एक नज़र में
- जनगणना 2011 (अंतिम प्रकाशित जनगणना) में राजस्थान में 92,38,534 अनुसूचित जनजाति के लोग गिने गए: राज्य की 6,85,48,437 आबादी का 13.48% (लगभग 13.5%)।
- जनजातिवार (जनगणना 2011): मीणा 43.46 लाख, फिर भील 41.00 लाख; सहरिया 1.11 लाख, जिनमें 1,08,520 बारां में।
- संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में राजस्थान की 12 प्रविष्टियाँ हैं (जनगणना 2011 में प्रयुक्त सूची); हर प्रविष्टि में उसके रूपांतर नाम भी आते हैं।
- जिले की आबादी में हिस्से के आधार पर 2011 में बांसवाड़ा सबसे आगे है, फिर डूंगरपुर और प्रतापगढ़; संख्या के आधार पर उदयपुर (2023 के विभाजन से पहले) सबसे आगे है।
- बारां की किशनगंज और शाहबाद तहसीलों की सहरिया जनजाति राजस्थान के लिए सूचीबद्ध विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है।
प्रमुख जनजातियाँ और उनके क्षेत्र
| जनजाति | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|
| भील | बांसवाड़ा, डूंगरपुर और उदयपुर (तब आज के सलूंबर सहित) |
| मीणा (Mina) | उदयपुर (तब आज के सलूंबर सहित), जयपुर, प्रतापगढ़, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर और अलवर (जनगणना 2011, सबसे अधिक से क्रम में) |
| गरासिया | सिरोही, उदयपुर (तब आज के सलूंबर सहित) और पाली (जनगणना 2011, सबसे अधिक से क्रम में) |
| सहरिया | बारां की किशनगंज और शाहबाद तहसीलें |
| डामोर | डूंगरपुर (जनगणना 2011 में 91,463 में से 56,352), फिर बांसवाड़ा और उदयपुर (तब आज के सलूंबर सहित) |
| कथौड़ी | उदयपुर (जनगणना 2011 में 4,833 में से 2,488; तब आज के सलूंबर सहित), फिर डूंगरपुर और बारां |
सहरिया बस्तियाँ सहराना कहलाती हैं और समुदाय का मुखिया कोतवाल कहलाता है।
अनुसूचित जनजाति की 12 प्रविष्टियाँ
संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 (अनुच्छेद 342 के अंतर्गत): राजस्थान की प्रविष्टियाँ, जनगणना 2011 की सूची के क्रम में:
- भील, भील गरासिया, ढोली भील, डूंगरी भील, डूंगरी गरासिया, मेवासी भील, रावल भील, तड़वी भील, भागलिया, भिलाला, पावरा, वसावा, वसावे
- भील मीणा
- डामोर, डामरिया
- धानका, तड़वी, तेतरिया, वलवी
- गरासिया (राजपूत गरासिया को छोड़कर)
- कथौड़ी, कटकरी, ढोर कथौड़ी, ढोर कटकरी, सोन कथौड़ी, सोन कटकरी
- कोकना, कोकनी, कुकना
- कोली ढोर, टोकरे कोली, कोलचा, कोलघा
- मीणा
- नायकड़ा, नायका, चोलीवाला नायका, कापड़िया नायका, मोटा नायका, नाना नायका
- पटेलिया
- सेहरिया (Seharia), सेहरिया (Sehria), सहरिया (Sahariya)
जिलेवार अनुसूचित जनजाति, जनगणना 2011
| जिला (2011 का नक्शा) | ST जनसंख्या | जिले में हिस्सा |
|---|---|---|
| उदयपुर (2023 के विभाजन से पहले) | 15.25 लाख | 49.7% |
| बांसवाड़ा | 13.73 लाख | 76.4% |
| डूंगरपुर | 9.83 लाख | 70.8% |
| प्रतापगढ़ | 5.50 लाख | 63.4% |
| सिरोही | 2.92 लाख | 28.2% |
सलूंबर जिला 2023 में उदयपुर से बना और दिसंबर 2024 में यथावत रखा गया, इसलिए आज का उदयपुर 2011 के जिले से छोटा है। बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ 2011 वाले ही जिले हैं।
अनुसूचित क्षेत्र
अनुसूचित क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची के पैरा 6 के अंतर्गत राष्ट्रपति के आदेश से घोषित होते हैं। अभी लागू आदेश अनुसूचित क्षेत्र (राजस्थान राज्य) आदेश, 2018 (C.O. 270, 19 मई 2018) है। इसने 1981 के आदेश (C.O. 114, 12 फरवरी 1981) की जगह ली; कारण नए जिले और जनगणना 2011 में अनुसूचित जनजाति की आबादी में बदलाव थे।
इसमें 3 पूरे जिले, 9 पूरी तहसीलें, 1 पूरा ब्लॉक और 46 ग्राम पंचायतों के 227 गाँव आते हैं। तहसीलें और जिले 19 मई 2018 की स्थिति के अनुसार हैं।
| जिला (2018 का नक्शा) | पूरी इकाइयाँ | सूचीबद्ध ग्राम पंचायतों के गाँव |
|---|---|---|
| बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ | पूरा जिला | |
| उदयपुर | कोटड़ा, झाड़ोल, खेरवाड़ा, ऋषभदेव और गोगुंदा तहसीलें; लसाड़िया, सलूंबर और सराड़ा तहसीलें (अब सलूंबर जिला); गिरवा ब्लॉक | बड़गाँव ब्लॉक (गिरवा तहसील), मावली और वल्लभनगर तहसीलें |
| सिरोही | आबू रोड तहसील | पिंडवाड़ा तहसील |
| राजसमंद | कुंभलगढ़ और नाथद्वारा तहसीलें | |
| चित्तौड़गढ़ | बड़ी सादड़ी तहसील | |
| पाली | बाली तहसील |
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह
PM-JANMAN (पीएम जनमन), 15 नवंबर 2023 को शुरू, 18 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में रहने वाले 75 PVTG समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए है।
राज्य सरकारों के PM गति शक्ति ऐप पर किए बसावट सर्वे ने राजस्थान में 38,982 PVTG परिवार और 1,47,020 PVTG लोग होने का अनुमान दिया (संसद में दिए आँकड़े, जुलाई 2026)। यह सर्वे का अनुमान है, जनगणना की गिनती नहीं। 2025-26 तक बताए गए लाभों में राजस्थान का अकेला जिला बारां है।
याद रखें: ये अक्सर उलझते हैं
- गरासिया प्रविष्टियाँ“गरासिया (राजपूत गरासिया को छोड़कर)” अपनी अलग प्रविष्टि है · “भील गरासिया” और “डूंगरी गरासिया” भील की प्रविष्टि के भीतर हैं
- मीणा प्रविष्टियाँमीणा (Mina) और भील मीणा अलग प्रविष्टियाँ हैं · धानका तड़वी, तेतरिया और वलवी के साथ है, जबकि तड़वी भील भील की प्रविष्टि में है
- अनुसूचित जनजाति या अनुसूचित क्षेत्रजनजातियाँ अनुच्छेद 342 के अंतर्गत विनिर्दिष्ट होती हैं · क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची (अनुच्छेद 244(1)) के अंतर्गत घोषित होते हैं
खुद को परखें: परीक्षा में पूछे गए प्रश्न
समान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2022 · प्रश्न 48
2011 की जनगणना के अनुसार, राजस्थान की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या का प्रतिशत है –
- (1)14.8
- (2)16.9
- (3)13.5
- (4)13.3
उत्तर देखें
✓ (3) 13.5
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसमान पात्रता परीक्षा (स्नातक स्तर) 2024 · प्रश्न 69
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन राजस्थान की सहरिया जनजाति के बारे में सही नहीं है?
- (1)सहरिया का निवास दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में है और वह भी बारां जिले के शहाबाद और किशनगंज तहसील तक ही सीमित है।
- (2)इनमें चौहान, डोडिया आदि जैसे “गोत्र” होते हैं।
- (3)इस जनजाति के मुखिया को तपाड़ा कहा जाता है।
- (4)वे कई देवी व देवताओं की पूजा करते हैं परन्तु उनके इष्ट देव “बेहरू भारानी” हैं।
उत्तर देखें
✓ (3) इस जनजाति के मुखिया को तपाड़ा कहा जाता है।
पूरा प्रश्न-पत्र देखेंसंरक्षण अधिकारी 2024 · प्रश्न 73
राजस्थान में पी.एम. जनमन मिशन के संबंध में निम्न में से कौनसा सही नहीं है?
- (1)यह मिशन विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की सामाजिक–आर्थिक स्थितियों में सुधार के लिए शुरू किया गया है।
- (2)राजस्थान में इस योजना में उदयपुर और बारां जिले के आदिवासी अनुदान के लिए पात्र हैं।
- (3)मिशन का उद्देश्य 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों का विकास करना है।
- (4)इस योजना में सरकारी कर्मचारियों के परिवारों या पक्का आवास वाले परिवारों को छोड़कर समस्त आवासहीन सहरिया परिवार पात्र हैं।
उत्तर देखें
✓ (2) राजस्थान में इस योजना में उदयपुर और बारां जिले के आदिवासी अनुदान के लिए पात्र हैं।
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