 30–36 °C; दिन का अधिकतम तापमान 49 °C तक | रातें सुहावनी; आर्द्रता कम |
| वर्षा ऋतु | मध्य जून से सितंबर | वर्ष की अधिकांश वर्षा इन्हीं महीनों में होती है | |
| शीत ऋतु | अक्टूबर से फरवरी | जनवरी में उत्तर में 10 °C से कम, हाड़ौती में लगभग 20 °C, शेष भाग में 10–20 °C | दो भाग: शरद् (मानसून प्रत्यावर्तन, अक्टूबर से मध्य दिसंबर, उमस भरा), फिर शुष्क शीत (मध्य दिसंबर से फरवरी) |
वर्षा का स्वरूप
वर्षा का वितरण बहुत असमान है: वर्षा पूर्व से पश्चिम और दक्षिण से उत्तर की ओर घटती है, और सूखा व अकाल प्रायः पड़ते रहते हैं। RBSE कक्षा 11 की पुस्तक में राज्य का वार्षिक औसत 52.37 सेमी दिया है; राज्य की जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (2014) में 530 मिमी।
मानसून से कम वर्षा के कारण: अरावली अरब सागर की मानसून शाखा के समानांतर है, इसलिए ये हवाएँ बिना वर्षा किए उत्तर की ओर निकल जाती हैं; बंगाल की खाड़ी की हवाएँ राज्य तक पहुँचते-पहुँचते अधिकांश नमी खो देती हैं; और अरावली नीची है तथा उस पर वनस्पति कम है। दक्षिण में अधिक ऊँचाई और सघन वनस्पति के कारण वर्ष में 100 सेमी से अधिक वर्षा होती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), जयपुर के अनुसार पूरे राज्य की जून–सितंबर की सामान्य वर्षा 435.6 मिमी है (आधार अवधि 1971–2020): पूर्वी राजस्थान 626.6 मिमी और पश्चिमी राजस्थान 283.6 मिमी। IMD जयपुर की एक पुरानी रिपोर्ट में 415 मिमी (आधार अवधि 1951–2000) दिया है।
जिलेवार मानसूनी वर्षा
IMD जयपुर की जून–सितंबर की सामान्य वर्षा (दीर्घावधि औसत, 1971–2020), सर्वाधिक से क्रम में। IMD अब भी 2023 से पहले के 33 जिलों के अनुसार आँकड़े देता है।
| जिला | IMD उप-संभाग | जून–सितंबर की सामान्य वर्षा (मिमी) |
|---|---|---|
| प्रतापगढ़ | पूर्वी राजस्थान | 914.2 |
| बांसवाड़ा | पूर्वी राजस्थान | 886 |
| झालावाड़ | पूर्वी राजस्थान | 884.3 |
| सिरोही | पूर्वी राजस्थान | 873 |
| बारां | पूर्वी राजस्थान | 832 |
| कोटा | पूर्वी राजस्थान | 732.2 |
| चित्तौड़गढ़ | पूर्वी राजस्थान | 727.2 |
| डूंगरपुर | पूर्वी राजस्थान | 706.5 |
| सवाई माधोपुर | पूर्वी राजस्थान | 661.5 |
| बूँदी | पूर्वी राजस्थान | 644.4 |
| उदयपुर | पूर्वी राजस्थान | 617.7 |
| भीलवाड़ा | पूर्वी राजस्थान | 604.5 |
| करौली | पूर्वी राजस्थान | 595.8 |
| दौसा | पूर्वी राजस्थान | 594.5 |
| धौलपुर | पूर्वी राजस्थान | 584.1 |
| टोंक | पूर्वी राजस्थान | 566.8 |
| अलवर | पूर्वी राजस्थान | 545.9 |
| भरतपुर | पूर्वी राजस्थान | 543.3 |
| राजसमंद | पूर्वी राजस्थान | 538.1 |
| जयपुर | पूर्वी राजस्थान | 524.3 |
| पाली | पश्चिमी राजस्थान | 491.6 |
| अजमेर | पूर्वी राजस्थान | 458.3 |
| जालौर | पश्चिमी राजस्थान | 417.8 |
| झुंझुनूं | पूर्वी राजस्थान | 408.8 |
| सीकर | पूर्वी राजस्थान | 407.1 |
| नागौर | पश्चिमी राजस्थान | 369.5 |
| चूरू | पश्चिमी राजस्थान | 334 |
| जोधपुर | पश्चिमी राजस्थान | 292.6 |
| बाड़मेर | पश्चिमी राजस्थान | 272.7 |
| हनुमानगढ़ | पश्चिमी राजस्थान | 253.6 |
| बीकानेर | पश्चिमी राजस्थान | 247 |
| श्रीगंगानगर | पश्चिमी राजस्थान | 204.7 |
| जैसलमेर | पश्चिमी राजस्थान | 176.9 |
तापमान के रिकॉर्ड
| भारत में सर्वोच्च | फलौदी (तब जोधपुर जिला, अब फलौदी जिला) में 19 मई 2016 को 51.0 °C |
|---|---|
| जयपुर | सर्वोच्च 48.5 °C (6 मई 1980); न्यूनतम −2.2 °C (16 जनवरी 1964 और 31 जनवरी 1905), IMD के 2011 तक के रिकॉर्ड |
लू, आँधी और मावठ
| नाम | अर्थ | कहाँ और कब |
|---|---|---|
| लू | ग्रीष्म की गर्म, शुष्क, प्रचंड हवा | मार्च–मई; जयपुर में यह अक्सर दिन का कामकाज ठप कर देती है |
| आँधी | धूल भरी आँधी | ग्रीष्म में रेतीले शुष्क पश्चिम में आम; जयपुर में मई में सबसे अधिक, और आँधी के बाद तापमान लगभग 5–7 °C गिर जाता है |
| मावठ (मावट) | पश्चिमी विक्षोभों (पश्चिम से आने वाले शीतोष्ण चक्रवातों) से दिसंबर–जनवरी में दो-तीन बार होने वाली हल्की शीतकालीन वर्षा; रबी फसलों के लिए वरदान | जयपुर में शीतकाल की सामान्य वर्षा 21.2 मिमी, यानी वार्षिक वर्षा का 3.4% |
मानसून का आगमन और वापसी
| घटना | सामान्य तिथि |
|---|---|
| केरल में आगमन | 1 जून |
| राजस्थान में आगमन | 18 जून (IMD); RBSE कक्षा 11 की पुस्तक के अनुसार जून का अंतिम सप्ताह या जुलाई का प्रारंभ |
| पूरे राज्य में मानसून छा जाना | 8 जुलाई |
| पश्चिमी राजस्थान से वापसी की शुरुआत | 17 सितंबर |
| पूरे राज्य से वापसी | 30 सितंबर |
वर्ष 2025 में मानसून 18 जून को राजस्थान पहुँचा, 29 जून को पूरे राज्य में छा गया, 14 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान से लौटना शुरू हुआ और 26 सितंबर को पूरे राज्य से लौट गया।
जलवायु का प्रकार और जलवायु प्रदेश
राजस्थान की जलवायु शुष्क से उपार्द्र मानसूनी प्रकार की है। IMD जयपुर के अनुसार राज्य का अधिकांश भाग उष्ण मरुस्थलीय और शेष उष्ण अर्द्धशुष्क है।
तापमान और वर्षा के आधार पर RBSE कक्षा 11 की पुस्तक राज्य को चार जलवायु प्रदेशों में बाँटती है:
| प्रदेश | वार्षिक वर्षा | तापमान | पुस्तक में दिए जिले (2018 के जिले) |
|---|---|---|---|
| शुष्क (मरुस्थलीय) प्रदेश | 25 सेमी से कम | ग्रीष्म में अधिकतम 45–49 °C; शीत में न्यूनतम 8 °C से 0 °C तक | जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर |
| अर्द्धशुष्क प्रदेश | 25–45 सेमी | ग्रीष्म 36–42 °C; शीत 10–17 °C | शुष्क प्रदेश और अरावली के बीच |
| आर्द्र प्रदेश | 50–75 सेमी | ग्रीष्म 32–34 °C; शीत 12–18 °C | अलवर, भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, बूँदी, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ का उत्तरी भाग |
| अति आर्द्र प्रदेश | 75 सेमी से अधिक | कोटा, बारां, झालावाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ का दक्षिणी भाग |
कृषि-जलवायु खंड
राजस्थान में 10 कृषि-जलवायु खंड हैं, जो ICAR की राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परियोजना (NARP) के अंतर्गत बने; यह परियोजना राज्य में 1981 में शुरू हुई। आधार हैं भू-आकृति, वर्षा, मृदा, सिंचाई जल और फसल-प्रतिरूप। खंडों के नाम, क्षेत्रफल और वर्षा राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार हैं; जिले IMD जयपुर के कृषि-मौसम बुलेटिन के अनुसार हैं, इसलिए कुछ जिले दो खंडों में आते हैं। किसी भी सूची में राजसमंद का नाम नहीं है।
दो खंडों के लिए अनुसंधान केंद्र अलग वर्षा बताते हैं: IIA के लिए 300–350 मिमी (ARS फतेहपुर) और IIIA के लिए 500–600 मिमी (RARI दुर्गापुरा)।
क्षेत्रफल: सबसे बड़ा खंड IC (लगभग 7.70 मिलियन हेक्टेयर) और सबसे छोटा IVB (1.72 मिलियन हेक्टेयर) है। अनुसंधान केंद्रों के अनुसार IIA लगभग 36.9 लाख हेक्टेयर (राज्य का 10.6%) और IIIA लगभग 2.97 मिलियन हेक्टेयर (8.67%; कृषि विभाग की तालिका में 2.96) है।
| खंड | क्षेत्रफल (मिलियन हेक्टेयर) | वर्षा (मिमी) | जिले (2023 से पहले के) |
|---|---|---|---|
| IA शुष्क पश्चिमी मैदान (शुष्क उत्तरी-पश्चिमी रेतीला मैदान भी) | 4.74 | 200–370 | बाड़मेर, जोधपुर का भाग |
| IB सिंचित उत्तरी-पश्चिमी मैदान | 2.10 | 100–350 | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ |
| IC अति शुष्क आंशिक सिंचित खंड | 7.70 | 100–350 | बीकानेर, जैसलमेर, चूरू के कुछ भाग |
| IIA आंतरिक जलप्रवाह शुष्क खंड (अंतःप्रवाह का संक्रमण मैदान भी) | 3.69 | 300–500 | नागौर, सीकर, झुंझुनूं, चूरू का भाग |
| IIB लूनी बेसिन का संक्रमणकालीन मैदान (लूनी बेसिन का जलोढ़ मैदान भी) | 3.00 | 300–500 | जालौर, पाली, सिरोही का भाग, जोधपुर |
| IIIA अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदान | 2.96 | 500–700 | जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक |
| IIIB बाढ़ संभावित पूर्वी मैदान | 2.77 | 500–700 | अलवर, धौलपुर, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर |
| IVA उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान | 3.36 | 500–900 | भीलवाड़ा, सिरोही, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ |
| IVB आर्द्र दक्षिणी मैदान | 1.72 | 500–1100 | डूंगरपुर, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ |
| V आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदान | 2.70 | 650–1000 | कोटा, झालावाड़, बूँदी, बारां |
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- लू, आँधी, मावठलू ग्रीष्म की गर्म शुष्क हवा · आँधी ग्रीष्म की धूल भरी आँधी · मावठ पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली हल्की शीतकालीन वर्षा
- दो वर्गीकरणचार जलवायु प्रदेश (RBSE, तापमान और वर्षा के आधार पर: शुष्क, अर्द्धशुष्क, आर्द्र, अति आर्द्र) · दस कृषि-जलवायु खंड (NARP, कृषि के लिए); दोनों के नाम न मिलाएँ
- खंडों के नामकृषि विभाग और IMD खंड IA को 'शुष्क पश्चिमी मैदान', IIA को 'आंतरिक जलप्रवाह शुष्क खंड' और IIB को 'लूनी बेसिन का संक्रमणकालीन मैदान' कहते हैं; 2025 की कृषि वानिकी नीति (प्रारूप) में इनके नाम शुष्क उत्तरी-पश्चिमी रेतीला मैदान, अंतःप्रवाह का संक्रमण मैदान और लूनी बेसिन का जलोढ़ मैदान हैं
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 54
राजस्थान का सबसे बड़ा कृषि – जलवायु प्रदेश कौनसा है?
- (1)शुष्क पश्चिमी मैदान
- (2)अति शुष्क आंशिक सिंचित क्षेत्र
- (3)आंतरिक प्रवाह का शुष्क क्षेत्र
- (4)उप आर्द्र दक्षिणी मैदान
उत्तर देखें
✓ (2) अति शुष्क आंशिक सिंचित क्षेत्र
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2022 · प्रश्न 38
औसत वार्षिक वर्षा के संदर्भ में निम्न में से कौन सा अवरोही क्रम में सुव्यवस्थित है ?
- (1)भरतपुर, गंगानगर, जयपुर, जोधपुर
- (2)उदयपुर, बीकानेर, पाली, जैसलमेर
- (3)भरतपुर, जोधपुर, जयपुर, गंगानगर
- (4)उदयपुर, पाली, बीकानेर, जैसलमेर
उत्तर देखें
✓ (4) उदयपुर, पाली, बीकानेर, जैसलमेर
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2023 · प्रश्न 3
निम्नलिखित में से कौन से जिलों का समूह प्राप्त मॉनसूनी वर्षा की मात्रा के अनुसार अवरोही क्रम में सही ढंग से व्यवस्थित है ?
- (1)धौलपुर, राजसमंद, जालौर
- (2)भीलवाड़ा, बारां, सीकर
- (3)राजसमंद, जालौर, धौलपुर
- (4)पाली, जयपुर, भरतपुर
उत्तर देखें
✓ (1) धौलपुर, राजसमंद, जालौर
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 3
राजस्थान के निम्नलिखित जिला समूहों का दक्षिणी-पश्चिमी मानसून में औसत वर्षा के आधार पर सही आरोही क्रम कौन सा है ?
- (1)जालौर, जयपुर, कोटा
- (2)जैसलमेर, बाँसवाड़ा, राजसमन्द
- (3)नागौर, धौलपुर, अजमेर
- (4)चूरू, बारां, भीलवाड़ा
उत्तर देखें
✓ (1) जालौर, जयपुर, कोटा
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