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राजस्थान की मृदा

राजस्थान की मृदा पश्चिम में रेतीली, पूर्व में जलोढ़, दक्षिण-पूर्व में काली और दक्षिण में लाल है। इन्हें स्थान व उपयोग के आधार पर, USDA मृदा गणों में और राज्य के कृषि-जलवायु खंडों के अनुसार बाँटा जाता है; प्रमुख समस्याएँ अपरदन, लवणता व जलभराव हैं।

⏱ 9 मिनट पढ़ें✓ तथ्य जाँचे गए 17 अक्टूबर 2026

विषय-सूची

एक नज़र में

  1. ICAR-NBSS&LUP के 1:250,000 पैमाने के राज्य मृदा मानचित्र में मृदाएँ 5 गणों और 117 वर्णित मृदा श्रेणियों (सीरीज़) में रखी गई हैं।
  2. NBSS&LUP: 11.61 मिलियन हेक्टेयर (राज्य का 33.2%) मानवजनित मृदा-अवनयन से प्रभावित है। वायु अपरदन 6.6 मिलियन हेक्टेयर (19.4%), जल अपरदन 3.0 मिलियन हेक्टेयर और लवणता 1.4 मिलियन हेक्टेयर (4.0%) पर है। 5.2 मिलियन हेक्टेयर (15.2%) चट्टान, लवण-समतल या सक्रिय बालुका-स्तूप हैं, जो खेती योग्य नहीं।
  3. ISRO का 2007 का अनुमान, राज्य की जलवायु परिवर्तन कार्य योजना में उद्धृत: राज्य का 67% भाग मरुस्थलीकरण व भू-अवनयन से प्रभावित है। इसमें वायु अपरदन सबसे बड़ा हिस्सा (44.2%) है, फिर जल अपरदन 11.2%, वनस्पति-अवनयन 6.25% और लवणीकरण 1.07%। यह ऊपर के NBSS&LUP आँकड़ों से अलग अध्ययन है।
  4. CAZRI द्वारा मानचित्रित शुष्क क्षेत्र (30 मानचित्रण इकाइयाँ) में एंटीसोल्स 51.84% और एरिडीसोल्स 41.05% क्षेत्र में हैं।
  5. इंदिरा गांधी नहर कमान का लगभग 0.208 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र जलभराव व उससे जुड़ी लवणता से प्रभावित है (2019 का अनुमान)।

मृदा के परंपरागत समूह

स्थान और कृषि-उपयोग के आधार पर आठ समूह, जैसा एल.आर. भल्ला की पुस्तक राजस्थान: एक विस्तृत अध्ययन (1989) में दिया है। जिलों के नाम 1989 की पुस्तक के हैं; तब से इनमें से कई नए जिले बने हैं, और मृदा-पेटियाँ जिलों की सीमा का पालन नहीं करतीं।

मृदाकहाँविशेषताएँफसलें
रेतीलीपश्चिमी रेतीला मैदान। रेतीली बालू: गंगानगर, बीकानेर, चूरू, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, झुंझुनूं। लाल रेतीली: नागौर, जोधपुर, पाली, जालौर तथा चूरू व झुंझुनूं के कुछ भाग। पीली-भूरी रेतीली: नागौर, पाली90-95% रेत और 5-7% मृत्तिका; नाइट्रोजन व जैविक पदार्थ कम, लवण अधिक, pH ऊँचा; जल नियमित मिले तभी उपजाऊ। निचले गड्ढों (बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर) की खारी उपश्रेणी में खेती नहीं होती, केवल लवण-सहनशील घास उगती है
भूरी रेतीलीअरावली अक्ष के पश्चिम में: बाड़मेर, जालौर, जोधपुर, सिरोही, पाली, नागौर, सीकर, झुंझुनूं; लगभग 36,400 वर्ग किमीउर्वरता पूर्व और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ती है; फॉस्फेट अच्छा; pH 7.2 से 9.2
लाल व पीलीसवाई माधोपुर (तब आज का करौली भी), भीलवाड़ा, अजमेर, सिरोहीग्रेनाइट, शिस्ट और नीस से बनी; पीला रंग लौह-ऑक्साइड के जलयोजन से; ह्यूमस कम, कैल्शियम कार्बोनेट नहीं; अजमेर में रेतीली
लाल दोमट (लोमी)डूंगरपुर; उदयपुर का मध्य व दक्षिणी भागप्राचीन स्फटिकीय व कायांतरित चट्टानों से बनी; नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व ह्यूमस कम; कंकड़ नहींमक्का, चावल, गन्ना
मिश्रित लाल व कालीभीलवाड़ा व उदयपुर के पूर्वी भाग; चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ालाल भाग ग्रेनाइट व नीस से, काला भाग मालवा पठार की काली मृदा का विस्तार; फॉस्फेट, नाइट्रोजन, कैल्शियम व जैविक पदार्थ की कमीकपास, मक्का
मध्यम कालीझालावाड़, बूँदी, कोटा (तब आज का बारां भी)गहरी भूरी मटियार व दोमट; फॉस्फेट, नाइट्रोजन व जैविक पदार्थ कम, कैल्शियम व पोटाश पर्याप्तव्यापारिक फसलें
कछारी (जलोढ़)भरतपुर, धौलपुर, जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर (तब आज का करौली भी)चूना, फॉस्फोरिक अम्ल व ह्यूमस की कमी; जल-स्तर ऊँचा होने पर छोटे लवणीय व क्षारीय टुकड़े; अच्छी उत्पादकता के लिए प्रसिद्ध
भूरी रेतीली कछारीअलवर; भरतपुर का उत्तरी भाग; गंगानगर का मध्य भागनदियों द्वारा लाई गई, अतः उपजाऊ; चूना, फॉस्फोरस व ह्यूमस की कमीव्यापारिक व खाद्यान्न फसलें; गंगानगर में कपास व गेहूँ

USDA मृदा गण

USDA मृदा वर्गीकरण (सॉइल टैक्सोनॉमी) मृदाओं को गणों में बाँटता है। प्रतिशत उस क्षेत्र के हैं जिसका अध्ययन में मानचित्रण हुआ: शुष्क क्षेत्र (CAZRI) या नामित जिला।

गण (USDA)कहाँस्रोतों में दी गई जानकारी
एंटीसोल्सपश्चिमी शुष्क भाग (बालुका-स्तूप व ऊबड़-खाबड़ रेतीला मैदान); भीलवाड़ा जिले का 10.32% क्षेत्र भीमृदा-विकास बहुत कमजोर, जैसे बालुका-स्तूपों में; टोरिप्सामेंट्स मुख्य प्रकार
एरिडीसोल्सपश्चिमी शुष्क भागमुख्यतः कैम्बिड्स और कैल्सिड्स
इनसेप्टीसोल्सभीलवाड़ा जिले का 68.85% क्षेत्र, वहाँ का सबसे बड़ा गणRSSB की उत्तर कुंजी (CET स्नातक स्तर 2022) इसे पाली, भीलवाड़ा और सिरोही में बताती है
अल्फीसोल्सRPSC की उत्तर कुंजी (RAS प्रारंभिक 2024) इसे जयपुर, दौसा और अलवर का प्रमुख गण बताती है
वर्टीसोल्सझालावाड़ (मालवा भाग की अधिकांश बेसाल्ट प्रोफ़ाइलें); प्रतापगढ़ (एंटीसोल्स व इनसेप्टीसोल्स के साथ); भीलवाड़ा जिले का 3.69% क्षेत्र

कृषि-जलवायु खंड और मृदा

राजस्थान कृषि विभाग दस कृषि-जलवायु खंडों में से प्रत्येक की मृदा व मुख्य फसलें बताता है।

खंडमृदामुख्य फसलें (खरीफ; रबी)
IA शुष्क पश्चिमी मैदान (शुष्क उत्तरी-पश्चिमी रेतीला मैदान भी)मरुस्थलीय मृदा व बालुका-स्तूप, वायुढ़, मोटे रेत की बनावट, कहीं-कहीं चूनेदारबाजरा, मोठ, तिल; गेहूँ, सरसों, जीरा
IB सिंचित उत्तरी-पश्चिमी मैदानजलोढ़ निक्षेप, चूनेदार, घुलनशील लवण व विनिमेय सोडियम अधिककपास, ग्वार; गेहूँ, सरसों, चना
IC अति शुष्क आंशिक सिंचित खंडमरुस्थलीय मृदा व बालुका-स्तूप, वायुढ़, दोमट-मोटी बनावट, चूनेदारबाजरा, मोठ, ग्वार; गेहूँ, सरसों, चना
IIA आंतरिक जलप्रवाह शुष्क खंड (अंतःप्रवाह का संक्रमण मैदान भी)बलुई दोमट, उथली; गड्ढों में लाल मृदाबाजरा, ग्वार, दलहन; सरसों, चना
IIB लूनी बेसिन का संक्रमणकालीन मैदान (लूनी बेसिन का जलोढ़ मैदान भी)जोधपुर, जालौर व पाली में लाल मरुस्थलीय मृदा; पाली व सिरोही में सीरोज़मबाजरा, ग्वार, तिल; गेहूँ, सरसों
IIIA अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदानसीरोज़म; पूर्व में जलोढ़; पश्चिम व उत्तर-पश्चिम में (गिरिपाद) लिथोसोल; भूरी मृदाबाजरा, ग्वार, ज्वार; गेहूँ, सरसों, चना
IIIB बाढ़ संभावित पूर्वी मैदानजलोढ़, नवीन, चूनेदार; जलभराव की संभावनाबाजरा, ग्वार, मूँगफली; गेहूँ, जौ, सरसों, चना
IVA उप-आर्द्र दक्षिणी मैदानगिरिपाद पर लिथोसोल, मैदानों में जलोढ़ मृदामक्का, दलहन, ज्वार; गेहूँ, चना
IVB आर्द्र दक्षिणी मैदानअधिकतर लालिमायुक्त, मध्यम बनावट, अच्छे जल-निकास वाली, चूनेदार; पहाड़ियों पर उथली, घाटियों में गहरीमक्का, धान, ज्वार, उड़द; गेहूँ, चना
V आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदानजलोढ़ मूल की काली मृदा, मटियार दोमट; भूजल-लवणताज्वार, सोयाबीन; गेहूँ, सरसों

मृदा की समस्याएँ और उपाय

पहली तीन पंक्तियों के जिले 1989 की पुस्तक के अनुसार हैं।

समस्याकहाँकारणउपाय
वायु अपरदनपश्चिमी शुष्क मैदान; अरावली के दर्रों से रेत पूर्वी मैदान में भी पहुँचती हैमानसून से पहले गर्म शुष्क हवाएँ व आँधियाँ, वनस्पति-आवरण का नाश, अति-चराई; मशीनी गहरी जुताई व बढ़ा बुवाई-क्षेत्र वायु-क्रिया को तेज करते हैंहवा के आर-पार वृक्ष-पट्टियाँ, वृक्षारोपण से बालुका-स्तूपों का स्थिरीकरण, खेजड़ी का वायुरोधक के रूप में उपयोग, नियोजित चरागाह
जल अपरदनअरावली के ढालों व गिरिपाद पर परत अपरदन (सिरोही, उदयपुर, अलवर, डूंगरपुर); चम्बल व उसकी सहायक नदियों के किनारे अवनालिका अपरदन (कोटा, सवाई माधोपुर, धौलपुर)वनों की कटाई, अति-चराई, दक्षिण व दक्षिण-पूर्व में पहाड़ी ढालों पर वालरा (स्थानांतरित) कृषि, समोच्च रेखा के अनुसार जुताई न करनाढालों व नदी-तटों पर वृक्षारोपण, चराई पर नियंत्रण, मेड़बंदी, समोच्च जुताई, फसल-चक्र, बहते जल को रोकने के लिए छोटे तालाब व बाँध
लवणता व क्षारीयताजोधपुर, पाली, भीलवाड़ा, जयपुर, अजमेर, भरतपुर, टोंक, अलवर, नागौर, सिरोही व चित्तौड़गढ़ में अधिक; लूनी बेसिन में लगभग 5,807 वर्ग किमी भूमि प्राकृतिक रूप से लवण-प्रभावित, अधिकांश सोडियम क्लोराइड, प्रायः 4 मीटर के भीतर अत्यधिक खारा भूजलअधिक वाष्पीकरण, ऊँचा जल-स्तर, खराब जल-निकास, सिंचाई में खारे कुओं का पानी, नहरों व तालाबों से रिसावभूमि को समतल करना, गोबर की खाद, लवण-सहनशील फसलें (जौ, गेहूँ, कपास, गन्ना), ग्वार या ढैंचे की हरी खाद, क्षारीय भूमि में मृदा-परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार जिप्सम
जलभरावनहर कमान क्षेत्र, मुख्यतः इंदिरा गांधी नहर (IGNP) कमान की अनूपगढ़, सूरतगढ़ व चरणवाला शाखाओं के क्षेत्र; श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ के नहर कमाननहर से रिसाव, प्राकृतिक जल-निकास का अभाव, नीचे कठोर परत, शुरुआती वर्षों में अधिक पानी, ऊँचे से निचले क्षेत्र की ओर जल-प्रवाहसतही व भूमिगत नालियाँ; यूकेलिप्टस, पॉप्युलस, केजुरीना या बाँस लगाकर जैव-निकास; सोडियमयुक्त मृदा में जिप्सम; लवण-सहनशील घासें

मरुस्थलीकरण

मरुस्थलीकरण का अर्थ है शुष्क, अर्द्धशुष्क व शुष्क उप-आर्द्र क्षेत्रों में जलवायु-परिवर्तन व मानवीय गतिविधियों से भूमि का अवनयन, जैसा संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय परिभाषित करता है। राजस्थान में इसके मुख्य रूप: थार के बालुका-स्तूपों पर वायु अपरदन, अरावली के कुछ भागों व थार के पूर्वी किनारे पर क्षुद्रनालिका व अवनालिका अपरदन, तथा श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ के नहर कमान में जलभराव व लवणता।

मरुस्थलीकरण रोकने की 30 से अधिक योजनाएँ दशकों से चल रही हैं। एकेशिया टोर्टिलिस के वृक्षारोपण से बालुका-स्तूपों का स्थिरीकरण हुआ है, पर ये रेत के पूरे विस्तार को नहीं ढक पाए। वनस्पति की कई परतें न होने से बालुका-स्तूप फिर सक्रिय हो जाते हैं, उड़ती रेत से पेड़ उखड़ते हैं और खेतों को खतरा होता है।

अनुसंधान और मृदा स्वास्थ्य

CAZRIICAR-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर
1952जोधपुर में मरुस्थल वनीकरण केंद्र (डेज़र्ट अफॉरेस्टेशन स्टेशन) के रूप में शुरू
1957मरुस्थल वनीकरण एवं मृदा संरक्षण केंद्र बना
1959भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत CAZRI के रूप में उन्नत
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड: प्रधानमंत्री ने 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ में शुरू किया।
  • 2022-23 से यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY; अक्टूबर 2024 से PM-RKVY) के घटक 'सॉइल हेल्थ एंड फर्टिलिटी' के रूप में चलती है।
  • 13 मार्च 2026 तक देश भर में 25.89 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड बन चुके थे।

याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं

  • तीन सूचियाँआठ परंपरागत समूह, USDA गण और कृषि-जलवायु खंड अलग-अलग वर्गीकरण हैं; एक उत्तर में इनके नाम न मिलाएँ।
  • स्थानीय शब्दऊसर, रेही और नमकीन मिट्टी लवणीय-क्षारीय भूमि हैं; वालरा पहाड़ी ढालों पर स्थानांतरित कृषि है।
  • हाड़ौती की काली मृदापरंपरागत सूची में 'मध्यम काली', कृषि विभाग के खंड V में 'जलोढ़ मूल की काली, मटियार दोमट'।

खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न

समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 46

निम्नलिखित में से राजस्थान के किन जिलों के समूह में मुख्यतः कच्छारी मृदा पाई जाती है?

  1. (1)भरतपुर – धौलपुर
  2. (2)बांसवाड़ा – डूंगरपुर
  3. (3)कोटा – बूंदी
  4. (4)बीकानेर – जैसलमेर
उत्तर देखें

✓ (1) भरतपुर – धौलपुर

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राजस्थान के निम्नलिखित में से किन जिलों में ‘इन्सेप्टीसोल्स मृदा’ पायी जाती है?

  1. (1)कोटा, बूंदी और बारां
  2. (2)पाली, भीलवाड़ा और सिरोही
  3. (3)जयपुर, दौसा और अलवर
  4. (4)जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर
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✓ (2) पाली, भीलवाड़ा और सिरोही

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आरएएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 · प्रश्न 5

जयपुर, दौसा और अलवर जिलों में किस मृदा की प्रधानता है ?

  1. (1)एन्टीसोल
  2. (2)इनसेप्टीसोल्स
  3. (3)वर्टीसोल्स
  4. (4)अल्फीसोल्स
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समान पात्रता परीक्षा (सीनियर सैकण्डरी स्तर) 2024 · प्रश्न 106

नीचे दो कथन दिए गए हैं : कथन - I : जलोढ़ मृदा राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय मैदान में पाई जाती है। कथन - II : इस मिट्टी में नाइट्रोजन पर्याप्त मात्रा में होती है लेकिन पोटाश और लौह तत्व की कमी होती है। उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें :

  1. (1)कथन I और कथन II दोनों सही हैं।
  2. (2)कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।
  3. (3)कथन I सही है किन्तु कथन II गलत है।
  4. (4)कथन I गलत है किन्तु कथन II सही है।
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✓ (2) कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।

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