एक नज़र में
- ICAR-NBSS&LUP के 1:250,000 पैमाने के राज्य मृदा मानचित्र में मृदाएँ 5 गणों और 117 वर्णित मृदा श्रेणियों (सीरीज़) में रखी गई हैं।
- NBSS&LUP: 11.61 मिलियन हेक्टेयर (राज्य का 33.2%) मानवजनित मृदा-अवनयन से प्रभावित है। वायु अपरदन 6.6 मिलियन हेक्टेयर (19.4%), जल अपरदन 3.0 मिलियन हेक्टेयर और लवणता 1.4 मिलियन हेक्टेयर (4.0%) पर है। 5.2 मिलियन हेक्टेयर (15.2%) चट्टान, लवण-समतल या सक्रिय बालुका-स्तूप हैं, जो खेती योग्य नहीं।
- ISRO का 2007 का अनुमान, राज्य की जलवायु परिवर्तन कार्य योजना में उद्धृत: राज्य का 67% भाग मरुस्थलीकरण व भू-अवनयन से प्रभावित है। इसमें वायु अपरदन सबसे बड़ा हिस्सा (44.2%) है, फिर जल अपरदन 11.2%, वनस्पति-अवनयन 6.25% और लवणीकरण 1.07%। यह ऊपर के NBSS&LUP आँकड़ों से अलग अध्ययन है।
- CAZRI द्वारा मानचित्रित शुष्क क्षेत्र (30 मानचित्रण इकाइयाँ) में एंटीसोल्स 51.84% और एरिडीसोल्स 41.05% क्षेत्र में हैं।
- इंदिरा गांधी नहर कमान का लगभग 0.208 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र जलभराव व उससे जुड़ी लवणता से प्रभावित है (2019 का अनुमान)।
मृदा के परंपरागत समूह
स्थान और कृषि-उपयोग के आधार पर आठ समूह, जैसा एल.आर. भल्ला की पुस्तक राजस्थान: एक विस्तृत अध्ययन (1989) में दिया है। जिलों के नाम 1989 की पुस्तक के हैं; तब से इनमें से कई नए जिले बने हैं, और मृदा-पेटियाँ जिलों की सीमा का पालन नहीं करतीं।
| मृदा | कहाँ | विशेषताएँ | फसलें |
|---|---|---|---|
| रेतीली | पश्चिमी रेतीला मैदान। रेतीली बालू: गंगानगर, बीकानेर, चूरू, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, झुंझुनूं। लाल रेतीली: नागौर, जोधपुर, पाली, जालौर तथा चूरू व झुंझुनूं के कुछ भाग। पीली-भूरी रेतीली: नागौर, पाली | 90-95% रेत और 5-7% मृत्तिका; नाइट्रोजन व जैविक पदार्थ कम, लवण अधिक, pH ऊँचा; जल नियमित मिले तभी उपजाऊ। निचले गड्ढों (बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर) की खारी उपश्रेणी में खेती नहीं होती, केवल लवण-सहनशील घास उगती है | |
| भूरी रेतीली | अरावली अक्ष के पश्चिम में: बाड़मेर, जालौर, जोधपुर, सिरोही, पाली, नागौर, सीकर, झुंझुनूं; लगभग 36,400 वर्ग किमी | उर्वरता पूर्व और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ती है; फॉस्फेट अच्छा; pH 7.2 से 9.2 | |
| लाल व पीली | सवाई माधोपुर (तब आज का करौली भी), भीलवाड़ा, अजमेर, सिरोही | ग्रेनाइट, शिस्ट और नीस से बनी; पीला रंग लौह-ऑक्साइड के जलयोजन से; ह्यूमस कम, कैल्शियम कार्बोनेट नहीं; अजमेर में रेतीली | |
| लाल दोमट (लोमी) | डूंगरपुर; उदयपुर का मध्य व दक्षिणी भाग | प्राचीन स्फटिकीय व कायांतरित चट्टानों से बनी; नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व ह्यूमस कम; कंकड़ नहीं | मक्का, चावल, गन्ना |
| मिश्रित लाल व काली | भीलवाड़ा व उदयपुर के पूर्वी भाग; चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा | लाल भाग ग्रेनाइट व नीस से, काला भाग मालवा पठार की काली मृदा का विस्तार; फॉस्फेट, नाइट्रोजन, कैल्शियम व जैविक पदार्थ की कमी | कपास, मक्का |
| मध्यम काली | झालावाड़, बूँदी, कोटा (तब आज का बारां भी) | गहरी भूरी मटियार व दोमट; फॉस्फेट, नाइट्रोजन व जैविक पदार्थ कम, कैल्शियम व पोटाश पर्याप्त | व्यापारिक फसलें |
| कछारी (जलोढ़) | भरतपुर, धौलपुर, जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर (तब आज का करौली भी) | चूना, फॉस्फोरिक अम्ल व ह्यूमस की कमी; जल-स्तर ऊँचा होने पर छोटे लवणीय व क्षारीय टुकड़े; अच्छी उत्पादकता के लिए प्रसिद्ध | |
| भूरी रेतीली कछारी | अलवर; भरतपुर का उत्तरी भाग; गंगानगर का मध्य भाग | नदियों द्वारा लाई गई, अतः उपजाऊ; चूना, फॉस्फोरस व ह्यूमस की कमी | व्यापारिक व खाद्यान्न फसलें; गंगानगर में कपास व गेहूँ |
USDA मृदा गण
USDA मृदा वर्गीकरण (सॉइल टैक्सोनॉमी) मृदाओं को गणों में बाँटता है। प्रतिशत उस क्षेत्र के हैं जिसका अध्ययन में मानचित्रण हुआ: शुष्क क्षेत्र (CAZRI) या नामित जिला।
| गण (USDA) | कहाँ | स्रोतों में दी गई जानकारी |
|---|---|---|
| एंटीसोल्स | पश्चिमी शुष्क भाग (बालुका-स्तूप व ऊबड़-खाबड़ रेतीला मैदान); भीलवाड़ा जिले का 10.32% क्षेत्र भी | मृदा-विकास बहुत कमजोर, जैसे बालुका-स्तूपों में; टोरिप्सामेंट्स मुख्य प्रकार |
| एरिडीसोल्स | पश्चिमी शुष्क भाग | मुख्यतः कैम्बिड्स और कैल्सिड्स |
| इनसेप्टीसोल्स | भीलवाड़ा जिले का 68.85% क्षेत्र, वहाँ का सबसे बड़ा गण | RSSB की उत्तर कुंजी (CET स्नातक स्तर 2022) इसे पाली, भीलवाड़ा और सिरोही में बताती है |
| अल्फीसोल्स | RPSC की उत्तर कुंजी (RAS प्रारंभिक 2024) इसे जयपुर, दौसा और अलवर का प्रमुख गण बताती है | |
| वर्टीसोल्स | झालावाड़ (मालवा भाग की अधिकांश बेसाल्ट प्रोफ़ाइलें); प्रतापगढ़ (एंटीसोल्स व इनसेप्टीसोल्स के साथ); भीलवाड़ा जिले का 3.69% क्षेत्र |
कृषि-जलवायु खंड और मृदा
राजस्थान कृषि विभाग दस कृषि-जलवायु खंडों में से प्रत्येक की मृदा व मुख्य फसलें बताता है।
| खंड | मृदा | मुख्य फसलें (खरीफ; रबी) |
|---|---|---|
| IA शुष्क पश्चिमी मैदान (शुष्क उत्तरी-पश्चिमी रेतीला मैदान भी) | मरुस्थलीय मृदा व बालुका-स्तूप, वायुढ़, मोटे रेत की बनावट, कहीं-कहीं चूनेदार | बाजरा, मोठ, तिल; गेहूँ, सरसों, जीरा |
| IB सिंचित उत्तरी-पश्चिमी मैदान | जलोढ़ निक्षेप, चूनेदार, घुलनशील लवण व विनिमेय सोडियम अधिक | कपास, ग्वार; गेहूँ, सरसों, चना |
| IC अति शुष्क आंशिक सिंचित खंड | मरुस्थलीय मृदा व बालुका-स्तूप, वायुढ़, दोमट-मोटी बनावट, चूनेदार | बाजरा, मोठ, ग्वार; गेहूँ, सरसों, चना |
| IIA आंतरिक जलप्रवाह शुष्क खंड (अंतःप्रवाह का संक्रमण मैदान भी) | बलुई दोमट, उथली; गड्ढों में लाल मृदा | बाजरा, ग्वार, दलहन; सरसों, चना |
| IIB लूनी बेसिन का संक्रमणकालीन मैदान (लूनी बेसिन का जलोढ़ मैदान भी) | जोधपुर, जालौर व पाली में लाल मरुस्थलीय मृदा; पाली व सिरोही में सीरोज़म | बाजरा, ग्वार, तिल; गेहूँ, सरसों |
| IIIA अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदान | सीरोज़म; पूर्व में जलोढ़; पश्चिम व उत्तर-पश्चिम में (गिरिपाद) लिथोसोल; भूरी मृदा | बाजरा, ग्वार, ज्वार; गेहूँ, सरसों, चना |
| IIIB बाढ़ संभावित पूर्वी मैदान | जलोढ़, नवीन, चूनेदार; जलभराव की संभावना | बाजरा, ग्वार, मूँगफली; गेहूँ, जौ, सरसों, चना |
| IVA उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान | गिरिपाद पर लिथोसोल, मैदानों में जलोढ़ मृदा | मक्का, दलहन, ज्वार; गेहूँ, चना |
| IVB आर्द्र दक्षिणी मैदान | अधिकतर लालिमायुक्त, मध्यम बनावट, अच्छे जल-निकास वाली, चूनेदार; पहाड़ियों पर उथली, घाटियों में गहरी | मक्का, धान, ज्वार, उड़द; गेहूँ, चना |
| V आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदान | जलोढ़ मूल की काली मृदा, मटियार दोमट; भूजल-लवणता | ज्वार, सोयाबीन; गेहूँ, सरसों |
मृदा की समस्याएँ और उपाय
पहली तीन पंक्तियों के जिले 1989 की पुस्तक के अनुसार हैं।
| समस्या | कहाँ | कारण | उपाय |
|---|---|---|---|
| वायु अपरदन | पश्चिमी शुष्क मैदान; अरावली के दर्रों से रेत पूर्वी मैदान में भी पहुँचती है | मानसून से पहले गर्म शुष्क हवाएँ व आँधियाँ, वनस्पति-आवरण का नाश, अति-चराई; मशीनी गहरी जुताई व बढ़ा बुवाई-क्षेत्र वायु-क्रिया को तेज करते हैं | हवा के आर-पार वृक्ष-पट्टियाँ, वृक्षारोपण से बालुका-स्तूपों का स्थिरीकरण, खेजड़ी का वायुरोधक के रूप में उपयोग, नियोजित चरागाह |
| जल अपरदन | अरावली के ढालों व गिरिपाद पर परत अपरदन (सिरोही, उदयपुर, अलवर, डूंगरपुर); चम्बल व उसकी सहायक नदियों के किनारे अवनालिका अपरदन (कोटा, सवाई माधोपुर, धौलपुर) | वनों की कटाई, अति-चराई, दक्षिण व दक्षिण-पूर्व में पहाड़ी ढालों पर वालरा (स्थानांतरित) कृषि, समोच्च रेखा के अनुसार जुताई न करना | ढालों व नदी-तटों पर वृक्षारोपण, चराई पर नियंत्रण, मेड़बंदी, समोच्च जुताई, फसल-चक्र, बहते जल को रोकने के लिए छोटे तालाब व बाँध |
| लवणता व क्षारीयता | जोधपुर, पाली, भीलवाड़ा, जयपुर, अजमेर, भरतपुर, टोंक, अलवर, नागौर, सिरोही व चित्तौड़गढ़ में अधिक; लूनी बेसिन में लगभग 5,807 वर्ग किमी भूमि प्राकृतिक रूप से लवण-प्रभावित, अधिकांश सोडियम क्लोराइड, प्रायः 4 मीटर के भीतर अत्यधिक खारा भूजल | अधिक वाष्पीकरण, ऊँचा जल-स्तर, खराब जल-निकास, सिंचाई में खारे कुओं का पानी, नहरों व तालाबों से रिसाव | भूमि को समतल करना, गोबर की खाद, लवण-सहनशील फसलें (जौ, गेहूँ, कपास, गन्ना), ग्वार या ढैंचे की हरी खाद, क्षारीय भूमि में मृदा-परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार जिप्सम |
| जलभराव | नहर कमान क्षेत्र, मुख्यतः इंदिरा गांधी नहर (IGNP) कमान की अनूपगढ़, सूरतगढ़ व चरणवाला शाखाओं के क्षेत्र; श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ के नहर कमान | नहर से रिसाव, प्राकृतिक जल-निकास का अभाव, नीचे कठोर परत, शुरुआती वर्षों में अधिक पानी, ऊँचे से निचले क्षेत्र की ओर जल-प्रवाह | सतही व भूमिगत नालियाँ; यूकेलिप्टस, पॉप्युलस, केजुरीना या बाँस लगाकर जैव-निकास; सोडियमयुक्त मृदा में जिप्सम; लवण-सहनशील घासें |
मरुस्थलीकरण
मरुस्थलीकरण का अर्थ है शुष्क, अर्द्धशुष्क व शुष्क उप-आर्द्र क्षेत्रों में जलवायु-परिवर्तन व मानवीय गतिविधियों से भूमि का अवनयन, जैसा संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय परिभाषित करता है। राजस्थान में इसके मुख्य रूप: थार के बालुका-स्तूपों पर वायु अपरदन, अरावली के कुछ भागों व थार के पूर्वी किनारे पर क्षुद्रनालिका व अवनालिका अपरदन, तथा श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ के नहर कमान में जलभराव व लवणता।
मरुस्थलीकरण रोकने की 30 से अधिक योजनाएँ दशकों से चल रही हैं। एकेशिया टोर्टिलिस के वृक्षारोपण से बालुका-स्तूपों का स्थिरीकरण हुआ है, पर ये रेत के पूरे विस्तार को नहीं ढक पाए। वनस्पति की कई परतें न होने से बालुका-स्तूप फिर सक्रिय हो जाते हैं, उड़ती रेत से पेड़ उखड़ते हैं और खेतों को खतरा होता है।
अनुसंधान और मृदा स्वास्थ्य
| CAZRI | ICAR-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर |
|---|---|
| 1952 | जोधपुर में मरुस्थल वनीकरण केंद्र (डेज़र्ट अफॉरेस्टेशन स्टेशन) के रूप में शुरू |
| 1957 | मरुस्थल वनीकरण एवं मृदा संरक्षण केंद्र बना |
| 1959 | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत CAZRI के रूप में उन्नत |
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड: प्रधानमंत्री ने 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ में शुरू किया।
- 2022-23 से यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY; अक्टूबर 2024 से PM-RKVY) के घटक 'सॉइल हेल्थ एंड फर्टिलिटी' के रूप में चलती है।
- 13 मार्च 2026 तक देश भर में 25.89 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड बन चुके थे।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- तीन सूचियाँआठ परंपरागत समूह, USDA गण और कृषि-जलवायु खंड अलग-अलग वर्गीकरण हैं; एक उत्तर में इनके नाम न मिलाएँ।
- स्थानीय शब्दऊसर, रेही और नमकीन मिट्टी लवणीय-क्षारीय भूमि हैं; वालरा पहाड़ी ढालों पर स्थानांतरित कृषि है।
- हाड़ौती की काली मृदापरंपरागत सूची में 'मध्यम काली', कृषि विभाग के खंड V में 'जलोढ़ मूल की काली, मटियार दोमट'।
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 46
निम्नलिखित में से राजस्थान के किन जिलों के समूह में मुख्यतः कच्छारी मृदा पाई जाती है?
- (1)भरतपुर – धौलपुर
- (2)बांसवाड़ा – डूंगरपुर
- (3)कोटा – बूंदी
- (4)बीकानेर – जैसलमेर
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✓ (1) भरतपुर – धौलपुर
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 51
राजस्थान के निम्नलिखित में से किन जिलों में ‘इन्सेप्टीसोल्स मृदा’ पायी जाती है?
- (1)कोटा, बूंदी और बारां
- (2)पाली, भीलवाड़ा और सिरोही
- (3)जयपुर, दौसा और अलवर
- (4)जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर
उत्तर देखें
✓ (2) पाली, भीलवाड़ा और सिरोही
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंआरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 5
जयपुर, दौसा और अलवर जिलों में किस मृदा की प्रधानता है ?
- (1)एन्टीसोल
- (2)इनसेप्टीसोल्स
- (3)वर्टीसोल्स
- (4)अल्फीसोल्स
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✓ (4) अल्फीसोल्स
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 106
नीचे दो कथन दिए गए हैं : कथन - I : जलोढ़ मृदा राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय मैदान में पाई जाती है। कथन - II : इस मिट्टी में नाइट्रोजन पर्याप्त मात्रा में होती है लेकिन पोटाश और लौह तत्व की कमी होती है। उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें :
- (1)कथन I और कथन II दोनों सही हैं।
- (2)कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।
- (3)कथन I सही है किन्तु कथन II गलत है।
- (4)कथन I गलत है किन्तु कथन II सही है।
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✓ (2) कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।
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